Tuesday, 12 May 2026

100 करोड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव गिरफ्तार, CBI गॉडफ़ादर IPS को पकड़ कर दम दिखाए, वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा?

100 करोड़ी इंस्पेक्टर सुभाष यादव गिरफ्तार, 

CBI गॉडफ़ादर IPS को पकड़ कर दम दिखाए


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया है। इंस्पेक्टर सुभाष की सौ करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों/ लेन देन आदि का पता चला है।
48 लाख बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को इंस्पेक्टर सुभाष यादव के मातहत हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से उस समय 48.87 लाख रुपये जब्त किए थे। तब इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया था। इस मामले में अब इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार किया गया है। 
आका आईपीएस -
इस मामले से इंस्पेक्टर सुभाष के आका आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया है। क्योंकि बिना किसी गॉड फादर आईपीएस के कोई मातहत इतनी संपत्ति नहीं बना सकता। 
आईपीएस वाला भाईचारा-
सीबीआई में मौजूद आईपीएस अपने आईपीएस वाले भाईचारे को त्याग कर अगर ईमानदारी से जांच करें, तो इंस्पेक्टर सुभाष के कई आका आईपीएस अधिकारी भी जेल जा सकते हैं।
अकूत संपत्ति-
इंस्पेक्टर की संपत्ति/ लेन देन के खुलासे से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके आका आईपीएस अधिकारियों की संपत्ति तो सैकड़ों/ हजारों करोड़ रुपये की होगी। 

आईपीएस अधिकारियों की सांठगाठ के कारण ही इंस्पेक्टर सुभाष वर्षों से द्वारका जिले में महत्वपूर्ण पदों पर ही तैनात रहा है। कुछ समय पहले ही उसने एक आईपीएस को महंगी कार/ फॉरच्यूनर तोहफे में दी बताते हैं।
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा-
इंस्पेक्टर सुभाष की संपत्ति और नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी अपराधियों/ नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
अपराधियों से सांठगाठ और वसूली करने वाले ऐसे इंस्पेक्टर सामान्य अपराधियों से ज्यादा खतरनाक है।
सरकार अगर सही मायने में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाना चाहती है तो
 खाकी को खाक में मिलाने वाले ऐसे अपराधी पुलिसकर्मियों/ अधिकारियों का तो एनकाउंटर किया जाना चाहिए। 


(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)








Monday, 11 May 2026

DCP के PA की हरियाणा पुलिस को तलाश, पंजाबी बाग के व्यापारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी का मामला, वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा ? CP सतीश गोलछा जागो

        कमिश्नर सतीश गोलछा जागो


वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर कब होगा ? 



