Friday, 28 November 2025

कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग करने वालों को कार देने वाला गिरफ्तार, कैनेडा पुलिस से बचने के लिए भारत आया


कपिल शर्मा के कैफे पर फायरिंग करने 
 वालों को कार देने वाला गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ, 
जबरन वसूली के लिए कैनेडा में कॉमेडियन कपिल शर्मा के कैफे/रेस्टोरेंट पर गोलियां चलाने वाले गिरोह के एक बदमाश को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लुधियाना से गिरफ्तार किया है। इस बदमाश ने वारदात के लिए कार का इंतजाम किया था। उसके पास से एक विदेशी पिस्तौल, कारतूस और कार बरामद हुई है। 

क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि डीसीपी संजीव यादव की देखरेख में इंस्पेक्टर मान सिंह, अरविंद सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम आदि की टीम ने लुधियाना से बंधु मान सिंह सेखों को गिरफ्तार किया। बंधु मान सिंह 23 अगस्त को ही कैनेडा से भारत वापस आया है।
बंधु मान सिंह कैनेडा में भी एक मामले में गिरफ्तार हुआ था। उसके खिलाफ लुधियाना में 2019 में हत्या की कोशिश का भी एक मामला दर्ज हुआ था। 
ज्वाइंट कमिश्नर सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच ने हाल ही में पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई द्वारा संचालित हथियार तस्करों के एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह को गिरफ्तार किया था। आठ विदेशी पिस्तौल बरामद हुई थी। तफ्तीश के दौरान पता चला कि इस गिरोह ने एक पिस्तौल लुधियाना निवासी बंधु मान सिंह सेखों को दी है। इस सूचना के आधार पर बंधु मान सिंह सेखों को गिरफ्तार किया गया। 
बंधु मान सिंह सेखों ने पूछताछ के दौरान बताया कि सात अगस्त को कैनेडा में कपिल शर्मा के रेस्टोरेंट पर फायरिंग करने वाले दलजोत सिंह रहल और गुरजोत को उसने वारदात के लिए कार दी थी। वारदात के बाद उसने कार अपने एक पड़ोसी के यहां खड़ी भी कराई थी।कैनेडा पुलिस से बचने के लिए वह भारत वापस आ गया। 
कपिल शर्मा से रंगदारी वसूलने के लिए विदेश में मौजूद बदमाश गोल्डी ढिल्लों और कुलबीर सिद्दू ने ये फायरिंग कराई। 
कैनेडा में इस साल जुलाई में खुले कपिल शर्मा के कैफे पर 10 जुलाई, 7 अगस्त और 16 अक्टूबर को गोलियां चलाई गई। जुलाई में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी शुरू में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकी हरजीत लाडी ने ली थी। उसने कहा कि कपिल शर्मा ने अपने टीवी कार्यक्रम में निहंग सिखों का अपमान किया है। बाद में गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों ने भी जिम्मेदारी ली। इसके बाद अगस्त में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी गोल्डी ढिल्लों और कुलबीर सिद्दू ने ली। अक्टूबर में हुई फायरिंग की जिम्मेदारी भी इन दोनों ने ही ली।




Wednesday, 26 November 2025

इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल का वकील और न्यायिक सदस्य गिरफ्तार ,1 करोड़ 35 लाख बरामद

