Sunday, 21 August 2022

CBI ने लेफ्टिनेंट कर्नल, सूबेदार मेजर और दो ठेकेदारों को रिश्वत का लेन देन करते हुए पकड़ा

लेफ्टिनेंट कर्नल, सूबेदार मेजर रिश्वत लेते पकडे़ गए।


इंद्र वशिष्ठ

सीबीआई ने 22 लाख रुपए से ज्यादा की रिश्वतखोरी के मामले में सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल और सूबेदार मेजर समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया कि
एमईएस, अंबाला छावनी (हरियाणा) के बैरक स्टोर अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल राहुल पवार, सूबेदार मेजर प्रदीप कुमार , ठेकेदारों दिनेश कुमार और  प्रीतपाल को रिश्वत का लेन-देन करते हुए गिरफ्तार किया  है।
रिश्वत का भुगतान यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि अम्बाला कैंट से अधिकांश टेंडर/ निविदाएं उक्त  ठेकेदारों को दिए जाएं।
सीबीआई ने जाल बिछाया और 22.48 लाख रुपए के लेन-देन के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल, सूबेदार मेजर और रिश्वत देने वाले दोनों ठेकेदारों को पकड़ा। 
सीबीआई द्वारा अंबाला, कुरुक्षेत्र में आरोपियों के परिसरों की तलाशी ली गई, जिसमें भारी मात्रा में नकदी और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं।

सीबीआई के अनुसार लेफ्टिनेंट कर्नल राहुल पवार के परिसर से 32 लाख 50 हजार रुपए और ठेकेदारों के यहां से 16 लाख रुपए बरामद हुए हैं।




Saturday, 20 August 2022

गुंडों की गन को खिलौना बना दो। गुंडों की गन में गोलियां भरते गन हाऊस।

 गुंडों की गन को खिलौना बना दो।
गुंडों की गन में गोलियां भरते गन हाऊस।


इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में बंदूक के 2251 कारतूस पकड़े हैं। इस मामले में देहरादून के रॉयल गन हाऊस के मालिक परीक्षित नेगी को भी गिरफ्तार किया गया है। गन हाऊस के मालिक की गिरफ्तारी से एक बार फिर यह साबित हो गया कि गन हाऊस वाले अपराधियों की बंदूकों के लिए कारतूस सप्लाई करते हैं। 
अवैध बंदूकों का कारोबार ऐसे गन हाऊस वालों के कारण ही फल फूल रहा है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार परीक्षित नेगी अन्य गन हाऊसों से और अन्य स्त्रोतों से भी कारतूस लेता था। परीक्षित अपने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर आपस में एक गन हाऊस से दूसरे गन हाऊस में कारतूसों की खरीद/बिक्री दिखाता था। जबकि कारतूसों को महंगे दामों पर बदमाशों को बेचता था। 
6 अगस्त 2022 को  पूर्वी जिला पुलिस ने जौनपुर के अजमल और राशिद को रायफल/ पिस्तौल के  2251 कारतूसों के साथ पकड़ा। 
ये दोनों  देहरादून के परीक्षित नेगी से कारतूस लाए थे और लखनऊ में जौनपुर के ही सद्दाम को देने जा रहे थे। सद्दाम को पकड़ा गया, तो पता चला कि मेरठ जेल में बंद  बदमाश अनिल बाल्यान और जौनपुर के  बदमाश शुभम सिंह के लिए ये कारतूस खरीदे गए थे।
लाइसेंसी हथियार के कारतूस परीक्षित को मुहैया कराने के आरोप में दिल्ली के यमुना विहार निवासी कामरान और रुड़की के नासिर को भी गिरफ्तार किया गया है। 
शुभम सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया। शुभम अवैध कारतूसों के धंधे का सरगना है। उसने रेत माफिया को बिहार में 6 रायफल भी बेची हैं।
परीक्षित से पूछताछ में पता चला है कि वह पहले भी हजारों कारतूस बदमाशों को बेच चुका है।

देसी पिस्तौल खिलौना बन जाएगी-
दिल्ली में हत्या, हत्या की कोशिश, लूट की वारदात के दौरान अपराधियों द्वारा गोली मारने / चलाने के मामले लगातार हो रहे है । हालांकि पुलिस भी पहले के मुकाबले अवैध हथियार ज्यादा पकड़ भी रही है । इसके बावजूद अवैध बंदूकों के कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसकी मुख्य वजह है बदमाशों को होने वाली कारतूस की सप्लाई। जिस दिन बदमाशों को पिस्तौल के लिए कारतूस मिलने बंद हो जाएंगॆ उस दिन बदमाशों के पास मौजूद पिस्तौल सिर्फ एक खिलौना भर बन कर रह जाएगी। इस एक कदम से ही अवैध बंदूक के कारोबार को नेस्तनाबूद तक किया जा सकता है ।  

