Wednesday, 8 December 2021

किसान आंदोलन की सुरक्षा पर दिल्ली पुलिस के 7 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च।

किसान आंदोलन की सुरक्षा पर
 पुलिस के 7 करोड़ खर्च।

इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस ने किसानों के धरना, प्रदर्शन पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए सात करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए है।
कितने किसानों की मौत हुई?-
राज्यसभा में सांसद एम. मोहम्मद अब्दुल्ला ने सरकार से सवाल पूछा, कि वर्ष 2020 से लेकर अब तक दिल्ली की सीमा पर धरना, प्रदर्शन में कितने किसानों की मृत्यु हुई?, क्या सरकार ने किसी मुआवजे की घोषणा की है?, दिल्ली पुलिस द्वारा किसानों के धरना प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा उपलब्ध कराने पर कितनी राशि व्यय की गई?
 सांसद कुमार केतकर ने सरकार से सवाल पूछा, कि क्या गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच अन्य कारकों सहित पानी की कमी, मौसम की स्थिति के कारण हुई मौतों और आत्महत्या का आंकड़ा एकत्र किया है?, मंत्रालय ने आय संबंधी मुआवजे और नौकरी के अवसरों के रुप में मृतकों के परिवारों को सहायता देने के लिए किसी नीति की घोषणा की है?

7 करोड़ से ज्यादा खर्च -
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने  किसानों के विभिन्न धरना, प्रदर्शन स्थलों पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए 7,38,42,914 रुपए ( 20 नवंबर 2021 तक)
 खर्च किए है।
राज्य का विषय है-
किसानों की मौतों के आंकड़ों के बारे में मंत्री ने बताया कि संविधान की सातवीं अनूसूची के अनुसार पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सरकार के विषय हैंं। इस संबंध में सूचना संबंधित राज्य सरकारों द्वारा रखी जाती हैंं। इस प्रकार की घटनाओं में मुआवजे के मामलों पर भी संबंधित राज्य सरकारें कार्रवाई करती हैं।
सत्ता के लठैत बने आईपीएस-
उल्लेखनीय है कि किसानों को दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए पुलिस ने अभूतपूर्व कार्य किए। दिल्ली की सीमाओं पर बड़ी बड़ी नुकीली कीलें सड़कों पर गाड दी गई , लोहे और सीमेंट के बैरीकेड की कई कई कतारें और कंटीले तार लगा दिए। रास्ता बंद करने के लिए सड़क पर बड़े बड़े कंटेनर रख दिए। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सीमाओं पर रास्तों को बंद करने के लिए ऐसे ऐसे इंतजाम किए, जैसे कि किसी दुश्मन देश की सेना को घुसने से रोकना है। सिंघु बार्डर पर किसानों के लिए जा रहे दिल्ली सरकार के पानी के टैंकरों को रोकने से पुलिस का अमानवीय और संवेदनहीन चेहरा भी उजागर हुआ। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सच्चिदानंद श्रीवास्तव और आईपीएस अफसरों ने सत्ता के लठैत की तरह कार्य किया। पुलिस द्वारा रास्ते बंद कर देने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।