आईटीएटी का वकील और न्यायिक सदस्य गिरफ्तार ,1 करोड़ 35 लाख बरामद 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल, जयपुर के वकील राजेंद्र सिसोदिया, न्यायिक सदस्य डॉ. एस. सीतालक्ष्मी और अपीलकर्ता मुजम्मिल को भ्रष्टाचार/ रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। 1 करोड़ 35 लाख रुपये से ज्यादा की रकम बरामद हुई है। 
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि वकील राजेंद्र सिसोदिया को 25 नवंबर को 5.5 लाख रुपये की रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया गया। अपील करने वाले ने हवाला के ज़रिए रिश्वत के 5.5 लाख रुपये दिए। इसके बाद, आईटीएटी की न्यायिक सदस्य डॉ. एस. सीतालक्ष्मी को 26 नवंबर को उनकी सरकारी कार से 30 लाख रुपये बरामद होने के साथ गिरफ्तार किया गया और अपील करने वाले मुजम्मिल को भी 26 नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई की कई टीमों ने जयपुर, कोटा और दूसरी जगहों पर छापे मारे और 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा की नकदी, प्रॉपर्टी के कागजात और दूसरे ऐसे दस्तावेज ज़ब्त किए, जिससे पता चलता है कि यह एक संगठित सिंडिकेट है।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इस क्रिमिनल नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया, जिसमें इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (आईटीएटी), जयपुर के एक वकील, एक ज्यूडिशियल मेंबर, एक असिस्टेंट रजिस्ट्रार और दूसरे अन्य सरकारी कर्मचारी और प्राइवेट लोग शामिल हैं। ये लोग रिश्वत के बदले आईटीएटी बेंच, जयपुर में पेंडिंग अपीलों को संबंधित अपील करने वालों के पक्ष में निपटाने की भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल थे।
सीबीआई ने 25 नवंबर को आरोपी वकील, आईटीएटी, न्यायिक सदस्य और असिस्टेंट रजिस्ट्रार समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।




फिदायीन डाक्टर को पनाह देने वाला गिरफ्तार

                  शोएब और डाक्टर उमर 

इंद्र वशिष्ठ
लालकिले के सामने फिदायीन हमले से ठीक पहले आतंकवादी डाक्टर उमर उन नबी को शरण देने के आरोप में फरीदाबाद निवासी शोएब को एनआईए ने गिरफ्तार किया है।
हरियाणा के फरीदाबाद का धौज निवासी शोएब इस मामले में गिरफ्तार होने वाला सातवां आरोपी है। एनआईए की जाँच से पता चला है कि उसने 10 नवंबर को राजधानी में लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट से पहले आतंकवादी उमर को रसद/ सामान आदि सहायता भी प्रदान की थी। 
इस कार बम विस्फोट में कई लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे।
बताया जाता है कि जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 30 अक्टूबर को डॉ. मुजम्मिल को दबोचा तो उमर गायब हो गया। उमर नबी के छिपने की व्यवस्था शोएब ने ही की। उसने डॉक्टर उमर को जिला नूंह की हिदायत कॉलोनी में अपनी रिश्तेदार के घर कमरा दिलवाया। यहां उमर दिल्ली धमाके से पहले (30 अक्टूबर से 10 नवंबर) तक किराए पर रहा था। यहीं से उसने ने दिल्ली जाकर धमाका किया था।
शोएब अल-फलाह यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिशियन है। वहीं से वह आरोपी डॉक्टरों उमर के संपर्क में आया।
एनआईए ने इससे पहले इस मामले में अपनी जाँच के दौरान कार बम विस्फोट करने वाले उमर के छह अन्य प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार किया था।
एनआईए आत्मघाती बम विस्फोट के संबंध में विभिन्न सुरागों की तलाश जारी रखे हुए है और इस भीषण हमले में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और उनका पता लगाने के लिए संबंधित पुलिस बलों के साथ समन्वय में विभिन्न राज्यों में तलाशी अभियान चला रही है।
इस घातक आतंकवादी हमले के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के प्रयास जारी है। 








 