 तमंचा देसी, गोली असली -
देसी यानी अवैध पिस्तौलों मे इंडियन आर्डिनेंस फैक्टरी के या विदेशी कारतूस का ही इस्तेमाल किया जाता है। यह खुलासा चौंकाने वाला है। क्योंकि विदेशी या इंडियन आर्डिनेंस फैक्टरी के कारतूस लाइसेंसशुदा ​हथियार डीलर द्वारा लाइसेंसशुदा हथियारधारी को ही बेचे जाते है।  अवैध पिस्तौलों के कारोबार पर रोक लगानी है तो कारतूस की सप्लाई पर रोक लगाने का पुख्ता इंतजाम करना चाहिए। इससे ही संगीन अपराध को कंट्रोल करने पर जबरदस्त असर पड़ेगा।

दिल्ली पुलिस द्वारा बरामद अवैध पिस्तौलों के मामलों की एक स्टडी में भी यह निष्कर्ष निकला था कि  ​​हथियार डीलर और लाइसेंसशुदा हथियारधारी के एक-एक कारतूस का पूरा/पुख्ता हिसाब  लिया जाना चाहिए है। पुलिस का मानना है कि अपराधियों को कारतूस की सप्लाई रोकने के लिए यह कदम उठाना सबसे जरूरी है।  दिल्ली पुलिस के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने स्टडी के आधार पर  केंद्र सरकार को इस बारे में कई सुझाव दिए थे ।
हथियार डीलर शक के घेरे में -
पुलिस का मानना है कि अवैध पिस्तौलों के धंधे को बढ़ावा देने में कुछ ​​हथियार डीलर भी शामिल हो सकते है। पुलिस ने तफ्तीश में पाया कि मुंगेर(बिहार) , मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश या किसी भी राज्य की बनी अवैध पिस्तौलों में विदेशी या इंडियन आर्डिनेंस फैक्टरी के कारतूस का ही हमेशा इस्तेमाल किया गया है।  प्रयोगशाला  की जांच में भी यह स्पष्ट पाया गया  कि बरामद कारतूस देसी यानी अवैध रुप से बने हुए नहीं है बल्कि इंडियन आर्डिनेंस फैक्टरी के बने हुए या विदेशी है। लाइसेंसशुदा हथियार डीलर ही, लाइसेंसशुदा हथियारधारक को कारतूस बेचते है। ऐसे में इन दोनों के माध्यम से ही कारतूस अपराधियों के पास पहुंचने की संभावना अधिक है। 
अनेक गन हाउस वालोंं की गिरफ्तारी से भी इस बात की पुष्टि हो जाती है।
इसलिए अवैध हथियार के धंधे को खत्म करना है तो अपराधियों तक कारतूसों की सप्लाई रोकना सबसे जरूरी है।
 एक-एक गोली का  पुख्ता हिसाब - लाइसेंसशुदा हथियार डीलर और लाइसेंसशुदा हथियारधारी के कारतूस अपराधियों तक न पहुंचे, इसे रोकने के लिए एक पुख्ता निगरानी और जांच व्यवस्था बनाने की जरुरत है हथियार डीलर ने लाइसेंसशुदा हथियारधारी को ही कारतूस बेचे है इसकी पुष्टि/तस्दीक लाइसेंसशुदा हथियारधारक से करने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
 पुलिस को स्टडी में पता चला कि इंडियन आर्डिनेस फैक्टरी से मिलने वाले कारतूस के कोटे को कुछ हथियार डीलर उसी राज्य या दूसरे राज्य के ​​हथियार डीलरों को बेच देते है। इससे इस कोटे के दुरूपयोग और कारतूसों के अपराधियों के पास पहुंच जाने की संभावना रहती है। सरकार को इंडियन आर्डिनेस फैक्टरी के  कारतूस के कोटे को आपस में  दूसरे हथियार डीलरों को बेचने पर रोक लगानी चाहिए। इससे कारतूस की कालाबाजारी और कारतूस अपराधियों के पास पहुंचना बंद होगा। लाइसेंसशुदा हथियारधारी के कारतूसों का भी पुख्ता हिसाब होना/देखना चाहिए और इस्तेमाल किए कारतूस के खाली खोखे को जमा कराने पर ही ओर कारतूस दिए जाने चाहिए ।

कारतूस रोकने से अपराध पर असर पड़ेगा- पुलिस ने यह भी पाया कि मेरठ, कानपुर, झारखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों के  कुछ हथियार  डीलर दूसरे राज्यों के हथियार डीलरों से कारतूस की बड़ी खेप/कोटा खरीदते है। पुलिस का मानना है कि इसके बाद कुछ हथियार डीलर अपने बिक्री रजिस्टर में हेराफेरी करके उन कारतूस को मोटा मुनाफा पाने के लिए अपराधियों को बेच देते है। पुलिस का मानना  है कि केंद्र सरकार यदि उपरोक्त कदम उठाए तो इंडियन आर्डिनेस फैक्टरी के कारतूसों को अपराधियों के पास पहुंचने से रोका जा सकता है। इससे संगीन अपराध को कंट्रोल करने पर जबरदस्त असर पड़ेगा। क्योंकि यह देखा गया है कि उम्दा किस्म के कारतूस अवैध रूप से बनाना असंभव और मुश्किल है।

