Thursday, 26 February 2026

अनिल अंबानी के घर- दफ़्तर पर सीबीआई के छापे, बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाया

अनिल अंबानी के घर सीबीआई का छापा , बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाया



इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने बैंक ऑफ़ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से ज़्यादा का चूना लगाने के मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के मालिक अनिल अंबानी के घर और दफ़्तर पर छापे मारे। 
सीबीआई ने 24 फरवरी 2026 को बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत पर रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ यह दूसरा मामला दर्ज किया है। इस शिकायत में आरसीओएम के प्रमोटर-पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, रिलायंस कम्युनिकेशंस और दूसरों के खिलाफ आईपीसी के तहत साज़िश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून  के तहत आपराधिक आचरण और अधिकारियों द्वारा पद के गलत इस्तेमाल का आरोप है। 
आरोप है कि मेसर्स रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा लिए गए लोन की वजह से बैंक ऑफ़ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ है। लोन को कथित तौर पर संबंधित पक्षों के साथ फर्जी ट्रांज़ैक्शन करके दूसरी जगह लगाया गया और गलत इस्तेमाल किया गया। अकाउंट्स की किताबों में हेरफेर किया गया और गड़बड़ियों को छिपाया गया।
अकाउंट को 2017 में ही बट्टा खाता ( नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया था। लेकिन, अनिल अंबानी की  बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका के आधार पर, हाई कोर्ट ने खातों को फ्रॉड घोषित करने पर स्टे लगा दिया था। 23 फरवरी 2026 को स्टे हटा दिया गया, जिसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह कंप्लेंट दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत केस अपने हाथ में ले लिया।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने इसके पहले  भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ एक और केस दर्ज किया है, एसबीआई  11 बैंकों के समूह का लीड बैंक है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस समूह का हिस्सा नहीं था। यह रिलायंस कम्युनिकेशन द्वारा बैंक ऑफ बड़ौदा, उस समय के विजया बैंक और उस समय के देना बैंक से लिया गया एक अलग लोन है। विजया बैंक और देना बैंक अब बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्ज हो गए हैं। इस केस के दर्ज होने के बाद, सीबीआई ने अनिल अंबानी के घर और  ऑफिस में तलाशी की है। इस लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं।

दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी  मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी के मुंबई स्थित 17 मंजिला आलीशान घर अबोड को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये बताई गई है.
यह कार्रवाई अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में की गई है। 
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में अब तक कुर्क की गई संपत्तियों की कीमत15,700 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी है
अनिल अंबानी वीरवार को पूछताछ के लिए ईडी दफ़्तर में पेश हुए।




Wednesday, 25 February 2026

लालकिला बम धमाके की साज़िश में 2 और आतंकी गिरफ्तार


 लालकिला बम धमाके की साज़िश में 2 और आतंकी  गिरफ्तार 



इंद्र वशिष्ठ, 

लालकिले के सामने हुए फिदायीन कार बम धमाके के मामले में कश्मीर के ज़मीर अहमद अहंगर (गंदरबल) और तुफैल अहमद भट (श्रीनगर) को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। अब इस मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों की  संख्या 11 हो गई है। 
अदालत ने दोनों आरोपियों को दस दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में भेज दिया। एनआईए के अनुसार ये दोनों आरोपी बम धमाके से जुड़ी साज़िश में सक्रिय रूप से शामिल थे। जांच में पता चला है कि इन दोनों ने बम धमाके के मुख्य आरोपी को हथियार सप्लाई किए थे।
एनआईए ने जांच में पाया कि ज़मीर अहमद और तुफैल अहमद अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद,  आतंकी संगठन के एक्टिव ओवर ग्राउंड वर्कर  हैं।
एनआईए की जांच से यह भी पता चला है कि ज़मीर और तुफैल बम धमाके की साज़िश और कई दूसरी आतंकी साज़िशों का भी हिस्सा थे। पूरी जांच और सबूतों की जांच के बाद यह भी पाया है कि वे भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करने में लगे हुए थे।
तुफैल अहमद भट्ट पेशे से एक एसी, टेक्नीशियन है। जांच में सामने आया है कि तुफैल ही वह शख्स है जिसने वह एके -47 राइफल मुहैया कराई थी जो पहले अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एक आरोपी डॉक्टर के लॉकर से बरामद हुई थी। 
एनआईए की जांच के मुताबिक, दिल्ली धमाके की साज़िश फिदायीन डाक्टर उमर उन नबी ने दूसरे आरोपियों डाक्टर मुज़म्मिल शकील गनी, डाक्टर शाहीन सईद, मुफ़्ती इरफ़ान, डाक्टर आदील अहमद राथर और पांच दूसरे लोगों के साथ मिलकर रची थी, जिन्होंने मुख्य साज़िश करने वालों को पनाह और लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया था। इन नौ लोगों को पहले कश्मीर और हरियाणा में अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया था।
लाल किले के सामने 10 नवंबर 2025 को हुए बम धमाके में 12 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे। मुख्य आरोपी, उमर उन नबी भी इस जानलेवा धमाके में मारा गया था 