Sunday, 23 November 2025

E-FIR of cyber fraud, a discriminatory order

                  Satish Golchha

Discrimination in e-FIR of cyber fraud



Inder Vashisth 

The Delhi Police has started registering e-FIRs for complaints of cyber financial fraud involving Rs1 lakh or more from November 1. Earlier, this system was in place for cyber fraud involving Rs10 lakh or more since May this year. Special Commissioner (Crime) Devesh Chandra Srivastava stated that this new system will help victims receive speedy justice. Cyber ​​fraudsters can be identified quickly and the defrauded funds can be frozen quickly
Questions about the Commissioner's competence -
However, this police initiative has given rise to numerous questions and controversies. This has cast doubt on the competence and role of Police Commissioner Satish Golchha . Whether fraud or fraud amounts to One rupees or One Crore are all equal crimes under the law. Legally, FIRs must be registered immediately in all criminal cases, without delay or discrimination. In such a situation, how can Police discriminate by registering e-FIRs only for cyber fraud cases involving Rs1 lakh or more? Is the police only for the rich? By doing this, has the Police Commissioner discriminated and committed injustice against those who have lost less than Rs1 lakh to cyber fraud? This police action will only encourage criminals who commit cyber frauds worth less than Rs1 lakh.
The terror of Cyber ​​Fraud-
This is a well know fact that the police did not register proper FIRs in all criminal cases to hide the crime rate. The situation is such that cybercrime cases are increasing day by day. Yet, the police do not even register proper FIRs in all cases. People have to struggle just to get an FIR registered. Hundreds/thousands of cyber fraud complaints are pending, for the want of FIRs. When FIRs are not registered, how will the criminals be caught? One can only imagine. Now after this new order, the police will not listen at all to the complainants who have lost less than Rs 1 lakh.
SHOs' fun-
Police Commissioner Satish Golcha should disclose the total number of cyber fraud/crime complaints received by the police so far, and how many FIRs were registered in those cases. A retired DCP says that FIRs are not registered in even 10% of cases. By setting a limit of one lakh rupees for cyber fraud cases, Police Commissioner has given , to some extent, SHOs and cyber fraudsters, a free hand.It is now possible that a complainant may go to the police station to file an FIR for fraud/cyber fraud of less than one lakh rupees, and the SHO will refuse to register it and he can mislead the complainant by showing the Commissioner's circular and interpreting it to his own liking. The SHO can claim that the Commissioner's order now allows  FIRs to be registered only in cases involving one lakh rupees and above.
Commissioner should show honesty-
If Police Commissioner Satish Golcha truly wants to curb crime and criminals, he should issue a clear and straightforward order, stating that any cognizable offense must be registered (FIR/e-FIR) immediately, without delay, and under the correct sections. Strict action will be taken against SHOs and DCPs who fail to do so. The Commissioner should also ensure that the order is fully implemented. The Police Commissioner should first and foremost immediately remove the one lakh rupee limit for registering e-FIRs. There should be no limit on the amount for registering an FIR.
Has the CP forgotten policing?
Police Commissioner Satish Golcha seems to have forgotten the Broken Window Theory, which supports a police system that focuses on minor crimes. This theory of criminology states that policing methods that target minor crimes, such as vandalism, loitering, public drinking, and fare evasion, help create a lawful environment and prevent major crime.Even a retired IPS officer has stated that this initiative will only encourage criminals who commit cyber frauds involving less than one lakh rupees. FIRs will not even be registered for victims of fraud involving less than one lakh rupees. Registering FIRs based solely on the amount is discriminatory, deeply wrong, and illegal.
Free hand to criminals-
A 1988 batch IPS officer, who retired as Special Commissioner of Delhi Police, says that ignoring frauds involving less than one lakh rupees will greatly encourage criminals. This gives criminals free rein. In such a situation, what will happen to the poor people who lose their money? Who is the police for? How can the police discriminate like this? Lakshmi Narayan Rao, retired DCP of the Special Cell and lawyer, says that fraud is fraud, no matter how much it amounts to. What law says that if the fraud is 99,000 rupees, an e-FIR will not be filed? How can the police set a limit on the amount for registering an FIR?
Flaw in Intention-
A senior IPS officer in the Crime Branch stated that e-FIRs are only available for cyber frauds involving 1 lakh rupees and above. For frauds involving less than this amount, regular FIRs will be filed at police stations, as earlier.
However, this raises the question: if this is the case, why was a circular limiting the amount to ₹1 lakh necessary?
Regular Police stations lack expertise in investigating cyber fraud cases. Consequently, how can investigations involving frauds of less than 1 lakh rupees be conducted properly? How will victims receive speedy justice? However, e-FIRs are investigated by cyber experts from the Cyber ​​Police Station, Crime Branch, and IFSO. It is absolutely unfair to have a discriminatory system for filing FIRs/ investigating cyber fraud cases. This raises doubts about the intentions of police officers.