राज्य पिस्तौलों की पूरी जांच कराए- 

केंद्र सरकार को सभी राज्यों को खासकर पंजाब, हरियाणा,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार को यह निर्देश देने चाहिए कि बरामद होने वाले सभी पिस्तौलों(मैगजीन वाली)और रिवाल्वर की प्रयोगशाला में बैलेस्टिक के अलावा फिजिक्स डिवीजन से भी पूरी जांच  जरूर कराई जानी चाहिए। ऐसे पिस्तौल की पूरी जांच कराने से यह पता चल सकता है। कि क्या वह किसी एक फैक्टरी में  मशीनों से बनाया गया है। सीबीआई इन पिस्तौलों की बनावट आदि का मुआयना और स्टडी करे और मुंगेर में वैध हथियार फैक्टरियों में मौजूद मशीनों से उसकी मिलान करके देखे। मुंगेर की बंदूक बनाने वाली वैध फैक्टरियों पर प्रशासन को कड़ी निगरानी औऱ समय-समय पर अचानक छापा मार कर चेकिंग करनी चाहिए। ताकि पता चल सके कि वहां पर  अवैध हथियार तो नहीं बनाए जा रहे।

गन हाउस मालिक गिरफ्तार -
फरवरी 2021 में स्पेशल सेल ने अंबाला गन हाउस के मालिक अमित राव (रेवाड़ी) और उसके कर्मचारी रमेश  समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर 4500 कारतूस बरामद किए। अमित राव कारतूसों के बिक्री रजिस्टर में हेराफेरी कर रमेश के माध्यम से कारतूस बेचता था। वह 60-70 रुपए मूल्य के एक कारतूस को 125-150 रुपए में बेचता था। दीपांशु मिश्रा, मनोज चौहान ,अकरम और उसका भाई इकराम रमेश से कारतूस लेकर प्रति कारतूस दो सौ रुपए से लेकर एक हजार रुपए तक में अपराधियों को बेचते थे। सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपांशु के पिता का इटावा में गन हाउस था, जो उनकी मृत्यु के बाद बंद हो गया। मनोज चौहान ट्रांसपोर्ट कंपनी में सुरक्षाकर्मी के रुप में काम करता है। अकरम और उसका भाई इकराम गन हाउस में हथियारों की सर्विस का काम करते हैं।
36 हजार कारतूस बेचने वाला गन हाउस मालिक -- 
जून 2018 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने आगरा में शिवहरे गन हाउस के मालिक आलोक शिवहरे को 1560 कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आलोक तीन साल में 36 हजार से ज्यादा कारतूस बदमाशों को बेच चुका है।
20 हजार से ज्यादा कारतूस सप्लाई-- 
साल 2018 में  दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 1310 कारतूस के साथ संदीप यादव को पकड़ा। संदीप के भाई संजीव की अलीगढ के अकबराबाद में हथियार की दुकान /गन हाऊस है। पुलिस ने बताया कि संदीप तीन साल में दिल्ली एनसीआर में 20 हजार से ज्यादा कारतूस सप्लाई कर चुका था।
मेडल विजेता शूटर कारतूस बेचता था— 
साल 2016 में स्पेशल सेल ने मेडल विजेता शूटर मुकर्रम अली को गिरफ्तार किया । उसके पास से अलग-अलग बोर के  5533 कारतूस बरामद हुए।अली ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि वह एक अन्य शूटर अक्षय से कारतूस खरीद कर सोनू और मुजफ्फर नगर के मेहंदी को बेचता था।
स्पेशल सेल ने वर्ष 2017 में अलीगढ़ के दो गन हाउस मालिक भाईयों को गिरफ्तार किया था। ये भी बदमाशों को कारतूस सप्लाई कर रहे थे। 
इन मामलों ने भी पुलिस की स्टडी को सही साबित किया है।

( लेखक इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1990 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)






Sunday, 7 August 2022

बटला हाउस में आतंकी संगठन ISIS के लिए धन जुटाने वाला जामिया का छात्र गिरफ्तार - NIA


बटला हाउस में आईएसआईएस का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार।


इंद्र वशिष्ठ
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली के बटला हाउस इलाके से आतंकी संगठन आईएसआईएस के लिए पैसा एकत्र करने के आरोप में एक छात्र को गिरफ्तार किया है। 
एनआईए के अनुसार वर्तमान में एफ- 18/27, जापानी गली, जोगाबाई एक्सटेंशन, बटला हाउस, नई दिल्ली निवासी आरोपी मोहसिन अहमद पुत्र मोहम्मद शकील अहमद को गिरफ्तार किया गया है। 21 साल का मोहसिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया में  बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र है।
आरोपी मूल रुप से पटना( बिहार) मे नई कॉलोनी, आईटीआई महिला, दीघा, दीनापुर/ खगुल का रहने वाला है।
आईएसआईएस की ऑनलाइन और जमीनी गतिविधियों के लिए एनआईए ने 25.06.2022 को स्वत: संज्ञान लेते हुए एक मामला दर्ज किया था। 
कट्टर सदस्य-
एनआईए के अनुसार आरोपी मोहसिन अहमद आईएसआईएस का कट्टर और सक्रिय सदस्य है। उसे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी आईएसआईएस के साथ सहानुभूति रखने वालों से धन एकत्र करने में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया है। 
आतंकवाद के लिए धन-
वह आईएसआईएस की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए इन पैसों / फंडों को क्रिप्टो करेंसी के रूप में सीरिया और अन्य स्थानों पर भेज रहा था। 
एनआईए द्वारा आरोपी से पूछताछ कर आगे की जांच की जा रही है।