इस मामले में फिदायीन उमर के 9 अन्य प्रमुख सहयोगियों को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस मामले में यासिर अहमद डार को एनआईए ने 18 दिसंबर को गिरफ्तार किया। यासिर अहमद फिदायीन बनने की ठान चुका था। आत्मघाती हमले को अंजाम देने की वह कसम भी खा चुका था।
श्रीनगर(कश्मीर) के शोपियां का रहने वाला  यासिर अहमद डार इस मामले में गिरफ्तार होने वाला नौवां व्यक्ति है। उसे एनआईए ने  नई दिल्ली से पकड़ा। एनआईए की जांच में यासिर की उस  साजिश में सक्रिय भूमिका का पता चला है, जिसके तहत 10 नवंबर को लालकिले के सामने कार बम धमाका हुआ था।
 इस साजिश मे सक्रिय रूप से शामिल यासिर ने  निष्ठा की शपथ ली थी और आत्मबलिदान वाले अभियानों को अंजाम देने की कसम खाई थी।‌एनआईए की जांच में यह भी पता चला है कि यासिर इस मामले में अन्य आरोपियों के साथ करीबी संपर्क में था, जिसमें फिदायीन डाक्टर उमर उन नबी ( बम धमाके को अंजाम देने वाला ) और मुफ्ती इरफान शामिल हैं। 
दिसंबर की  शुरुआत में, एनआईए  ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में कई आरोपियों और संदिग्धों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर तलाशी ली थी और विभिन्न डिजिटल डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की थी।
इससे पहले, मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनी और महिला डॉ. शाहीन सईद के फरीदाबाद (हरियाणा) में अल फलाह यूनिवर्सिटी कॉम्प्लेक्स और अन्य जगहों पर भी इसी तरह की तलाशी ली गई थी।

आतंकी हमले की साज़िश में शामिल फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े बारामूला (जम्मू-कश्मीर) निवासी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला को एनआईए ने 9 दिसंबर को गिरफ्तार किया। दिल्ली स्थित एनआईए के मुख्यालय में पूछताछ के बाद डॉ. बिलाल नसीर मल्ला को गिरफ्तार किया गया। 
एनआईए की जांच के अनुसार, बिलाल ने जानबूझकर फिदायीन हमलावर डाक्टर उमर उन नबी को पनाह दी और सामान आदि से भी उसकी सहायता की। डॉ. बिलाल नसीर मल्ला पर आतंकवादी हमले से संबंधित सबूतों को नष्ट करने का भी आरोप है। 
फिदायीन हमले से ठीक पहले आतंकवादी डाक्टर उमर उन नबी को शरण देने के आरोप में फरीदाबाद निवासी शोएब को एनआईए ने 26 नवंबर को गिरफ्तार किया था। एनआईए की जांच से पता चला है कि उसने 10 नवंबर को राजधानी में लाल किले के बाहर हुए कार बम विस्फोट से पहले आतंकवादी उमर को रसद/ सामान आदि सहायता भी प्रदान की थी। 
बताया जाता है कि जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल को दबोचा तो उमर गायब हो गया। उमर नबी के छिपने की व्यवस्था शोएब ने ही की। उसने डॉक्टर उमर को अपनी रिश्तेदार के घर कमरा दिलवाया। यहां उमर दिल्ली धमाके से पहले (10 नवंबर) तक किराए पर रहा था। यहीं से उसने  दिल्ली जाकर धमाका किया था।