 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 

Thursday, 20 November 2025

दिल्ली पुलिस का रिश्वतखोर एसआई और एएसआई गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। सीबीआई ने कृष्णा नगर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर नितिन मीना और हर्ष विहार थाने के एएसआई बुध पाल सिंह को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
जमानत कराने का ठेका-
सीबीआई ने शाहदरा जिले के कृष्णा नगर थाने में  सब-इंस्पेक्टर नितिन मीना को शिकायतकर्ता से 30 हजार रुपये लेते हुए 19 नवंबर को गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता का भाई जेल में बंद है। सब-इंस्पेक्टर नितिन मीना ने शिकायतकर्ता के भाई के पक्ष में चार्जशीट दाखिल करने और जमानत कराने में मदद करने के लिए 40 हजार रुपए रिश्वत मांगी। सब-इंस्पेक्टर नितिन मीना ने धमकी दी, कि रिश्वत नहीं देने पर शिकायतकर्ता का भाई जेल में रहेगा। 
पता चला है कि सब-इंस्पेक्टर नितिन का कुछ दिन पहले ही कृष्णा नगर थाने से आनन्द विहार थाने में तबादला हो गया था। वह रिश्वत लेने कृष्णा नगर थाने गया था। 

महिला को जेल भेजने की धमकी-
सीबीआई ने 18 नंवबर को उत्तर पूर्वी जिले के हर्ष विहार थाने के एएसआई बुध पाल को महिला शिकायतकर्ता से पचास हजार रुपए लेते हुए पकड़ा। शिकायतकर्ता के पिता की सबौली में संपत्ति है। शिकायतकर्ता की भाभी ने संपत्ति विवाद के संबंध में शिकायतकर्ता और उसकी बहन के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करा दी। एएसआई बुध पाल ने शिकायतकर्ता का नाम इस मामले से हटा देने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत मांगी। रिश्वत नहीं देने पर महिला को जेल भेज देने की धमकी दी। 
2.40  लाख लेते पकड़ा-
सीबीआई ने 9 नवंबर को उत्तर पूर्वी जिले के ज्योति नगर थाने में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) पाटील कुमार को शिकायतकर्ता से 2 लाख 40 हज़ार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। एएसआई पाटील कुमार ने शिकायतकर्ता से संपत्ति के दस्तावेजों की वैरीफिकेशन की अनुकूल रिपोर्ट कोर्ट में देने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी। एएसआई ने धमकी दी कि अगर रिश्वत नहीं दी, तो वह शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेगा।
एएसआई ने शिकायतकर्ता के वकील दोस्त से कहा कि, अगर वह रिश्वत दिलाने में उसकी मदद करेगा, तो बदले में वह उसे एक लाख रुपये देगा।




