Saturday, 16 May 2026

182 करोड़ की 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद, अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़ा एक सीरियाई नागरिक भी गिरफ्तार,हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह

 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन जब्त
 सीरियाई नागरिक गिरफ्तार

हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह 


खूंखार बनाने वाली जिहादी ड्रग कैप्टागॉन 



इंद्र वशिष्ठ, 
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत कैप्टागॉन की तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट/पाउडर जब्त किया गया। एजेंसियों ने पहली बार जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये है। सिंडिकेट से जुड़े अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागॉन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।
चपाती मशीन में ड्रग्स-
एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त सूचना के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की पहचान की। 11 मई 2026 को मकान की तलाशी के दौरान एक चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी गई लगभग 31.5 किलोग्राम
कैप्टागॉन टैबलेट बरामद की गई, जिसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सीरियाई नागरिक 15.11.2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12.01.2025 को समाप्त हो गया और वह अवैध रूप से यहाँ रह रहा था। उसने नेब सराय में मकान किराये पर लिया था।
ऊन की आड़ में ड्रग्स-
आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोकैप्टागकैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। इस कंटेनर को भेड़ की ऊन से भरा हुआ बताकर सीरिया से आयात किया गया था। कंटेनर की गहन तलाशी के दौरान तीन बैगों में छिपाकर रखे गया 196.2 किलोग्राम कैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था, जहां कैप्टागॉन का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। 
कोकीन-
हाल ही में मुंबई में एनसीबी द्वारा की गई एक अन्य बड़ी कार्रवाई  में इक्वाडोर से आए कंटेनर में छिपाकर रखी गई 349 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन बरामद की गई थी। यह इस बात को उजागर करता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के लिए व्यावसायिक कार्गो और कंटेनर आधारित व्यापार मार्गों का दुरुपयोग बढ़ रहा है।
ड्रग के ख़िलाफ़ सख्ती-
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मध्य-पूर्व जा रहे ड्रग की इस खेप को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के उदाहरण हैं। भारत में आने वाली या हमारे देश को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करके बाहर जाने वाली हर ग्राम ड्रग पर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे।  
जिहादी ड्रग-  
मध्य-पूर्व देशों के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे जिहादी ड्रग कहा जाता है। इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है. यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। कैप्टागॉन एक ऐसा नशा है जो शरीर में जबरदस्त ऊर्जा भर देता है।इसे लेने के बाद इंसान लंबे समय तक जाग सकता है, थकान महसूस नहीं होती, फोकस बढ़ जाता है और दिमाग में एक अलग तरह का जोश और खुशी महसूस होती है। 
मौत का डर खत्म -
सीरिया के एक पूर्व विद्रोही लड़ाके ने बताया था कि युद्ध के दौरान कैप्टागॉन क्यों इतना खतरनाक साबित हुआ। सीरियाई लड़ाके के मुताबिक, ब्रिगेड कमांडर ने हमें यह गोली दी और कहा कि इससे ताकत मिलती है। पहली बार लेने पर लगा कि शरीर में जबरदस्त एनर्जी आ गई है। सामने 10 लोग भी हों तो उन्हें पकड़कर मार सकते हो। नींद नहीं आती, डर खत्म हो जाता है, थकान महसूस नहीं होती। अगर कमांडर कहे कि सैन्य बैरक में घुस जाओ, तो बिना डर के अंदर चले जाओगे। 
इसी वजह से कैप्टागॉन को जिहादी ड्रग भी कहा जाता है। हालांकि यह सिर्फ आईएसआईएस या बंदूक उठा चुके लड़ाकों तक सीमित नहीं है। पूरे मध्य-पूर्व में यह ड्रग काफी लोकप्रिय है, खासकर उन देशों में जहां शरीयत कानून के कारण शराब पर पाबंदी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टागॉन 1980 के दशक से ही अमीर और युवा वर्ग के बीच काफी पसंद किया जाता रहा है। इसे लोग पार्टी ड्रग और सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल जितनी एम्फेटामाइन ड्रग्स पकड़ी जाती हैं, उनमें से एक-तिहाई सिर्फ सऊदी अरब में बरामद होती है। रिपोर्ट में बताया गया कि सऊदी अरब में नशे की लत का इलाज करा रहे करीब 75 प्रतिशत लोग कैप्टागॉन के आदी हैं।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)














