Wednesday, 20 May 2026

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाला गद्दार गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ, 
एनआईए ने भारत विरोधी आतंकी साजिश के तहत पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों  को गोपनीय सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के आरोप में जासूस जफर रियाज उर्फ ​​रिजवी को गिरफ्तार किया है। 
कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ ​​रिजवी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था और उसे घोषित अपराधी (पीओ) घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी, तभी उसे हिरासत में ले लिया गया।

जफर रियाज की शादी पाकिस्तानी नागरिक से हुई थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तानी नागरिक हैं। आईपीसी और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत जासूसी के एक मामले में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका ज़फ़र 2005 से भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार यात्रा कर रहा था।
 ऐसी ही एक यात्रा के दौरान पाकिस्तान के खुफ़िया अधिकारियों (पीआईओ) ने उससे संपर्क किया। धन का प्रलोभन और पाकिस्तानी नागरिकता का वादा करके उसे भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए राजी किया।
 जफर ने अन्य जासूसी और आतंकी ऑपरेटरों की मदद के लिए एक पीआईओ को भारतीय दूरसंचार मोबाइल नंबरों के वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) दिए ताकि वह व्हाट्सएप अकाउंट सक्रिय कर सके। पीआईओ ने इन अकाउंट्स का इस्तेमाल सीआरपीएफ के एएसआई मोतीराम जाट से गुप्त रूप से संवाद करने के लिए किया, जाट पीआईओ को सुरक्षा संबंधी गुप्त जानकारी पहुंचाता था।
एनआईए ने पिछले साल मई में सीआरपीएफ के एएसआई मोती राम जाट को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई )के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
एनआईए के अनुसार जासूसी रैकेट में शामिल अन्य लोगों का पता लगाने और इस साजिश के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है।









Tuesday, 19 May 2026

DDA का रिश्वतखोर विजिलेंस अफसर दीपक यादव गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के असिस्टेंट विजिलेंस अफसर दीपक यादव और एमटीएस तरुण को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
सीबीआई ने डीडीए के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर  की शिकायत के आधार पर दिल्ली विकास प्राधिकरण के आरोपी असिस्टेंट विजिलेंस अफसर दीपक यादव के खिलाफ 18 मई को मामला दर्ज किया। आरोप है कि असिस्टेंट विजिलेंस अफसर दीपक यादव ने शिकायतकर्ता के खिलाफ विजिलेंस मामले में शिकायतकर्ता के मूल विभाग को अनुकूल जवाब भेजने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। बातचीत के बाद, आरोपी 3 लाख रुपये रिश्वत लेने के लिए सहमत हो गया। 
सीबीआई ने 18 मई को जाल बिछाकर असिस्टेंट विजिलेंस अफसर दीपक यादव को डीडीए के एमटीएस तरुण के माध्यम से रिश्वत की कुल राशि तीन लाख में से आंशिक भुगतान के रूप में 50 हज़ार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 

Monday, 18 May 2026

नीट पेपर लीक: आरसीसी कोचिंग का मालिक गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में लातूर (महाराष्ट्र)स्थित आरसीसी कोचिंग संस्थान के मालिक प्रोफेसर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर उर्फ एम सर को गिरफ्तार किया है। ये संस्थान छात्रों को नीट परीक्षा की तैयारी कराता है। इसकी नौ शाखाएं हैं, जिनमें मुख्य शाखा लातूर में है। अदालत ने शिवराज को 9 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। 
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर एनटीए से जुड़े केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी का करीबी हैं। उनके संस्थान और घर पर तलाशी के दौरान केमिस्ट्री का पेपर बरामद हुआ, जिसमें 3 मई को आयोजित नीट परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के समान प्रश्न थे। इस मामले में अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्या नगर से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई ने 16 मई को नीट परीक्षा के बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली में गिरफ्तार किया। वह नीट परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थी बॉटनी और जूलॉजी के पेपर तक उनकी पूरी पहुंच थी। 15 मई को इस मामले में पुणे से मुख्य आरोपी/ किंगपिन केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया गया। पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। 13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल, विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 
सीबीआई की विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की जांच से केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर लीक के वास्तविक स्रोत का पता चला है। इसके अलावा, उन बिचौलियों को भी गिरफ्तार किया गया है जो उन छात्रों को जुटाने में शामिल थे जिन्होंने नीट परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को विशेष कोचिंग कक्षाओं में भेजने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था, जहां उन पर चर्चा और निर्देश दिए जाते थे। 