इंद्र वशिष्ठ, 
पुलिस में भ्रष्टाचार तो चरम पर है ही।  पुलिसकर्मियों द्वारा  जबरन वसूली, डकैती और लूट के अलावा हत्या तक करने के मामले पिछले एक महीने से लगातार सामने आ रहे है। आम अपराधी से ज्यादा खतरनाक तो ऐसे वर्दी वाले गुंडे/ अपराधी हो गए है। 
कमिश्नर, आईपीएस की भूमिका-
इस तरह के संगीन मामले सामने आने से दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा और आईपीएस अधिकारियों की काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है। 
वर्दी वाले अपराधियों का एनकाउंटर -
आम बदमाश/अपराधी को कथित एनकाउंटर में पैर में गोली मारकर बहादुरी दिखाने वाली पुलिस अगर सही मायने में बहादुर और ईमानदार है तो उसे वर्दी वाले गुंडों/अपराधियों का भी एनकाउंटर करना चाहिए। हत्या, डकैती, लूटपाट, जबरन वसूली करने वाले ऐसे वर्दीधारी अपराधियों का भी एनकाउंटर होने लगे, तो ही अपराध और अपराधियों पर अंकुश लग सकता है। पुलिस में मौजूद गंदगी भी साफ़ हो जाएगी। लेकिन अफ़सोस ऐसा होगा नहीं। 
सच्चाई तो यह है कि डकैती के 3 और अपहरण की 1 वारदात में शामिल हवलदार आराम से पुलिस में नौकरी कर रहा हैं। 
एनकाउंटर लंगड़ा, एक ही कहानी-
पिछले कुछ समय से कथित एनकाउंटर का चलन बढ़ गया। जिसमें कहानी हमेशा लगभग एक जैसी ही होती। " शार्प शूटर बदमाश ने गोली चलाई, जो पुलिसकर्मियों की बुलेट प्रूफ जैकेट पर लगी।"  "पुलिस ने आत्म रक्षा में गोली चलाई जो अपराधी के पैर में लगी। "
अपराधी का फोटोशूट-
पुलिस द्वारा बताए गए कथित शार्प शूटर
बदमाशों की गोली हमेशा बुलेटप्रूफ जैकेट पर ही लगती है और पुलिस की बंदूक की गोली पैर में लगने के बावजूद अपराधी अस्पताल में या पुलिस हिरासत में फोटो के लिए आराम से लेट कर या खड़ा होकर पोज भी दे सकता है। 
बदमाशों का महिमा मंडन बंद हो -
बारी से पहले तरक्की, इनाम और प्रचार के चक्कर में पुलिसकर्मी यह भूल रहे हैं कि इन कथित एनकाउंटर की कहानी से ये संदेश भी जाता है कि दिल्ली में कोई मामूली सा गुंडा भी पुलिस से नहीं डरता और इसलिए वह पुलिस पर भी गोली चलाने में नहीं हिचकता। 
दूसरी ओर पुलिस तो  एक तरह से उसे शार्प शूटर, खतरनाक अपराधी बता कर उसका महिमामंडन कर देती। इस सब का फायदा बदमाश/अपराधी को ही मिलता है। मामूली से बदमाश/ गुंडे के बारे में भी अगर पुलिस कहे कि उसने पुलिस पर गोली चलाई थी, तो उस बदमाश की तो दुकान चल गई। आम आदमी भी अब उससे ज्यादा डरेगा, कि ये तो पुलिस पर भी गोली चला देता है। 

डीसीपी के पीए की हरियाणा पुलिस को तलाश

दिल्ली में पंजाबी बाग निवासी कारोबारी से 2 करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी को हरियाणा पुलिस द्वारा तलाश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 
एसआई प्रदीप कुमार रांगी पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे़ शरद भास्कर का पीए है। ये मामला सामने आने के बाद से वह नौकरी से गायब है।
डीसीपी का खास पीए-
स्पेशल पुलिस कमिश्नर स्तर के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीसीपी भास्कर जब ट्रैफिक में तैनात थे, एसआई प्रदीप रांगी तभी से उनके साथ अटैच है। जबकि कागजों में उसकी तैनाती बाहरी उत्तरी जिले में थी। 
अब यह मामला सामने आने के बाद एसआई प्रदीप कुमार रांगी को डीसीपी ने रिलीव कर दिया। लेकिन प्रदीप कुमार रांगी ने बाहरी उत्तरी  जिले में जॉइन नहीं किया है। वह गायब है। 
इस मामले में डीसीपी भास्कर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई। 
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजीव रंजन समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क की कोशिश की गई। 
कमिश्नर खुलासा करें-
मामूली चोर पकड़ने का भी प्रचार करने वाली दिल्ली पुलिस के कमिश्नर और आईपीएस अधिकारियों को संगीन अपराध के इस मामले में डीसीपी और पीए की भूमिका के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। 
आपराधिक मामले में तो हरियाणा पुलिस कार्रवाई करेगी ही। 
दिल्ली पुलिस को बताना चाहिए कि एसआई प्रदीप कुमार रांगी के ख़िलाफ़ कोई विभागीय कार्रवाई की गई है या नहीं ? 
5 करोड़ मांगे-
वेस्ट पंजाबी बाग निवासी एक्वालाइट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन्द्र कुमार की बहादुर गढ़ के कसार गांव में फैक्टरी है। 16 और 18 अप्रैल को इंटरनेशनल कॉल से कॉलर ने खुद को गैंगस्टर्स लॉरेंस बिश्नाई गिरोह का रणदीप मलिक बताकर देवेन्द्र से पांच करोड़ रुपए रंगदारी मांगी। 
20 अप्रैल को रोहिणी इलाके में  देवेन्द्र ने रणदीप के बताए गुर्गों को दो करोड़ रुपए सौंप दिए। रकम देने के बावजूद 21 अप्रैल को दोबारा से धमकी दी गई कि, 'लॉरेंस भाई ने पैसे कम बताएं हैं। दो करोड़ रुपये और मांगे गए। उसके बाद देवेन्द्र कुमार ने सेक्टर-6 बहादुरगढ़ पुलिस को शिकायत दी।  22 अप्रैल को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3 (5), 308(4), 308(5), 351(3), 61(2) मामला दर्ज कर लिया गया।  इस मामले में हरियाणा पुलिस कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, उनसे मिली जानकारी के बाद ही दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी की  तलाश शुरू कर दी गई। 