Sunday, 5 December 2021

SHO पर सब-इंस्पेक्टर ने लगाया पैसे मांगने का आरोप। DCP ने चुप्पी साधी।



SHO पर सब-इंस्पेक्टर ने लगाया पैसे मांगने का आरोप।
DCP ने चुप्पी साधी।


इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली के कोटला मुबारक पुर थाने के एसएचओ पर उसके मातहत सब-इंस्पेक्टर ने ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
लेकिन आरोप लगाने वाले सब-इंस्पेक्टर को ही लाइन हाजिर कर दिया गया।  शिकायतकर्ता को ही तुरंत लाइन हाजिर कर देने से आला पुलिस अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है।
कथित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसएचओ विनय त्यागी के खिलाफ सब-इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह ने बकायदा रोजनामचे में आपबीती को दर्ज किया है।
जितेंद्र सिंह का 26 नवंबर 2021 को ही दक्षिण जिला पुलिस लाइन से कोटला मुबारक पुर थाने में तबादला किया गया था। 
SHO ने पैसे मांगे-
जितेंद्र सिंह द्वारा रोजनामचे में लिखा गया है कि वह डयूटी के सिलसिले में एसएचओ विनय त्यागी से पहली बार मिला, तो उन्होंने उससे पैसों की मांग की। उसने एसएचओ से कहा कि वह पैसे देने की स्थिति में नहीं है।
जितेंद्र सिंह के अनुसार इसके बाद वह चिट्ठा मुंशी एएसआई सुभाष से अपनी डयूटी के बारे में मिला, तो उसने भी पसंद की डयूटी लगाने की एवज में पैसों की मांग की। उसने उसे भी पैसे देने में असमर्थता व्यक्त कर दी। 
पैसे नहीं देगा, तो रेस्ट भी नहीं मिलेगा -
27 नवंबर को उसकी त्यागराज स्टेडियम में सुरक्षा इंतजाम में डयूटी लगा दी गई। डयूटी के बाद छुट्टी ( रेस्ट) के लिए उसने चिट्ठा मुंशी से कहा तो उसने उसके साथ बदतमीजी से बात की। 
जितेंद्र का आरोप है कि उसने एसएचओ से फोन पर बात की, तो उसने उसके साथ बदतमीजी से बात की और कहा कि " जब तक पैसे की मांग पूरी नहीं करता, तुझे कोई रेस्ट नहीं मिलेगा"। एसएचओ ने कहा कि "मैं तुझे नौकरी करना सिखा दूंगा"।
चिट्ठा मुंशी पैसे एकत्र करता है।-
जितेंद्र के अनुसार 27 नवंबर से  बिना रेस्ट दिए लगातार उससे इंतजाम, पिकेट और इमरजेंसी  आदि डयूटी कराई जा रही है। एसएचओ की ओर से एएसआई सुभाष भी उसे बार बार पैसे के लिए परेशान कर रहा है। 
एएसआई सुभाष के नाम  बीट /डिवीजन भी है लेकिन उसका काम एसएचओ के लिए पैसा एकत्र करने का है। 
एसीपी को बताया-
जितेंद्र के मुताबिक़ उसने अपने एसीपी (डिफेंस कालोनी) को यह सारी बात बताई थी।
जितेंद्र ने 5 दिसंबर को सुबह थाने के रोजनामचे (जनरल डायरी) में यह सब दर्ज कर दिया। जितेंद्र ने यह भी लिखा है कि  इस वजह से वह सदमे और मानसिक तनाव में है।
DCP की चुप्पी-
इस बारे में मीडिया द्वारा बार बार पूछने पर भी दक्षिण जिला की डीसीपी बैनीता मैरी जैकर ने इस मामले में चुप्पी साध ली। इससे साफ जाहिर होता है कि सब-इंस्पेक्टर के आरोपों में दम है।
अब देखना है कि पुलिस कमिश्नर एसएचओ के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।
SHO का बयान -
एसएचओ विनय त्यागी ने बताया कि सब-इंस्पेक्टर जितेंद्र जहां भी तैनात रहा,वहां अपनी ऐसी हरकतों के कारण लाइन हाजिर हुआ है। अपने सभी एसएचओ के खिलाफ वह इसी तरह के आरोप लगा चुका है।
3 बार लाइन हाजिर-
एसएचओ पर आरोप लगाने वाला सब-इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह 2016 बैच का है। सब- इंस्पेक्टर पहले भी 3 बार लाइन हाजिर हो चुका है। 

कमिश्नर का आदेश गुमनाम शिकायतों पर कार्रवाई न करें-
भ्रष्टाचार कैसे रुकेगा?
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने पुलिस अफसरों/ कर्मियों के खिलाफ बिना नाम पते यानी गुमनाम शिकायतों पर कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
पुलिस कमिश्नर द्वारा 27 अक्टूबर को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जिस शिकायत पर नाम पता न हो यानी गुमनाम हो। नाम पता हो लेकिन वह वैरीफाई न हो। शिकायतकर्ता नोटिस दिए जाने के बाद भी जांच में शामिल न हो। शिकायत में अनर्गल आरोप हो तो उस पर कार्रवाई न की जाए।
कमिश्नर ने केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा  इस सिलसिले में जारी आदेश का इस सर्कुलर में हवाला दिया है।

