Friday, 6 February 2026

आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज, विदेशी नागरिक को बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का आरोप

आईपीएस शंकर चौधरी ने खाकी को खाक में मिलाया
विदेशी नागरिक को बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का आरोप 

आईपीएस शंकर चौधरी: रक्षक बना भक्षक



इंद्र वशिष्ठ
विवादित आईपीएस अफसर एवं दिल्ली के द्वारका जिले के पूर्व डीसीपी शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शंकर चौधरी पर विदेशी नागरिक को गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का सनसनीखेज आरोप है। 
एफआईआर दो साल बाद दर्ज-
29 नवंबर 2023 को दक्षिण पश्चिम जिले के पालम थाना इलाके से नाइजीरिया की एक महिला ने दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर मिजोरम पुलिस में तैनात आईपीएस शंकर चौधरी के इस अपराध की जानकारी दी थी। जिस पर दिल्ली पुलिस ने दो साल बाद अब 5 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की है। 
35 लाख हड़प लिए- 
महिला ने पीसीआर को फोन कर आरोप लगाया कि मिजोरम पुलिस उसके भाई हैरीसन को घर से उठा ले गई। पुलिस घर से 35 लाख रुपए भी ले गई। पुलिस अब बीस लाख रुपये और मांग रही है। महिला ने अवैध हिरासत और जबरन वसूली के इस मामले में शामिल आईपीएस शंकर चौधरी का नाम पुलिस को बताया था। 
दिल्ली पुलिसकर्मी भी शामिल-
उस समय मिजोरम पुलिस में एसपी (नारकोटिक्स) के पद पर तैनात शंकर चौधरी अपनी छुट्टियां खत्म होने के बाद भी बिना अनुमति के दिल्ली में मौजूद थे। आईपीएस शंकर चौधरी ने दिल्ली पुलिस में मौजूद अपने कुछ खास पुलिसकर्मियों के साथ गैर कानूनी तरीके से हैरीसन के घर 26 नवंबर 2023 को छापा मारा। हैरीसन को अवैध रूप से वसंत विहार स्थित मिजोरम हाऊस में बंधक बनाकर रखा गया। हैरीसन को उसकी बहन द्वारा पीसीआर पर फोन करने के बाद छोड़ दिया गया। 
एफआईआर दर्ज- 
22 जुलाई 2025 को  गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस के दक्षिण रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय कुमार जैन ने इस मामले की जांच की। संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय जैन की शिकायत पर  5 फरवरी 2026 को इस मामले में दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया है। आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी को गैरकानूनी तरीके से रोकने, बंधक बनाने और जब्त संपत्ति का गबन करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 166/341/342/409 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उनके साथ इस गैर कानूनी मामले में शामिल दिल्ली पुलिस के हवलदार शालूज, हवलदार विकास और हवलदार प्रशांत के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। 
हैरिसन को 26 से 29 नवंबर तक मिजोरम हाउस में रखा गया, लेकिन इस दौरान न तो कोई गिरफ्तारी मेमो बनाया गया, न अदालत में पेश किया गया और न ही कोई कानूनी आदेश मौजूद था। जांच में यह भी सामने आया कि शंकर चौधरी ने 21 से 29 नवंबर के बीच बिना किसी कानूनी अनुमति के डाबरी-बिंदापुर इलाके में खुद छापेमारी का नेतृत्व किया। दिल्ली पुलिस के 13 अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने पुष्टि की कि ये कार्रवाई शंकर चौधरी के निर्देश पर हुई। 

