इंद्र वशिष्ठ,
पुलिस में भ्रष्टाचार तो चरम पर है ही। पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन वसूली, डकैती और लूट के अलावा हत्या तक करने के मामले पिछले एक महीने से लगातार सामने आ रहे है। आम अपराधी से ज्यादा खतरनाक तो ऐसे वर्दी वाले गुंडे/ अपराधी हो गए है।
कमिश्नर, आईपीएस की भूमिका-
इस तरह के संगीन मामले सामने आने से दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा और आईपीएस अधिकारियों की काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है।
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर -
आम बदमाश/अपराधी को कथित एनकाउंटर में पैर में गोली मारकर बहादुरी दिखाने वाली पुलिस अगर सही मायने में बहादुर और ईमानदार है तो उसे वर्दी वाले गुंडों/अपराधियों का भी एनकाउंटर करना चाहिए। हत्या, डकैती, लूटपाट, जबरन वसूली करने वाले ऐसे वर्दीधारी अपराधियों का भी एनकाउंटर होने लगे, तो ही अपराध और अपराधियों पर अंकुश लग सकता है। पुलिस में मौजूद गंदगी भी साफ़ हो जाएगी। लेकिन अफ़सोस ऐसा होगा नहीं।
सच्चाई तो यह है कि डकैती के 3 और अपहरण की 1 वारदात में शामिल हवलदार आराम से पुलिस में नौकरी कर रहा हैं।
एनकाउंटर लंगड़ा, एक ही कहानी-
पिछले कुछ समय से कथित एनकाउंटर का चलन बढ़ गया। जिसमें कहानी हमेशा लगभग एक जैसी ही होती। " शार्प शूटर बदमाश ने गोली चलाई, जो पुलिसकर्मियों की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी।" "पुलिस ने आत्म रक्षा में गोली चलाई जो अपराधी के पैर में लगी। "
अपराधी का फोटोशूट-
पुलिस द्वारा बताए गए कथित शार्प शूटर
बदमाशों की गोली हमेशा बुलेटप्रूफ जैकेट पर ही लगती है और पुलिस की बंदूक की गोली पैर में लगने के बावजूद अपराधी अस्पताल में या पुलिस हिरासत में फोटो के लिए आराम से लेट कर या खड़ा होकर पोज भी दे सकता है।
बदमाशों का महिमा मंडन बंद हो -
बारी से पहले तरक्की, इनाम और प्रचार के चक्कर में पुलिसकर्मी यह भूल रहे हैं कि इन कथित एनकाउंटर की कहानी से ये संदेश भी जाता है कि दिल्ली में कोई मामूली सा गुंडा भी पुलिस से नहीं डरता और इसलिए वह पुलिस पर भी गोली चलाने में नहीं हिचकता।
दूसरी ओर पुलिस तो एक तरह से उसे शार्प शूटर, खतरनाक अपराधी बता कर उसका महिमामंडन कर देती। इस सब का फायदा बदमाश/अपराधी को ही मिलता है। मामूली से बदमाश/ गुंडे के बारे में भी अगर पुलिस कहे कि उसने पुलिस पर गोली चलाई थी, तो उस बदमाश की तो दुकान चल गई। आम आदमी भी अब उससे ज्यादा डरेगा, कि ये तो पुलिस पर भी गोली चला देता है।
डीसीपी के पीए की हरियाणा पुलिस को तलाश
दिल्ली में पंजाबी बाग निवासी कारोबारी से 2 करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी को हरियाणा पुलिस द्वारा तलाश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
एसआई प्रदीप कुमार रांगी पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे़ शरद भास्कर का पीए है। ये मामला सामने आने के बाद से वह नौकरी से गायब है।
डीसीपी का खास पीए-
स्पेशल पुलिस कमिश्नर स्तर के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीसीपी भास्कर जब ट्रैफिक में तैनात थे, एसआई प्रदीप रांगी तभी से उनके साथ अटैच है। जबकि कागजों में उसकी तैनाती बाहरी उत्तरी जिले में थी।
अब यह मामला सामने आने के बाद एसआई प्रदीप कुमार रांगी को डीसीपी ने रिलीव कर दिया। लेकिन प्रदीप कुमार रांगी ने बाहरी उत्तरी जिले में जॉइन नहीं किया है। वह गायब है।
इस मामले में डीसीपी भास्कर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई।
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजीव रंजन समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क की कोशिश की गई।
कमिश्नर खुलासा करें-
मामूली चोर पकड़ने का भी प्रचार करने वाली दिल्ली पुलिस के कमिश्नर और आईपीएस अधिकारियों को संगीन अपराध के इस मामले में डीसीपी और पीए की भूमिका के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आपराधिक मामले में तो हरियाणा पुलिस कार्रवाई करेगी ही।
दिल्ली पुलिस को बताना चाहिए कि एसआई प्रदीप कुमार रांगी के ख़िलाफ़ कोई विभागीय कार्रवाई की गई है या नहीं ?
