Tuesday, 9 June 2026

3 करोड़ मांगने वाला, इंस्पेक्टर प्रदीप का गॉडफ़ादर अफसर कौन ?, आईपीएस- इंस्पेक्टर सिंडिकेट पर प्रहार कब होगा?



कमिश्नर सतीश गोलछा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में विफल

3 करोड़ मांगने वाला इंस्पेक्टर का गॉडफ़ादर  कौन है ? 


इंस्पेक्टर प्रदीप के गॉडफ़ादर अफसर ने 3 करोड़ मांगे थे

आईपीएस- इंस्पेक्टर सिंडिकेट पर प्रहार कब होगा? 



इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने 8 जून को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह परमार को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। रिश्वत की जब्त रकम एक करोड़ भी हो सकती है। 

इंस्पेक्टर प्रदीप के गॉडफ़ादर वरिष्ठ अफसर ने सीबीआई में दर्ज मामले के आरोपी एन राजा से तीन करोड़ रुपये रिश्वत मांगी थी। इस वरिष्ठ अफसर ने सीबीआई में अपने संपर्कों/ प्रभाव/ सांठगांठ के दम आरोपी को बचा लेने का दावा किया था। 
गॉडफ़ादर का नाम एफआईआर में क्यों नहीं-
सीबीआई द्वारा इस मामले में चुप्पी साध लेने और इंस्पेक्टर प्रदीप के गॉडफ़ादर
वरिष्ठ अफसर (आईपीएस हो सकता है)और अन्य सरकारी अफसरों ( सीबीआई वाले हो सकते हैं)के नाम तक भी एफआईआर में दर्ज नहीं करने से सीबीआई की भूमिका पर सवालिया निशान लग जाता है। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि इंस्पेक्टर प्रदीप का आका वरिष्ठ अफसर कोई आईपीएस अधिकारी हो सकता है। उसने आरोपी एन राजा से डेढ़ करोड़ रुपये एडवांस मांगे थे। एन राजा ने एक करोड़ रुपये चेन्नई के हवाला कारोबारी के माध्यम से दिल्ली मंगाए।
सीबीआई चुप-
इसलिए संभावना है कि इंस्पेक्टर एक करोड़ लेते हुए पकड़ा गया है। इंस्पेक्टर कुल कितने रुपये लेते हुए गिरफ्तार हुआ। इसकी आधिकारिक तौर पर सीबीआई ने जानकारी नहीं दी है। 
 इंस्पेक्टर प्रदीप क्राइम ब्रांच के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात है। प्रदीप को 8 जून को लाल किले के पास से गिरफ्तार किया गया है। प्रदीप लाल किला चौकी इंचार्ज भी रह चुका है। 
नारकोटिक्स का मामला-
ड्रग्स/ दवाई बनाने वाली पुदुचेरी की एक कंपनी के ख़िलाफ़ पिछले साल नंवबर में नारकोटिक्स कानून के तहत का मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। इस मामले में  एन. राजा  ​​वल्लियप्पन उर्फ़  राजशेखर आरोपी है। 
गॉडफ़ादर- इंस्पेक्टर का गठजोड़
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार  विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी से पता चला कि  दिल्ली पुलिस, क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर  प्रदीप सिंह, आरोपी  एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन  राजशेखर,  एन. राजा का  सहयोगी राजकुमार उर्फ ​​मदनराज, अन्य अज्ञात सरकारी अफसरों और  निजी व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रचकर सीबीआई जांच अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य सरकारी अफसरों पर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सीबीआई मामलों में अनुचित राहत दिलाने के लिए अवैध रिश्वत के भुगतान में सहयोग कर रहे हैं। 