भ्रष्टाचार ऐसे रुकेगा-
सच्चाई यह है कि लोग डर के मारे अपने नाम से भ्रष्टाचार की शिकायत नहीं करते हैं।
शिकायत गुमनाम है या शिकायतकर्ता का नाम फर्जी है इस चक्कर में न पड़ कर 
पुलिस अफसरों को गुमनाम शिकायत में लगाए गए आरोपों/ तथ्यों की सत्यता का पता लगाना चाहिए और उसके आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
 गुमनाम शिकायत पर कार्रवाई न करने से तो भ्रष्टाचार करने वाले बेखौफ हो जाते।  गुमनाम शिकायत के आधार पर कार्रवाई किए जाने से ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता है और भ्रष्टाचारी डरेंगे।

उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम द्वारा डेरे में लड़कियों से बलात्कार का मामला गुमनाम शिकायत के कारण ही उजागर हुआ था। जिसके परिणाम स्वरूप राम रहीम जेल में सजा भुगत रहा है।






Tuesday, 23 November 2021

सीबीआई ने ईपीएफओ के एक अफसर समेत दो लोगों को 1 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

 इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने ईपीएफओ के एक अफसर समेत दो लोगों को  एक लाख रुपए  रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
सीबीआई प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), जगाधरी (हरियाणा) के प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार और निजी व्यक्ति अशोक गुप्ता को एक लाख रुपए के रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया गया है।
एक शिकायत के आधार पर आरोपी के विरुद्ध एक मामला दर्ज हुआ। 
आरोप है कि शिकायतकर्ता ने नवम्बर, 2018 से जुलाई, 2019 के दौरान अपनी फर्म के कर्मचारियों से सम्बन्धित भविष्य निधि हेतु सभी बकाया जमा कर दिया था। 
लेकिन ईपीएफओ अफसर अनिल कुमार  ने शिकायतकर्ता की फर्म के विरुद्ध सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत जांच पड़ताल शुरू कर दी।
आरोप है कि उक्त जांच पड़ताल के दौरान, प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार ने शिकायतकर्ता को जारी जांच पड़ताल से बचने  के लिए निजी व्यक्ति  अशोक गुप्ता से सम्पर्क करने को कहा। 
 शिकायतकर्ता ने अशोक गुप्ता से सम्पर्क किया, जिसने कथित रुप से जांच पड़ताल को निपटाने के बदले में प्रवर्तन अधिकारी की ओर से एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग की।
सीबीआई ने जाल बिछाया और अशोक गुुप्ता को  प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुुुमार  की ओर से शिकायतकर्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। इसके बाद प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। जगाधरी (हरियाणा) स्थित आरोपियों के परिसर में तलाशी की जा रही है।
दोनो गिरफ्तार आरोपियों को सक्षम अदालत के समक्ष कल पेश किया जाएगा।





Friday, 19 November 2021

CBI ने रत्नाकर बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों को 30 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगी।


सीबीआई ने रत्नाकर बैंक  के दो वरिष्ठ अधिकारियों को 30 लाख रुपए  रिश्वत लेते   गिरफ्तार किया। 

