Tuesday, 28 July 2026

पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की वर्दी पर लगा जंतर मंतर का दाग, गृहमंत्री धृतराष्ट्र मत बनो : लांबा को लंबा करो, राठी को लाठी दो

           कमिश्नर अनुराग कुमार

       एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा

             इंस्पेक्टर नवीन राठी

गृहमंत्री धृतराष्ट्र मत बनो : लांबा को लंबा करो, राठी को लाठी दो, डागर को डांगर बना दो

कमिश्नर की वर्दी पर लागा जंतर मंतर का दाग




इंद्र वशिष्ठ, 
एक तो पहले ही दिल्ली पुलिस की छवि करतूतों के कारण दिनोंदिन बद से बदतर हो रही है। लोगों का पुलिस में रत्ती भर भरोसा नहीं है। उस पर एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा, इंस्पेक्टर/एसएचओ नवीन राठी और पुलिसकर्मी हनी डागर, यशवंत जैसे वर्दी वाले गुंडों द्वारा जंतर मंतर पर लड़कियों के साथ बदसलूकी, छात्रों की पिटाई और घिनौनी हरकतों ने पुलिस की बची खुची इज़्ज़त/साख पर कलंक लगा दिया है। इन वर्दी वाले गुंडों ने दुनिया भर में दिल्ली पुलिस और भारत की छवि को दाग़दार कर दिया। 
दिल्ली पुलिस महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील होने का दावा करते थकती नहीं है। लेकिन इस मामले ने पुलिस के दावे की धज्जियां उड़ा दी। पुलिस को शर्मसार करने वाले इन पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज न करने से पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की काबलियत और भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है। 
एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा लड़की को थप्पड़ मारने और इंस्पेक्टर नवीन राठी द्वारा लड़की के पिछले हिस्से में डंडा घुसाने का दृश्य पूरी दुनिया देख रही है।
गृहमंत्री अमित शाह धृतराष्ट्र मत बनो। इन दोनों अफसरों को जेल भेज कर वर्दी वाले गुंडों को सबक सिखाओ। 
गृहमंत्री जिम्मेदार-
वैसे तो दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ/आरएएफ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर जो जुल्म किए हैं उसके लिए सीधे तौर पर गृहमंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी/जवाबदेही बनती है क्योंकि दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ उनके मातहत है। लेकिन उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की उम्मीद करना बेकार है। 
लड़कियों से बदसलूकी/ मारपीट करने वाले पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न करने से बेटी बचाओ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है। 
कमिश्नर जिम्मेदार -
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए था। लेकिन वह गृहमंत्री अमित शाह के चहेते है इसलिए उन्हें भी अब तक हटाया नहीं गया। अनुराग कुमार अगर गृह मंत्री के चहेते न होते तो, अगमू कैडर में उनसे सीनियर आईपीएस अधिकारियों को दरकिनार कर उन्हें 17 जुलाई को आनन फानन में कमिश्नर नहीं बनाया जाता। वैसे कमिश्नर अनुराग कुमार पर छात्रों की पिटाई का दाग तो लग ही गया। पुलिसिया जुल्म की जब भी बात होगी कमिश्नर अनुराग कुमार का नाम लिया जाएगा। 
आईपीएस सत्ता के लठैत मत बनो-
आईपीएस सिर्फ बातें ही ईमानदारी/कर्तव्य/कानून/संविधान पालन की करते हैं और बकायदा शपथ भी लेते है। लेकिन उनका आचरण बिल्कुल इसके विपरीत होता हैं। ये जनता के सेवक नहीं, बल्कि राजनेताओं के गुलाम/ दास की तरह व्यवहार और काम करते हैं। चाहे सरकार किसी भी दल की हो महत्वपूर्ण पद पाने के लिए आईपीएस सत्ता के लठैत बन कर खाकी को खाक में मिलाने से भी बिल्कुल नहीं हिचकते। कांग्रेस के शासन में साल 2011 में रामलीला मैदान में रात में सो रहे लोगों पर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर बृजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में लाठीचार्ज किया गया था। तब सलवार  पहन कर भाग रहे रामदेव को पुलिस ने पकड़ा था। 