5 करोड़ मांगे-
वेस्ट पंजाबी बाग निवासी एक्वालाइट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन्द्र कुमार की बहादुर गढ़ के कसार गांव में फैक्टरी है। 16 और 18 अप्रैल को इंटरनेशनल कॉल से कॉलर ने खुद को गैंगस्टर्स लॉरेंस बिश्नाई गिरोह का रणदीप मलिक बताकर देवेन्द्र से पांच करोड़ रुपए रंगदारी मांगी।
20 अप्रैल को रोहिणी इलाके में देवेन्द्र ने रणदीप के बताए गुर्गों को दो करोड़ रुपए सौंप दिए। रकम देने के बावजूद 21 अप्रैल को दोबारा से धमकी दी गई कि, 'लॉरेंस भाई ने पैसे कम बताएं हैं। दो करोड़ रुपये और मांगे गए। उसके बाद देवेन्द्र कुमार ने सेक्टर-6 बहादुरगढ़ पुलिस को शिकायत दी। 22 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3 (5), 308(4), 308(5), 351(3), 61(2) मामला दर्ज कर लिया गया। इस मामले में हरियाणा पुलिस कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, उनसे मिली जानकारी के बाद ही दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी की तलाश शुरू कर दी गई।
जमानत नहीं मिली -
झज्जर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राणा ने आरोपी एएसआई प्रदीप कुमार रांगी की अग्रिम जमानत याचिका 6 मई को खारिज कर दी। अदालत में पुलिस की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी प्रदीप कुमार रांगी ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उसने दूसरे साथियों के साथ मिलकर जबरन वसूली करवाने की आपराधिक साजिश रची थी। आरोपी के पास से जबरन वसूली की काफी बड़ी रकम बरामद की जानी है। जिस पर अदालत ने भी माना है कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।
रक्षक बने भक्षक
हत्यारा हवलदार-
26 अप्रैल, 2026 की रात दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जाफरपुर कलां इलाके में स्पेशल सेल में तैनात हवलदार नीरज बलहारा ने दो युवकों को गोली मार दी। डिलीवरी का काम करने वाले 21 वर्षीय पांडव कुमार की मौत हो गई। घर के बाहर आवाज के कारण के बाद हवलदार नीरज ने सीने में गोली मार दी। दोनों युवक एक बच्चे की जन्मदिन पार्टी से वापस अपने घर बिंदा पुर लौट रहे थे। उनके अन्य साथी कैब का इंतजार कर रहे थे।
हत्या और हत्या की कोशिश में हवलदार नीरज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
डकैत हवलदार-
31 मार्च 2026 को बाड़ा हिन्दू राव थाना के आजाद मार्केट, रेलवे पुल के नीचे एक व्यापारी के कर्मचारियों से पचास लाख 37 हजार रुपये लूट लिए गए। दिल्ली पुलिस की पांचवीं बटालियन में तैनात हवलदार समय सिंह मीणा समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस लूट का मास्टर माइंड दिल्ली पुलिस का हवलदार समय सिंह मीणा निकला।
हवलदार समय सिंह मीणा ने अपने साथियों से लूट की यह वारदात कराई थी।
समय सिंह मीणा डकैती की 2 और अपहरण की एक वारदात में पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद वह पुलिस की नौकरी में है। इससे वरिष्ठ पुलिस अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है।
लुटेरे पुलिस वाले -
24 मार्च 2026, मध्य जिले के देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की ने यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूट लिए। दीपक दस लाख रुपये लेकर करोल बाग में जेवर खरीदने आया था। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40 रुपये लूट लिए। दीपक ने 25 मार्च को पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। 30 मार्च को दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख ₹ बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख रुपये जब्त किए है।
इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
सिर्फ लाइन हाज़िर- एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया। पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।