जमानत नहीं मिली -
झज्जर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राणा ने आरोपी एएसआई प्रदीप कुमार रांगी की अग्रिम जमानत याचिका 6 मई को खारिज कर दी। अदालत में पुलिस की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी प्रदीप कुमार रांगी ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उसने दूसरे साथियों के साथ मिलकर जबरन वसूली करवाने की आपराधिक साजिश रची थी।  आरोपी के पास से जबरन वसूली की काफी बड़ी रकम बरामद की जानी है। जिस पर अदालत ने भी माना है कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।

रक्षक बने भक्षक

हत्यारा हवलदार-
26 अप्रैल, 2026 की रात दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के जाफरपुर कलां इलाके में स्पेशल सेल में तैनात हवलदार नीरज बलहारा ने दो युवकों को गोली मार दी। डिलीवरी का काम करने वाले 21 वर्षीय पांडव कुमार की मौत हो गई। घर के बाहर आवाज के कारण के बाद हवलदार नीरज ने सीने में गोली मार दी। दोनों युवक एक बच्चे की जन्मदिन पार्टी से वापस अपने घर बिंदा पुर लौट रहे थे। उनके अन्य साथी कैब का इंतजार कर रहे थे। 
हत्या और हत्या की कोशिश में हवलदार नीरज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
डकैत हवलदार-
31 मार्च 2026 को बाड़ा हिन्दू राव थाना के आजाद मार्केट, रेलवे पुल के नीचे एक व्यापारी के कर्मचारियों से पचास लाख 37 हजार रुपये लूट लिए गए। दिल्ली पुलिस की पांचवीं बटालियन में तैनात हवलदार समय सिंह मीणा समेत कुल 7 आरोपियों  को गिरफ्तार किया गया। इस लूट का मास्टर माइंड दिल्ली पुलिस का हवलदार समय सिंह मीणा निकला। 
हवलदार समय सिंह मीणा ने अपने साथियों से लूट की यह वारदात कराई थी। 
समय सिंह मीणा डकैती की 2 और अपहरण की एक वारदात में पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद वह पुलिस की नौकरी में है। इससे वरिष्ठ पुलिस अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है।
लुटेरे पुलिस वाले -
24 मार्च 2026, मध्य जिले के देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की ने यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूट लिए। दीपक दस लाख रुपये लेकर करोल बाग में जेवर खरीदने आया था। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40  रुपये लूट लिए। दीपक ने 25 मार्च को पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। 30 मार्च को दोनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 

एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख ₹ बरामद-
सीबीआई ने 21 अप्रैल को दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख रुपये जब्त किए है।
इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
सिर्फ लाइन हाज़िर- एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष को सिर्फ लाइन हाज़िर किया गया। पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी।


