Friday, 1 May 2026

CGHS की रिश्वतखोर एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा गिरफ्तार

इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने सीजीएसटीएस, मेरठ (यूपी) की एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा  और उसके निजी सहायक/ ड्राइवर सनी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ़्तार किया है। सीजीएचएस मुरादाबाद में तैनात कर्मचारी तरुण का दो महीने पहले सीजीएचएस मेरठ से मुरादाबाद तबादला कर दिया गया। तरुण पारिवारिक और आर्थिक कारणों से वापस मेरठ आना चाहता है। तरुण ने तबादले के लिए एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा से बात की। एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा ने मुरादाबाद से वापस मेरठ में तबादले के बदले अपने निजी सहायक सनी के माध्यम से 80 हजार रुपये रिश्वत मांगी। तरुण की शिकायत पर सीबीआई ने 30 अप्रैल को मामला दर्ज किया। सीबीआई ने जाल बिछाया। इस जाल के दौरान निजी सहायक सनी और एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा वर्मा शिकायतकर्ता तरुण से 50,000 रुपये की रिश्वत लेने पर सहमत हो गए। इसके बाद, निजी सहायक सनी को डाक्टर नताशा वर्मा की ओर से 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। सीबीआई ने दोनों आरोपियों एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर नताशा और उनके निजी सहायक सनी को गिरफ़्तार कर लिया है।
सीबीआई ने 12 अगस्त 2025 को मेरठ में तैनात सीजीएचएस के एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार, ऑफिस सुपरिटेंडेंट लवेश सोलंकी और उनके निजी साथी रईस अहमद को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 





एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार ने दो निजी अस्पतालों जेएमसी मेडिसिटी और हाई फील्ड अस्पताल को सीजीएचएस की सूची से हटा देने की धमकी दे कर 50 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 


50 लाख के जेवरात बरामद -
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार के आवास और बैंक लॉकरों की भी तलाशी ली। तलाशी में आरोपी के परिसर/लॉकर से 29.50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये से अधिक मूल्य के आभूषण बरामद किए गए। इसके अलावा, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति के दस्तावेज और म्यूचुअल फंड और शेयर बाजारों में भारी निवेश का विवरण प्राप्त हुआ है।
दो करोड़ से ज्यादा की धन संपत्ति-
प्रथम दृष्टया यह पता चला कि डाक्टर अजय कुमार ने सीएमओ, सीजीएचएस मेरठ, यू.पी. के रूप में कार्य करते हुए 01.04.2020 से 13.08.2025 की अवधि के दौरान खुद को अवैध रूप से समृद्ध किया और उसके पास 2,06,31,845/- रुपये के आर्थिक संसाधन हैं, जो उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है।
सीबीआई ने डाक्टर अजय कुमार एडिशनल डायरेक्टर, सीजीएचएस, मेरठ, उत्तर प्रदेश के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति (डीए) का भी मामला 18 नवंबर 2025 को दर्ज किया। 


















सीजीएचएस का एडिशनल डायरेक्टर डाक्टर अजय कुमार  गिरफ्तार, 50 लाख मांगे






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Tuesday, 28 April 2026

अनिल अंबानी की 3 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


अनिल अंबानी की 3 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


इंद्र वशिष्ठ, 
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में अनिल अंबानी और मैसर्स रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड की
3034.90 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। जिससे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मामलों में कुल 19,344 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्तियां कुर्क हो गई है।
ईडी रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के उन मामलों की जांच कर रही है जिनमें बैंक/सार्वजनिक फंड के गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
यह जांच भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर आरकॉम, अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज कई एफआईआर  के आधार पर शुरू की गई थी। आरकॉम और उसकी ग्रुप कंपनियों ने घरेलू और विदेशी कर्जदाताओं से लोन लिए थे, जिनमें से कुल 40,185 करोड़ रुपये बकाया हैं।

ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में मुंबई की उषा किरण बिल्डिंग में एक फ्लैट, पुणे के खंडाला में एक फार्महाउस और अहमदाबाद के साणंद में ज़मीन का एक टुकड़ा शामिल है। इनके अलावा, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर भी कुर्क किए गए, जो मैसर्स राइज़ी इन्फिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे। यह कंपनी अनिल अंबानी के ग्रुप की एक इकाई है और राइज़ी ट्रस्ट के तहत आती है, जो अनिल अंबानी के परिवार के सदस्यों का एक निजी पारिवारिक ट्रस्ट है। 
इस ट्रस्ट का गठन संपत्तियों को ट्रस्ट में इकट्ठा करके धन को सुरक्षित रखने और संसाधन जुटाने के लिए किया गया था, ताकि इसे अनिल अंबानी की व्यक्तिगत देनदारियों से बचाया जा सके। ये देनदारियां उन व्यक्तिगत गारंटियों के रूप में थीं जो उन्होंने आरकॉम को दिए गए लोन के बदले कर्जदाता बैंकों को दी थीं। 
इन संपत्तियों का उद्देश्य अनिल अंबानी के परिवार द्वारा लाभ के लिए इस्तेमाल और स्वामित्व करना था, न कि उन संकटग्रस्त सार्वजनिक बैंकों के लिए, जिनके लोन एनपीए बन गए थे।
पीएमएलए की धारा 8 के तहत, कुर्क की गई संपत्ति उन वैध दावेदारों को वापस कर दी जाएगी जिन्हें नुकसान हुआ है, जिसमें पीड़ित बैंक भी शामिल हैं। 
इस प्रकार, यह कुर्की मूल्य को सुरक्षित रखती है, ताकि उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद, सार्वजनिक धन को कानून के अनुसार बैंकों और अंततः आम जनता को वापस दिलाया जा सके।



दाऊद का साथी नशे का सौदागर सलीम डोला एनसीबी के शिकंजे में, तुर्किये से लाया गया डोला, नशे के सरगना के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं: अमित शाह

दाऊद का साथी सलीम डोला एनसीबी के शिकंजे में,
नशे के सरगना के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं: अमित शाह

इंद्र वशिष्ठ
नशे के कुख्यात सौदागर/तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस भारत लाया गया है। सलीम डोला कुख्यात आतंकी दाऊद इब्राहिम का सहयोगी है। 
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने इंटरपोल और भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर, 'ऑपरेशन ग्लोबल-हंट' के तहत वांछित ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस लाने में सफलता हासिल की है। मंगलवार सुबह नई दिल्ली के इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे पर पहुँचते ही एनसीबी ने उसे हिरासत में ले लिया।
सलीम डोला (59 वर्ष, मुंबई निवासी) के खिलाफ मार्च, 2024 में भारत के अनुरोध पर इंटरपोल द्वारा रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में मुकदमा चलाने के लिए उसकी तलाश थी। पिछले कुछ वर्षों में, डोला ने मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में फैला हुआ एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट खड़ा कर लिया था।
दो दशकों में महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रेक्स और मेथामफेटामाइन की बड़ी खेप पकड़े जाने से जुड़े मामलों में डोला की सीधी भूमिका है।सलीम डोला की भूमिका भारत में निचले स्तर के वितरण नेटवर्क के लिए एक थोक सप्लायर के रूप में लगातार सामने आती रही है। इसके अलावा, गुजरात एटीएस और मुंबई पुलिस को भी उसकी तलाश थी।इससे पहले, उसके बेटे ताहिल सलीम डोला और अन्य सहयोगियों को 2025 में यूएई से प्रत्यर्पण/वापसी के बाद मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
ड्रग सरगना कहीं भी सुरक्षित नहीं -केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नार्को सिंडिकेट के खिलाफ सरकार की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति के अनुरूप, एनसीबी ने तुर्किये से कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को वापस लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है।शाह ने कहा कि सरकार के ड्रग कार्टेल को पूरी तरह से खत्म करने के मिशन के तहत, हमारी नार्कोटिक्सरोधी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मज़बूत नेटवर्क के ज़रिए सीमाओं के पार भी अपनी पकड़ बना ली है।  ड्रग सरगना कहीं भी छिप जाएं, अब उनके लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है।





Friday, 24 April 2026

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया, रिश्वत दो जमानत लो, क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? जज की भूमिका ?