3 आतंकी डाक्टर और मुफ़्ती एनआईए की हिरासत में


3 आतंकी डाक्टर और मुफ़्ती एनआईए की हिरासत में
 


इंद्र वशिष्ठ, 
लाल किले के सामने हुए कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने फिदायीन हमलावर डाक्टर उमर के चार और प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या छह हो गई है।
एनआईए के अनुसार कश्मीर में पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, अनंतनाग  के डॉ. आदील अहमद राठर, लखनऊ की महिला डॉ. शाहीन सईद और शोपियां के मुफ़्ती इरफान अहमद वागे को गिरफ्तार किया है।
अहम भूमिका-
 एनआईए की जांच के अनुसार, इन सभी ने  आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाई थी। कश्मीर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों को एनआईए ने पटियाला हाउस कोर्ट के प्रोडक्शन ऑर्डर पर श्रीनगर से हिरासत में लिया।
ड्रोन- रॉकेट से बमबारी की तैयारी-
एनआईए ने इस मामले में सबसे पहले धमाके में इस्तेमाल की गई कार के मालिक कश्मीरी आमिर राशिद अली को और उसके बाद जसीर बिलाल वानी उर्फ ​​दानिश को गिरफ्तार किया। जसीर से पूछताछ में पता चला कि आतंकवादी हमलों के लिए ड्रोन और रॉकेट का इस्तेमाल करने का इरादा था
जसीर ने कार बम विस्फोट से पहले कथित तौर पर ड्रोनों में बदलाव करके और रॉकेट बनाने की कोशिश करके आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की थी।
पोस्टर से पर्दाफाश-
आतंकी डाक्टरों के इस गिरोह का खुलासा जैश ए मोहम्मद के समर्थन में चिपकाए गए पोस्टर/ इश्तहार से हुआ। अक्टूबर में कश्मीर के नौगाम में जैश-ए-मोहम्मद के नाम से पोस्टर लगाए गए। कश्मीर पुलिस ने इस मामले में शोपियां के मुफ्ती इरफान अहमद को पकड़ा। उससे पता चला कि यह पोस्टर डॉ. आदिल अहमद ने लिखा है। मुफ्ती ने डॉ. मुजम्मिल शकील का भी नाम  लिया, जो फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। कश्मीर पुलिस ने  डाक्टर आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार किया।  उसके बाद डाक्टर मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। उससेसे पूछताछ में पता चला कि अल फलाह यूनिवर्सिटी में उसके कमरे के बगल में डॉ.उमर का कमरा है। डाक्टर मुजम्मिल की पूछताछ के आधार पर डॉ. शाहीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया।  दस नवंबर को कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में दो अलग अलग स्थानों से लगभग तीन हज़ार किलो विस्फोटक सामग्री (अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर आदि) बरामद की। 
उधर भनक लगते ही डॉ. उमर विस्फोटक से लदी कार को लेकर निकल गया। शाम को लाल किले के सामने उसने आत्मघाती हमला कर दिया।




Wednesday, 19 November 2025

CGHS के एडिशनल डायरेक्टर से 29 लाख रुपये, 50 लाख के जेवरात बरामद, आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार एडिशनल डायरेक्टर, सीजीएचएस, मेरठ, उत्तर प्रदेश के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति (डीए) का मामला 18 नवंबर को दर्ज किया है। आरोप है कि डाक्टर अजय कुमार ने स्वयं और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर अवैध रूप से धन और संपत्ति अर्जित करके खुद को समृद्ध बनाया है।
एडिशनल डायरेक्टर गिरफ्तार, 50 लाख मांगे-
सीबीआई ने इस साल 12 अगस्त को मेरठ में तैनात सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार, ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी और उनके निजी साथी रईस अहमद को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार ने दो निजी अस्पतालों जेएमसी मेडिसिटी और हाई फील्ड अस्पताल को सीजीएचएस की सूची से हटा देने की धमकी दे कर 50 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
50 लाख के जेवरात बरामद -
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार के आवास और बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। तलाशी में आरोपी के परिसर/लॉकर से 29.50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण बरामद किए गए। इसके अलावा, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति के दस्तावेज और म्यूचुअल फंड और शेयर बाजारों में भारी निवेश का विवरण प्राप्त हुआ है।
दो करोड़ से ज्यादा की धन संपत्ति-
प्रथम दृष्टया यह पता चला कि डाक्टर अजय कुमार ने सीएमओ, सीजीएचएस मेरठ, यू.पी. के रूप में कार्य करते हुए 01.04.2020 से 13.08.2025 की अवधि के दौरान खुद को अवैध रूप से समृद्ध किया और उसके पास 2,06,31,845/- रुपये के आर्थिक संसाधन हैं, जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है।
पैनल से हटाने की धमकी-
सीबीआई ने 12.08.2025 को मेरठ, उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल समूह के निदेशक संचालन विशाल सलोनिया की शिकायत पर मेरठ में तैनात सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार और ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। 
 शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 08.07.2025 को सीजीएचएस टीम, मेरठ द्वारा उसके दो अस्पतालों जेएमसी मेडिसिटी और हाई फील्ड अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया और उसके बाद, अस्पतालों से रिश्वत वसूलने के इरादे से दोनों अस्पतालों को मामूली कमियों को उजागर करते हुए नोटिस दिए गए। आरोपियों ने अस्पतालों को सीजीएचएस पैनलबद्ध अस्पतालों की सूची से न हटाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।
पैनल निलंबित-
रिश्वत नहीं देने पर जेएमसी मेडिसिटी अस्पताल का पैनल निलंबित कर दिया। इसके बाद हाई फील्ड अस्पताल का भी पैनल निलंबित करने की धमकी दी।
एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार और ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी ने अस्पतालों को पैनल से हटाने से बचने के लिए जल्द से जल्द 50 लाख रुपये की रिश्वत राशि देने पर जोर दिया था। बातचीत के बाद,एडिशनल डायरेक्टर अजय कुमार 12.08.2025 को 5 लाख रुपये (50 लाख रुपये की रिश्वत राशि की पहली किस्त) का आंशिक भुगतान स्वीकार करने के लिए सहमत हो गया। 
रंगेहाथ गिरफ्तार-
सीबीआई ने जाल बिछाया और सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार, ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी और उनके निजी साथी रईस अहमद को 5 लाख रुपये (50 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त) के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।