गॉडफ़ादर ने 3 करोड़ मांगे-
यह भी पता चला है कि  राजकुमार मदनराज,  एन. राजा वल्लियप्पन  राजशेखर और दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर  प्रदीप सिंह के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। 14.05.2026  एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​​ राजशेखर और  राजकुमार मदनराज ने नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे के पास एयरोसिटी में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से मुलाकात की। इसके बाद, प्रदीप सिंह कथित तौर पर उन दोनों को पास ही स्थित एक अज्ञात वरिष्ठ सरकारी अफसर के कार्यालय में ले गया और उनसे उनका परिचय कराया। मुलाकात के दौरान, उक्त वरिष्ठ सरकारी ने कथित तौर पर एन. राजा उर्फ ​​वल्लियप्पन उर्फ ​ राजशेखर को आश्वासन दिया कि
वह सीबीआई मामलों में अपने संपर्कों और सीबीआई के भीतर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अनुकूल राहत हासिल कर सकता था।
डेढ़ करोड़ एडवांस-
सूत्रों से यह भी पता चला है कि 16.05.2026 को  एन. राजा उर्फ ​​ राजशेखर ने अपनी पत्नी को सूचित किया कि उक्त वरिष्ठ सरकारी अफसर ने 3 करोड़ रुपये की रिश्वत के बदले में सीबीआई के लंबित मामलों में सहायता देने पर सहमति जताई है और 1.5 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि की मांग की है। इसके बाद,  एन. राजा  अपने संपर्कों के माध्यम से संबंधित लोक सेवकों को अवैध रिश्वत के भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने में लगे रहे।
इंस्पेक्टर गुजरात गया-
आगे की जानकारी से पता चलता है कि  राजकुमार उर्फ ​​मदनराज बाद में वडोदरा, गुजरात गया, जहां उसने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से दिल्ली स्थित सरकारी अफसरों को रिश्वत की राशि पहुंचाने की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की। बैठक के बाद, दोनों एक साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। 
सूत्रों से यह भी पता चला है कि एन. राजा ने अपनी पत्नी को सूचित किया कि दिल्ली में सरकारी अधिकारियों द्वारा मांगी गई अवैध रिश्वत की अग्रिम राशि तत्काल पहुंचानी आवश्यक है और उन्हें धनराशि का इंतजाम करके तैयार रखने का निर्देश दिया। 
हवाला से एक करोड़-
यह भी पता चला है कि एन. राजा वल्लियप्पन ने चेन्नई स्थित एक हवाला ऑपरेटर से संपर्क किया और रिश्वत की अग्रिम राशि के रूप में 1 करोड़ रुपये दिल्ली भेजने के लिए उसकी सेवाएं लीं। 
सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि रिश्वत की राशि इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को 8 जून 2026 को दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र में सौंपी जाएगी।
उपरोक्त जानकारी के आधार पर सीबीआई ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह  और  एन. राजा और  राजकुमार मदनराज तथा अन्य अज्ञात लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और आपराधिक साज़िश का मामला दर्ज किया। इसके बाद  जाल बिछाया और इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। 











