विदेशी नागरिक को बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का आरोप
इंद्र वशिष्ठ
विवादित आईपीएस अफसर एवं दिल्ली के द्वारका जिले के पूर्व डीसीपी शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शंकर चौधरी पर विदेशी नागरिक को गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का सनसनीखेज आरोप है।
एफआईआर दो साल बाद दर्ज-
29 नवंबर 2023 को दक्षिण पश्चिम जिले के पालम थाना इलाके से नाइजीरिया की एक महिला ने दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर मिजोरम पुलिस में तैनात आईपीएस शंकर चौधरी के अपराध/ करतूत की जानकारी दी थी। जिस पर दिल्ली पुलिस ने दो साल बाद अब जाकर एफआईआर दर्ज की है।
35 लाख हड़प लिए-
महिला ने पीसीआर को फोन कर आरोप लगाया कि मिजोरम पुलिस उसके भाई हैरीसन को घर से उठा ले गई। पुलिस घर से 35 लाख रुपए भी ले गई। पुलिस अब बीस लाख रुपये और मांग रही है। महिला ने अवैध हिरासत और जबरन वसूली के इस मामले में शामिल आईपीएस शंकर चौधरी (एजीएमयूटी 2011 बैच) का नाम बताया था।
दिल्ली पुलिसकर्मी भी शामिल-
उस समय मिजोरम पुलिस में एसपी (नारकोटिक्स) के पद पर तैनात शंकर चौधरी अपनी छुट्टियां खत्म होने के बाद बिना अनुमति के दिल्ली में मौजूद थे। आईपीएस शंकर चौधरी ने दिल्ली पुलिस में मौजूद अपने कुछ खास पुलिसकर्मियों के साथ गैर कानूनी तरीके से हैरीसन के घर 26 नवंबर 2023 को छापा मारा। हैरीसन को अवैध रूप से वसंत विहार स्थित मिजोरम हाऊस में बंधक बनाकर रखा गया। हैरीसन को उसकी बहन द्वारा पीसीआर पर फोन करने के बाद छोड़ दिया गया। इसके बाद हैरीसन विदेश चला गया।
जांच शुरू-
22 जुलाई 2025 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर दिल्ली पुलिस के दक्षिण रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय कुमार जैन ने इस मामले की जांच की।
संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय जैन की शिकायत पर अब 5 फरवरी 2026 को इस मामले में दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया है। आईपीएस शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ जानबूझ कर नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी को गैरकानूनी तरीके से रोकने, बंधक बनाने और जब्त संपत्ति का गबन करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 166/341/342/409 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि शंकर चौधरी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और प्रक्रियात्मक नियमों की धज्जियां उड़ाईं। उनके साथ इस गैर कानूनी मामले में शामिल दिल्ली पुलिस के हवलदार शालूज, विकास और प्रशांत के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
यह मामला 2023 में मिजोरम में दर्ज दो एनडीपीएस एक्ट के मामलों से जुड़ा है, आईपीएस शंकर चौधरी फिलहाल मिजोरम में नारकोटिक्स एसपी के पद पर तैनात हैं।
सीसीटीवी फुटेज में खुलासा
एफआईआर के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में हैरिसन को आईपीएस शंकर चौधरी की टीम द्वारा उसके घर से ले जाते हुए देखा गया। उसे 26 से 29 नवंबर तक मिजोरम हाउस में रखा गया, लेकिन इस दौरान न तो कोई गिरफ्तारी मेमो बनाया गया, न अदालत में पेश किया गया और न ही कोई कानूनी आदेश मौजूद था। जांच में यह भी सामने आया कि चौधरी ने 21 से 29 नवंबर के बीच बिना किसी कानूनी अनुमति के डाबरी-बिंदापुर इलाके में खुद छापेमारी का नेतृत्व किया। दिल्ली पुलिस के 13 अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने पुष्टि की कि ये कार्रवाई चौधरी के निर्देश पर हुई।