बायोलॉजी पेपर लीक करने वाली बॉटनी टीचर गिरफ्तार

बायोलॉजी पेपर लीक करने वाली बॉटनी टीचर गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने नीट परीक्षा के बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को  दिल्ली में गिरफ्तार किया है। वह नीट परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थीं और उन्हें एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था। बॉटनी और जूलॉजी के पेपर तक उनकी पूरी पहुंच थी।
अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने पुणे की मनीषा वाघमारे के माध्यम से नीट परीक्षा के संभावित उम्मीदवारों को संगठित किया और अपने पुणे स्थित आवास पर इन छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं।
 इन कक्षाओं के दौरान उन्होंने बॉटनी और जूलॉजी विषयों के विभिन्न प्रश्नों को समझाया और छात्रों को उन्हें अपनी नोटबुक में लिखने और किताबों में चिह्नित करने के लिए कहा। इनमें से अधिकांश प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा के वास्तविक प्रश्न पत्र से मेल खाते थे।  
मनीषा मंधारे पुणे के शिवाजीनगर में स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स साइंस एंड कॉमर्स में बॉटनी की लेक्चरर हैं। बताया जाता है कि मनीषा पिछले 5-6 वर्षों से एनटीए के लिए नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल रही है। 
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने 12 मई 2026 को यह मामला दर्ज किया था।
इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई ने 15 मई को इस मामले में पुणे से मुख्य आरोपी/ सरगना केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। 13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल उनके बेटों विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 
विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की जांच में केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर के लीक होने के वास्तविक स्रोत के साथ-साथ उन बिचौलियों का भी पता चला है जो उन छात्रों को जुटाने में शामिल थे जिन्होंने नीट परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को पढ़ाने और उन पर चर्चा करने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)




Friday, 15 May 2026

नीट पेपर लीक का किंगपिन गिरफ्तार





नीट पेपर लीक का किंगपिन गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने नीट- यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में मुख्य आरोपी/ सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। 
सीबीआई को जांच में पता चला कि केमिस्ट्री  के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 
अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में, उन्होंने एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों को संगठित किया और पुणे स्थित अपने आवास पर इन छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं। 
इन विशेष कोचिंग कक्षाओं के दौरान उन्होंने प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर लिखवाए। छात्रों ने इन प्रश्नों को अपनी नोटबुक में हाथ से लिखा और ये प्रश्नपत्र 3 मई को आयोजित नीट  परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं। गहन पूछताछ के बाद मूल रूप से लातूर निवासी पी.वी. कुलकर्णी को शुक्रवार को पुणे से गिरफ्तार किया गया। कुलकर्णी लातूर के दयानंद कॉलेज के रिटायर्ड लेक्चर है।
 सीबीआई ने इस मामले में13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल उनके बेटों विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया।
सीबीआई ने देश भर में कई स्थानों पर चलाए तलाशी अभियान के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।  
सीबीआई की विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की जांच में केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र लीक होने के वास्तविक स्रोत के साथ-साथ उन बिचौलियों का भी पता चला है जो उन छात्रों को जुटाने में शामिल थे जिन्होंने इन प्रश्नपत्रों को पढ़ाने/चर्चा करने के लिए विशेष कोचिंग कक्षाओं में लाखों रुपये का भुगतान किया था। 
 




Thursday, 14 May 2026

लालकिला फिदायीन हमला: 10 आतंकियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल

लालकिला फिदायीन हमला: 10 आतंकियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल




इंद्र वशिष्ठ, 
लाल किला के सामने 10 नवंबर 2025 को हुए फिदायीन कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पृष्ठों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। बम धमाके से 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। 
पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, मुख्य आरोपी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी सहित सभी 10 आरोपियों का संबंध अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) संगठन से था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) की एक शाखा है। हमला करने वाला पुलवामा निवासी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी फरीदाबाद (हरियाणा) के अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन में पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर था, के खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव है।
 डॉ. नबी के अलावा, आरोपपत्र में जिन अन्य लोगों के नाम हैं, वे हैं: आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुज़मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार। आरोपपत्र में 588 गवाहों के बयान , 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से अधिक जब्त की गई सामग्रियों के रूप में विस्तृत साक्ष्य शामिल हैं। 
जिहादी साजिश-
एनआईए का दावा है कि विस्तृत वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के माध्यम से एक बड़ी जिहादी साजिश का पर्दाफाश किया गया है आरोपी, जिनमें से कुछ कट्टरपंथी डाक्टर थे, ने इस घातक हमले को अंजाम देने के लिए एक्यूआईएस/एजीयूएच की विचारधारा से प्रेरणा ली थी।
ऑपरेशन हेवनली हिंद-
2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक में, आरोपियों ने तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान हिजरत करने के असफल प्रयास के बाद, एजीयूएच आतंकी संगठन को "एजीयूएच अंतरिम" के रूप में पुनर्गठित किया था। नवगठित संगठन के तत्वावधान में, उन्होंने  भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से "ऑपरेशन हेवनली हिंद" शुरू किया था।
एनआईए की जांच में पता चला कि ऑपरेशन हेवनली हिंद के तहत, आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, सक्रिय रूप से एजीयूएच की हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद का जखीरा जमा किया और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रसायनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर विस्फोटक बनाए। आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के बम (आईईडी) भी बनाए और उनका परीक्षण किया था। विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) था, जिसे आरोपियों ने गुप्त रूप से घटक सामग्री प्राप्त करके और विस्फोटक मिश्रण को परिपूर्ण बनाने के लिए प्रयोग करके तैयार किया था।
डीएनए से पहचान-
एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के माध्यम से मृतक आरोपी की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में की। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद में भी शामिल थे, जिनमें एके-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और  देसी पिस्तौलें शामिल थीं।
ड्रोन से हमला-
आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से रॉकेट और ड्रोन से लैस आईईडी का परीक्षण किया था। 
आरोपियों की देश के अन्य हिस्सों में भी अपने अभियान का विस्तार करने की योजना थी, जिसे आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ ने नाकाम कर दिया।
 इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एनआईए उन फरार आरोपियों की तलाश जारी रखे हुए है जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई थी।



Tuesday, 12 May 2026

100 करोड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव गिरफ्तार, CBI गॉडफ़ादर IPS को पकड़ कर दम दिखाए, वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा?

100 करोड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव गिरफ्तार, 

CBI गॉडफ़ादर IPS को पकड़ कर दम दिखाए


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया है। इंस्पेक्टर सुभाष की सौ करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों/ लेन देन आदि का पता चला है।
48 लाख बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को इंस्पेक्टर सुभाष यादव के मातहत हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से उस समय 48.87 लाख रुपये जब्त किए थे। तब इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया था। इस मामले में अब इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया गया है। 
आका आईपीएस -
इस मामले से इंस्पेक्टर सुभाष के आका आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया है। क्योंकि बिना किसी गॉड फादर आईपीएस के कोई मातहत इतनी संपत्ति नहीं बना सकता। 
आईपीएस वाला भाईचारा-
सीबीआई में मौजूद आईपीएस अपने आईपीएस वाले भाईचारे को त्याग कर अगर ईमानदारी से जांच करें, तो इंस्पेक्टर सुभाष के कई आका आईपीएस अधिकारी भी जेल जा सकते हैं।
अकूत संपत्ति-
इंस्पेक्टर की संपत्ति/ लेन देन के खुलासे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके आका आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति तो सैकड़ों/ हजारों करोड़ रुपये की होगी। 

