Friday, 24 April 2026

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया, रिश्वत दो जमानत लो, क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? जज की भूमिका ?

महिला जज के रीडर को महिला वकील ने पकड़वाया,

रिश्वत के बदले जमानत की गारंटी , 

क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत की गारंटी दे सकता हैं ? 

जज की भूमिका ? 


इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना को वकील निशा गौड़ से 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। रीडर ने जमानत याचिका मंजूर कराने के लिए महिला वकील से तीस हजार रुपये रिश्वत मांगी थी। 
वकील निशा गौड़ ने 22 अप्रैल को सीबीआई में शिकायत की। जिसमें आरोप लगाया कि एडिशनल सेशन जज कादम्बरी अवस्थी के रीडर संजीव सदाना ने जमानत पर सुनवाई के समय शिकायतकर्ता वकील निशा गौड़ के मुवक्किल की जमानत अर्जी मंजूर करवाने  के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। 
सीबीआई ने 23 अप्रैल को एक जाल बिछाया और रीडर संजीव को शिकायतकर्ता निशा गौड़ से कुल 30,000 रुपये की रिश्वत में से 20,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। 
पैसे दो जमानत लो-
निशा गौड़ के अनुसार संजीव ने उससे कहा कि पैसे दो और बिना बहस किए ही जमानत का आर्डर लो। निशा ने बताया कि इसके पहले मामले के आईओ ने उससे कहा की कोर्ट तुमसे कुछ चाहता है। तब निशा ने संजीव से बात की। 
उसने जज से मिल कर उपरोक्त सारी बातें बताने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट स्टाफ़ ने उसे जज से मिलने ही नहीं दिया। तब उसने सीबीआई में शिकायत की। 
जज की भूमिका-
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जज की मिलीभगत के बिना रीडर जमानत मंजूर कराने की गारंटी दे सकता है? 
अगर जज ईमानदार है तो उसकी नाक के नीचे उसका रीडर रिश्वत कैसे वसूल रहा था ?
दोनों ही सूरत में जज की पेशेवर काबलियत और भूमिका पर सवालिया निशान तो लग ही गया है।
हाईकोर्ट को इस मामले की पूरी गहराई तक जांच करनी चाहिए। 











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