Tuesday, 28 July 2026

पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की वर्दी पर लगा जंतर मंतर का दाग, गृहमंत्री धृतराष्ट्र मत बनो : लांबा को लंबा करो, राठी को लाठी दो

           कमिश्नर अनुराग कुमार

       एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा

             इंस्पेक्टर नवीन राठी

गृहमंत्री धृतराष्ट्र मत बनो : लांबा को लंबा करो, राठी को लाठी दो, डागर को डांगर बना दो

कमिश्नर की वर्दी पर लागा जंतर मंतर का दाग




इंद्र वशिष्ठ, 
एक तो पहले ही दिल्ली पुलिस की छवि करतूतों के कारण दिनोंदिन बद से बदतर हो रही है। लोगों का पुलिस में रत्ती भर भरोसा नहीं है। उस पर एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा, इंस्पेक्टर/एसएचओ नवीन राठी और पुलिसकर्मी हनी डागर, यशवंत जैसे वर्दी वाले गुंडों द्वारा जंतर मंतर पर लड़कियों के साथ बदसलूकी, छात्रों की पिटाई और घिनौनी हरकतों ने पुलिस की बची खुची इज़्ज़त/साख पर कलंक लगा दिया है। इन वर्दी वाले गुंडों ने दुनिया भर में दिल्ली पुलिस और भारत की छवि को दाग़दार कर दिया। 
दिल्ली पुलिस महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशील होने का दावा करते थकती नहीं है। लेकिन इस मामले ने पुलिस के दावे की धज्जियां उड़ा दी। पुलिस को शर्मसार करने वाले इन पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज न करने से पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की काबलियत और भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है। 
एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा लड़की को थप्पड़ मारने और इंस्पेक्टर नवीन राठी द्वारा लड़की के पिछले हिस्से में डंडा घुसाने का दृश्य पूरी दुनिया देख रही है।
गृहमंत्री अमित शाह धृतराष्ट्र मत बनो। इन दोनों अफसरों को जेल भेज कर वर्दी वाले गुंडों को सबक सिखाओ। 
गृहमंत्री जिम्मेदार-
वैसे तो दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ/आरएएफ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर जो जुल्म किए हैं उसके लिए सीधे तौर पर गृहमंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी/जवाबदेही बनती है क्योंकि दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ उनके मातहत है। लेकिन उनसे नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की उम्मीद करना बेकार है। 
लड़कियों से बदसलूकी/ मारपीट करने वाले पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न करने से बेटी बचाओ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग गया है। 
कमिश्नर जिम्मेदार -
पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार को पद से हटाया जाना चाहिए था। लेकिन वह गृहमंत्री अमित शाह के चहेते है इसलिए उन्हें भी अब तक हटाया नहीं गया। अनुराग कुमार अगर गृह मंत्री के चहेते न होते तो, अगमू कैडर में उनसे सीनियर आईपीएस अधिकारियों को दरकिनार कर उन्हें 17 जुलाई को आनन फानन में कमिश्नर नहीं बनाया जाता। वैसे कमिश्नर अनुराग कुमार पर छात्रों की पिटाई का दाग तो लग ही गया। पुलिसिया जुल्म की जब भी बात होगी कमिश्नर अनुराग कुमार का नाम लिया जाएगा। 
आईपीएस सत्ता के लठैत मत बनो-
आईपीएस सिर्फ बातें ही ईमानदारी/कर्तव्य/कानून/संविधान पालन की करते हैं और बकायदा शपथ भी लेते है। लेकिन उनका आचरण बिल्कुल इसके विपरीत होता हैं। ये जनता के सेवक नहीं, बल्कि राजनेताओं के गुलाम/ दास की तरह व्यवहार और काम करते हैं। चाहे सरकार किसी भी दल की हो महत्वपूर्ण पद पाने के लिए आईपीएस सत्ता के लठैत बन कर खाकी को खाक में मिलाने से भी बिल्कुल नहीं हिचकते। कांग्रेस के शासन में साल 2011 में रामलीला मैदान में रात में सो रहे लोगों पर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर बृजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में लाठीचार्ज किया गया था। तब सलवार  पहन कर भाग रहे रामदेव को पुलिस ने पकड़ा था। 