आतंकी सिंडिकेट का गुंडा अनमोल बिश्नोई एनआईए के शिकंजे में


अनमोल बिश्नोई एनआईए के शिकंजे में 



इंद्र वशिष्ठ
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के भाई और करीबी सहयोगी अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर गिरफ्तार कर लिया।
आतंकी वारदात में शामिल-
आतंकी और आपराधिक मामलों में शामिल अनमोल बिश्नोई पर एनआईए ने दस लाख रुपये का इनाम भी रखा हुआ था। 
अनमोल पर मुंबई में‌12 अक्टूबर​​​​​ 2024 को
एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी के अलावा पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मई 2022 में हत्या का भी आरोप है। अनमोल का नाम  सलमान खान के घर पर फायरिंग केस में भी सामने आया था।
अमेरिका भाग गया-
अनमोल बिश्नोई साल 2022 में जाली पासपोर्ट पर अमेरिका भाग गया था। अवैध तरीके से अमेरिका में घुसने पर उसे गिरफ्तार किया गया। अमेरिका में शरण मांगने की उसकी अर्जी भी ठुकरा दी गई। जिसके बाद अमेरिका ने उसे भारत वापस भेज दिया। बुधवार सुबह इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे पर उतरने के बाद एनआईए ने अनमोल बिश्नोई को गिरफ्तार कर लिया। 
आतंकी सिंडिकेट का 19 वां आरोपी गिरफ्तार-
एनआईए के अनुसार अनमोल बिश्नोई, अपने जेल में बंद भाई लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले आतंकी सिंडिकेट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार होने वाला 19 वां ​​आरोपी है। 
एनआईए के अनुसार अनमोल ने 2020-2023 की अवधि के दौरान देश में विभिन्न आतंकवादी वारदात/ कृत्यों को अंजाम देने में आतंकवादी गोल्डी बरार और लॉरेंस बिश्नोई की सक्रिय रूप से सहायता की थी, अनमोल के खिलाफ मार्च 2023 में एनआईए द्वारा आरोपपत्र दायर किया गया था।
विदेश से सक्रिय -
बिश्नोई गिरोह के विभिन्न सहयोगियों के साथ मिलकर काम करते हुए, अनमोल ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के लिए अमेरिका से आतंकी सिंडिकेट चलाना और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना जारी रखा, और इसके लिए ज़मीनी स्तर पर उसके गुर्गों का इस्तेमाल किया। जाँच से पता चला कि अनमोल बिश्नोई ने गिरोह के शूटरों और ज़मीनी गुर्गों को आश्रय और रसद सहायता प्रदान की थी। वह अन्य गैंगस्टरों की मदद से विदेशी धरती से भारत में जबरन वसूली में भी शामिल था।
रेड कार्नर नोटिस-
अनमोल 15 मई, 2022 को भानु नाम के एक फर्जी पासपोर्ट पर अमेरिका भाग गया। हालाँकि, पिछले साल अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग ने पाया कि उसके यात्रा दस्तावेजों के साथ संलग्न एक कंपनी का एक संदर्भ पत्र जाली था। उसके खिलाफ 6 दिसंबर, 2022 को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।
अनमोल के खिलाफ 31 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 22 राजस्थान में दर्ज हैं और नौ गिरफ्तारी वारंट भी हैं। 
गठजोड़ पर प्रहार-
एनआईए, लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व में आतंकवादी-गैंगस्टर षड्यंत्र मामले की जांच जारी रखे हुए है। यह जांच आतंकवादियों, गैंगस्टरों और हथियार तस्करों के बीच गठजोड़ को नष्ट करने के अपने प्रयासों के तहत जारी है, जिसमें उनके बुनियादी ढांचे और वित्तपोषण/फंडिंग के स्रोत भी शामिल हैं।