Saturday, 21 February 2026

31 मार्च को देश लाल आतंक से मुक्त हो जाएगा: गृहमंत्री अमित शाह


31 मार्च को देश लाल आतंक से मुक्त हो जाएगा: अमित शाह


इंद्र वशिष्ठ
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर से दोहराया कि 31 मार्च 2026 को देश को माओवादी समस्या से पूर्ण रूप से मुक्त करा देंगे। माओवाद का सम्पूर्ण उन्मूलन हो जाएगा। शनिवार को असम के गुवाहाटी में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 87 वें स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह ने कहा  कि देश के 12 राज्यों और अनगिनत ज़िलों में नक्सलवाद फैला हुआ था। 
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट-
इतना बड़ा, विकट और दुष्कर काम मात्र तीन साल में ही समाप्त कर दिया गया और सीआरपीएफ के जवानों के भरोसे कह सकते हैं कि 31 मार्च 2026 को देश माओवादी समस्या से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। नक्सलवादियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को विषम भौगोलिक परिस्थितियों में 46 डिग्री तापमान में 21 दिन तक कड़ी धूप में सीआरपीएफ के जवानों ने अंजाम दिया और नक्सलियों के आश्रय और रणनीतिक स्थान को समाप्त कर दिया।  
गृहमंत्री ने कहा कि जब देश आतंकवाद और  लाल आतंक से मुक्त हो जाएगा तो इसमें सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन का बहुत बड़ा योगदान है।
2270 जवान शहीद- सीआरपीएफ 86 साल से देश की आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत कर रही है। देश को सुरक्षित रखने में सीआरपीएफ के 2270 जवान अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। 
विनाश से विकास के रास्ते पर -
अमित शाह ने कहा कि 11-12 साल पहले देश में 3 बड़े हॉटस्पॉट- जम्मू और कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी राज्य देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बने हुए थे। आज इन तीनों जगह पर कमोबेश शांति स्थापित करने में सफलता मिली है। इन तीनों हॉटस्पॉट में एक ज़माने में बम धमाके, गोलियां, बंद और विनाश का दृश्य दिखता था, वही तीनों क्षेत्र आज विकास का ग्रोथ इंजन बनकर पूरे देश के विकास को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। सीआरपीएफ के इन बलिदानियों के बिना इन तीनों हॉटस्पॉट को विकास के रास्ते पर ले जाना असंभव था।
2 से 248 बटालियन - 1939 में सिर्फ 2 बटालियन के साथ सीआरपीएफ का सफर शुरू हुआ था और आज 248 बटालियन और 3 लाख 25 हज़ार के संख्याबल के साथ सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ा सीएपीएफ बन गया है। 9 अप्रैल, 1965 को कच्छ के रण में सीआरपीएफ ने सरदार पोस्ट पर बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तानी सेना का सामना किया था और इसी कारण हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मोर्चा संभाला- केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब वामपंथी उग्रवादियों के हमले में कोलकाता में पुलिस के 78 जवानों की हत्या की गई थी तब भी  सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला था, संसद पर हुए आतंकी हमले को भी सीआरपीएफ ने नाकाम किया था। 2005 में श्रीरामजन्मभूमि पर हुए हमले को भी सीआरपीएफ नाकाम किया था। कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद वहां एक भी गोली नहीं चलानी पड़ी, इसमें भी सीआरपीएफ की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
पत्थरबाजी शून्य - जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाज़ी की घटनाएं शून्य हो गई हैं, उद्योग आ रहे हैं और विकास हो रहा है और इसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ और विशेषकर जम्मू और कश्मीर पुलिस का बहुत बड़ा योगदान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति बहाली में भी सीआरपीएफ की भूमिका रही।
 सीआरपीएफ के जवानों ने कई धार्मिक उत्सवों, महाकुंभ और अमरनाथ यात्रा के सफल आयोजन में बहुत बड़ा योगदान दिया है। सीआरपीएफ ने देश की आंतरिक सुरक्षा को हमेशा बल दिया, मज़बूत किया और सुरक्षित रखने का काम किया है।
सम्मान- इस अवसर पर सीआरपीएफ के 14 जवानों को वीरता का पुलिस पदक, 5 जवानों को विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पुलिस पदक और सीआरपीएफ की 5 वाहिनियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक दिए गए।  