आईपीएस अधिकारियों की सांठगाठ के कारण ही इंस्पेक्टर सुभाष वर्षों से द्वारका जिले में महत्वपूर्ण पदों पर ही तैनात रहा है। कुछ समय पहले ही उसने एक आईपीएस को महंगी कार/ फॉरच्यूनर तोहफे में दी बताते हैं।
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा-
इंस्पेक्टर सुभाष की संपत्ति और नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी अपराधियों/ नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
अपराधियों से सांठगाठ और वसूली करने वाले ऐसे इंस्पेक्टर सामान्य अपराधियों से ज्यादा खतरनाक है।
सरकार अगर सही मायने में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाना चाहती है तो
 खाकी को खाक में मिलाने वाले ऐसे अपराधी पुलिसकर्मियों/ अधिकारियों का तो एनकाउंटर किया जाना चाहिए। 


(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)








Monday, 11 May 2026

DCP के PA की हरियाणा पुलिस को तलाश, पंजाबी बाग के व्यापारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी का मामला, वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा ? CP सतीश गोलछा जागो

        कमिश्नर सतीश गोलछा जागो


वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा ? 



इंद्र वशिष्ठ, 
पुलिस में भ्रष्टाचार तो चरम पर है ही।  पुलिसकर्मियों द्वारा  जबरन वसूली, डकैती और लूट के अलावा हत्या तक करने के मामले पिछले एक महीने से लगातार सामने आ रहे है। आम अपराधी से ज्यादा खतरनाक तो ऐसे वर्दी वाले गुंडे/ अपराधी हो गए है। 
कमिश्नर, आईपीएस की भूमिका-
इस तरह के संगीन मामले सामने आने से दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा और आईपीएस अधिकारियों की काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है। 
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर -
आम बदमाश/अपराधी को कथित एनकाउंटर में पैर में गोली मारकर बहादुरी दिखाने वाली पुलिस अगर सही मायने में बहादुर और ईमानदार है तो उसे वर्दी वाले गुंडों/अपराधियों का भी एनकाउंटर करना चाहिए। हत्या, डकैती, लूटपाट, जबरन वसूली करने वाले ऐसे वर्दीधारी अपराधियों का भी एनकाउंटर होने लगे, तो ही अपराध और अपराधियों पर अंकुश लग सकता है। पुलिस में मौजूद गंदगी भी साफ़ हो जाएगी। लेकिन अफ़सोस ऐसा होगा नहीं। 
सच्चाई तो यह है कि डकैती के 3 और अपहरण की 1 वारदात में शामिल हवलदार आराम से पुलिस में नौकरी कर रहा हैं। 
एनकाउंटर लंगड़ा, एक ही कहानी-
पिछले कुछ समय से कथित एनकाउंटर का चलन बढ़ गया। जिसमें कहानी हमेशा लगभग एक जैसी ही होती। " शार्प शूटर बदमाश ने गोली चलाई, जो पुलिसकर्मियों की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी।"  "पुलिस ने आत्म रक्षा में गोली चलाई जो अपराधी के पैर में लगी। "
अपराधी का फोटोशूट-
पुलिस द्वारा बताए गए कथित शार्प शूटर
बदमाशों की गोली हमेशा बुलेटप्रूफ जैकेट पर ही लगती है और पुलिस की बंदूक की गोली पैर में लगने के बावजूद अपराधी अस्पताल में या पुलिस हिरासत में फोटो के लिए आराम से लेट कर या खड़ा होकर पोज भी दे सकता है। 
बदमाशों का महिमा मंडन बंद हो -
बारी से पहले तरक्की, इनाम और प्रचार के चक्कर में पुलिसकर्मी यह भूल रहे हैं कि इन कथित एनकाउंटर की कहानी से ये संदेश भी जाता है कि दिल्ली में कोई मामूली सा गुंडा भी पुलिस से नहीं डरता और इसलिए वह पुलिस पर भी गोली चलाने में नहीं हिचकता। 
दूसरी ओर पुलिस तो  एक तरह से उसे शार्प शूटर, खतरनाक अपराधी बता कर उसका महिमामंडन कर देती। इस सब का फायदा बदमाश/अपराधी को ही मिलता है। मामूली से बदमाश/ गुंडे के बारे में भी अगर पुलिस कहे कि उसने पुलिस पर गोली चलाई थी, तो उस बदमाश की तो दुकान चल गई। आम आदमी भी अब उससे ज्यादा डरेगा, कि ये तो पुलिस पर भी गोली चला देता है। 