गृहमंत्री अमित शाह में अगर जरा सी भी इंसानियत, संवेदनशीलता, नैतिकता है तो कमिश्नर अनुराग कुमार को पद से हटा देना चाहिए। एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा और इंसपेक्टर नवीन राठी जैसे पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लड़कियों के साथ बदसलूकी/यौन उत्पीड़न और पिटाई करने वाले संदीप लांबा और नवीन राठी जैसे नामर्दो की जगह जेल है। इन दोनों पुलिस अफसरों की अगर ईमानदारी से जांच की जाए तो इनके भ्रष्टाचार के मामले भी उजागर हो सकते है। 
संदीप लांबा और नवीन राठी ने अगर अपनी माँ का दूध पिया है तो वर्दी उतार कर ऐसी हरकत करके दिखाओ। तब छात्र तो दूर छात्राएं ही इनके पिछवाड़े में इनका ही डंडा घुसेड़ देंगी। 
समाज को भी ऐसे अफसरों का बहिष्कार करना चाहिए। 
जनता को आत्म रक्षा का हक़-
वैसे एक कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें यह प्रावधान किया जाए कि अगर कोई पुलिसकर्मी किसी निहत्थे, बेकसूर की पिटाई करता है तो जनता को भी अपनी आत्मरक्षा/ बचाव में उस पुलिसकर्मी को पिटने का हक होना चाहिए। आत्मरक्षा में ऐसा कदम उठाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होना चाहिए। 
कोई निरंकुश, भ्रष्ट पुलिसकर्मी अगर कानून अपने हाथ में लेता है तो उसे विभाग की ओर से बिल्कुल भी सुरक्षा या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उसके ख़िलाफ़ अपराधी की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए। कानून का पालन न करने वाले कानून के रखवाले को तो आम अपराधी से भी ज्यादा सज़ा मिलनी चाहिए।
ऐसे वर्दी वाले गुंडों के कारण ही पुलिस की छवि दिनों दिन खराब हो रही है और आम आदमी पुलिस से नफ़रत करते हैं। ऐसे कायर पुलिसकर्मी सिर्फ लड़कियों, बच्चों, छात्रों और असहाय लोगों को पीट कर अपनी बहादुरी दिखा सकते है। जबकि जहां बहादुरी दिखाना चाहिए वहां पीठ दिखा कर भाग जाते हैं। 
आईपीएस कितने बहादुर ? -
 साल 2019 में तीस हजारी अदालत परिसर में कुछ गुंडे वकीलों ने पुलिसकर्मियों की छाती पर जो तांडव किया था। तब इनकी बहादुरी/ मर्दानगी कहां चली गई थी? 
मोनिका भारद्वाज आईपीएस-
तब उत्तर जिले की तत्कालीन डीसीपी मोनिका भारद्वाज हाथ जोड़कर कायरों की तरह जान बचा कर भागी थी। मोनिका भारद्वाज ने बदसलूकी करने वाले गुड़े वकीलों के ख़िलाफ़ एफआईआर तक दर्ज करने की हिम्मत नहीं दिखाई। 
तत्कालीन एडिशनल डीसीपी हरेन्द्र कुमार को वकीलों ने जमीन पर गिरा-गिरा कर पीटा था। तब पुलिसकर्मियों के हाथों में शायद लकवा लग गया होगा, इसलिए पलटवार नहीं किया। इनके हाथ सिर्फ बेकसूरों पर ही उठते हैं। 
नाकारा कमिश्नर-
तत्कालीन नाकारा कमिश्नर अमूल्य पटनायक और तत्कालीन डीसीपी मोनिका भारद्वाज घायल पुलिसकर्मियों का हाल चाल पूछने तक नहीं गए थे। पहली बार दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर पुलिसकर्मियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था।
अतुल ठाकुर आईपीएस-
उत्तर पूर्वी जिले के तत्कालीन डीसीपी अतुल ठाकुर का गिरेबान सांसद मनोज तिवारी ने पकड़ा था, सारी दुनिया ने ये दृश्य देखा। लेकिन पलटवार करना तो दूर आईपीएस अतुल ठाकुर की मनोज तिवारी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की भी हिम्मत नहीं हुई। ऐसे आईपीएस सिर्फ जनता और अपने मातहतों के सामने ही खुद को बड़ा बहादुर दिखाते है। 
जंतर मंतर पर मधुर वर्मा-
जंतर मंतर पर मध्य रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा को भी तैनात किया गया। ये वही मधुर वर्मा हैं, जिनकी गुंडागर्दी ने 2019 में मीडिया में सुर्खियां बटोरी थी। नई दिल्ली जिले के डीसीपी के पद पर रहते हुए मधुर वर्मा के ख़िलाफ़ ट्रैफिक पुलिस के इंस्पेक्टर कर्मवीर मलिक ने पिटाई करने की बकायदा विजिलेंस में शिकायत की थी। लेकिन तत्कालीन नाकारा कमिश्नर अमूल्य पटनायक और गृह मंत्रालय ने मधुर वर्मा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की। मधुर वर्मा जब उत्तर जिले में डीसीपी थे तब सदर बाजार थाना के तत्कालीन एसएचओ अनिल समोता को जलील करने का मामला भी चर्चा में आया था। वैसे मधुर वर्मा के कारनामों की गूंज चंडीगढ़ में भी रही है। जो आईपीएस अपने मातहतों तक ऐसा व्यवहार करता रहा है। ऐसे आईपीएस मधुर वर्मा को जंतर मंतर पर तैनात किया गया था। 