Friday, 20 February 2026

33 बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को मौत की सज़ा

इंद्र वशिष्ठ, 
उत्तर प्रदेश के बांदा में पॉक्सो मामलों की अदालत के स्पेशल जज ने शुक्रवार को 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने वाले  रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मौत की सज़ा सुनाई है।
 कोर्ट ने सरकार को हर पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपियों के घर से ज़ब्त की गई रकम पीड़ितों में बराबर बांटी जाए। 
सीबीआई ने 31.10.2020 को आरोपी रामभवन और दूसरे अज्ञात लोगों के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण, अश्लीलता के मकसद के लिए बच्चों का इस्तेमाल और बाल यौन शोषण सामग्री बनाने और इंटरनेट पर फैलाने के आरोपों में केस दर्ज किया। 
जांच के दौरान, पता चला कि आरोपियों ने 33 लड़कों, जिनमें से कुछ की उम्र तीन साल भी थी, पर गंभीर यौन हमलों समेत कई तरह के घिनौने/गलत काम किए थे।
जांच में यह भी पता चला कि यौन हमले के दौरान कुछ पीड़ितों के गुप्तांगों पर चोटें आई थीं। उनमें से कुछ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। कुछ पीड़ितों की आंखें भेंगापन की समस्या से जूझ रही हैं। पीड़ित अभी भी दरिंदों की वजह से हुए मानसिक सदमे से जूझ रहे हैं। ये दरिंदे साल 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट के आसपास के इलाके में सक्रिय रहे। 
आरोपी रामभवन सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहा था। आरोपी बच्चों को ऑनलाइन वीडियो-गेम्स का एक्सेस देने और पैसे/गिफ्ट देने जैसे अलग-अलग तरीके अपना कर लुभाता/ फंसाता था।
जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 10.02.2021 को आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
 ​​कोर्ट ने आरोपियों के अपराधों को "रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर" पाया, जिसमें 33 नाबालिग बच्चों का सुनियोजित यौन शोषण और  दुर्व्यवहार शामिल था।

Wednesday, 18 February 2026

कश्मीर में आतंकियों को घेरने-खदेड़ने में जुटी सीआरपीएफ


कश्मीर में आतंकियों को घेरने-खदेड़ने में जुटी सीआरपीएफ


इंद्र वशिष्ठ, 
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने विशेष रणनीति अपनाई है। इस रणनीति के कारण आतंकियों के लिए अब ऊंचाई वाली पहाड़ियों/जंगल में छिपना/टिकना या ठिकाना बनाना मुश्किल हो गया। सीआरपीएफ के जवान आतंकियों को घेर या खदेड़ रहे हैं।
इस रणनीति के तहत सीआरपीएफ ने पहाड़ी इलाकों में 6 हजार फ़ीट और उससे ज़्यादा ऊंचाई पर कुल 43 टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (टीओबी) बनाए हैं। ये टीओबी 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर के बैसरन में टूरिस्ट पर हुए आतंकवादी हमले के बाद बनाए गए। इनमें से, पिछले साल अक्टूबर में कश्मीर में 26 और नवंबर में जम्मू में कुल 17 टीओबी बनाए गए। 
आतंकियों को टिकने नहीं देना-
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आतंकियों ने अपनी रणनीति बदली है अब वो नीचे घाटी/वादी में वारदात नहीं करते। वो ऊंचाई वाले इलाकों में वारदात करते हैं।
आतंकियों से निपटने के सुरक्षा बलों ने भी अपनी रणनीति बदल ली। सीआरपीएफ,  जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर अब ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों को सैटल नहीं होने दे रही। सुरक्षा बलों द्वारा आतंकियों को घेरा या खदेड़ा जा रहा है। 
एक टीओबी में सीआरपीएफ के 16 से 25 जवान और कश्मीर पुलिस के 3-4 पुलिसकर्मी होते हैं। 
आतंकियों की पनाहगाह-
टीओबी के माध्यम से आतंकियों की गतिविधियों वाले इलाकों में लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इससे अब आतंकियों को न तो सुरक्षित पनाह मिलेगी और न ही हमलों की साजिश रचने का मौका।
पहले आतंकी ऐसे इलाकों में बेखौफ घूमते थे और उन इलाकों में छिप कर वह वारदात के लिए मौके की तलाश में रहते हैं और वारदात के बाद उन इलाकों में आसानी से गायब हो जाते। 
विशेष कपड़े-
बर्फ़ और ठंड से बचाव के लिए जवानों को विशेष जैकेट, स्लीपिंग बैग, जूते और बैग आदि दिए गए हैं। संपर्क के लिए सेटेलाइट फोन दिए गए हैं। 
आतंकी -
जम्मू में 30-40 और कश्मीर में 40-57 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना हैं। कश्मीर के स्थानीय 6 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें से 4 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद हैं। कश्मीर में स्थानीय आतंकी लतीफ़ और जाकिर सक्रिय हैं।