 



Saturday, 30 May 2026

नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को पलीता लगा रहे IPS, गृहमंत्री: गुंडे IPS को जेल कब भेजोगे? भ्रष्टाचारियों का हर्ष वर्धन नहीं मान मर्दन हो


आईपीएस-इंस्पेक्टर गठजोड़ पर प्रहार कब होगा? 
गृहमंत्री के नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को पलीता लगा रहे आईपीएस, 
भ्रष्ट आईपीएस को जेल कब भेजोगे ? 
भ्रष्टाचारियों का हर्ष वर्धन नहीं मान मर्दन होना चाहिए



इंद्र वशिष्ठ, 
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2047 तक नशा मुक्त भारत बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रग सिंडिकेटों को जड़ से समाप्त करने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। 
भ्रष्टाचार मुक्त आईपीएस-
गृह मंत्री अगर वाकई इस मुद्दे पर गंभीर हैं तो उन्हें सबसे पहले अपनी दिल्ली पुलिस और आईपीएस को ही भ्रष्टाचार मुक्त कर पूरे देश के सामने मिसाल पेश करनी चाहिए। क्योंकि बिना ईमानदार पुलिस अफसरों के नशा मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। वह पहले दिल्ली को नशा मुक्त करके देश भर की पुलिस के सामने उदाहरण पेश कर सकते हैं।
कमिश्नर फेल-
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा में भ्रष्टाचार और आईपीएस अधिकारियों पर अंकुश लगाने का दम ही नहीं हैं। नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को कुछ भ्रष्ट आईपीएस अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। 
आईबी की भूमिका -
हैरानी की बात है कि गृहमंत्री की नाक के नीचे  ये सब हो रहा है। गृहमंत्री को भ्रष्ट आईपीएस के सिंडिकेट के ख़िलाफ़ कार्रवाई करके अपनी मौजूदगी का अहसास कराना चाहिए। क्या गृहमंत्री के आंख,नाक और कान यानी आईबी/खुफ़िया तंत्र सो रहा है या वह गृहमंत्री को भ्रष्ट आईपीएस अधिकारियों के बारे में सच्चाई न बता कर गुमराह कर रहा है? 
गृहमंत्री सिंडिकेट पर प्रहार करें-
गृहमंत्री अगर चाहें तो उनके पास अब एक सुनहरा मौका है जब वह आईपीएस अधिकारियों और इंस्पेक्टर के नापाक गठजोड़/ सिंडिकेट की जड़ पर जबरदस्त प्रहार कर सकते हैं। ऐसा करके वह पूरे देश में एक मिसाल पेश कर सकते हैं। अगर वह कोई कार्रवाई नहीं करते, तो उनमें और अन्य नेताओं में कोई फर्क नहीं रहेगा। जब तक आईपीएस अफसरों का ऐसा नापाक गठजोड़ रहेगा, अपराध और अपराधियों पर काबू नहीं पाया जा सकता। 
आईपीएस- इंस्पेक्टर का गठजोड़-
हाल ही में द्वारका जिले के पूर्व डीसीपी शंकर चौधरी और नारकोटिक्स सेल के इंस्पेक्टर सुभाष यादव के नशे के सौदागरों से वसूली करने के सनसनीखेज मामले सामने आए हैं जिससे साफ़ पता चलता है कि पुलिस नशे के सौदागरों को पकड़ने के बजाए उनसे वसूली करने में लगी हुई है। 
किस गॉडफ़ादर आईपीएस ने बचाया  -
द्वारका जिले के नारकोटिक्स सेल में तैनात हवलदार अजय को सीबीआई ने 21 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया। नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48 लाख रुपये से ज्यादा की रकम बरामद हुई। लेकिन उस समय सीबीआई ने नारकोटिक्स सेल के इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तार नहीं किया। इससे सीबीआई की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया। पुलिस में चर्चा है कि आईपीएस गॉडफ़ादर ने उस समय इंस्पेक्टर सुभाष यादव को गिरफ्तारी से बचा लिया। मामले ने तूल पकड़ा तो सीबीआई ने 11 मई को इंस्पेक्टर सुभाष यादव को भी गिरफ्तार किया। 
100 करोड़ी इंस्पेक्टर-
सुभाष यादव की 100 करोड़ रुपये की संपत्ति/ लेनदेन का पता चला है। इस मामले में कई आईपीएस अधिकारियों के शामिल होने की खबरें आई हैं। 
इंस्पेक्टर के कितने गॉडफ़ादर ?-