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया,

रिश्वत के बदले जमानत की गारंटी , 

क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? 

जज की भूमिका ? 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना को वकील निशा गौड़ से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। रीडर ने जमानत याचिका मंजूर कराने के लिए महिला वकील से तीस हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। 
वकील निशा गौड़ ने 22 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत की। जिसमें आरोप लगाया कि एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना ने जमानत पर सुनवाई के समय शिकायतकर्ता वकील निशा गौड़ के मुवक्किल की जमानत अर्जी मंजूर करवाने  के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने 23 अप्रैल को एक जाल बिछाया और रीडर संजीव को शिकायतकर्ता निशा गौड़ से कुल 30,000 रुपये की रिश्वत में से 20,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। 
पैसे दो जमानत लो-
निशा गौड़ के अनुसार संजीव ने उससे कहा कि पैसे दो और बिना बहस किए ही जमानत का आर्डर लो। निशा ने बताया कि इसके पहले मामले के आईओ ने उससे कहा की कोर्ट तुमसे कुछ चाहता है। तब निशा ने संजीव से बात की। 
उसने जज से मिल कर उपरोक्त सारी बातें बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट स्टाफ़ ने उसे जज से मिलने ही नहीं दिया। तब उसने सीबीआई में शिकायत की। 
जज की भूमिका-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत मंजूर कराने की गारंटी दे सकता है? 
अगर जज ईमानदार है तो उसकी नाक के नीचे उसका रीडर रिश्वत कैसे वसूल रहा था ?
दोनों ही सूरत में जज की पेशेवर काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान तो लग ही गया है।
हाईकोर्ट को इस मामले की पूरी गहराई तक जांच करनी चाहिए। 










Wednesday, 22 April 2026

एंटी नारकोटिक्स सेल से 48.87 लाख ₹ बरामद, पुलिस ड्रग्स पकड़ रही है या बिकवा रही है?, कमिश्नर और आईपीएस अफसरों की काबलियत/ भूमिका पर सवालिया निशान

कमिश्नर सतीश गोलछा भ्रष्टाचार पर अंकुश कब लगाओगे? 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले के एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय को 2 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने एंटी नारकोटिक्स सेल के दफ़्तर से 48.87 लाख रुपये जब्त किए है।
इतनी मोटी रकम की बरामदगी से तो यह साफ़ पता चलता है कि पुलिसकर्मी नशे के सौदागरों को पकड़ने की बजाए उनसे वसूली करने में लगे हुए हैं।
कमिश्नर, आईपीएस की भूमिका-
पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। पुलिसकर्मियों द्वारा रिश्वतखोरी, वसूली के अलावा लूटपाट करने तक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एसएचओ के पद पर इंस्पेक्टरों को लगाने और पद से हटाने में जमकर भेदभाव का सिलसिला जारी है। कमिश्नर और आईपीएस अफसरों के चहेते तो सालों से एसएचओ के पद पर जमे हुए है। 
इससे कमिश्नर सतीश गोलछा और आईपीएस अफसरों की पेशेवर  काबलियत और भूमिका पर भी सवालिया निशान लग जाता है।
लाइन हाज़िर-
एंटी नारकोटिक्स सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर सुभाष को लाइन हाज़िर कर दिया गया है। पुलिस ने शिकायतकर्ता को ड्रग्स के मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने 21.04.2026 को एक शिकायत के आधार पर द्वारका की एंटी नारकोटिक्स सेल के हवलदार अजय और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। हवलदार अजय और अन्य पुलिसकर्मियों ने शिकायतकर्ता को एक मामले में झूठा न फंसाने के लिए 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। हवलदार अजय ने 21.04.2026 तक 5 लाख रुपये की आंशिक रकम पहुंचाने का निर्देश दिया था।सीबीआई ने 21.04.2026 को एक जाल बिछाया और हवलदार अजय को शिकायतकर्ता से कुल 15 लाख रुपये की रिश्वत में से आंशिक भुगतान के तौर पर 2 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कार्यालय परिसर की तलाशी के दौरान 48.87 लाख रुपये की राशि जब्त की गई है।

दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। 

शकर पुर थाने की महिला SI और HC के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, हवलदार गिरफ्तार
सीबीआई ने 6 अप्रैल को पूर्वी जिले के शकर पुर थाने के हवलदार राहुल को बीस हज़ार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
सीबीआई ने नोएडा निवासी एक महिला की शिकायत पर शकर पुर थाने में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल के ख़िलाफ़ 6 अप्रैल को आपराधिक साज़िश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया। 
एफआईआर के अनुसार महिला का आरोप है कि उसके और उसके दोस्त के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न आदि की धाराओं के तहत एक झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस मामले की आईओ सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल दस मार्च को उसे उसके घर से उठा कर थाने लाए। सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल ने एफआईआर से दोनों के नाम हटाने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत मांगी। 
महिला ने 3 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत कर दी। 
सीबीआई ने आरोपों के सत्यापन के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। इसके बाद शिकायतकर्ता से थाने में ही रिश्वत लेते हुए हवलदार राहुल को गिरफ्तार कर लिया। सब-इंस्पेक्टर रक्षा को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 
बाहरी जिले में 2 महीने में 3 मामले-
सीबीआई ने 3 अप्रैल को बाहरी जिले के पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनोज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बाहरी जिले में भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का दो महीने में ये तीसरा मामला सामने आया है। 
सब-इंस्पेक्टर मनोज ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास/ झगड़े के मामले को रफा दफा करने के लिए 3 लाख रुपये रिश्वत मांगी।
एस एच ओ लाइन हाज़िर-
पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने के एसएचओ देवेन्द्र सिंह को लाइन हाज़िर कर दिया गया।

इसके पहले सीबीआई ने 13 मार्च को बाहरी जिले के ही सुल्तान पुरी थाने में तैनात हवलदार राजेश और हवलदार अजय को सट्टेबाज से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 
एस एच ओ लाइन हाज़िर-
इस मामले में सुल्तान पुरी थाने के एसएचओ रवींद्र कुमार को लाइन हाज़िर किया गया था।

एक अन्य मामले में सीबीआई ने 7 फरवरी को इसी जिले के पश्चिम विहार(ईस्ट) थाने में तैनात एएसआई ओम प्रकाश को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
बस अड्डा चौकी इंचार्ज गिरफ्तार-
सीबीआई ने 24 मार्च को कश्मीरी गेट बस अड्डे की पुलिस चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर नीरज को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सब-इंस्पेक्टर नीरज ने बोतल बंद पानी बेचने वाले शिकायतकर्ता से 33 हजार रुपये महीना/मंथली रिश्वत मांगी थी।
एएसआई गिरफ्तार-
दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 15 मार्च को गीता कालोनी थाने में तैनात एएसआई रोहतास को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एएसआई ने शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने और केस में उसका बचाव करने की एवज में उससे रिश्वत मांगी थी।

सीबीआई ने 10 फरवरी को दिल्ली पुलिस के चितरंजन पार्क थाने के एएसआई सुंदर पाल सिंह को दस लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

लुटेरे पुलिस वाले -
मध्य जिले के देश बंधु गुप्ता रोड थाने के सब-इंस्पेक्टर महावीर और सिपाही विक्की को यूपी के जालौन निवासी व्यापारी दीपक सोनी से आठ लाख 40 हजार रुपये लूटने के मामले में 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया। 
24 मार्च की वारदात है। यूपी के जालौन निवासी दीपक दस ला रुपये लेकरकरोल बाग में जेवर खरीदने आए थे। पुलिसकर्मियों ने उनके नोटों को नकली बता कर उनसे, 8.40 लूट लिए। दीपक ने अगले दिन डीसीपी से शिकायत की। 