Monday, 17 November 2025

आतंकियों का इरादा ड्रोन से बम धमाके करने का था, फिदायीन हमलावर का एक और साथी गिरफ्तार

आतंकियों का इरादा ड्रोन से बम धमाके करने का था



इंद्र वशिष्ठ, 
लाल किले के सामने हुए कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने फिदायीन हमलावर डाक्टर उमर के एक और प्रमुख सहयोगी जसीर बिलाल वानी उर्फ ​​दानिश को श्रीनगर से गिरफ्तार किया है। जसीर से पूछताछ में पता चला कि आतंकवादी हमलों के लिए ड्रोनों और रॉकेट का भी इस्तेमाल करने का इरादा था। 
नरसंहार की साज़िश-
एनआईए के अनुसार‌ जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड का निवासी जसीर बिलाल वानी उर्फ ​​दानिश इस हमले का सक्रिय सह-साजिशकर्ता था और उसने आतंकवादी उमर उन नबी के साथ मिलकर इस आतंकी नरसंहार की योजना बनाई थी।
ड्रोन-रॉकेट-
एनआईए की जाँच से पता चला है कि जसीर ने कार बम विस्फोट से पहले कथित तौर पर ड्रोनों में बदलाव करके और रॉकेट बनाने की कोशिश करके आतंकवादी हमलों को अंजाम देने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की थी।
फिदायीन बनने से इंकार -
राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएट जसीर वानी ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसे आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए उमर ने कई महीनों तक उसका ‘ब्रेनवॉश’ किया। वह पिछले वर्ष अक्टूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ से मिलने को तैयार हुआ, जहां से उसे हरियाणा के फरीदाबाद में अल फलाह विश्वविद्यालय में रहने के लिए ले जाया गया।
वानी को पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हिरासत में लिया था और पूछताछ में उसने खुलासा किया था कि मॉड्यूल के अन्य लोग उसे प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद के लिए ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) बनाना चाहते थे, जबकि उमर कई महीनों से उसका ब्रेनवॉश कर आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार कर रहा था।
इस्लाम में आत्महत्या पर रोक-
उमर की यह कोशिश इस साल अप्रैल में उस समय नाकाम हो गई जब वानी ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में आत्महत्या को निषिद्ध मानने का हवाला देते हुए इससे इंकार कर दिया था।
आत्मघाती हमलावर बनाने की मुहिम की साजिश जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क की जांच में एक खतरनाक आयाम जोड़ती है।
उमर में बदलाव-
जम्मू-कश्मीर पुलिस को वानी ने पूछताछ के दौरान बताया कि उमर में बदलाव साल 2021 में सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद आया, जहां दोनों कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के ओजीडब्ल्यू से मिले थे।
केमिकल एकत्र-
तुर्किये की यात्रा के बाद, अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले उमर और गनई ने खुले बाजार से भारी मात्रा में रसायन इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जिसमें 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल थे, जिनमें से अधिकांश को विश्वविद्यालय परिसर के पास संग्रहीत किया गया था।
6 दिसंबर को हमला-
उसने बताया कि छह दिसंबर को हमले की साजिश श्रीनगर पुलिस की सावधानीपूर्वक जांच के बाद नाकाम हो गई क्योंकि इस पूछताछ के बाद गनई की गिरफ्तारी हुई और विस्फोटक जब्त कर लिए गए। इससे उमर संभवत: घबरा गया और अंततः लाल किले के बाहर हुए ‘आत्मघाती हमले’को अंजाम दिया।
कार मालिक गिरफ्तार-
एनआईए ने इसके पहले रविवार को कश्मीरी आमिर राशिद अली को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जम्मू-कश्मीर के पंपोर के संबूरा निवासी आरोपी आमिर राशिद अली ने  आत्मघाती हमलावर डाक्टर उमर उन नबी के साथ मिलकर आतंकी हमला करने की साजिश रची थी। बम विस्फोट के लिए इस्तेमाल कार फरीदाबाद से आमिर के नाम से ही खरीदी गई थी
एनआईए ने उमर से संबंधित एक अन्य वाहन भी ज़ब्त कर किया। इस मामले में साक्ष्य के लिए वाहन की जांच की जा रही है।
एनआईए बम विस्फोट के पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।
आतंकवाद-रोधी एजेंसी की कई टीमें विभिन्न सुरागों का पता लगा रही हैं और आतंकी हमले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।