डीसीपी के पीए की हरियाणा पुलिस को तलाश

दिल्ली में पंजाबी बाग निवासी कारोबारी से 2 करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी को हरियाणा पुलिस द्वारा तलाश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 
एसआई प्रदीप कुमार रांगी पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे़ शरद भास्कर का पीए है। ये मामला सामने आने के बाद से वह नौकरी से गायब है।
डीसीपी का खास पीए-
स्पेशल पुलिस कमिश्नर स्तर के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीसीपी भास्कर जब ट्रैफिक में तैनात थे, एसआई प्रदीप रांगी तभी से उनके साथ अटैच है। जबकि कागजों में उसकी तैनाती बाहरी उत्तरी जिले में थी। 
अब यह मामला सामने आने के बाद एसआई प्रदीप कुमार रांगी को डीसीपी ने रिलीव कर दिया। लेकिन प्रदीप कुमार रांगी ने बाहरी उत्तरी  जिले में जॉइन नहीं किया है। वह गायब है। 
इस मामले में डीसीपी भास्कर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई। 
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजीव रंजन समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क की कोशिश की गई। 
कमिश्नर खुलासा करें-
मामूली चोर पकड़ने का भी प्रचार करने वाली दिल्ली पुलिस के कमिश्नर और आईपीएस अधिकारियों को संगीन अपराध के इस मामले में डीसीपी और पीए की भूमिका के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 
आपराधिक मामले में तो हरियाणा पुलिस कार्रवाई करेगी ही। 
दिल्ली पुलिस को बताना चाहिए कि एसआई प्रदीप कुमार रांगी के ख़िलाफ़ कोई विभागीय कार्रवाई की गई है या नहीं ? 
5 करोड़ मांगे-
वेस्ट पंजाबी बाग निवासी एक्वालाइट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन्द्र कुमार की बहादुर गढ़ के कसार गांव में फैक्टरी है। 16 और 18 अप्रैल को इंटरनेशनल कॉल से कॉलर ने खुद को गैंगस्टर्स लॉरेंस बिश्नाई गिरोह का रणदीप मलिक बताकर देवेन्द्र से पांच करोड़ रुपए रंगदारी मांगी। 
20 अप्रैल को रोहिणी इलाके में  देवेन्द्र ने रणदीप के बताए गुर्गों को दो करोड़ रुपए सौंप दिए। रकम देने के बावजूद 21 अप्रैल को दोबारा से धमकी दी गई कि, 'लॉरेंस भाई ने पैसे कम बताएं हैं। दो करोड़ रुपये और मांगे गए। उसके बाद देवेन्द्र कुमार ने सेक्टर-6 बहादुरगढ़ पुलिस को शिकायत दी।  22 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3 (5), 308(4), 308(5), 351(3), 61(2) मामला दर्ज कर लिया गया।  इस मामले में हरियाणा पुलिस कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, उनसे मिली जानकारी के बाद ही दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी की  तलाश शुरू कर दी गई। 

जमानत नहीं मिली -
झज्जर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राणा ने आरोपी एएसआई प्रदीप कुमार रांगी की अग्रिम जमानत याचिका 6 मई को खारिज कर दी। अदालत में पुलिस की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी प्रदीप कुमार रांगी ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उसने दूसरे साथियों के साथ मिलकर जबरन वसूली करवाने की आपराधिक साजिश रची थी।  आरोपी के पास से जबरन वसूली की काफी बड़ी रकम बरामद की जानी है। जिस पर अदालत ने भी माना है कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।