शंकर चौधरी की करतूतें पढ़ें ------
जून 2022 में प्रकाशित
डीसीपी शंकर चौधरी ने खाकी को खाक में मिलाया
दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के डीसीपी पद से शंकर चौधरी को 4 जून 2022 को हटा दिया गया । डीसीपी पर सनसनीखेज आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक महिला के सिर पर गिलास मार दिया। महिला के सिर में तीन टांके लगे। लेकिन पुलिस ने डीसीपी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की ।
डीसीपी ने मारा-
शुक्रवार तीन जून 2022 की रात करीब तीन बजे महिला के पति ने पुलिस कंट्रोल रुम को फोन कर इस मामले की शिकायत की। महिला के पति ने पीसीआर को बताया कि 'द्वारका जिले के डीसीपी शंकर चौधरी ने शराब पीकर मेरी पत्नी के सिर पर गिलास मार दिया है डीसीपी किसी ओर से झगड़ा कर रहे थे, गिलास मेरी पत्नी के लग गया'। मैं पत्नी को साकेत स्थित मैक्स अस्पताल लाया हूँ।
पीसीआर ने यह सूचना दक्षिण जिला के ग्रेटर कैलाश थाने के रोजनामचे (जनरल डायरी) में दर्ज कराई है। लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
घटना कैलाश कालोनी के 'अनकल्चरड' कैफे एंड बार में हुई। रियल एस्टेट बिजनेसमैन द्वारा आयोजित जन्मदिन की पार्टी में यह सब हुआ। डीसीपी शंकर चौधरी ने हंगामा किया और गिलास फेंके।
डीसीपी की चुप्पी-
दक्षिण जिले की डीसीपी बेनिता मैरी जैकर ने इस मामले में चुप्पी साध ली ।
पत्रकारों द्वारा इस बारे में सवाल पूछने पर दक्षिण जिले की तत्कालीन डीसीपी बेनिता मैरी जैकर ने जिले के मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप को ही 'ओनली एडमिन कैन सेंड मैसेज' कर दिया। महिला डीसीपी का महिला पीडिता के मामले में ऐसा रवैया पुलिस के महिलाओं के प्रति संवेदनशील होने के दावे की पोल खोलता है।
पहले भी हटाया-
शंकर चौधरी जब लाजपत नगर में एसीपी थे तब भी उन्हें आरोपों के कारण ही हटाया गया था। आरोप इतने गंभीर थे कि शंकर चौधरी को हटाने का आदेश वायरलेस पर दिया गया था।
पुलिस प्रवक्ता का बयान -
दूसरी ओर महिला को गिलास मारने के मामले में पुलिस प्रवक्ता ने बयान दिया कि ग्रेटर कैलाश में 4 जून की तड़के एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी जिसमें यह उल्लेख किया गया था कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी रैंक के एक अधिकारी ने एक निजी क्लब में जन्मदिन की पार्टी में एक महिला के साथ मारपीट की है। इसके बाद पीड़िता का एक वीडियो क्लिप प्राप्त हुआ जिसमें उसने कहा कि वह अपने परिवार के साथ परिवार के एक सदस्य की जन्मदिन की पार्टी मना रही थी। संबंधित अधिकारी भी अपने परिवार के साथ मौजूद थे। समारोह के दौरान एक गिलास महिला पर गिरा और वह घायल हो गई। इस पर महिला का पति भड़क गया, क्योंकि उस समय पार्टी में एक व्यक्ति गिलास से खेल रहा था। गलतफहमी के चलते डीसीपी का नाम चर्चा में आ गया। पारिवारिक मामला होने के कारण मामला सुलझ गया है।
पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान-
पुलिस प्रवक्ता का यह बयान बड़ा ही हास्यास्पद है। इससे पुलिस की काबिलियत पर ही सवालिया निशान लग जाता है। महिलाओं के प्रति संवेदनशील होने के पुलिस के दावे की भी पोल खुल गई है।
पुलिस प्रवक्ता का यह बयान वारदात की सूचना मिलने के ग्यारह घंटे बाद यानी शनिवार दोपहर एक बजे के बाद आया है।
अगर पुलिस प्रवक्ता के बयान को सही मान लिया जाए, तो सवाल उठता है कि पुलिस द्वारा महिला के पति के खिलाफ झूठी जानकारी देने के आरोप में धारा 182 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई। महिला के पति के खिलाफ