Sunday, 16 November 2025

लाल किला बम विस्फोट मामले में आत्मघाती हमलावर का साथी गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ, 
लाल किला के सामने कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने कश्मीरी आमिर राशिद अली को दिल्ली से गिरफ्तार किया है, आमिर राशिद ने आत्मघाती हमलावर डाक्टर उमर के साथ मिलकर इस आतंकी हमले की साजिश रची थी। इस हमले में 12 निर्दोष लोगों की जान चली गई और 18 अन्य घायल हो गए थे।
दिल्ली पुलिस से मामला अपने हाथ में लेने के बाद एनआईए ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया था।
एनआईए की जांच से पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के पंपोर के संबूरा निवासी आरोपी आमिर राशिद अली ने कथित आत्मघाती हमलावर डाक्टर उमर उन नबी के साथ मिलकर आतंकी हमला करने की साजिश रची थी।
आमिर उस कार की खरीद में मदद के लिए दिल्ली आया था जिसका इस्तेमाल अंततः विस्फोट के लिए वाहन-जनित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के रूप में किया गया था। आई 20 हुंदई कार 29 अक्टूबर को फरीदाबाद में सेक्टर 37 स्थित रायल कार जोन से दो लाख रुपये नकद देकर आमिर राशिद के नाम से खरीदी गई थी। कार खरीदने के लिए आमिर ने अपने ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड आदि दिए थे। 

 एनआईए ने फोरेंसिक जाँच से वाहन-जनित आईईडी के मृतक चालक की पहचान उमर उन नबी के रूप में की है, जो पुलवामा जिले का निवासी और फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय में जनरल मेडिसिन विभाग में सहायक प्रोफेसर था।
एनआईए ने उमर से संबंधित एक अन्य वाहन भी ज़ब्त कर लिया है। इस मामले में साक्ष्य के लिए वाहन की जांच की जा रही है। एनआईए ने अब तक 10 नवंबर को हुए विस्फोट में घायल हुए लोगों सहित 73 गवाहों से पूछताछ की है।

दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और विभिन्न सहयोगी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते हुए, एनआईए विभिन्न राज्यों में अपनी जाँच जारी रखे हुए है। यह बम विस्फोट के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने और मामले RC-21/2025/NIA/DLI में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए कई सुरागों की तलाश कर रही है।