Sunday, 31 July 2022

दिल्ली पुलिस पर फिर थोपा गया बाहरी कमिश्नर, कमिश्नर वही जो मोदी, शाह के मन भाए। IPS बेचारे सत्ता से हारे।

                     संजय अरोड़ा

दिल्ली पुलिस में फिर थोपा गया बाहरी कमिश्नर।
  
कमिश्नर वही जो मोदी, शाह के मन भाए।

आईपीएस बेचारे सत्ता से हारे।


इंद्र वशिष्ठ
बेशक आईपीएस अपने को  कितना  ही काबिल समझते/मानते हों, लेकिन अगर सत्ता की कृपा आप पर नहीं है तो सारी काबलियत धरी की धरी रह जाती है वह सब बेकार साबित हो जाती है। काबलियत पर कृपा हावी हो जाती है। इस कलयुग में काबिल वहीं,जो मंत्री के मन भाए। 
पहले गुजरात काडर के राकेश अस्थाना को और अब तमिलनाडु काडर के संजय अरोड़ा को  दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बना कर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने लगातार दूसरी बार यह साबित कर दिया है। 
मोदी,शाह को एजीएमयूटी काडर में क्या एक भी ऐसा काबिल आईपीएस अफसर नहीं मिला, जिसे दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाया जा सके। मोदी ने एजीएमयूटी काडर के आईपीएस अफसरों का हक मार कर उनके साथ अन्याय किया है। भाजपा द्वारा तीसरी बार ऐसा किया गया है।
नाकाबिल हैं तो नौकरी से भी निकालो-
दिल्ली पुलिस से कुछ दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुए एक आईपीएस अफसर का कहना है कि
सरकार की नजर में अगर एजीएमयूटी काडर के जो आईपीएस अफसर वरिष्ठ होते हुए और रिकॉर्ड आदि में भी सब कुछ साफ/  सही होते हुए भी कमिश्नर बनाने के काबिल नहीं है, तो फिर वह पुलिस सेवा में भी क्यों हैं, सरकार उन्हें  जबरन सेवा से रिटायर कर हटा क्यों नहीं देती? 
ऐसे नाकाबिल अफसरों को स्पेशल कमिश्नर जैसे पदों पर रखना भी तो गलत ही है। 
दयनीय हालत-
एजीएमयूटी काडर के आईपीएस की स्थिति तो बड़ी दयनीय हो गई है क्योंकि जब भी
बाहरी कमिश्नर आता है तो आईपीएस को फिर से उसके सामने अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है। अब संजय अरोड़ा के सामने अपने को साबित/प्रूव करते रहेंगे। फिर हो सकता संजय अरोड़ा के बाद भी किसी दूसरे काडर से लाकर कमिश्नर बना दिया जाए।
आईपीएस को ठेंगा दिखाया-
गुजरात काडर के 1984 बैच के आईपीएस
राकेश अस्थाना को  प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का करीबी माना जाता है। इसीलिए एजीएमयूटी काडर के काबिल आईपीएस अफसरों को ठेंगा दिखा कर राकेश अस्थाना को रिटायरमेंट से 4 दिन पहले सेवा विस्तार देकर उनके ऊपर थोप दिया गया था।
अब तमिलनाडु काडर के संजय अरोड़ा (आईपीएस-1988) को कमिश्नर बनाए जाने से  एजीएमयूटी काडर के अफसर हैरान परेशान तो  हैं लेकिन बेचारे कर तो कुछ भी नहीं सकते हैंं। वैसे  भले ही वह खुद को फन्ने खां दिखाते हो, लेकिन इस अन्याय के खिलाफ कोर्ट में गुहार लगाने की  उनमें हिम्मत भी नहीं होगी।
बेशक इस काडर में काबिल अफसर भी हैं लेकिन वह बेचारे शायद  प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से नजदीकी बना उनका आशीर्वाद/ कृपा पाने के काबिल नहीं थे। प्रधानमंत्री को इस काडर के अफसरों की तुलना में अब संजय अरोड़ा ज्यादा "काबिल" नजर आए। 
इसीलिए तो अरुणाचल, गोवा, मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश( एजीएमयूटी )काडर के आईपीएस अफसरों को दरकिनार कर आईटीबीपी के डीजी संजय अरोड़ा को दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बना दिया गया। 
इन मामलों से  पता चलता है कि राजनेता अपने चहेते अफसर के लिए नियम कायदे की कैसे धज्जियां उड़ा देते हैं। 
 जोर का झटका-