Friday, 10 July 2026

1996 श्रीनगर हिंसा: शब्बीर शाह समेत हुर्रियत के 6 नेताओं के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर


1996 श्रीनगर हिंसा: शब्बीर शाह समेत हुर्रियत के 6 नेताओं के ख़िलाफ़ चार्जशीट



इंद्र वशिष्ठ
एनआईए ने 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा और पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी के मामले में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के छह वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है।
शुक्रवार को जम्मू स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल आरोपपत्र में शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील उर्फ मोहम्मद याकूब वक़ील, जाविद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी को आरोपी बनाया गया है। 
सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वकील के विरुद्ध कार्यवाही उनके निधन के कारण समाप्त हो चुकी है। हालांकि, आरोपपत्र में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश और गैरकानूनी जमावड़े में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है।
एनआईए के अनुसार, 17 जुलाई 1996 को मारे गए उग्रवादी हिलाल अहमद बेग के जनाजे के दौरान नाज़ क्रॉसिंग, श्रीनगर में इन नेताओं ने कथित रूप से एक अवैध जमावड़े का नेतृत्व किया और पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़काई। जुलूस में शामिल आतंकियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हुए और पथराव में सरकारी वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
 आरोपित नेताओं ने भारत-विरोधी, पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी नारे लगाए तथा कथित रूप से भडकाऊ भाषण दिए। यह हिंसा हुर्रियत नेतृत्व की एक पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य जनाजे के जुलूस का उपयोग अलगाववादी विचारधारा के प्रचार, जनसमर्थन जुटाने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने के लिए करना था।
घटना के दिन श्रीनगर के शेरगढ़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने अप्रैल 2026 में मामले की जांच अपने हाथ में ली।

Thursday, 9 July 2026

53 संरक्षित पशु-पक्षी बरामद, 6 वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार : CBI-DRI का संयुक्त अभियान

53 संरक्षित पशु-पक्षी बरामद, 6 वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार : CBI-DRI का संयुक्त अभियान