गृहमंत्री अमित शाह में अगर जरा सी भी इंसानियत, संवेदनशीलता, नैतिकता है तो कमिश्नर अनुराग कुमार को पद से हटा देना चाहिए। एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा और इंसपेक्टर नवीन राठी जैसे पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। लड़कियों के साथ बदसलूकी/यौन उत्पीड़न और पिटाई करने वाले संदीप लांबा और नवीन राठी जैसे नामर्दो की जगह जेल है। इन दोनों पुलिस अफसरों की अगर ईमानदारी से जांच की जाए तो इनके भ्रष्टाचार के मामले भी उजागर हो सकते है। 
संदीप लांबा और नवीन राठी ने अगर अपनी माँ का दूध पिया है तो वर्दी उतार कर ऐसी हरकत करके दिखाओ। तब छात्र तो दूर छात्राएं ही इनके पिछवाड़े में इनका ही डंडा घुसेड़ देंगी। 
समाज को भी ऐसे अफसरों का बहिष्कार करना चाहिए। 
जनता को आत्म रक्षा का हक़-
वैसे एक कानून बनाया जाना चाहिए, जिसमें यह प्रावधान किया जाए कि अगर कोई पुलिसकर्मी किसी निहत्थे, बेकसूर की पिटाई करता है तो जनता को भी अपनी आत्मरक्षा/ बचाव में उस पुलिसकर्मी को पिटने का हक होना चाहिए। आत्मरक्षा में ऐसा कदम उठाने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होना चाहिए। 
कोई निरंकुश, भ्रष्ट पुलिसकर्मी अगर कानून अपने हाथ में लेता है तो उसे विभाग की ओर से बिल्कुल भी सुरक्षा या संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उसके ख़िलाफ़ अपराधी की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए। कानून का पालन न करने वाले कानून के रखवाले को तो आम अपराधी से भी ज्यादा सज़ा मिलनी चाहिए।
ऐसे वर्दी वाले गुंडों के कारण ही पुलिस की छवि दिनों दिन खराब हो रही है और आम आदमी पुलिस से नफ़रत करते हैं। ऐसे कायर पुलिसकर्मी सिर्फ लड़कियों, बच्चों, छात्रों और असहाय लोगों को पीट कर अपनी बहादुरी दिखा सकते है। जबकि जहां बहादुरी दिखाना चाहिए वहां पीठ दिखा कर भाग जाते हैं। 
आईपीएस कितने बहादुर ? -
 साल 2019 में तीस हजारी अदालत परिसर में कुछ गुंडे वकीलों ने पुलिसकर्मियों की छाती पर जो तांडव किया था। तब इनकी बहादुरी/ मर्दानगी कहां चली गई थी? 
मोनिका भारद्वाज आईपीएस-
तब उत्तर जिले की तत्कालीन डीसीपी मोनिका भारद्वाज हाथ जोड़कर कायरों की तरह जान बचा कर भागी थी। मोनिका भारद्वाज ने बदसलूकी करने वाले गुड़े वकीलों के ख़िलाफ़ एफआईआर तक दर्ज करने की हिम्मत नहीं दिखाई। 
तत्कालीन एडिशनल डीसीपी हरेन्द्र कुमार को वकीलों ने जमीन पर गिरा-गिरा कर पीटा था। तब पुलिसकर्मियों के हाथों में शायद लकवा लग गया होगा, इसलिए पलटवार नहीं किया। इनके हाथ सिर्फ बेकसूरों पर ही उठते हैं। 
नाकारा कमिश्नर-
तत्कालीन नाकारा कमिश्नर अमूल्य पटनायक और तत्कालीन डीसीपी मोनिका भारद्वाज घायल पुलिसकर्मियों का हाल चाल पूछने तक नहीं गए थे। पहली बार दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर पुलिसकर्मियों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था।
अतुल ठाकुर आईपीएस-
उत्तर पूर्वी जिले के तत्कालीन डीसीपी अतुल ठाकुर का गिरेबान सांसद मनोज तिवारी ने पकड़ा था, सारी दुनिया ने ये दृश्य देखा। लेकिन पलटवार करना तो दूर आईपीएस अतुल ठाकुर की मनोज तिवारी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की भी हिम्मत नहीं हुई। ऐसे आईपीएस सिर्फ जनता और अपने मातहतों के सामने ही खुद को बड़ा बहादुर दिखाते है। 
जंतर मंतर पर मधुर वर्मा-
जंतर मंतर पर मध्य रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा को भी तैनात किया गया। ये वही मधुर वर्मा हैं, जिनकी गुंडागर्दी ने 2019 में मीडिया में सुर्खियां बटोरी थी। नई दिल्ली जिले के डीसीपी के पद पर रहते हुए मधुर वर्मा के ख़िलाफ़ ट्रैफिक पुलिस के इंस्पेक्टर कर्मवीर मलिक ने पिटाई करने की बकायदा विजिलेंस में शिकायत की थी। लेकिन तत्कालीन नाकारा कमिश्नर अमूल्य पटनायक और गृह मंत्रालय ने मधुर वर्मा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की। मधुर वर्मा जब उत्तर जिले में डीसीपी थे तब सदर बाजार थाना के तत्कालीन एसएचओ अनिल समोता को जलील करने का मामला भी चर्चा में आया था। वैसे मधुर वर्मा के कारनामों की गूंज चंडीगढ़ में भी रही है। जो आईपीएस अपने मातहतों तक ऐसा व्यवहार करता रहा है। ऐसे आईपीएस मधुर वर्मा को जंतर मंतर पर तैनात किया गया था। 















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