30 जून 2021 को  एजीएमयूटी काडर के 1988 बैच के आईपीएस स्पेशल कमिश्नर (सतर्कता) बालाजी श्रीवास्तव ने कमिश्नर का अतिरिक्त कार्यभार संभाला था। यह तय माना जा रहा था कि बालाजी श्रीवास्तव ही अब कमिश्नर रहेंगे भले  ही कागजी आदेश कार्यवाहक कमिश्नर का रहे। 
क्योंकि बालाजी श्रीवास्तव से पहले सच्चिदानंद श्रीवास्तव को भी एक साल से ज्यादा समय तक कार्यवाहक कमिश्नर ही बना के  रखा गया था, रिटायरमेंट से करीब चालीस दिन पहले ही सच्चिदानंद श्रीवास्तव को नियमित कमिश्नर नियुक्त किया गया था।
लेकिन राकेश अस्थाना को कमिश्नर बना कर बालाजी श्रीवास्तव को जोर का झटका दे दिया गया था। 
वैसे दूसरे काडर से ला कर कमिश्नर बना देने से झटका तो उन जुगाड़ू एसएचओ/अफसरों को भी लगता है जो शुरु से ही यह देख कर ही उस आईपीएस की ही सेवा/ फटीक करते है जोकि भावी कमिश्नर होता है। ऐसे में दूसरे आईपीएस को वह खास तवज्जो नहीं देते है।
अब फिर बाहरी काडर के आईपीएस को  कमिश्नर बना दिए जाने से उन्हें भी दिक्कत होगी। 
आईपीएस बेचारे सत्ता से हारे  -
वैसे जब बालाजी श्रीवास्तव को कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया तो कमिश्नर पद के दावेदार 1987 बैच के आईपीएस अफसर सत्येंद्र गर्ग और ताज हसन को दरकिनार कर दिया गया था। इसके बाद ताज हसन को सिविल डिफेंस, होमगार्ड और फायर सर्विस का महानिदेशक बना दिया गया।
बारी से पहले कमिश्नर बनाने की परंपरा-
सत्ता द्वारा बारी से पहले यानी लाइन तोड़ कर और दूसरे का हक मार कर अपने खास वफादार आईपीएस को कमिश्नर बनाने की परंपरा बन गई है। 
किरण बेदी को दरकिनार करके उनसे जूनियर युद्धबीर डडवाल को कमिश्नर बनाया गया था। दीपक मिश्रा,धर्मेंद्र कुमार और कर्नल सिंह को दरकिनार करके उनसे जूनियर अमूल्य पटनायक को कमिश्नर बनाया गया था। ये सभी एजीएमयूटी काडर के ही थे। अब फिर इस काडर के ही 1987 और 1988 बैच के आईपीएस अफसरों को दरकिनार करके तमिलनाडु काडर के संजय अरोड़ा को बाहर से लाकर कमिश्नर बना दिया गया।
जब बारी से पहले या बाहर से लाकर किसी को कमिश्नर बनाया जाता है तो जाहिर सी बात है कि उस आईपीएस का नुकसान हो जाता है जो बारी के हिसाब से कमिश्नर बनने का असली हकदार होता है। 
वैसे सच्चाई यह है कि सरकार किसी भी दल की हो पुलिस का इस्तेमाल सभी सत्ता के लठैत के रुप में करते हैं। इसलिए वह कमिश्नर ऐसे अफसर को बनाते हैं जो उनके इशारे पर कठपुतली की तरह नाचे।  
आईपीएस के साथ अन्याय-
पहले राकेश अस्थाना और अब संजय अरोड़ा को कमिश्नर बनाए जाने  का असर उन आईपीएस अफसरों पर पड़ा है जो कमिश्नर बनने की कतार में सबसे प्रबल दावेदार थे और हैं। 
अगर संजय अरोड़ा दो साल इस पद रहे ,जिसकी  संभावना है, तो एजीएमयूटी काडर के अनेक  दावेदार आईपीएस अफसर कमिश्नर बने बगैर ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अपनी बारी की बाट जोह रहे उन आईपीएस के साथ यह अन्याय है। क्योंकि अपने-अपने काडर में आईपीएस की  मंजिल/लक्ष्य और सपना पुलिस बल के मुखिया का पद ही होता है। सत्ता ने उनका सपना और दिल तोड़ दिया और उनका हक छीन लिया।
 बाहरी कमिश्नर की परंपरा -
ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब एजीएमयूटी काडर से बाहर के आईपीएस अधिकारी को दिल्ली पुलिस कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया गया हो।
साल 1999 में भाजपा के शासन काल में 1966 बैच के उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस अजय राज शर्मा को दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाया गया था। काबिल और दबंग अजय राज शर्मा सबसे सफल कमिश्नर रहे हैं। अजय राज शर्मा से आईपीएस अफसर तक डरते थे। कमिश्नर के पद पर तीन साल की बेहतरीन पारी के बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल का महानिदेशक बनाया गया। 