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई और डीआरआई ने वाइल्डलाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, मुंबई/कोलकाता की मदद से एक संयुक्त अभियान में 15 लुप्तप्राय स्लो लोरिस, 2 बिंटुरोंग, 28 स्टार कछुए, 6 मिस्र के लुप्तप्राय गिद्ध और 2 शिकरा पक्षियों को बरामद किया और बचाया। ये पशु/ पक्षी वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1972 के तहत आते हैं, जिन्हें भारत में सबसे ज़्यादा सुरक्षा प्राप्त है। 
इस मामले में मुंबई में नोमान खान, मोहम्मद फारूक, इंशा शकील और कोलकाता में सैकत विश्वास, मिथुन मंडल उर्फ ​​हिमांशु मंडल और अर्जुन मंडल को गिरफ्तार किया गया। 
डीआरआई मुंबई को वाइल्डलाइफ़ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत संरक्षित वन्यजीवों के व्यापार में शामिल एक अंतर-राज्यीय अपराध सिंडिकेट के बारे में पता चला था।‌ जिसके आधार पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की यह कार्रवाई की गई थी। 
सीबीआई ने 7 और 8 जुलाई, 2026 को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए। आरोपियों ने व्यापार के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों से ये पशु और पक्षी हासिल किए थे। शुरुआती कार्रवाई के बाद, बरामद वन्यजीव प्रजातियों को सुरक्षित रखने और उनकी देखभाल के लिए क्रमशः महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभागों को सौंप दिया गया। 


















Wednesday, 8 July 2026

ऑनलाइन आतंकी कट्टरपंथ फैलाने के मामले में देश भर में छापेमारी : NIA

ऑनलाइन आतंकी कट्टरपंथ फैलाने के  मामले में देश भर में छापेमारी 


इंद्र वशिष्ठ, 
एनआईए ने बुधवार को ऑनलाइन आतंकी कट्टरपंथ फैलाने के एक मामले में देश भर में छापेमारी की। यह मामला आईएसआईएस और एक्यूआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों की विचारधारा को बढ़ावा देकर, लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के खिलाफ हिंसक जिहाद के ज़रिए भारत में इस्लामिक स्टेट बनाने की साज़िश से जुड़ा है। 

एनआईए ने दिल्ली, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और गुजरात में कुल 20 जगहों पर एक साथ छापेमारी की। छापेमारी में कई डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए। कट्टरपंथ फैलाने की साज़िश के बारे में और सुराग पाने के लिए इन डिवाइस की फॉरेंसिक जांच की जाएगी। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों और एक नाबालिग को गिरफ़्तार किया गया है। एनआईए ने इस मामले की जांच इस साल मई में विजयवाड़ा पुलिस से अपने हाथ में ली थी। विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) पुलिस ने शुरू में मार्च में यह मामला दर्ज किया था। यह मामला मुख्य आरोपी रहमतुल्लाह शरीफ़ मोहम्मद के घर पर छापेमारी के बाद दर्ज किया गया था, जिसमें प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट(एक्यूआईएस) और इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री मिली थी। आज जिन जगहों पर छापेमारी की गई, उन्हें पहले ज़ब्त किए गए डिजिटल डिवाइस के विस्तृत तकनीकी विश्लेषण, गिरफ़्तार आरोपियों के कनेक्शन और जांच से मिली अन्य जानकारियों के आधार पर चुना गया था।
एनआईए के अनुसार देश को अस्थिर करने और खिलाफत स्थापित करने की साज़िश में शामिल अन्य लोगों की पहचान का काम जारी  है। एनआईए ने पाया है कि गिरफ़्तार आरोपी और उनके साथी ऑनलाइन माध्यमों से हिंसक जिहादी कंटेंट और गलत जानकारी के ज़रिए देश भर के आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहे थे। आरोपी जिहादी विचारधारा को फैलाने और भारत-विरोधी साज़िश को आगे बढ़ाने के लिए विदेशों में बैठे अपने हैंडलर्स के साथ ऑनलाइन संपर्क में भी थे।










Monday, 6 July 2026

पहलगाम आतंकी हमला: हाफिज़ सईद के ख़िलाफ़ चार्जशीट



इंद्र वशिष्ठ, 
एनआईए ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी तथा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और उसके मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के प्रमुख एवं संस्थापक हाफिज़ सईद को पूरक आरोप पत्र में आरोपी बनाया है।