Saturday, 16 May 2026

182 करोड़ की 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद, अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़ा एक सीरियाई नागरिक भी गिरफ्तार,हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह

 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन जब्त
 सीरियाई नागरिक गिरफ्तार

हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह 


खूंखार बनाने वाली जिहादी ड्रग कैप्टागॉन 



इंद्र वशिष्ठ, 
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत कैप्टागॉन की तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट/पाउडर जब्त किया गया। एजेंसियों ने पहली बार जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये है। सिंडिकेट से जुड़े अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागॉन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।
चपाती मशीन में ड्रग्स-
एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त सूचना के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की पहचान की। 11 मई 2026 को मकान की तलाशी के दौरान एक चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी गई लगभग 31.5 किलोग्राम
कैप्टागॉन टैबलेट बरामद की गई, जिसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सीरियाई नागरिक 15.11.2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12.01.2025 को समाप्त हो गया और वह अवैध रूप से यहाँ रह रहा था। उसने नेब सराय में मकान किराये पर लिया था।
ऊन की आड़ में ड्रग्स-
आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोकैप्टागकैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। इस कंटेनर को भेड़ की ऊन से भरा हुआ बताकर सीरिया से आयात किया गया था। कंटेनर की गहन तलाशी के दौरान तीन बैगों में छिपाकर रखे गया 196.2 किलोग्राम कैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था, जहां कैप्टागॉन का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। 
कोकीन-
हाल ही में मुंबई में एनसीबी द्वारा की गई एक अन्य बड़ी कार्रवाई  में इक्वाडोर से आए कंटेनर में छिपाकर रखी गई 349 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन बरामद की गई थी। यह इस बात को उजागर करता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के लिए व्यावसायिक कार्गो और कंटेनर आधारित व्यापार मार्गों का दुरुपयोग बढ़ रहा है।
ड्रग के ख़िलाफ़ सख्ती-
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मध्य-पूर्व जा रहे ड्रग की इस खेप को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के उदाहरण हैं। भारत में आने वाली या हमारे देश को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करके बाहर जाने वाली हर ग्राम ड्रग पर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे।  
जिहादी ड्रग-  
मध्य-पूर्व देशों के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे जिहादी ड्रग कहा जाता है। इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है. यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। कैप्टागॉन एक ऐसा नशा है जो शरीर में जबरदस्त ऊर्जा भर देता है।इसे लेने के बाद इंसान लंबे समय तक जाग सकता है, थकान महसूस नहीं होती, फोकस बढ़ जाता है और दिमाग में एक अलग तरह का जोश और खुशी महसूस होती है। 
मौत का डर खत्म -
सीरिया के एक पूर्व विद्रोही लड़ाके ने बताया था कि युद्ध के दौरान कैप्टागॉन क्यों इतना खतरनाक साबित हुआ। सीरियाई लड़ाके के मुताबिक, ब्रिगेड कमांडर ने हमें यह गोली दी और कहा कि इससे ताकत मिलती है। पहली बार लेने पर लगा कि शरीर में जबरदस्त एनर्जी आ गई है। सामने 10 लोग भी हों तो उन्हें पकड़कर मार सकते हो। नींद नहीं आती, डर खत्म हो जाता है, थकान महसूस नहीं होती। अगर कमांडर कहे कि सैन्य बैरक में घुस जाओ, तो बिना डर के अंदर चले जाओगे। 
इसी वजह से कैप्टागॉन को जिहादी ड्रग भी कहा जाता है। हालांकि यह सिर्फ आईएसआईएस या बंदूक उठा चुके लड़ाकों तक सीमित नहीं है। पूरे मध्य-पूर्व में यह ड्रग काफी लोकप्रिय है, खासकर उन देशों में जहां शरीयत कानून के कारण शराब पर पाबंदी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टागॉन 1980 के दशक से ही अमीर और युवा वर्ग के बीच काफी पसंद किया जाता रहा है। इसे लोग पार्टी ड्रग और सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल जितनी एम्फेटामाइन ड्रग्स पकड़ी जाती हैं, उनमें से एक-तिहाई सिर्फ सऊदी अरब में बरामद होती है। रिपोर्ट में बताया गया कि सऊदी अरब में नशे की लत का इलाज करा रहे करीब 75 प्रतिशत लोग कैप्टागॉन के आदी हैं।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)