Friday, 1 May 2026

CGHS की रिश्वतखोर एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा गिरफ्तार

    एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा 



इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने सीजीएचएस, मेरठ (यूपी) की एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा और उसके निजी सहायक/ ड्राइवर सनी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ़्तार किया है।


सीजीएचएस मुरादाबाद में तैनात कर्मचारी तरुण का फरवरी में सीजीएचएस मेरठ से मुरादाबाद तबादला कर दिया गया। तरुण वापस मेरठ आना चाहता है। तरुण ने तबादले के लिए एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा से बात की। एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा ने मुरादाबाद से वापस मेरठ में तबादले के बदले अपने निजी सहायक सनी के माध्यम से 80 हजार रुपये रिश्वत मांगी। 
तरुण की शिकायत पर सीबीआई ने 30 अप्रैल को जाल बिछाया। इस जाल के दौरान निजी सहायक सनी और एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा शिकायतकर्ता तरुण से 50,000 रुपये की रिश्वत लेने पर सहमत हो गए।
इसके बाद, निजी सहायक सनी को डाक्टर नताशा वर्मा की ओर से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। सीबीआई ने एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा और उनके निजी सहायक सनी को गिरफ़्तार कर लिया।

सीजीएचएस का एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार गिरफ्तार, 50 लाख मांगे
सीबीआई ने 12 अगस्त 2025 को मेरठ में तैनात सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार,ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी और उनके निजी साथी रईस अहमद को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 
एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार ने दो निजी अस्पतालों जेएमसी मेडिसिटी और हाई फील्ड अस्पताल को सीजीएचएस की सूची से हटा देने की धमकी दे कर 50 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
50 लाख के जेवरात बरामद -
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार के आवास और बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। तलाशी में आरोपी के परिसर/लॉकर से 29.50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण बरामद किए गए। इसके अलावा, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति के दस्तावेज और म्यूचुअल फंड और शेयर बाजारों में भारी निवेश का विवरण प्राप्त हुआ है।
दो करोड़ से ज्यादा की धन संपत्ति-
प्रथम दृष्टया यह पता चला कि डाक्टर अजय कुमार ने सीएमओ, सीजीएचएस मेरठ, यू.पी. के रूप में कार्य करते हुए 01.04.2020 से 13.08.2025 की अवधि के दौरान खुद को अवैध रूप से समृद्ध किया और उसके पास 2,06,31,845/- रुपये के आर्थिक संसाधन हैं, जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है।
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार एडिशनल डायरेक्टर, सीजीएचएस, मेरठ, उत्तर प्रदेश के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति (डीए) का भी मामला 18 नवंबर 2025 को दर्ज किया। 
















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Tuesday, 28 April 2026

अनिल अंबानी की 3 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


अनिल अंबानी की 3 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


इंद्र वशिष्ठ, 
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में अनिल अंबानी और मैसर्स रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड की
3034.90 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। जिससे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों में कुल 19,344 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्तियां कुर्क हो गई है।
ईडी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के उन मामलों की जांच कर रही है जिनमें बैंक/सार्वजनिक फंड के गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
यह जांच भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज कई एफआईआर  के आधार पर शुरू की गई थी। आरकॉम और उसकी ग्रुप कंपनियों ने घरेलू और विदेशी कर्जदाताओं से लोन लिए थे, जिनमें से कुल 40,185 करोड़ रुपये बकाया हैं।

ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई की उषा किरण बिल्डिंग में एक फ्लैट, पुणे के खंडाला में एक फार्महाउस और अहमदाबाद के साणंद में ज़मीन का एक टुकड़ा शामिल है। इनके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर भी कुर्क किए गए, जो मैसर्स राइज़ी इन्फिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे। यह कंपनी अनिल अंबानी के ग्रुप की एक इकाई है और राइज़ी ट्रस्ट के तहत आती है, जो अनिल अंबानी के परिवार के सदस्यों का एक निजी पारिवारिक ट्रस्ट है। 
इस ट्रस्ट का गठन संपत्तियों को ट्रस्ट में इकट्ठा करके धन को सुरक्षित रखने और संसाधन जुटाने के लिए किया गया था, ताकि इसे अनिल अंबानी की व्यक्तिगत देनदारियों से बचाया जा सके। ये देनदारियां उन व्यक्तिगत गारंटियों के रूप में थीं जो उन्होंने आरकॉम को दिए गए लोन के बदले कर्जदाता बैंकों को दी थीं। 
इन संपत्तियों का उद्देश्य अनिल अंबानी के परिवार द्वारा लाभ के लिए इस्तेमाल और स्वामित्व करना था, न कि उन संकटग्रस्त सार्वजनिक बैंकों के लिए, जिनके लोन एनपीए बन गए थे।
पीएमएलए की धारा 8 के तहत, कुर्क की गई संपत्ति उन वैध दावेदारों को वापस कर दी जाएगी जिन्हें नुकसान हुआ है, जिसमें पीड़ित बैंक भी शामिल हैं। 
इस प्रकार, यह कुर्की मूल्य को सुरक्षित रखती है, ताकि उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद, सार्वजनिक धन को कानून के अनुसार बैंकों और अंततः आम जनता को वापस दिलाया जा सके।



दाऊद का साथी नशे का सौदागर सलीम डोला एनसीबी के शिकंजे में, तुर्किये से लाया गया डोला, नशे के सरगना के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं: अमित शाह

दाऊद का साथी सलीम डोला एनसीबी के शिकंजे में,
नशे के सरगना के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं: अमित शाह

इंद्र वशिष्ठ
नशे के कुख्यात सौदागर/तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस भारत लाया गया है। सलीम डोला कुख्यात आतंकी दाऊद इब्राहिम का सहयोगी है। 
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इंटरपोल और भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर, 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' के तहत वांछित ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस लाने में सफलता हासिल की है। मंगलवार सुबह नई दिल्ली के इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे पर पहुँचते ही एनसीबी ने उसे हिरासत में ले लिया।
सलीम डोला (59 वर्ष, मुंबई निवासी) के खिलाफ मार्च, 2024 में भारत के अनुरोध पर इंटरपोल द्वारा रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में मुकदमा चलाने के लिए उसकी तलाश थी। पिछले कुछ वर्षों में, डोला ने मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में फैला हुआ एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट खड़ा कर लिया था।
दो दशकों में महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रेक्स और मेथामफेटामाइन की बड़ी खेप पकड़े जाने से जुड़े मामलों में डोला की सीधी भूमिका है।सलीम डोला की भूमिका भारत में निचले स्तर के वितरण नेटवर्क के लिए एक थोक सप्लायर के रूप में लगातार सामने आती रही है। इसके अलावा, गुजरात एटीएस और मुंबई पुलिस को भी उसकी तलाश थी।इससे पहले, उसके बेटे ताहिल सलीम डोला और अन्य सहयोगियों को 2025 में यूएई से प्रत्यर्पण/वापसी के बाद मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
ड्रग सरगना कहीं भी सुरक्षित नहीं -केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नार्को सिंडिकेट के खिलाफ सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के अनुरूप, एनसीबी ने तुर्किये से कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को वापस लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है।शाह ने कहा कि सरकार के ड्रग कार्टेल को पूरी तरह से खत्म करने के मिशन के तहत, हमारी नार्कोटिक्सरोधी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मज़बूत नेटवर्क के ज़रिए सीमाओं के पार भी अपनी पकड़ बना ली है।  ड्रग सरगना कहीं भी छिप जाएं, अब उनके लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।





Friday, 24 April 2026

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया, रिश्वत दो जमानत लो, क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? जज की भूमिका ?

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया,

रिश्वत के बदले जमानत की गारंटी , 

क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? 