दिल्ली पुलिस में कमिश्नर प्रणाली 1 जुलाई 1978 में शुरु हुई थी, तब उत्तर प्रदेश काडर के जे एन चतुर्वेदी को पहला कमिश्नर नियुक्त किया गया था। महाराष्ट्र काडर के आईपीएस एस एस जोग, राजस्थान काडर के बजरंग लाल, सुभाष टंडन और हरियाणा काडर के पीएस भिंडर भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर बनाए गए।
कमिश्नर सिस्टम से पहले दिल्ली पुलिस के मुखिया यानी आईजी के पद पर भी दूसरे काडर के अफसरों को नियुक्त किया गया था। कांग्रेस के तत्कालीन गृहमंत्री पीसी सेठी भी अपने राज्य मध्यप्रदेश के कई पुलिस अफसरों को दिल्ली पुलिस में लाए थे। सरकार किसी भी दल की हो, सब नियमों को ताक पर रख कर अपने चहेते को ही लगाते है।
 राकेश अस्थाना को तो रिटायरमेंट से ठीक पहले सरकार ने एक साल का सेवा विस्तार देकर कमिश्नर बनाया था।  
सत्ता के लठैत कमिश्नर? -
पिछले कई सालों से कमिश्नर के पद पर ऐसे नाकाबिल आईपीएस अफसर आए हैं जिन्होंने  सत्ता के लठैत बन खाकी को खाक में मिला दिया। ऐसे कमिश्नरों के कारण ही पुलिस में भ्रष्टाचार व्याप्त है। ये कमिश्नर अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने में भी विफल रहे। पेशेवर रुप से नाकाबिल कमिश्नरों के कारण ही आईपीएस अफसर और मातहत पुलिसकर्मी भी निरंकुश हो जाते हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता हैं।  हालत यह है कि लूट,झपटमारी आदि अपराध की सही एफआईआर तक दर्ज नहीं की जाती है। अपराध कम दिखाने के लिए अपराध को दर्ज ना करने या हल्की धारा में दर्ज किए जाने की परंपरा जारी है। थानों में लोगों से पुलिस सीधे मुंह बात तक नहीं करती। डीसीपी या अन्य वरिष्ठ अफसरों से मिलने के लिए भी लोगों को सिफारिश तक करानी पड़ती है।

अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि संजय अरोड़ा अपनी पेशेवर काबिलियत दिखा कर कमिश्नर पद का सम्मान,गरिमा बहाल करेंगे या वह अपने पूर्ववर्ती कमिश्नरों की तरह सत्ता के लठैत बन पद की गरिमा को मटियामेट करेंगे। 

हालांकि दिल्ली पुलिस के कमिश्नर पद पर पहले अनेक ऐसे आईपीएस अफसर रहे हैं जिनकी काबिलियत और दमदार नेतृत्व क्षमता की मिसाल दी जाती है। काबिल कमिश्नर से ही आईपीएस भी डरते हैं। 




(लेखक इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1990 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)





Saturday, 23 July 2022

IPS में दम है, तो थानेदारों की नकेल कसे।

आईपीएस में दम है, तो थानेदारों की नकेल कसे।


इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस में एसएचओ यानी थानेदार दिनों दिन कितने ज्यादा भ्रष्ट , निरंकुश और बेखौफ होते जा रहे है। इसका अंदाजा हाल ही के मामलों से भी लगाया जा सकता है। एसएचओ के बेखौफ होने के लिए आईपीएस अफसर जिम्मेदार है। आईपीएस अफसर अगर काबिलियत, ईमानदारी और दबंगता से अपने कर्तव्य का पालन करें, तो ही एसएचओ की नकेल कसी जा सकती है। 

आईपीएस की भूमिका पर सवाल-
लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले कई सालों से आईपीएस अफसर एसएचओ के 'दोस्त' और आका की भूमिका में ज्यादा नजर आ रहे है। 
पेशेवर रुप से कमजोर/दब्बू /नाकाबिल  अफसरों के कारण ही आईपीएस जैसी प्रतिष्ठित सेवा की छवि भी खराब होती है। ऐसे आईपीएस के कारण ही बेईमान पुलिसकर्मी निरंकुश हो जाते है।
इसी लिए अपराध और अपराधियों पर भी अंकुश नहीं लग पाता है। 
लगता है अब काबिल, दमदार आईपीएस अफसरों का अकाल पड़ गया है।