 इंद्र वशिष्ठ 
सीबीआई  ने अहमदाबाद के रत्नाकर बैंक के कृषि प्रभाग के क्षेत्रीय प्रमुख और वसूली प्रमुख, रत्नाकर बैंक लिमिटेड पुणे को 30 लाख रुपए  रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया है। 
सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने  बताया कि 
मूल्यांकन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगने की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर किया गया।
 आरोप है कि शिकायतकर्ता ने अपने 12 पारिवारिक सदस्यों के साथ, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की बागवानी योजना, जिसमें सरकार 56 लाख रुपए की कुल प्रोजेक्ट कीमत तक के प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए  50% की दर से आर्थिक सहायता(सब्सिडी) देती है, के तहत उत्पादन एवं उत्पादन के बाद के प्रबन्धन के माध्यम से व्यावसायिक बागवानी  के विकास के तहत एग्री टर्म लोन के लिए आवेदन किया।आर्थिक सहायता(सब्सिडी) की अनुपलब्धता के कारण, शिकायतकर्ता एवं उसके पारिवारिक सदस्यों का एग्री टर्म लोन गैर निष्पादित संपत्ति(एनपीए) घोषित हुआ और आर्थिक सहायता(सब्सिडी) प्राप्त करने के लिए गिरवी संपत्तियों हेतु  मूल्यांकन प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। परस्पर बातचीत पर रिश्वत धनराशि 30 लाख रुपए तय हुई।

सीबीआई ने जाल बिछाया और रत्नाकर बैंक, अहमदाबाद के क्षेत्रीय प्रमुख  निमेश मंगर को 30 लाख रुपए की रिश्वत की माँग करने और स्वीकार करने पर पकड़ा। बाद में, रत्नाकर बैंक लिमिटेड पुणे के रिकवरी हेड सौरभ भसीन को भी पकड़ा।
दोनों आरोपियों के अहमदाबाद, पुणे,दिल्ली स्थित कार्यालय एवं आवासीय परिसरों सहित पाँच स्थानों पर तलाशी ली गई।


Thursday, 18 November 2021

ऑटो रिक्शा गैंग ने बुजुर्ग दम्पत्ति के जेवर,नकदी उड़ाई। गिरोह में महिलाएं भी शामिल।रेलवे स्टेशन, बस अड्डा/स्टैंड पर सक्रिय गिरोह। चोरों को पकड़ने में पुलिस हमेशा फिसड्डी।


ऑटो रिक्शा गैंग ने बुजुर्ग दम्पत्ति के जेवर,नकदी उड़ाई। 
गिरोह में महिलाएं भी शामिल।
रेलवे स्टेशन, बस अड्डा/ स्टैंड पर सक्रिय गिरोह।
चोरों को पकड़ने में पुलिस हमेशा फिसड्डी-