इंस्पेक्टर सुभाष द्वारका जिले के तत्कालीन डीसीपी हर्षवर्धन (अब सीबीआई में) का भी खासमखास बताया जाता है। ये वही हर्षवर्धन हैं जिन्होंने राजेन्द्र नगर में कोचिंग सेंटर में बरसात का पानी भरने से हुई मौतों के मामले में एक बेकसूर कार चालक को गिरफ्तार किया था। कार चालक पर आरोप लगाया कि उसके कार चलाने से ही पानी कोचिंग सेंटर में घुस गया। कोर्ट ने पुलिस की इस करतूत पर जमकर फटकार लगाई थी। ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌इस मामले से हर्षवर्धन की काबलियत की पोल खुल गई।
आजकल हर्षवर्धन और बरसों से उनके खासमखास एसओ रहे इंस्पेक्टर मूलचन्द के बारे में तमाम तरह के किस्से पुलिस में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हालांकि सच्चाई ये है कि इंस्पेक्टर सुभाष का सिर्फ एक ही गॉड फादर नहीं हो सकता। आईपीएस शंकर चौधरी का तो पर्दाफाश हो ही चुका है। तत्कालीन डीसीपी संतोष मीणा ने सुभाष यादव को पहली बार नाइजीरियाई बहुल मोहन गार्डन इलाके में तैनात किया था। ये इलाका नशे के सौदागरों का गढ़ है और यही पुलिस की मोटी कमाई का जरिया है। इस इलाके से मोटी कमाई का लालच ही आईपीएस शंकर चौधरी को मिजोरम से खींच लाया। उसके पहले सुभाष स्पेशल स्टाफ़ आदि में तैनात रहा था। 
इन अफसरों के रिश्ते इंस्पेक्टर सुभाष से सिर्फ पेशेवर थे या कोई मिलीभगत थी इसका खुलासा तो ईमानदार और निष्पक्ष जाँच से ही हो सकता है। 
दो मिनट में खुलासा-
इंस्पेक्टर सुभाष और उसके बॉस रहे आईपीएस अधिकारियों के मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड की जांच से तो दो मिनट में ये बात आसानी से साबित हो सकती हैं कि इंस्पेक्टर किस किस अफसर का खासमखास है। 
मधुप तिवारी की भूमिका पर सवाल -
इस मामले के सामने आने के बाद स्पेशल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था जोन 2) मधुप तिवारी का अचानक तत्काल प्रभाव से 2 मई को अरुणाचल प्रदेश तबादला कर दिया गया। तबादला आदेश में उनके नए पद का जिक्र नहीं था। मतलब उन्हें कोई पद नहीं दिया गया। इससे ही इस बात को बल मिला कि इंस्पेक्टर सुभाष कांड से कनेक्शन के कारण उन्हें हटाया गया है। अगर वाकई इस कारण से ही मधुप तिवारी को हटाया गया है। तो उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सिर्फ तबादला करके तो एक तरह से गृह मंत्रालय ने मधुप तिवारी को बचाने का ही काम किया है। द्वारका जिला स्पेशल कमिश्नर मधुप तिवारी के अन्तर्गत था। मधुप तिवारी पहले पश्चिम रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त भी रह चुके थे।
मधुप तिवारी पहले भी चर्चा में आए थे जब सीबीआई ने डेपुटेशन का समय पूरा होने से पहले ही उन्हें वापस उनके काडर में भेज दिया गया था। 
साल 2017 में बिहार में एमएलसी के बेटे राकेश रंजन उर्फ राकी यादव को हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। कार ओवर टेक करने से बौखला कर राकी ने छात्र आदित्य की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तभी यह खुलासा हुआ कि कि पेशे से ठेकेदार और शौकिया शूटर राकी यादव की पिस्तौल का लाइसेंस दिल्ली पुलिस ने बनाया था।उस समय लाइसेंसिंग विभाग के मुखिया अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मधुप तिवारी थे। गया की एसएसपी गरिमा मलिक ने बिना अनिवार्य वेरीफिकेशन के राकी यादव  का लाइसेंस बनाने पर दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान भी लगाया था इसके बावजूद मधुप तिवारी समेत लाइसेंसिंग विभाग के किसी अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद 13 मई  को स्पेशल कमिश्नर (कानून -व्यवस्था जोन1) के पद से रवींद्र यादव का तबादला अंडमान डीजीपी के पद पर कर दिया गया। दोनों तबादलों को लेकर पुलिस में तरह तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन दोनों मामलों में अंतर स्पष्ट हैं। मधुप तिवारी को द्वारका कांड के कारण बिना कोई पद दिए हटाया गया। रवींद्र यादव को डीजीपी अंडमान नियुक्त करना सामान्य तबादला बताया जाता है।
आईपीएस नादान हैं ? -