ईमानदार हो, तो ईमानदार नजर आना जरूरी है।-
कमिश्नर और अन्य आईपीएस अफसर अगर दमदार और काबिल हो, तो ही एसएचओ डरते हैं वरना आईपीएस को तो वह अपना साझीदार/ पार्टनर ही मानते हैं। जब तक आईपीएस अफसर अपने निजी लाभ /घरेलू कार्य के लिए एसएचओ पर निर्भर रहेंगे, पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लग ही नहीं सकता। आईपीएस अगर ईमानदार हो, तो ईमानदार नजर आना जरूरी है।
लेकिन जो आईपीएस अफसर मातहत पुलिसकर्मियों और सरकारी कार आदि संसाधनों का निजी काम के लिए इस्तेमाल करते हैं। अपनी शान दिखाने के लिए दफ्तरों की साज सज्जा और  कार्यक्रमों पर सरकारी धन बेदर्दी से लुटाते हैं। 
जो अफसर लूट, झपटमारी, हत्या की कोशिश,  जैसे अपराध को ही सही दर्ज नहीं करते या हल्की धारा में दर्ज़ करते हैं। 
उनको ईमानदार भला कैसे माना जा सकता है। अपराध को दर्ज़ न करके एक तरह से अपराधी की मदद करने वाले पुलिसवाले तो अपराधी से भी बड़े गुनाहगार है। 
कमिश्नर और आईपीएस अफसर अगर ठान लें, तो ही भ्रष्ट पुलिस वालों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

वैसे दिल्ली पुलिस में ऐसे कमिश्नर और आईपीएस अफसर भी रहे हैं। जिनकी काबिलियत, दबंगता और दमदार नेतृत्व क्षमता का आज भी उदाहरण दिया जाता है।

दो लाख दो, मामला रफा दफा कराओ-
दिल्ली पुलिस के पूर्वी जिला के साइबर थाने के एसएचओ सतीश कुमार और एएसआई विजेंद्र  को 17 जुलाई को निलंबित किया गया। एक व्यक्ति को धमकी देकर दो लाख रुपए मांगने वाले इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ जबरन वसूली और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला भी दर्ज किया गया है।
पूर्वी जिला के एडिशनल डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि एक महिला ने साइबर थाने में   शिकायत की थी, कि उसके पति ने उसके ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। पति-पत्नी के बीच मुकदमे बाजी चल रही है।
आरोप है कि साइबर थाने का एसएचओ सतीश और एएसआई विजेंद्र महिला के पति के घर गए, उसे धमकाया और मामला निपटा देने के लिए दो लाख रुपए मांगे।  शिकायकर्ता जब बाद में साइबर थाने गया, तब भी उससे रकम की मांग की गई। बीस हजार रुपए पुलिसकर्मियों को शिकायतकर्ता ने दे भी दिए।
शिकायकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अफसर को इस मामले की शिकायत की। शिकायत के साथ उसने ऑडियो रिकार्डिंग आदि भी दी। 
पीजी सेल के एसीपी ने मामले की जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। 
साढ़े आठ करोड़ वसूलने वाला एसएचओ-
6 जुलाई 2022 को दक्षिण पश्चिम जिला के साइबर थाने के एसएचओ संजय गाड़े को निलंबित किया गया था। उस पर साढ़े आठ करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। मुंबई के एक व्यक्ति पर साइबर ठगी के आरोप लगने पर उसके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था। खातों में करोड़ों रुपए हैं। खातों से रोक हटवाने और मुकदमे में बचाने के लिए यह रकम ली गई।
दो करोड़ डकारने वाला एसएचओ-
 7 जून 2022 को पटेल नगर थाना के एसएचओ भरत सिंह समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सरकारी संपति के गबन/ अमानत में ख्यानत का मामला धारा 409 के तहत दर्ज किया गया। भरत सिंह को दो महीने पहले ही पहली बार एस एच ओ बनाया गया था।
5.50 करोड़ बरामद - 
 आरोप है कि पीसीआर पर तैनात पटेल नगर थाने के एएसआई दानवीर और सिपाही कुलदीप ने दो लोगों से हवाला के साढे 5 करोड़ रुपए पकड़े थे। पुलिसकर्मियों ने एस एच ओ को सूचना दी। 
एसएचओ मौके पर गया और रकम से भरा एक बैग अपनी  कार में रखवा दिया। शेष दो बैग थाने में जमा कर दिए। एसएचओ भरत सिंह ने जब्ती/ बरामदगी तीन करोड़ चालीस लाख रुपए की ही दिखाई। आयकर विभाग को भी इतनी ही रकम के बारे में सूचना दी।  दो करोड़ दस लाख रुपए एसएचओ खुद डकार गया।
वरिष्ठ पुलिस अफसरों की जानकारी में यह चौंकाने वाली जानकारी आई तो हडकंप मच गया। एसएचओ समेत तीन पुलिसकर्मियों को तुरंत लाइन हाजिर कर जांच शुरु कर दी गई। हडपी गई रकम बरामद कर ली गई। 

(  लेखक इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1990 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)