एनआईए ने जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में दायर पूरक आरोपपत्र में हाफिज़ सईद पर व्यक्तिगत हैसियत के साथ-साथ प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सक्रिय मुखौटा/छद्म संगठन टीआरएफ के प्रमुख के रूप में भी आरोप लगाए हैं।
आरोपपत्र में हाफिज़ सईद पर भारतीय न्याय संहिता  तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और पाकिस्तान से भारत विरोधी साजिश रचने से संबंधित धाराएं भी लगाई हैं। 
यह पूरक आरोपपत्र पहले दायर किए गए 1,597 पृष्ठों के मूल आरोपपत्र का विस्तार है। इसमें पाकिस्तान की साजिश, हाफिज़ सईद की भूमिका तथा एनआईए द्वारा वैज्ञानिक जांच और घटनास्थल पर की गई विस्तृत पड़ताल से जुटाए गए साक्ष्यों का विवरण दिया गया है।

इससे पहले 15 दिसंबर 2025 को दायर मूल आरोपपत्र में एनआईए ने पाकिस्तानी हैंडलर आतंकी साजिद जट्ट को आरोपी बनाया था। इसके अलावा ऑपरेशन महादेव के दौरान जुलाई 2025 में सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए तीन आतंकियों, दो गिरफ्तार आरोपियों तथा प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा/टीआरएफ को भी आरोपित किया गया था। एनआईए के अनुसार, इन सभी की पहलगाम हमले की योजना बनाने, सुविधा देने और अंजाम देने में भूमिका थी। 

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए इस आतंकी हमले में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने धर्म के आधार पर चुनकर लोगों की हत्या की थी। इस हमले में 25 निर्दोष पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की जान गई थी।





Thursday, 2 July 2026

169 करोड़ के गबन में एचएसपीसीबी का अकाउंटेंट गिरफ्तार

169 करोड़ के गबन में एचएसपीसीबी का अकाउंटेंट गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के तत्कालीन वरिष्ठ लेखा अधिकारी प्रवीन कुमार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा में एचएसपीसीबी के खाते से सरकारी धन के गबन के मामले में गिरफ्तार किया है।
एचएसपीसीबी के तत्कालीन सदस्य सचिव प्रदीप कुमार, आईएएस को 169 करोड़ रुपये के गबन मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। हरियाणा में 504 करोड़ रुपये के पूरे घोटाले में शामिल 8 सरकारी विभागों में यह सबसे बड़ा वित्तीय नुकसान है।
सीबीआई जांच में सामने आया है कि प्रवीन कुमार ने विभाग की मंजूरी और रिकॉर्ड के बिना गुप्त तरीके से बैंक खाता खुलवाया था। इस खाते का संचालन बाद में फर्जी वित्तीय लेन-देन को अंजाम देने के लिए किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, एचएसपीसीबी के धन का गबन चेक और डेबिट नोट के जरिए किया गया तथा निकाली गई राशि को आरोपियों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों में भेज दिया गया। हालांकि खाते का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता प्रवीन कुमार था, लेकिन खाते में एक ऐसे सह-आरोपी का मोबाइल नंबर दर्ज कराया गया था, जो विभाग का कर्मचारी ही नहीं था। ऐसा कथित तौर पर खाते में होने वाले फर्जी लेन-देन को छिपाने और पकड़े जाने से बचने के लिए किया गया।
यह मामला सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में सामने आए करीब 504 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले का हिस्सा है। हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपये फर्जी अथवा अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और डेबिट नोट के माध्यम से निकालकर शेल कंपनियों में भेज दिए गए।
सीबीआई अब तक इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन लोक सेवक, दो कंपनियां तथा छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। प्रवीन कुमार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है।








Wednesday, 1 July 2026

तीन करोड़ रिश्वत: IPS दीपक गहलावत गिरफ़्तार, नकली दवाईयां बेचने वालों को सीबीआई से बचाने के लिए रिश्वतखोरी