इंस्पेक्टर सुभाष यादव करीब 8-9 साल से द्वारका जिले में तैनात है। इस दौरान द्वारका जिले में डीसीपी के पद पर अनेक आईपीएस अधिकारी रहें हैं। आईपीएस अधिकारियों की कृपा के बिना इंस्पेक्टर सुभाष यादव इतने लंबे समय तक एक ही जिले में रह ही नहीं सकता। अब ऐसे में या तो इन आईपीएस की इंस्पेक्टर सुभाष के साथ सांठगांठ थी या ये आईपीएस इतने नाकाबिल/ नादान/मासूम/ मूर्ख थे कि उनका मातहत इंस्पेक्टर नशा तस्करों से जमकर वसूली करता रहा और उन्हें भनक तक नहीं लगी। दोनों ही सूरत में आईपीएस अधिकारियों की भूमिका और काबलियत पर सवालिया निशान तो लग ही जाता है। इसलिए इन अफसरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई तो की ही जानी चाहिए। 
आईपीएस की छत्रछाया में फला फूला -
द्वारका जिले में डीसीपी के पद पर रहे आईपीएस संतोष मीणा, शंकर चौधरी, एम हर्षवर्धन और अंकित सिंह की छत्रछाया के दौरान ही इंस्पेक्टर सुभाष खूब फला फूला और अकूत संपत्ति बनाई। 
इस समय कुशल पाल सिंह डीसीपी द्वारका जिले के के पद पर है। आईपीएस जतिन नरवाल संयुक्त पुलिस आयुक्त के पद पर हैं। 
जड़ पर वार जरुरी-
द्वारका जिले में इंस्पेक्टर सुभाष की रुकने में मदद करने वाले और नारकोटिक्स सेल का कार्यभार संभालने के बाद इंस्पेक्टर की निगरानी करने वाले सभी आईपीएस से तो निगरानी/ सुपरविजन में हुई लापरवाही के लिए पूछताछ की जानी चाहिए, और यदि वे उसके साथ मिलीभगत करते हुए पाए जाते हैं, तो उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। 
गृहमंत्री अगर वाकई अपराध और अपराधियों पर काबू करना चाहते हैं तो ऐसे आईपीएस अधिकारियों को जेल भेजने में देर नहीं करनी चाहिए। 
गृहमंत्री को इस मामले में शामिल पाए जाने वाले आईपीएस अधिकारियों को जेल भेज कर पूरे देश में एक मिसाल कायम करनी चाहिए। पुलिस में व्याप्त संगठित भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने का यह सही समय है।
सीबीआई की भूमिका -
सिपाही या क्लर्क पकड़ने का भी प्रचार करने वाली सीबीआई ने इंस्पेक्टर सुभाष यादव की गिरफ्तारी पर प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं की। सीबीआई ने आज तक भी आधिकारिक तौर पर ये नहीं बताया कि इंस्पेक्टर के कितने ठिकानों पर छापे मारे गए और कितनी संपत्ति का पता चला है। जब इंस्पेक्टर के बारे में सीबीआई कुछ नहीं बता रही, तो आईपीएस अधिकारियों की जांच वह कैसी करेगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 
आईपीएस का भाईचारा -
सीबीआई अगर आईपीएस के साथ आपसी भाईचारा वाले भाव को त्याग कर ईमानदारी से जांच करे तो इंस्पेक्टर सुभाष यादव के आका आईपीएस अधिकारियों का भी पर्दाफाश हो सकता हैं। लेकिन ऐसा होने की संभावना नहीं  है। 
सीबीआई में डायरेक्टर से लेकर अन्य महत्वपूर्ण पदों पर आईपीएस अधिकारी ही नियुक्त है। 
इसलिए कोर्ट से पिंजरे के तोते का खिताब पा चुकी सीबीआई से निष्पक्ष, ईमानदार जाँच की अपेक्षा करना बेमानी है। 
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ही अगर चाहें तो ही भ्रष्ट आईपीएस अधिकारियों के सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है। 
डीसीपी के पीए की हरियाणा पुलिस को तलाश
दिल्ली में पंजाबी बाग निवासी कारोबारी से 2 करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी को हरियाणा पुलिस द्वारा तलाश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया। 
एसआई प्रदीप कुमार रांगी पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे़ शरद भास्कर का पीए है। ये मामला सामने आने के बाद से वह नौकरी से गायब है।
लुटेरा आईपीएस जेल कब जाएगा? -