Monday, 18 July 2022

SHO निलंबित, धमकाया,दो लाख मांगे। खाकी को खाक में मिलाया।


साइबर थाने का SHO निलंबित।
 धमकाया, दो लाख मांगे।



इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस के साइबर थाने के एसएचओ और एएसआई को निलंबित किया गया है। एक व्यक्ति को धमकी देकर दो लाख रुपए मांगने वाले इन दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ जबरन वसूली और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला भी दर्ज किया गया है।
पूर्वी जिला के साइबर थाने के एसएचओ सतीश कुमार और एएसआई विजेंद्र के खिलाफ पुलिस के वरिष्ठ अफसरों को शिकायत मिली थी।
पूर्वी जिला के एडिशनल डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि एक महिला ने साइबर थाने में एक  शिकायत की थी, कि उसके पति ने उसके ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। पति-पत्नी के बीच मुकदमे बाजी चल रही है।
आरोप है कि साइबर थाने का एसएचओ सतीश और एएसआई विजेंद्र महिला के पति के घर गए, उसे धमकाया और मामला निपटा देने के लिए दो लाख रुपए मांगे। 
आरोप है कि शिकायकर्ता जब बाद में साइबर थाने गया, तब भी उससे रकम की मांग की गई। 
बीस हजार रुपए पुलिसकर्मियों को शिकायतकर्ता ने दे भी दिए।
शिकायकर्ता ने वरिष्ठ पुलिस अफसर को इस मामले की शिकायत की। शिकायत के साथ उसने ऑडियो रिकार्डिंग आदि भी दी। 
पीजी सेल के एसीपी ने मामले की जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। 
इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और दोनों को निलंबित कर दिया गया।

साढ़े आठ करोड़ वसूलने वाला एसएचओ-
6 जुलाई 2022 को दक्षिण पश्चिम जिला के साइबर थाने के एसएचओ संजय गाड़े को निलंबित किया गया था। उस पर साढ़े आठ करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। मुंबई के एक व्यक्ति पर साइबर ठगी के आरोप लगने पर उसके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया था। खातों में करोड़ों रुपए हैं। खातों से रोक हटवाने और मुकदमे में बचाने के लिए यह रकम ली गई।
दो करोड़ डकारने वाला एसएचओ-
 7 जून 2022 को पटेल नगर थाना के एसएचओ भरत सिंह समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ सरकारी संपति के गबन/ अमानत में ख्यानत का मामला धारा 409 के तहत दर्ज किया गया। भरत सिंह को दो महीने पहले ही पहली बार एस एच ओ बनाया गया था।
5.50 करोड़ बरामद - 
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोप है कि पीसीआर पर तैनात पटेल नगर थाने के एएसआई दानवीर और सिपाही कुलदीप ने दो लोगों से हवाला के साढे 5 करोड़ रुपए पकड़े थे। पुलिसकर्मियों ने एस एच ओ को सूचना दी। 
2.10 करोड़ डकारें -
एसएचओ मौके पर गया और रकम से भरा एक बैग अपनी इनोवा कार में रखवा दिया। शेष दो बैग थाने में जमा कर दिए। एसएचओ भरत सिंह ने जब्ती/ बरामदगी तीन करोड़ चालीस लाख रुपए की ही दिखाई। आयकर विभाग को भी इतनी ही रकम के बारे में सूचना दी।  दो करोड़ दस लाख रुपए एसएचओ खुद डकार गया।
वरिष्ठ पुलिस अफसरों की जानकारी में यह चौंकाने वाली जानकारी आई तो हडकंप मच गया। एसएचओ समेत तीन पुलिसकर्मियों को तुरंत लाइन हाजिर कर जांच शुरु कर दी गई। हडपी गई रकम बरामद कर ली गई। 
इन मामलों से पता चलता है कि भ्रष्ट पुलिस कर्मी कितने निरंकुश और बेखौफ हो गए हैं। 


Thursday, 30 June 2022

सीबीआई ने 5 लाख लेते रेलवे के चीफ इंजीनियर को गिरफ्तार किया ।

सीबीआई ने 5 लाख लेते रेलवे के चीफ इंजीनियर को गिरफ्तार किया ।

इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने पांच लाख रुपए रिश्वत लेते हुए  रेलवे के चीफ इंजीनियर को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई ने शिकायतकर्ता से पांच लाख रुपए की रिश्वत की मांग करने एवं स्वीकार करने पर पी आर सुरेश मुख्य अभियन्ता( दक्षिण मध्य रेलवे, सिकन्दराबाद) को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई के प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया कि पी आर सुरेश मुख्य अभियन्ता  (दक्षिण मध्य रेलवे, रेल निर्माण निलयम, सिकन्दराबाद) के खिलाफ  29 जून को मामला दर्ज किया गया , जिसमें आरोप है कि उप्पल-जम्मीकुन्टा रेलवे स्टेशनों के मध्य आर ओ बी  के निर्माण हेतु ठेके की अवधि बढ़ाने के लिए आरोपी ने शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपए रिश्वत की मांग की।
सीबीआई ने जाल बिछाया एवं आरोपी मुख्य अभियंता पी आर सुरेश को शिकायतकर्ता से 5 लाख रुपए की रिश्वत की मांग करने एवं स्वीकार करने के दौरान रंगे हाथ पकड़ा। आरोपी के परिसर में तलाशी ली गई।
गिरफ्तार आरोपी को हैदराबाद की सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।।