तीन करोड़ रिश्वत: IPS अधिकारी दीपक गहलावत  गिरफ़्तार



इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने नकली दवाओं का धंधा करने वाले‌ अपराधियों से तीन करोड़ रुपये रिश्वत मांगने वाले हरियाणा कैडर के (2012 बैच)  आईपीएस दीपक गहलावत को गिरफ़्तार किया है, दीपक अभी दिल्ली में ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी ( बीसीएएस) में रीजनल डायरेक्टर के पद पर तैनात है।
सीबीआई ने 8 जून 2026 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, नकली दवाओं का धंधा करने वाले एन राजा  और उसके सहयोगी राजकुमार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था।
 जांच के दौरान पता चला कि आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत ने एन राजा से 3 करोड़ रिश्वत की मांग की थी, जिसमें डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस मांगे। दीपक ने आश्वासन दिया कि वह अपने निजी प्रभाव/ संपर्क/ सांठगांठ का इस्तेमाल करके पुडुचेरी में नकली दवाओं की बिक्री से जुड़े सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामलों में आरोपी एन राजा को राहत दिला देगा हैं। 
सीबीआई ने 8 जून को पुख्ता सूचना के आधार जाल बिछाया और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और 6 अन्य व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया था। इस दौरान लगभग 25 लाख रुपये की ट्रैप राशि और 90 लाख रुपये बरामद किए गए थे। 
सीबीआई की भूमिका पर सवालिया निशान-
इस मामले में सीबीआई की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया था। इस मामले में आईपीएस अधिकारी शामिल था। इसलिए सीबीआई ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह की गिरफ्तारी की आधिकारिक तौर पर जानकारी मीडिया को नहीं दी। सीबीआई ने एफआईआर में आईपीएस दीपक गहलावत का नाम भी दर्ज नहीं किया। 

सीबीआई की एफआईआर में इंस्पेक्टर प्रदीप, सीबीआई के मामले के आरोपी एन राजा, उसके सहयोगी राजकुमार का तो पूरा ब्यौरा दिया गया था।
सीबीआई के अनुसार  विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला कि दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर  प्रदीप सिंह, आरोपी एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन  राजशेखर,  एन. राजा का  सहयोगी राजकुमार उर्फ ​​मदनराज, अन्य अज्ञात सरकारी अफसरों और  निजी व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर सीबीआई जांच अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य सरकारी अफसरों पर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सीबीआई मामलों में अनुचित राहत दिलाने के लिए अवैध रिश्वत के भुगतान में सहयोग कर रहे हैं। 
14.05.2026 को  एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​​ राजशेखर और  राजकुमार मदनराज ने नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे के पास एयरोसिटी में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से मुलाकात की। इसके बाद, प्रदीप सिंह उन दोनों को पास ही स्थित एक अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अफसर के कार्यालय में ले गया। मुलाकात के दौरान, उक्त वरिष्ठ सरकारी ने  एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​ राजशेखर  को सीबीआई के मामले में बचाने का आश्वासन दिया। उसने तीन करोड़ रुपये रिश्वत मांगी। जिसमें डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस मांगे। लेकिन इसके बावजूद  सीबीआई ने एफआईआर में वरिष्ठ अफसर का नाम न लिख कर अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अफसर दर्ज किया। 
सीबीआई के पास जब इतनी पुख्ता जानकारी थी कि हवाला से रकम मंगा कर आठ जून को दिल्ली में इंस्पेक्टर प्रदीप को दी जाएगी। इस सूचना के आधार पर ही सीबीआई ने इंस्पेक्टर प्रदीप और एन राजा के साथी राजकुमार को गिरफ्तार भी कर लिया। 
ऐसे में क्या देश की तेजतर्रार मानी जाने वाली सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने से पहले इंस्पेक्टर के आका आईपीएस का नाम मालूम नहीं होगा। इस बात पर कोई भी विश्वास नहीं करेगा। इससे तो यह लगता है कि सीबीआई ने जानबूझकर एफआईआर में उसका नाम नहीं लिखा।