शंकर चौधरी की करतूतें ----

डीसीपी ने महिला के सिर पर गिलास मारा- 

दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के डीसीपी पद से शंकर चौधरी को 4 जून 2022 को हटाया गया था। डीसीपी पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक महिला के सिर पर गिलास मार दिया। महिला के सिर में तीन टांके लगे थे। लेकिन पुलिस ने डीसीपी शंकर चौधरी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की । 
शुक्रवार तीन जून 2022 की रात करीब तीन बजे महिला के पति ने पुलिस कंट्रोल रुम को फोन कर इस मामले की शिकायत की। महिला के पति ने पीसीआर को बताया कि 'द्वारका जिले के डीसीपी शंकर चौधरी ने शराब पीकर मेरी पत्नी के सिर पर गिलास मार दिया है डीसीपी किसी ओर से झगड़ा कर रहे थे, गिलास मेरी पत्नी के लग गया'। पीसीआर ने यह सूचना दक्षिण जिला के ग्रेटर कैलाश थाने के रोजनामचे (जनरल डायरी) में दर्ज कराई है। लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। घटना कैलाश कालोनी के 'अनकल्चरड' कैफे एंड बार में हुई। रियल एस्टेट बिजनेसमैन द्वारा आयोजित जन्मदिन की पार्टी में यह सब हुआ। डीसीपी शंकर चौधरी ने  हंगामा किया और गिलास फेंके।
पुलिस प्रवक्ता का बयान -
महिला को गिलास मारने के मामले में पुलिस प्रवक्ता ने बयान दिया था कि ग्रेटर कैलाश में 4 जून की तड़के एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के एक अधिकारी ने एक निजी क्लब में जन्मदिन की पार्टी में एक महिला के साथ मारपीट की है। इसके बाद पीड़िता का एक वीडियो क्लिप प्राप्त हुआ जिसमें उसने कहा कि वह अपने परिवार के साथ परिवार के एक सदस्य की जन्मदिन की पार्टी मना रही थी। संबंधित अधिकारी भी अपने परिवार के साथ मौजूद थे। समारोह के दौरान एक गिलास महिला पर गिरा और वह घायल हो गई। इस पर महिला का पति भड़क गया, क्योंकि उस समय पार्टी में एक व्यक्ति गिलास से खेल रहा था। गलतफहमी के चलते डीसीपी का नाम चर्चा में आ गया। पारिवारिक मामला होने के कारण मामला सुलझ गया है।
पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान-
पुलिस प्रवक्ता का यह बयान बड़ा ही हास्यास्पद है। पुलिस प्रवक्ता का यह बयान वारदात की सूचना मिलने के ग्यारह घंटे बाद यानी शनिवार दोपहर एक बजे के बाद आया था। अगर पुलिस प्रवक्ता के बयान को सही मान लिया जाए, तो सवाल उठता है कि पुलिस द्वारा महिला के पति के खिलाफ झूठी जानकारी देने के आरोप में धारा 182 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई। महिला के पति के खिलाफ ऐसा न करने से इस बात को बल मिलता है कि डीसीपी को बचाने के लिए मामला रफा दफा किया गया है।
पुलिस ने कुछ नहीं किया-
पुलिस को तुरंत घटनास्थल पर पहुंच कर पार्टी में मौजद सभी लोगों और बॉर के स्टाफ आदि के बयान दर्ज करने चाहिए थे। बॉर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की या फुटेज जब्त करनी चाहिए थी । सबसे अहम बात  पुलिस को तुरंत आरोपी डीसीपी शंकर चौधरी की मेडिकल जांच करानी चाहिए थी। जिससे यह पता चलता कि डीसीपी नशे में था या नहीं। वह गिलास जब्त करना था , जिससे महिला घायल हुई। उस गिलास पर उंगलियों के निशान की जांच से ही साफ हो सकता था कि डीसीपी ने मारा या किसी अन्य से वाकई गिलास गिरा।
हवाबाज डीसीपी- 
वैसे आईपीएस शंकर चौधरी की कार्यशैली, हाव भाव आईपीएस के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं लगते है। उनकी हरकतों में बचपना/ छिछोरापन/ हवाबाजी झलकती  है इसका अंदाजा एक मामले से ही लगाया जा सकता है  साल 2021 में द्वारका जिले में एक व्यक्ति ने पारिवारिक झगड़े में अपनी ताई की हत्या कर दी थी।
प्रचार बहादुर अफसर - 
करवा चौथ के दिन आरोपी की पत्नी ने खुद पीसीआर को फोन किया और बताया कि उसका पति घर में मौजूद है और वह आत्म समर्पण करना चाहता है। अब ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि एसएचओ जाकर उसे वहां से गिरफ्तार कर लाता। लेकिन तत्कालीन डीसीपी शंकर चौधरी खुद उस घर में गए और आत्म समर्पण करने वाले आरोपी को खुद गर्दन से पकड़ कर, ऐसे घर से बाहर लाए, जैसे उन्होंने किसी खूंखार अपराधी को बड़ी मुश्किल से पकड़ा है। डीसीपी ने ऐसा करके यह दिखाना चाहा जैसे कि उन्होंने कोई बहुत बहादुरी का काम किया है। इसे आईपीएस की सिर्फ़ प्रचार की भूख ही कहा जा सकता है।
पहले भी हटाया गया- 
शंकर चौधरी जब लाजपत नगर में एसीपी थे तब भी उन्हें आरोपों के कारण ही हटाया गया था। आरोप इतने गंभीर थे कि  शंकर चौधरी को हटाने का आदेश वायरलेस पर दिया गया था।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)







Tuesday, 20 January 2026

शालीमार बाग में महिला की गोली मारकर हत्या करने वाले गिरफ्तार, पति के हत्यारों को सज़ा दिलाने की प्रयास में मारी गई पत्नी