 दिल्ली पुलिस के एक नामी एसीपी(सेवानिवृत्त) की टिप्पणी-
ऐसे मामलों में, जहाँ इतनी बड़ी रकम बरामद होती है और पुलिस यूनिट द्वारा कोई संगठित रैकेट चलाया जा रहा होता है, वहाँ सुपरवाइज़री रैंक के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्हें यह समझाना होगा कि उन्हें इतनी आज़ादी कैसे मिली कि उनके ही दफ़्तर से इतनी बड़ी रकम बरामद हो गई। यह सभी सुपरवाइज़री अधिकारियों की नाकामी है, जो ACP से लेकर स्पेशल CP तक—जिन पर ऐसी विशेष यूनिट की निगरानी की ज़िम्मेदारी होती है—इस तरह के अनैतिक गठजोड़ पर नज़र रखने में नाकाम रहे। इसके अलावा, पुलिस अधिकारियों को विशेष एजेंसियों में लंबे समय तक रखने का विचार उल्टा साबित हुआ है, और इस नीति पर फिर से विचार करना बेहद ज़रूरी है। 












Tuesday, 7 April 2026

शकर पुर थाने की महिला SI और HC के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, हवलदार गिरफ्तार

शकर पुर थाने की महिला SI और HC के ख़िलाफ़ FIR दर्ज, हवलदार गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के पकड़े जाने का सिलसिला जारी है। 
सीबीआई ने 6 अप्रैल को पूर्वी जिले के शकर पुर थाने के हवलदार राहुल को बीस हज़ार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
सीबीआई ने नोएडा निवासी नेहा की शिकायत पर शकर पुर थाने में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल के ख़िलाफ़ 6 अप्रैल को आपराधिक साज़िश और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया। 
एफआईआर के अनुसार महिला का आरोप है कि उसके और उसके दोस्त दीपांकर के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न/लज्जा भंग करने के लिए हमला करने आदि की धाराओं के तहत एक झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है। इस मामले की आईओ सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल दस मार्च को उसे उसके घर से उठा कर थाने लाए। सब-इंस्पेक्टर रक्षा और हवलदार राहुल ने एफआईआर से दोनों के नाम हटाने के लिए एक लाख रुपये रिश्वत मांगी। 
महिला ने 3 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत कर दी। 
सीबीआई ने आरोपों के सत्यापन के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। इसके बाद शिकायतकर्ता से थाने में ही रिश्वत लेते हुए हवलदार राहुल को गिरफ्तार कर लिया। सब-इंस्पेक्टर रक्षा को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है। 
भ्रष्टाचार चरम पर-
सीबीआई ने 3 अप्रैल को बाहरी जिले के पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनोज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बाहरी जिले में भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का दो महीने में ये तीसरा मामला सामने आया है। 
सब-इंस्पेक्टर मनोज ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास/ झगड़े के मामले को रफा दफा करने के लिए 3 लाख रुपये रिश्वत मांगी। पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने के एसएचओ देवेन्द्र सिंह को लाइन हाज़िर कर दिया गया।
इसके पहले सीबीआई ने 13 मार्च को बाहरी जिले के ही सुल्तान पुरी थाने में तैनात हवलदार राजेश और हवलदार अजय को सट्टेबाज से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस मामले में सुल्तान पुरी थाने के एसएचओ रवींद्र कुमार को लाइन हाज़िर किया गया था। एक अन्य मामले में सीबीआई ने 7 फरवरी को इसी जिले के पश्चिम विहार(ईस्ट) थाने में तैनात एएसआई ओम प्रकाश को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
सीबीआई ने 24 मार्च को कश्मीरी गेट बस अड्डे की पुलिस चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर नीरज को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सब-इंस्पेक्टर नीरज ने बोतल बंद पानी बेचने वाले शिकायतकर्ता से 33 हजार रुपये महीना/मंथली रिश्वत मांगी थी।दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 15 मार्च को गीता कालोनी थाने में तैनात एएसआई रोहतास को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एएसआई ने शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने और केस में उसका बचाव करने की एवज में उससे रिश्वत मांगी थी।सीबीआई ने 10 फरवरी को दिल्ली पुलिस के चितरंजन पार्क थाने के एएसआई सुंदर पाल सिंह को दस लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 

