ऐसा न करने से इस बात को बल मिलता है कि डीसीपी को बचाने के लिए मामला रफा दफा किया गया है।
डीसीपी की मेडिकल जांच कराई? -
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना बताएं कि
पुलिस को जैसे ही घटना की जानकारी मिली तो
क्या पुलिस ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंच कर पार्टी में मौजद सभी लोगों और बॉर के स्टाफ आदि के बयान दर्ज किए। क्या बार में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की या फुटेज जब्त की गई। सबसे अहम बात क्या पुलिस ने तुरंत आरोपी डीसीपी की मेडिकल जांच कराई। जिससे यह पता चलता कि डीसीपी नशे में था या नहीं। क्या वह गिलास जब्त किया गया, जिससे महिला घायल हुई। उस गिलास पर उंगलियों के निशान की जांच से ही साफ हो सकता था कि डीसीपी ने मारा या किसी अन्य से वाकई गिलास गिरा। डीसीपी पार्टी में सरकारी कार में गया था या निजी कार में।
इस पत्रकार द्वारा तब डीसीपी शंकर चौधरी से आरोप पर उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया। डीसीपी ने कहा कि वह अपना पक्ष कुछ देर में भेज देंगे।
हवाबाज डीसीपी-
वैसे डीसीपी शंकर चौधरी की कार्यशैली, हाव भाव आईपीएस के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं लगते है। उनकी हरकतों में बचपना/ छिछोरापन/ हवाबाजी झलकती है इसका अंदाजा एक मामले से ही लगाया जा सकता है पिछले साल एक व्यक्ति ने पारिवारिक झगड़े में अपनी ताई की हत्या कर दी थी।
प्रचार बहादुर अफसर -
करवा चौथ के दिन आरोपी की पत्नी ने खुद पीसीआर को फोन किया और बताया कि उसका पति घर में मौजूद है और वह आत्म समर्पण करना चाहता है। अब ऐसे में होना तो यह चाहिए था कि एस एच ओ जाकर उसे वहां से गिरफ्तार कर लाता। लेकिन डीसीपी शंकर चौधरी खुद उस घर में गए और आत्म समर्पण करने वाले आरोपी को खुद गर्दन से पकड़ कर, ऐसे घर से बाहर लाए, जैसे उन्होंने किसी खूंखार अपराधी को बड़ी मुश्किल से पकड़ा है। डीसीपी ने ऐसा करके यह दिखाना चाहा जैसे कि उन्होंने कोई बहुत बहादुरी का काम किया है। इसे आईपीएस की सिर्फ़ प्रचार की भूख ही कहा जा सकता है। इसका बकायदा वीडियो भी वायरल हुआ था।
एनकाउंटर विवादों में-
द्वारका जिले में हुए कई कथित एनकाउंटर पर तो अदालत ने सवाल उठाए और कमिश्नर को जांच के लिए कहा है। एक एनकाउंटर में तो आरोप है कि युवक को उसके घर से उठाया गया और बाद में पैर में गोली मार दी गई।
वकील नाराज-
द्वारका अदालत के वकीलों ने कुछ समय पहले डीसीपी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार वकीलों ने कुछ समय पहले डीसीपी को हटाने की मांग की थी। तब वरिष्ठ आईपीएस अफसरों ने वकीलों को आश्वासन भी दिया था कि डीसीपी शंकर चौधरी को हटा दिया जाएगा।
आईपीएस के चाल चलन पर निगरानी -
आईपीएस द्वारा खाकी वर्दी को खाक में मिलाने से केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के खुफिया/ सतर्कता विभाग की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है क्या इन विभागों को यह मालूम नहीं है कि कौन कौन आईपीएस डयूटी के दौरान रात में शराब पिए रहते हैं और सरकारी कार में निजी पार्टियों में जाते हैं। बिल्डरों या अन्य बिजनेसमैन की पार्टियों में मौज मस्ती करते हैं।
आईपीएस पीये तो नहीं कोई खराबी, मातहत पीये तो है शराबी-
डयूटी पर शराब पीने वाले एस एच ओ और निचले स्तर के पुलिसकर्मियों के खिलाफ तो तुरंत कार्रवाई की जाती है लेकिन आईपीएस को बचाया जाता है। वैसे खुद डीसीपी शंकर चौधरी ने कुछ दिन पहले डयूटी पर शराब पीने के आरोप में एक एस एच ओ को लाइन हाजिर किया था।