नीट बायोलॉजी पेपर लीक करने वाली बॉटनी टीचर गिरफ्तार

बायोलॉजी पेपर लीक करने वाली बॉटनी टीचर गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने नीट परीक्षा के बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मास्टर माइंड महाराष्ट्र के पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को  दिल्ली में गिरफ्तार किया है। वह नीट परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थीं और उन्हें एनटीए द्वारा विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था। बॉटनी और जूलॉजी के पेपर तक उनकी पूरी पहुंच थी।
अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने पुणे की मनीषा वाघमारे के माध्यम से नीट परीक्षा के संभावित उम्मीदवारों को संगठित किया और अपने पुणे स्थित आवास पर इन छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं।
 इन कक्षाओं के दौरान उन्होंने बॉटनी और जूलॉजी विषयों के विभिन्न प्रश्नों को समझाया और छात्रों को उन्हें अपनी नोटबुक में लिखने और किताबों में चिह्नित करने के लिए कहा। इनमें से अधिकांश प्रश्न 3 मई 2026 को आयोजित परीक्षा के वास्तविक प्रश्न पत्र से मेल खाते थे।  
मनीषा मंधारे पुणे के शिवाजीनगर में स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ आर्ट्स साइंस एंड कॉमर्स में बॉटनी की लेक्चरर हैं। बताया जाता है कि मनीषा पिछले 5-6 वर्षों से एनटीए के लिए नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल रही है। 
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने 12 मई 2026 को यह मामला दर्ज किया था।
इस मामले में अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई ने 15 मई को इस मामले में पुणे से मुख्य आरोपी/ सरगना केमिस्ट्री के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया। पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया। 13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल उनके बेटों विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 
विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की जांच में केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर के लीक होने के वास्तविक स्रोत के साथ-साथ उन बिचौलियों का भी पता चला है जो उन छात्रों को जुटाने में शामिल थे जिन्होंने नीट परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को पढ़ाने और उन पर चर्चा करने के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया था।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)