स्पेशल कमिश्नर रवींद्र यादव, ज्वाइंट कमिश्नर विजय सिंह और एडिशनल पुलिस कमिश्नर भीष्म सिंह


शालीमार बाग में महिला की गोली मारकर हत्या करने वाले गिरफ्तार

पति के हत्यारों को सज़ा दिलाने के चक्कर में मारी गई पत्नी



इंद्र वशिष्ठ, 
शालीमार बाग इलाके में 10 जनवरी को दिनदहाड़े रचना यादव (44) की गोली मारकर कर हत्या करने वाले अभियुक्तों को उत्तर पश्चिम जिला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अपने पति की हत्या के मामले की अदालत में पैरवी करने और संपत्ति विवाद के कारण रचना की हत्या की गई। रचना यादव रेजीडेंस वेलफ़ेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष थी। 
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी एवं साजिशकर्ता भरत यादव निवासी भलस्वा गांव दिल्ली, भाड़े के हत्यारों निखिल निवासी गांव खंडरा और सुमित निवासी गांव बलजट्टन, जिला पानीपत, हरियाणा को गिरफ्तार किया है। 
इनाम-
भरत यादव साल 2023 में रचना यादव के पति बिजेंद्र यादव की हत्या करने के बाद से भागा हुआ था। उस पर पुलिस ने 20 हजार रुपये का इनाम रखा हुआ था। बिजेंद्र यादव की हत्या के मामले में चार आरोपी जेल में हैं।
सज़ा का डर-
रचना यादव अपने पति के हत्यारों को सज़ा दिलाने के लिए अदालत में लगातार पैरवी कर रही थी। जिससे आरोपियों को सज़ा होने का डर सताने लगा। इसलिए भरत यादव ने भाड़े के हत्यारों से रचना यादव की  हत्या करा दी।
काफ़ी मशक़्क़त के बाद सफलता-
उत्तरी क्षेत्र के स्पेशल कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) रवींद्र यादव ने बताया कि उत्तर क्षेत्र के ज्वाइंट कमिश्नर विजय सिंह और उत्तर पश्चिम जिले के  एडिशनल पुलिस कमिश्नर भीष्म सिंह की देखरेख में पुलिस टीम ने काफ़ी मशक़्क़त के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया। 
सीसीटीवी कैमरे ने पकड़वाया-
पुलिस ने तफ्तीश के दौरान घटनास्थल और आसपास के रास्तों के सैंकड़ों( 300 से ज्यादा) सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालते हुए सबसे पहले रचना यादव को गोली मारने वाले निखिल की पहचान की। 
इसके अलावा पुलिस ने घटनास्थल पर उस समय मौजूद मोबाइल फोनों के रिकॉर्ड का विश्लेषण भी किया। 
एआई का इस्तेमाल-
सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में मिली फोटो में गोली चलाने वाले संदिग्ध का चेहरा साफ दिखाई नहीं दिया, तो पुलिस ने चेहरा पहचानने के लिए साइबर सेल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक की भी मदद ली। गोली चलाने संदिग्ध की पहचान पूरी तरह स्पष्ट और पुख्ता हो जाने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। 
बिहार के जंगल में छुपे-
पुलिस को मोबाइल फोन निगरानी और मोबाइल फोन रिकॉर्ड खंगालते हुए आरोपियों के कटिहार, बिहार में होने का पता चला। 
दिल्ली पुलिस ने बिहार पुलिस की मदद से जंगल में छिपे निखिल और भरत यादव को गिरफ्तार कर लिया। 
पानीपत से पकड़ा-
इनसे पूछताछ में पता चला कि वारदात के समय सुमित मोटर साइकिल चला रहा था। इसके बाद सुमित को पानीपत से गिरफ्तार कर लिया गया। वारदात में इस्तेमाल मोटर साइकिल और एक कार बरामद हो गई है। मोटर साइकिल सुभाष प्लेस क्षेत्र से चोरी की गई थी।
पिस्तौल छिपाई-
एडिशनल पुलिस कमिश्नर भीष्म सिंह ने बताया वारदात में इस्तेमाल पिस्तौल आरोपियों ने कहां पर छिपाई ये पता चल गया है।
आम आदमी पार्टी से कनेक्शन-
उत्तर पश्चिम जिले के  एडिशनल कमिश्नर भीष्म सिंह ने बताया बिजेंद्र यादव और भरत यादव दोनों भलस्वा गांव में पड़ोसी थे। दोनों ही आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे। दोनों पार्षद के टिकट के दावेदार भी थे। बिजेंद्र यादव के ख़िलाफ़ दस आपराधिक मामले दर्ज थे। राजनीति और गांव में वर्चस्व को लेकर दोनों में दुश्मनी थी।
भरत यादव ने बिजेंद्र यादव के भाई से ढ़ाई सौ गज का एक प्लाट खरीदा था लेकिन उस पर बिजेंद्र यादव का कब्जा था। इसको लेकर दोनों में दुश्मनी थी। इस संपत्ति विवाद के कारण दोनों पक्ष एक-दूसरे को लगातार धमकियां दे रहे थे। भरत यादव ने 2023 में बिजेंद्र यादव की हत्या कर दी। 