 इंद्र वशिष्ठ 
राजधानी में तिपहिया स्कूटर सवार लुटेरो के गिरोह रोजाना लोगों को शिकार बना रहे। इन गिरोहों में महिलाएं भी शामिल है।
लोग चोरों के सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। लेकिन पुलिस अफसरों की नजर में शायद यह अपराध कोई मायने नहीं रखता है।
पुलिस अफसर उन लोगों की पीड़ा/तकलीफ़ का अंदाजा भी नहीं लगा सकते जिनकी जीवन भर की जमा पूँजी, गहने,सामान आदि चोरी हो जाते हैं। 
पुलिस अगर ईमानदारी से कोशिश करें, तो ऐसे गिरोहों को पकड़ा जा सकता है, लेकिन चोरी के मामलों को सुलझाने में पुलिस रुचि लेती ही नहीं है।
लुट गए बुजुर्ग दम्पत्ति -
ऐसे ही एक गिरोह ने 18 नवंबर की सुबह एक बुजुर्ग दम्पत्ति के लाखों रुपए के जेवर और नकदी पर हाथ साफ कर दिया । 
बिहार से पत्नी चंद्र कांता (70) के साथ दिल्ली आए बुजुर्ग छाजू राम शर्मा (76) ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से त्री नगर जाने के लिए तिपहिया स्कूटर लिया। स्टेशन से कुछ दूर जाते ही चालक ने स्कूटर रोक दिया, कहा कि खराब हो गया। इस दौरान एक अन्य  स्कूटर वाला आ गया। उसमें दो महिला सवारी पहले से ही  बैठी हुई थी। 
दम्पत्ति भी उस स्कूटर में बैठ गए। कुछ दूर जाने पर चालक ने एक अन्य को भी बिठा लिया। युवक के बैठने के बाद एक महिला दम्पत्ति की ओर पीठ करके यानी ओट करके ऐसे बैठ गई कि उन्हें अपना  सामान नजर नहीं आए। 
गलत रास्ते पर ले गया।-
चालक देशबंधु गुप्ता मार्ग की बजाए स्कूटर को राज घाट की ओर ले गया। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय,शक्ति नगर की ओर से घुमाते हुए एक स्थान पर ले जा कर स्कूटर रोक दिया। चालक ने दम्पत्ति को उतार दिया और बोला कि तुम यहीं खड़े रहना मैं दूसरी सवारी को छोड़ कर वापस आता हूं। 
दम्पत्ति काफी देर वहां खड़े रहे, इसके बाद एक अन्य स्कूटर से त्री नगर अपनी बेटी बीना के घर पहुंचे।
जेवर नकदी चोरी-
 घर में जब उन्होंने अपनी दोनों अटैची खोली तो उनके होश उड़ गए। अटैची में रखे करीब पांच तोला सोने के जेवर, चालीस हजार रुपए नकद, दो एटीएम कार्ड, दो वोटर कार्ड, पेन कार्ड, साडियां आदि गायब मिले। दम्पत्ति हरियाणा में  भात में शामिल होने के लिए आए थे।
पुलिस कोशिश करें तो पकड़ा जाए गिरोह-
गिरोह ने उनके एटीएम कार्ड से उनके बैंक खाते से सत्तर हजार रुपए निकाल लिए। 
गिरोह ने  दिलशाद कालोनी स्थित एटीएम से भी नकदी निकाली,  उनके कार्ड से पांच हजार के प्यूमा के जूते और तीन-तीन हजार रुपए कीमत की कमीज खरीदी। यह सब सुबह दस बजे से एक बजे के बीच किया गया।
 केशव पुरम थाना पुलिस अगर चाहे और ईमानदारी से कोशिश करें तो स्टेशन और उपरोक्त रास्तों और स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से इस गिरोह का आसानी से पता लगा सकती है।
दम्पत्ति रेलवे स्टेशन से जिस स्कूटर मे सवार हुए थे वह स्कूटर चालक भी इस गिरोह का ही साथी हो सकता है। उसने जानबूझ स्टेशन से बाहर आने के बाद दूसरे स्कूटर में उन्हें बिठाया होगा।
पुलिस की भूमिका-
लेकिन पुलिस अपराधियों को पकड़ना तो दूर चोरी का मामला तक भी दर्ज नहीं करती। परेशान छाजू राम के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह नई दिल्ली स्टेशन रिपोर्ट दर्ज कराने गए तो वहां पुलिसकर्मियों ने चोरी की बजाए बैग गुम होने की लॉस्ट रिपोर्ट दर्ज कर अपना पल्ला झाड़ दिया।  

इसके बाद चंद्र कांता ने उत्तर पश्चिम जिले के केशव पुरम थाने में चोरी की ऑनलाइन ई-एफआईआर दर्ज की है।