Friday, 15 May 2026

नीट पेपर लीक का किंगपिन गिरफ्तार





नीट पेपर लीक का किंगपिन गिरफ्तार



इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने नीट- यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में मुख्य आरोपी/ सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। 
सीबीआई को जांच में पता चला कि केमिस्ट्री  के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी, एनटीए की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे। उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी। 
अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में, उन्होंने एक अन्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से छात्रों को संगठित किया और पुणे स्थित अपने आवास पर इन छात्रों के लिए विशेष कोचिंग कक्षाएं आयोजित कीं। 
इन विशेष कोचिंग कक्षाओं के दौरान उन्होंने प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर लिखवाए। छात्रों ने इन प्रश्नों को अपनी नोटबुक में हाथ से लिखा और ये प्रश्नपत्र 3 मई को आयोजित नीट  परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते हैं। गहन पूछताछ के बाद मूल रूप से लातूर निवासी पी.वी. कुलकर्णी को शुक्रवार को पुणे से गिरफ्तार किया गया। कुलकर्णी लातूर के दयानंद कॉलेज के रिटायर्ड लेक्चर है।
 सीबीआई ने इस मामले में13 मई को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी मांगीलाल बिवाल उनके बेटों विकास और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खेरनार को गिरफ्तार किया। 14 मई को अहिल्या नगर के धनजंय लोखंडा और पुणे की मनीषा वाघमारे को गिरफ्तार किया।
सीबीआई ने देश भर में कई स्थानों पर चलाए तलाशी अभियान के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।  
सीबीआई की विशेष टीमों द्वारा जांच जारी है और अब तक की जांच में केमिस्ट्री के प्रश्नपत्र लीक होने के वास्तविक स्रोत के साथ-साथ उन बिचौलियों का भी पता चला है जो उन छात्रों को जुटाने में शामिल थे जिन्होंने इन प्रश्नपत्रों को पढ़ाने/चर्चा करने के लिए विशेष कोचिंग कक्षाओं में लाखों रुपये का भुगतान किया था। 
 

Thursday, 14 May 2026

लालकिला फिदायीन हमला: 10 आतंकियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल

लालकिला फिदायीन हमला: 10 आतंकियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल




इंद्र वशिष्ठ, 
लाल किला के सामने 10 नवंबर 2025 को हुए फिदायीन कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पृष्ठों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। बम धमाके से 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। 
पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, मुख्य आरोपी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी सहित सभी 10 आरोपियों का संबंध अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) संगठन से था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) की एक शाखा है। हमला करने वाला पुलवामा निवासी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी फरीदाबाद (हरियाणा) के अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन में पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर था, के खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव है।
 डॉ. नबी के अलावा, आरोपपत्र में जिन अन्य लोगों के नाम हैं, वे हैं: आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुज़मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार। आरोपपत्र में 588 गवाहों के बयान , 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से अधिक जब्त की गई सामग्रियों के रूप में विस्तृत साक्ष्य शामिल हैं। 
जिहादी साजिश-
एनआईए का दावा है कि विस्तृत वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के माध्यम से एक बड़ी जिहादी साजिश का पर्दाफाश किया गया है आरोपी, जिनमें से कुछ कट्टरपंथी डाक्टर थे, ने इस घातक हमले को अंजाम देने के लिए एक्यूआईएस/एजीयूएच की विचारधारा से प्रेरणा ली थी।
ऑपरेशन हेवनली हिंद-
2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक में, आरोपियों ने तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान हिजरत करने के असफल प्रयास के बाद, एजीयूएच आतंकी संगठन को "एजीयूएच अंतरिम" के रूप में पुनर्गठित किया था। नवगठित संगठन के तत्वावधान में, उन्होंने  भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से "ऑपरेशन हेवनली हिंद" शुरू किया था।
एनआईए की जांच में पता चला कि ऑपरेशन हेवनली हिंद के तहत, आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, सक्रिय रूप से एजीयूएच की हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद का जखीरा जमा किया और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रसायनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर विस्फोटक बनाए। आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के बम (आईईडी) भी बनाए और उनका परीक्षण किया था। विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) था, जिसे आरोपियों ने गुप्त रूप से घटक सामग्री प्राप्त करके और विस्फोटक मिश्रण को परिपूर्ण बनाने के लिए प्रयोग करके तैयार किया था।
डीएनए से पहचान-
एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के माध्यम से मृतक आरोपी की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में की। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद में भी शामिल थे, जिनमें एके-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और  देसी पिस्तौलें शामिल थीं।
ड्रोन से हमला-
आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से रॉकेट और ड्रोन से लैस आईईडी का परीक्षण किया था। 
आरोपियों की देश के अन्य हिस्सों में भी अपने अभियान का विस्तार करने की योजना थी, जिसे आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ ने नाकाम कर दिया।
 इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एनआईए उन फरार आरोपियों की तलाश जारी रखे हुए है जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई थी।