द्वारका के पूर्व डीसीपी शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने 5 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की है। शंकर चौधरी पर नशे के सौदागर विदेशी नागरिक को गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाकर 35 लाख रुपये वसूलने का सनसनीखेज आरोप है। लेकिन शंकर चौधरी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। जबकि गृहमंत्री को इस पुख्ता मामले में आईपीएस शंकर चौधरी को तुरंत गिरफ्तार कराना चाहिए था। ऐसे गुंडे किस्म के आईपीएस को जेल भेजने से ही बाकी भ्रष्ट आईपीएस अधिकारियों में भी कानून का डर पैदा होगा। गृहमंत्रालय के निर्देश पर दक्षिण रेंज के तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय जैन ने जांच की। संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय कुमार जैन की शिकायत पर ही‌ विजिलेंस यूनिट ने शंकर चौधरी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। इसके बावजूद अभी तक शंकर चौधरी को गिरफ्तार नहीं किया गया। आईपीएस शंकर चौधरी के साथ इस अपराध में शामिल दिल्ली पुलिस के हवलदार शालूज, हवलदार विकास और हवलदार प्रशांत के खिलाफ सिर्फ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करना आश्चर्यजनक है। 
2 साल बाद एफआईआर दर्ज-
29 नवंबर 2023 को नाइजीरिया की एक महिला ने पीसीआर को फोन कर मिजोरम पुलिस में तैनात आईपीएस शंकर चौधरी के इस अपराध की जानकारी दी थी। जिस पर  दो साल बाद अब एफआईआर दर्ज की गई।
उस समय मिजोरम पुलिस में एसपी (नारकोटिक्स) के पद पर तैनात शंकर चौधरी अपनी छुट्टियां खत्म होने के बाद भी बिना अनुमति के दिल्ली में मौजूद थे। आईपीएस शंकर चौधरी ने दिल्ली पुलिस में मौजूद अपने कुछ खास पुलिसकर्मियों के साथ गैर कानूनी तरीके से हैरीसन के घर 26 नवंबर 2023 को छापा मारा। हैरीसन को अवैध रूप से वसंत विहार स्थित मिजोरम हाऊस में बंधक बनाकर रखा गया। हैरीसन को उसकी बहन द्वारा पीसीआर पर फोन करने के बाद छोड़ दिया गया। 
शंकर चौधरी को बचाया-
इसके पहले द्वारका जिले के डीसीपी पद से शंकर चौधरी को 4 जून 2022 को हटाया गया था। डीसीपी पर एक महिला के सिर पर गिलास मारने का आरोप था। महिला के सिर में तीन टांके लगे थे। लेकिन पुलिस ने शंकर चौधरी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की। 
नशे के सौदागरों से वसूली-
पुलिस की नशे के सौदागरों से वसूली के और भी उदाहरण पेश हैं। सीबीआई ने 13 अप्रैल 2023 को दरिया गंज नारकोटिक्स ब्रांच के दफ़्तर में एएसआई रुपेश और बिचौलिए अनुराग को दस लाख रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तार नशे की सौदागर महिला की मदद करने और उसके परिजनों को गिरफ्तार न करने की एवज से तीस लाख रिश्वत मांगी थी।
कमिश्नर, आईपीएस की कृपा का नमूना -
एएसआई रुपेश एसीपी अनिल शर्मा की टीम में था यानी एसीपी की नाक के नीचे ही एएसआई रुपेश ने रिश्वत ली। इसके बावजूद एसीपी अनिल शर्मा के ख़िलाफ़ पुलिस कमिश्नर ने कोई कार्रवाई नहीं की। 
आईपीएस और मातहतों के गठजोड़ का एक नमूना एसीपी अनिल शर्मा का भी है। 
डीसीपी ने एक्शन लिया-
पश्चिम जिले की तत्कालीन डीसीपी उर्विजा गोयल की रिपोर्ट के आधार पर 20 सितंबर 2021 को तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने राजौरी गार्डन के तत्कालीन एसएचओ अनिल शर्मा को हटा दिया था। दरअसल सतर्कता विभाग  ने जांच में पाया था कि तत्कालीन एसएचओ अनिल शर्मा इलाके में अवैध शराब की बिक्री और जुए जैसे अपराध को रोकने में पूरी तरह विफल है। पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत है। 
इसके बावजूद इसी अनिल शर्मा को तत्कालीन कमिश्नर संजय अरोरा ने नारकोटिक्स ब्रांच में तैनात कर दिया था। 
एसीपी ने 15 लाख मांगे- 
सीबीआई ने 31अगस्त 2022 को बाहरी उत्तरी जिले के ही बवाना थाना स्थित नारकोटिक्स शाखा में तैनात एसीपी बृज पाल के खिलाफ नशे के सौदागर से 15 लाख रुपए रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया था। 
इस मामले में एएसआई दुष्यंत गौतम को सात लाख 89 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। एनडीपीएस के मामले में शिकायतकर्ता की पत्नी को राहत देने के लिए एसीपी ने एएसआई के जरिए 15 लाख रुपए की मांग की थी। 