    

Monday, 12 January 2026

राष्ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्षों के सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे पाकिस्तान, बांग्लादेश



संसद के अध्यक्षों के सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे पाकिस्तान, बांग्लादेश




इंद्र वशिष्ठ
राष्ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28 वां सम्मेलन (सीएसपीओसी ) 14 से 16 जनवरी तक
भारत की संसद की मेजबानी में दिल्ली में होगा। इस सम्मेलन में पाकिस्तान और बांग्लादेश भाग नहीं लेंगे। 
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों द्वारा निष्पक्षता और न्यायसंगतता को बनाए रखना, प्रोत्साहित करना और सुदृढ़ करना। संसदीय लोकतंत्र के विभिन्न स्वरूपों की जानकारी को बढ़ावा देना और संसदीय संस्थाओं का विकास करना है। 
सम्मेलन के विषय 
राष्ट्रमंडल देशों की संसद के अध्यक्ष,पीठासीन अधिकारी और प्रतिनिधि सम्मेलन में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखने में अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसद में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग: नवाचार, निगरानी और अनुकूलन में संतुलन स्थापित करना, सोशल मीडिया और सांसदों पर इसका प्रभाव, संसद के प्रति जन सामान्य की समझ बढ़ाने और मतदान के बाद भी नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नवीन रणनीतियां, संसद सदस्यों और संसदीय कर्मियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। 
पाकिस्तान शामिल नहीं-
क्या इस सम्मेलन में पाकिस्तान और बांग्लादेश भी भाग लेंगे ?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने  इसके  जवाब में बताया कि पाकिस्तान की सम्मेलन में भागीदारी नहीं रहेगी। वहीं बांग्लादेश में संसद भंग होने की वजह से उसकी सहभागिता नहीं होगी।
14 जनवरी को सीएसपीओसी की स्थायी समिति की बैठक लाल किले के परिसर में आयोजित की जाएगी। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जनवरी 2026 को संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला इस सम्मेलन के अध्यक्ष हैं।
भारत की संसद अब तक तीन बार ( वर्ष 1971,1986, 2010) सीएसपीओसी की मेजबानी कर चुकी है। 
 
28 वें सीएसपीओसी में प्रतिभागियों की संख्या 
सीएसपीओसी देशों और स्वायत्त संसदों से भागीदारी की पुष्टि करने वाले अध्यक्षों/पीठासीन अधिकारियों की कुल संख्या 59 और लोक सभा अध्यक्ष और राज्य सभा के उपसभापति सहित  61 है
61 अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों में से जिन्होंने अभी तक सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि की है उनमें से 44 स्पीकर और 15 डिप्टी स्पीकर हैं । 
भारत सहित प्रतिनिधित्व करने वाले सीएसपीओसी देशों की कुल संख्या 41 है
ओम बिरला ने कहा कि राष्ट्रमंडल की 67 सदस्य संसदों में से इस बार के सम्मेलन में 61 पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं और इस बार सम्मेलन के इतिहास में सबसे ज्यादा भागीदारी होगी।

सीएसपीओसी का परिचय 
राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) की शुरुआत वर्ष 1969 में कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के तत्कालीन स्पीकर, माननीय लुसिएन लैमूरू की पहल पर हुई थी । सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल के 53 संप्रभु देशों की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हैं। 
इससे पहले 27 वां सीएसपीओसी 4–6 जनवरी 2024 को कंपाला, युगांडा में आयोजित हुआ था।
सीएसपीओसी के अध्यक्ष 
प्रत्येक सम्मेलन के समापन पर, अगला सम्मेलन जिस देश में आयोजित होना होता है, उस देश के अध्यक्ष/पीठासीन अधिकारी सीएसपीओसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष बनते हैं।
16 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में 28वें सीएसपीओसी के समापन पर लोक सभा अध्यक्ष यह दायित्व यूके हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर, राइट ऑनरेबल सर लिंडसे होयल को सौंपेंगे।
सीएसपीओसी के प्रतिभागी 
सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल के 53 देशों की संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग लेते हैं। इनमें 23 द्विसदनीय संसद  और 30 एकसदनीय संसद शामिल हैं 
अध्यक्षों/पीठासीन अधिकारियों की कुल संख्या 76 है।