' नमो भारत ' कॉरिडोर की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले

सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन, डीआईजी संजय कुमार सैन 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीआईएसएफ ने अब दिल्ली-एनसीआर में  नमो भारत कॉरिडोर की सुरक्षा भी संभाल ली है। 
दिल्ली के न्यू अशोक नगर में मंगलवार को आयोजित एक समारोह के दौरान रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नमो भारत कॉरिडोर की सुरक्षा औपचारिक रूप से सीआईएसएफ को सौंप दी गई। 
यह भारत के पहले हाई-स्पीड रीजनल ट्रांजिट सिस्टम की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की पूर्ण तैनाती की शुरुआत का प्रतीक है, जो पूरे एनसीआर में यात्रियों के लिए सुरक्षित और बेहतर यात्रा सुनिश्चित करेगा।
 एनसीआरटीसी के अफसरों ने सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन को एक प्रतीकात्मक चाबी सौंपी।
 इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि नमो भारत नेटवर्क में सीआईएसएफ की तैनाती भारत के नए जमाने के परिवहन ढांचे को सुरक्षित करने में एक अहम कदम है। जैसे-जैसे परिवहन प्रणालियां तेज और आपस में जुड़ रही हैं, सुरक्षा के प्रति हमारा दृष्टिकोण भी उतना ही उन्नत, एकीकृत और तकनीक-आधारित होना चाहिए। सीआईएसएफ एक सहज, मजबूत और यात्री-केंद्रित सुरक्षा माहौल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है जो न केवल बुनियादी ढांचे की रक्षा करता है बल्कि यात्रियों में विश्वास भी जगाता है।
 251 जवान तैनात-आरआरटीएस नेटवर्क के दिल्ली खंड के तीन स्टेशनों - आनंद विहार, न्यू अशोक नगर और सराय काले खान की सुरक्षा सीआईएसएफ के कुल 251 कर्मी करेंगे। दिल्ली खंड आरआरटीएस के प्रथम चरण का हिस्सा है, जिसमें दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 22 स्टेशन शामिल हैं।उत्तर प्रदेश के आरआरटीएस स्टेशनों की सुरक्षा उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (यूपीएसआईएसएफ) द्वारा की जाएगी।‌ सीआईएसएफ मेट्रो और ट्रांजिट सुरक्षा में विशेष प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिसमें प्रवेश नियंत्रण, स्क्रीनिंग और भीड़ प्रबंधन शामिल है।
 उत्तर प्रदेश के आरआरटीएस स्टेशनों की सुरक्षा के लिए यूपीएसआईएसएफ के कर्मियों को डीएमआरसी में सीआईएसएफ द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। सीआईएसएफ की तैनाती से पूरे आरआरटीएस नेटवर्क में कड़ी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिसमें उन्नत निगरानी प्रणाली (एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम), एक्सेस कंट्रोल, तोड़फोड़ विरोधी जांच और तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमताएं शामिल हैं।
इस अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक ने जवानों के आवास के निर्माण के लिए भूमि पूजन/शिलान्यास किया। यह आरआरटीएस ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ जवानों के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
समारोह में एनसीआरटीसी के एमडी शलभ गोयल,  सीआईएसएफ के एडीजी/मुख्यालय विजय प्रकाश, आईजी/एनसीआर सरोज कांत मल्लिक, डीआईजी/डीएमआरसी संजय कुमार सैन और सीआईएसएफ तथा एनसीआरटीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।






Saturday, 4 April 2026

पश्चिम विहार थाने का सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार, एसएचओ लाइन हाज़िर

पश्चिम विहार थाने का सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार, एसएचओ लाइन हाज़िर  


इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के पकड़े जाने का सिलसिला जारी है। सीबीआई ने 3 अप्रैल को बाहरी जिले के पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनोज को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बाहरी जिले में भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी का दो महीने में ये तीसरा मामला सामने आया है। 
शिकायतकर्ता राधे श्याम के बेटे सन्नी का 26 मार्च को किसी लड़के से झगड़ा हो गया। सब-इंस्पेक्टर मनोज ने बीट के सिपाही के माध्यम से 1 अप्रैल को राधे श्याम को थाने बुलवाया। राधे श्याम का आरोप है कि सब-इंस्पेक्टर मनोज ने उसकी पिटाई की। 
सब-इंस्पेक्टर मनोज ने गैर इरादतन हत्या के प्रयास/झगड़े के मामले को रफा दफा करने के लिए 3 लाख रुपये रिश्वत मांगी। सब-इंस्पेक्टर मनोज ने कहा कि अभी सब मेरे हाथ में है मैं सब ठीक कर दूंगा। राधे श्याम ने 3 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत कर दी। 
 सीबीआई ने थाने के अंदर ही सब-इंस्पेक्टर मनोज को एक लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। पश्चिम विहार (वेस्ट) थाने के एसएचओ देवेन्द्र सिंह को लाइन हाज़िर कर दिया गया।
 इसके पहले सीबीआई ने 13 मार्च को बाहरी जिले के ही सुल्तान पुरी थाने में तैनात हवलदार राजेश और हवलदार अजय को सट्टेबाज से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इस मामले में सुल्तान पुरी थाने के एसएचओ रवींद्र कुमार को लाइन हाज़िर किया गया था। एक अन्य मामले में सीबीआई ने 7 फरवरी को इसी जिले के पश्चिम विहार(ईस्ट) थाने में तैनात एएसआई ओम प्रकाश को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
भ्रष्टाचार चरम पर-
सीबीआई ने 24 मार्च को कश्मीरी गेट बस अड्डे की पुलिस चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर नीरज को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सब-इंस्पेक्टर नीरज ने बोतल बंद पानी बेचने वाले शिकायतकर्ता से 33 हजार रुपये महीना/मंथली रिश्वत मांगी थी।
 दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 15 मार्च को गीता कालोनी थाने में तैनात एएसआई रोहतास को 15 हजार रुपये  रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एएसआई ने शिकायतकर्ता को झूठे केस में फंसाने और केस में उसका बचाव करने की एवज में उससे रिश्वत मांगी थी।
सीबीआई ने 10 फरवरी को दिल्ली पुलिस के चितरंजन पार्क थाने के एएसआई सुंदर पाल सिंह को दस लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। 
एएसआई सुंदर पाल सिंह ने शिकायतकर्ता प्रेम सूद से दविंदर सलवान के साथ प्रॉपर्टी के एग्रीमेंट को कैंसिल करने के उसके मामले को निपटाने और यह पक्का करने के लिए कि दविंदर सलवान उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगा, 25 लाख रुपये रिश्वत  मांगी। 








Tuesday, 31 March 2026

MCD का डिप्टी कमिश्नर और प्रशासनिक अधिकारी गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने एमसीडी, शाहदरा, उत्तरी ज़ोन के डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम को 4 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
सीबीआई ने 30 मार्च 2026 को एमसीडी के निलंबित एसएसए मुकेश शर्मा और निलंबित जेएसए गजेंद्र कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज किया। 
डिप्टी कमिश्नर कर्नल अभिषेक मिश्रा द्वारा इन दोनों निलंबित कर्मचारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की जा रही है। 
आरोप है कि डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा की ओर से प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम ने उन दोनों की जांच रिपोर्ट उनके पक्ष में सक्षम अधिकारी को भेजने के लिए 4 लाख रुपये(दो लाख रुपये प्रति) रिश्वत मांगी।
सीबीआई ने 30 मार्च को जाल बिछाया और आरोपी प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम को शिकायतकर्ताओं से 4 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई के दौरान आरोपी डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा की भूमिका भी सामने आई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक मिश्रा एमसीडी में प्रतिनियुक्ति पर है।