(लेखक इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)











मेरठ छावनी बोर्ड का सदस्य 3 लाख लेते हुए गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने मेरठ में छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को तीन लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।  सीबीआई ने 29 मई, 2026 को सतीश कुमार शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया।
 आरोप है कि सतीश कुमार शर्मा ने गांधी बाग, मेरठ छावनी, उत्तर प्रदेश के पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क के टेंडर को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए शिकायतकर्ता द्वारा अपनी मां की ओर से संचालित निजी फर्म को दिए गए टेंडर को जारी रखने के लिए 3 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।
सीबीआई ने 29 मई, 2026 को जाल बिछाकर सतीश कुमार शर्मा को शिकायतकर्ता से 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। 


Wednesday, 27 May 2026

नीट पेपर लीक: डॉक्टर और फिजिक्स टीचर गिरफ्तार

नीट पेपर लीक: डॉक्टर और फिजिक्स टीचर गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज शिरुरे और पुणे के एक कोचिंग सेंटर के फिजिक्स टीचर तेजस हर्षद कुमार शाह को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या 13 हो गई है। 
लातूर के रहने वाले डॉक्टर मनोज शिरुरे  ने आरोपी आरसीसी कोचिंग सेंटर के मालिक मालिक प्रोफेसर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के बेटे सहित तीन छात्रों को आरोपी केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी से केमिस्ट्री के पेपर प्राप्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आरोपी तेजस हर्षद कुमार शाह पुणे स्थित कोचिंग सेंटर डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल अकादमी में फिजिक्स टीचर हैं। उन्हें लीक हुए फिजिक्स के प्रश्नपत्र गिरफ्तार आरोपी मनीषा हवलदार से मिले थे। 
इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 
सीबीआई ने 22 मई को  फिजिक्स का पेपर लीक करने के आरोप में  मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया है। वह पुणे में सेठ हीरालाल सर्राफ प्रशाला में प्रिंसिपल है। वह नीट परीक्षा प्रक्रिया में एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त की गई थी। 
18 मई को लातूर(महाराष्ट्र) स्थित आरसीसी कोचिंग संस्थान के मालिक प्रोफेसर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर उर्फ एम सर को गिरफ्तार किया। 16 मई को बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली में गिरफ्तार किया।15 मई को इस मामले में पुणे से मुख्य आरोपी/ सरगना केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। 13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल, विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया।
इस मामले में सिलसिलेवार कड़ी और साजिश का पता लगाने के लिए जांच जारी है। सीबीआई ने अब तक विभिन्न स्थानों पर 49 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है और कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त की गई वस्तुओं का विस्तृत विश्लेषण जारी है।
विभिन्न विशेष टीमें मिलकर जांच कर रही हैं और जांच में परीक्षा से पहले प्रसारित रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के प्रश्न पत्रों के रिसाव के वास्तविक स्रोत का पता चला है।

