जज की भूमिका ? 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना को वकील निशा गौड़ से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। रीडर ने जमानत याचिका मंजूर कराने के लिए महिला वकील से तीस हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। 
वकील निशा गौड़ ने 22 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत की। जिसमें आरोप लगाया कि एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना ने जमानत पर सुनवाई के समय शिकायतकर्ता वकील निशा गौड़ के मुवक्किल की जमानत अर्जी मंजूर करवाने  के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने 23 अप्रैल को एक जाल बिछाया और रीडर संजीव को शिकायतकर्ता निशा गौड़ से कुल 30,000 रुपये की रिश्वत में से 20,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। 
पैसे दो जमानत लो-
निशा गौड़ के अनुसार संजीव ने उससे कहा कि पैसे दो और बिना बहस किए ही जमानत का आर्डर लो। निशा ने बताया कि इसके पहले मामले के आईओ ने उससे कहा की कोर्ट तुमसे कुछ चाहता है। तब निशा ने संजीव से बात की। 
उसने जज से मिल कर उपरोक्त सारी बातें बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट स्टाफ़ ने उसे जज से मिलने ही नहीं दिया। तब उसने सीबीआई में शिकायत की। 
जज की भूमिका-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत मंजूर कराने की गारंटी दे सकता है? 
अगर जज ईमानदार है तो उसकी नाक के नीचे उसका रीडर रिश्वत कैसे वसूल रहा था ?
दोनों ही सूरत में जज की पेशेवर काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान तो लग ही गया है।
हाईकोर्ट को इस मामले की पूरी गहराई तक जांच करनी चाहिए। 











Wednesday, 22 April 2026

एंटी नारकोटिक्स सेल से 48.87 लाख ₹ बरामद, पुलिस ड्रग्स पकड़ रही है या बिकवा रही है?, कमिश्नर और आईपीएस अफसरों की काबलियत/ भूमिका पर सवालिया निशान

कमिश्नर सतीश गोलछा भ्रष्टाचार पर अंकुश कब लगाओगे? 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख रुपये जब्त किए है।
इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
कमिश्नर, आईपीएस की भूमिका-
पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वतखोरी, वसूली के अलावा लूटपाट करने तक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एसएचओ के पद पर इंस्पेक्टरों को लगाने और पद से हटाने में जमकर भेदभाव का सिलसिला जारी है। कमिश्नर और आईपीएस अफसरों के चहेते तो सालों से एसएचओ के पद पर जमे हुए है। 
इससे कमिश्नर सतीश गोलछा और आईपीएस अफसरों की पेशेवर  काबलियत और भूमिका पर भी सवालिया निशान लग जाता है।
लाइन हाज़िर-
एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने 21.04.2026 को एक शिकायत के आधार पर द्वारका की एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। हवलदार अजय और अन्य पुलिसकर्मियों ने शिकायतकर्ता को एक मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। हवलदार अजय ने 21.04.2026 तक 5 लाख रुपये की आंशिक रकम पहुंचाने का निर्देश दिया था।सीबीआई ने 21.04.2026 को एक जाल बिछाया और हवलदार अजय को शिकायतकर्ता से कुल 15 लाख रुपये की रिश्वत में से आंशिक भुगतान के तौर पर 2 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कार्यालय परिसर की तलाशी के दौरान 48.87 लाख रुपये की राशि जब्त की गई है।

दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। 

शकर पुर थाने की महिला SI और HC के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, हवलदार गिरफ्तार
सीबीआई ने 6 अप्रैल को पूर्वी जिले के शकर पुर थाने के हवलदार राहुल को बीस हज़ार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
सीबीआई ने नोएडा निवासी एक महिला की शिकायत पर शकर पुर थाने में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल के ख़िलाफ़ 6 अप्रैल को आपराधिक साज़िश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया। 
एफआईआर के अनुसार महिला का आरोप है कि उसके और उसके दोस्त के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न आदि की धाराओं के तहत एक झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस मामले की आईओ सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल दस मार्च को उसे उसके घर से उठा कर थाने लाए। सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल ने एफआईआर से दोनों के नाम हटाने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत मांगी। 
महिला ने 3 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत कर दी। 
सीबीआई ने आरोपों के सत्यापन के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। इसके बाद शिकायतकर्ता से थाने में ही रिश्वत लेते हुए हवलदार राहुल को गिरफ्तार कर लिया। सब-इंस्पेक्टर रक्षा को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 
बाहरी जिले में 2 महीने में 3 मामले-
सीबीआई ने 3 अप्रैल को बाहरी जिले के पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनोज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बाहरी जिले में भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का दो महीने में ये तीसरा मामला सामने आया है। 
सब-इंस्पेक्टर मनोज ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास/ झगड़े के मामले को रफा दफा करने के लिए 3 लाख रुपये रिश्वत मांगी।
एस एच ओ लाइन हाज़िर-
पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने के एसएचओ देवेन्द्र सिंह को लाइन हाज़िर कर दिया गया।

इसके पहले सीबीआई ने 13 मार्च को बाहरी जिले के ही सुल्तान पुरी थाने में तैनात हवलदार राजेश और हवलदार अजय को सट्टेबाज से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 
एस एच ओ लाइन हाज़िर-
इस मामले में सुल्तान पुरी थाने के एसएचओ रवींद्र कुमार को लाइन हाज़िर किया गया था।

एक अन्य मामले में सीबीआई ने 7 फरवरी को इसी जिले के पश्चिम विहार(ईस्ट) थाने में तैनात एएसआई ओम प्रकाश को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
बस अड्डा चौकी इंचार्ज गिरफ्तार-
सीबीआई ने 24 मार्च को कश्मीरी गेट बस अड्डे की पुलिस चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर नीरज को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सब-इंस्पेक्टर नीरज ने बोतल बंद पानी बेचने वाले शिकायतकर्ता से 33 हजार रुपये महीना/मंथली रिश्वत मांगी थी।
एएसआई गिरफ्तार-
दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 15 मार्च को गीता कालोनी थाने में तैनात एएसआई रोहतास को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एएसआई ने शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने और केस में उसका बचाव करने की एवज में उससे रिश्वत मांगी थी।

सीबीआई ने 10 फरवरी को दिल्ली पुलिस के चितरंजन पार्क थाने के एएसआई सुंदर पाल सिंह को दस लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

लुटेरे पुलिस वाले -
मध्य जिले के देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की को यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूटने के मामले में 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया। 
24 मार्च की वारदात है। यूपी के जालौन निवासी दीपक दस ला रुपये लेकरकरोल बाग में जेवर खरीदने आए थे। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40 लूट लिए। दीपक ने अगले दिन डीसीपी से शिकायत की। 


 दिल्ली पुलिस के एक नामी एसीपी(सेवानिवृत्त) की टिप्पणी-
ऐसे मामलों में, जहाँ इतनी बड़ी रकम बरामद होती है और पुलिस यूनिट द्वारा कोई संगठित रैकेट चलाया जा रहा होता है, वहाँ सुपरवाइज़री रैंक के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्हें यह समझाना होगा कि उन्हें इतनी आज़ादी कैसे मिली कि उनके ही दफ़्तर से इतनी बड़ी रकम बरामद हो गई। यह सभी सुपरवाइज़री अधिकारियों की नाकामी है, जो ACP से लेकर स्पेशल CP तक—जिन पर ऐसी विशेष यूनिट की निगरानी की ज़िम्मेदारी होती है—इस तरह के अनैतिक गठजोड़ पर नज़र रखने में नाकाम रहे। इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों को विशेष एजेंसियों में लंबे समय तक रखने का विचार उल्टा साबित हुआ है, और इस नीति पर फिर से विचार करना बेहद ज़रूरी है।