महिला प्रेस फोटोग्राफर का सात लाख रुपए का कैमरा उड़ाया।
वारदात 8 नवंबर शाम को पूर्वी दिल्ली के शकर पुर थाना इलाके में हुई।
नोएडा निवासी वरिष्ठ पत्रकार (फोटोग्राफर) शिप्रा दास (65) स्कूल ब्लॉक के सामने मदर डेयरी रोड पर  बस का इंतजार कर रही थी। तभी एक तिपहिया स्कूटर उनके पास आकर रुका। तिपहिया में चालक के साथ एक युवक और पीछे सीट पर भी दो लोग बैठे हुए थे।
तिपहिया चालक ने शिप्रा से पूछा कि कहां जाना है। चालक ने पहले पचास रुपए मांगे, फिर तीस रुपए में नोएडा छोड़ देने को तैयार हो गया।
शिप्रा स्कूटर में बैठ गई। तिपहिया चालक ने उसे कहा कि अपना बैग पीछे रख दो, ताकि बैठने की जगह बन जाए। शिप्रा ने बैग रखने से मना कर दिया, लेकिन चालक उसे  बैग पीछे रखने के लिए बार-बार कहने लगा, तो उसने बैग पीछे रख दिया। इसी दौरान चालक के साथ बैठा युवक भी पीछे सीट पर बैठे व्यक्ति की गोद में आकर बैठ गया। शिप्रा ने बताया कि कुछ देर बाद ही सुनसान रास्ते से ले जाकर चालक ने मयूर विहार रोड पर एक जगह पर दूसरे  तिपहिया स्कूटर के पास अपना तिपहिया रोक दिया। शिप्रा से कहा कि दूसरा तिपहिया स्कूटर वाला उसे नोएडा छोड़ देगा।
सात लाख का कैमरा-शिप्रा ने घर पहुंच कर अपना बैग खोला तो उसमें कैमरे और लेंस के स्थान पर पत्थर भरे हुए थे। 
कैमरा, 2 लेंस, फ्लैश आदि की कीमत करीब सात लाख रुपए है। शिप्रा की शिकायत पर शकर पुर थाना पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज किया है।
जान बच गई-
शिप्रा का कहना है कि उसकी जान बच गई, यह ही बहुत बड़ी बात हैं। क्योंकि अगर उसने बैग पीछे नहीं रखा होता, तो अपराधी सुनसान रास्ते पर उस पर हमला करके भी कैमरा लूट लेते। 
चौकन्ना रहेंं-
तिपहिया स्कूटर में यात्रा करते समय सावधानी बरतें और चौकन्ने रहे, वरना जान और माल दोनों से हाथ धोना पड़ सकता है। उस तिपहिया स्कूटर में तो बिल्कुल भी न बैठे, जिसमें पहले से ही सवारी बैठी हुई हो और बेशक चालक कम किराए में गतंव्य तक पहुंचाने का लालच क्यों न दे।  तिपहिया स्कूटर का नंबर भी जरूर नोट करें।
चोरी के 169474 मामले-
पुलिस कमिश्नर द्वारा सालाना प्रेसवार्ता (2021) में पेश किए अपराध के आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी में चोरों,लुटेरों/स्नैचरों का बोलबाला/आतंक है। पुलिस ने चोरी के कुल 169474 मामले दर्ज किए है इनमें वाहन चोरी के 35019 मामले भी शामिल है। इनमें से चोरी के 164308 मामले तो ई-एफआईआर के माध्यम से  मोबाइल फोन और वेबसाइट के माध्यम से दर्ज किए गए हैं। 
पुलिस ने घर,दुकान, कारखाने, गोदाम आदि में हुई चोरी और वाहन चोरी के कितने मामलों को सुलझाया यानी कितने चोर पकडे़ गए है। चोरी का कितना माल /संपत्ति और वाहन बरामद किए यह जानकारी पुलिस कमिश्नर ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी नहीं दी है। इससे साफ पता चलता है कि पुलिस चोरों को पकड़ने और गाडियां बरामद करने में बुरी तरह फेल हो गई है। इसी लिए चोरी के मामले सुलझाने के आंकड़े पुलिस ने उजागर ने नहीं किए। इसके अलावा यह भी नहीं बताया कि साल 2020 में आईपीसी के तहत दर्ज अपराध के कुल कितने मामलों को पुलिस ने सुलझा लिया है।
45 फीसदी ही अपराधी पकडे़ गए-
हालांकि एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर ने बताया कि साल 2020 में आईपीसी के तहत दर्ज अपराध के कुल 250324 मामलों में से 45.71 फीसदी मामले ही सुलझाए गए है। वाहन चोरी और चोरी के अन्य मामलों को सुलझाने की दर बहुत ही कम रहती हैं।

चोरों को पकड़ने में पुलिस हमेशा फिसड्डी-
साढ़े 4 लाख से ज्यादा चोरियां हुई।
सिर्फ 57 हजार मामले सुलझाए।
साल 2016, 2017और 2018 में चोरी के कुल 461989 मामले दर्ज किए गए ।  सिर्फ 57100 मामले पुलिस ने सुलझाए है। सिर्फ 27216 मामलों में ही चोरी का माल बरामद किया गया है। पुलिस ने सिर्फ 18581 मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। इससे पता चलता है कि चोरी के मामलों को सुलझाने में पुलिस की बिल्कुल रुचि नहीं है।