Tuesday, 26 May 2026

कमला मार्केट थाने का वसूलीबाज हवलदार गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। निरंकुश और बेखौफ पुलिसकर्मियों द्वारा जमकर लूट/वसूली/ रिश्वतखोरी की जा रही है। इस साल अब तक  11 रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने मध्य जिले के कमला मार्केट थाने में तैनात हवलदार अंकुश धामा को अजमेरी गेट निवासी शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। हवलदार अंकुश धामा ने जेल भेजने की धमकी देकर डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता का अपने एक रिश्तेदार से झगड़ा हुआ था। दोनों पक्ष शिकायत दर्ज कराने के लिए कमला मार्केट थाने गए। हवलदार अंकुश धामा ने अस्पताल में दोनों की चिकित्सा जांच रकरवाई। इस दौरान उनके एक परिचित के हस्तक्षेप से, दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया। हालांकि मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझ गया था। लेकिन हवलदार अंकुश धामा ने शिकायतकर्ता को जेल भेजने की धमकी दी और उसे जेल न भेजने के बदले 1.5 लाख रुपये की मांग की। बातचीत के बाद यह राशि 1 लाख रुपये हो गई। शिकायतकर्ता ने हवलदार अंकुश धामा को उसी दिन 50 हजार रुपये दिए और 20 हज़ार रुपये बाद में भी दिए। इसके बावजूद, हवलदार अंकुश धामा ने शिकायतकर्ता पर शेष राशि का भुगतान करने के लिए दबाव डालना जारी रखा। शिकायतकर्ता ने हवलदार से हुई बातचीत को ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया और विजिलेंस यूनिट में शिकायत कर दी। 25 मई की शाम को विजिलेंस यूनिट ने  कमला मार्केट थाने के पुलिस बूथ में हवलदार अंकुश धामा को शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये लेते गिरफ्तार कर लिया‌‌‌। लुटेरे पुलिस वाले -मध्य जिले के ही देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की को यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूटने के मामले में 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया। 





24 मार्च की वारदात है। यूपी के जालौन निवासी दीपक दस ला रुपये लेकरकरोल बाग में जेवर खरीदने आए थे। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40 लूट लिए। दीपक ने अगले दिन डीसीपी से शिकायत की।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)







Friday, 22 May 2026

नीट पेपर लीक: फिजिक्स की मैडम गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने नीट परीक्षा का फिजिक्स का पेपर लीक करने के आरोप में मनीषा संजय हवलदार को गिरफ्तार किया है। वह पुणे में सेठ हीरालाल सर्राफ प्रशाला में प्रिंसिपल है। वह नीट परीक्षा प्रक्रिया में एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त की गई थी। उसके पास फिजिक्स के पेपर तक पूरी पहुंच थी। अप्रैल 2026 के दौरान उसने नीट के फिजिक्स से संबंधित कुछ प्रश्न सह-आरोपी मनीषा मंधारे के साथ साझा किए थे। उसके द्वारा साझा किए गए प्रश्न नीट परीक्षा के फिजिक्स के प्रश्नपत्रों से मेल खाते हैं। मनीषा संजय हवलदार ने 1992 में फिजिक्स टीचर के रूप में स्कूल में कार्यभार संभाला था। वह 2023 से प्रिंसिपल के पद पर है और 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने वाली थी।अब तक इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

सीबीआई ने 18 मई को लातूर(महाराष्ट्र) स्थित आरसीसी कोचिंग संस्थान के मालिक प्रोफेसर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर उर्फ एम सर को गिरफ्तार किया। 16 मई को बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली में गिरफ्तार किया।15 मई को इस मामले में पुणे से मुख्य आरोपी/ सरगना केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। 13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल, विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 
विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की गई जांच से पेपर लीक होने के वास्तविक स्रोत का पता चला है। उन बिचौलियों की भी पहचान कर ली गई है और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्होंने उन छात्रों को जुटाया था जिन्होंने नीट परीक्षा में आने वाले प्रश्न साझा किए जाने वाले विशेष कोचिंग कक्षाओं में भाग लेने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था। 













बांग्लादेश और पाकिस्तान की सीमा बनेगी अभेद्य, घुसपैठियों को चुन-चुन कर देश से निकालेंगे : गृहमंत्री अमित शाह

इंद्र वशिष्ठ, 
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे।
 गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरों और अन्य नई  तकनीकों के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को लेकर आएगा।
शुक्रवार को नई दिल्ली में बीएसएफ के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में अमित शाह ने कहा कि अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली नोट, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां बीएसएफ के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने  इन सभी चुनौतियों का बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। 
 गृह मंत्री ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल, अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा। सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। नारकोटिक्स और नकली नोटों के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।चुन-चुन कर देश से निकालेंगे-
गृह मंत्री ने कहा कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे। 
बीएसएफ को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। बीएसएफ की जिम्मेदारी है कि वह न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, डीडीओ, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ उनका संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रास्तों को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। 
विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल-
गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है।  अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।
नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान-
गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।