रक्षक बने भक्षक

हत्यारा हवलदार-
26 अप्रैल, 2026 की रात दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जाफरपुर कलां इलाके में स्पेशल सेल में तैनात हवलदार नीरज बलहारा ने दो युवकों को गोली मार दी। डिलीवरी का काम करने वाले 21 वर्षीय पांडव कुमार की मौत हो गई। घर के बाहर आवाज के कारण के बाद हवलदार नीरज ने सीने में गोली मार दी। दोनों युवक एक बच्चे की जन्मदिन पार्टी से वापस अपने घर बिंदा पुर लौट रहे थे। उनके अन्य साथी कैब का इंतजार कर रहे थे। 
हत्या और हत्या की कोशिश में हवलदार नीरज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
डकैत हवलदार-
31 मार्च 2026 को बाड़ा हिन्दू राव थाना के आजाद मार्केट, रेलवे पुल के नीचे एक व्यापारी के कर्मचारियों से पचास लाख 37 हजार रुपये लूट लिए गए। दिल्ली पुलिस की पांचवीं बटालियन में तैनात हवलदार समय सिंह मीणा समेत कुल 7 आरोपियों  को गिरफ्तार किया गया। इस लूट का मास्टर माइंड दिल्ली पुलिस का हवलदार समय सिंह मीणा निकला। 
हवलदार समय सिंह मीणा ने अपने साथियों से लूट की यह वारदात कराई थी। 
समय सिंह मीणा डकैती की 2 और अपहरण की एक वारदात में पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद वह पुलिस की नौकरी में है। इससे वरिष्ठ पुलिस अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है।
लुटेरे पुलिस वाले -
24 मार्च 2026, मध्य जिले के देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की ने यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूट लिए। दीपक दस लाख रुपये लेकर करोल बाग में जेवर खरीदने आया था। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40  रुपये लूट लिए। दीपक ने 25 मार्च को पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। 30 मार्च को दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 

एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख ₹ बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख रुपये जब्त किए है।
इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
सिर्फ लाइन हाज़िर- एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया। पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।






Friday, 1 May 2026

CGHS की रिश्वतखोर एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा गिरफ्तार

    एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा 



इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने सीजीएचएस, मेरठ (यूपी) की एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा और उसके निजी सहायक/ ड्राइवर सनी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ़्तार किया है।


सीजीएचएस मुरादाबाद में तैनात कर्मचारी तरुण का फरवरी में सीजीएचएस मेरठ से मुरादाबाद तबादला कर दिया गया। तरुण वापस मेरठ आना चाहता है। तरुण ने तबादले के लिए एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा से बात की। एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा ने मुरादाबाद से वापस मेरठ में तबादले के बदले अपने निजी सहायक सनी के माध्यम से 80 हजार रुपये रिश्वत मांगी। 
तरुण की शिकायत पर सीबीआई ने 30 अप्रैल को जाल बिछाया। इस जाल के दौरान निजी सहायक सनी और एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा शिकायतकर्ता तरुण से 50,000 रुपये की रिश्वत लेने पर सहमत हो गए।
इसके बाद, निजी सहायक सनी को डाक्टर नताशा वर्मा की ओर से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। सीबीआई ने एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा और उनके निजी सहायक सनी को गिरफ़्तार कर लिया।

सीजीएचएस का एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार गिरफ्तार, 50 लाख मांगे
सीबीआई ने 12 अगस्त 2025 को मेरठ में तैनात सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार,ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी और उनके निजी साथी रईस अहमद को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 
एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार ने दो निजी अस्पतालों जेएमसी मेडिसिटी और हाई फील्ड अस्पताल को सीजीएचएस की सूची से हटा देने की धमकी दे कर 50 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
50 लाख के जेवरात बरामद -
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार के आवास और बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। तलाशी में आरोपी के परिसर/लॉकर से 29.50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण बरामद किए गए। इसके अलावा, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति के दस्तावेज और म्यूचुअल फंड और शेयर बाजारों में भारी निवेश का विवरण प्राप्त हुआ है।
दो करोड़ से ज्यादा की धन संपत्ति-
प्रथम दृष्टया यह पता चला कि डाक्टर अजय कुमार ने सीएमओ, सीजीएचएस मेरठ, यू.पी. के रूप में कार्य करते हुए 01.04.2020 से 13.08.2025 की अवधि के दौरान खुद को अवैध रूप से समृद्ध किया और उसके पास 2,06,31,845/- रुपये के आर्थिक संसाधन हैं, जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है।
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार एडिशनल डायरेक्टर, सीजीएचएस, मेरठ, उत्तर प्रदेश के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति (डीए) का भी मामला 18 नवंबर 2025 को दर्ज किया। 
















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