लालकिला फिदायीन हमला: 10 आतंकियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल
इंद्र वशिष्ठ,
लाल किला के सामने 10 नवंबर 2025 को हुए फिदायीन कार बम विस्फोट मामले में एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पृष्ठों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है। बम धमाके से 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दायर आरोप पत्र के अनुसार, मुख्य आरोपी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी सहित सभी 10 आरोपियों का संबंध अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीयूएच) संगठन से था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) की एक शाखा है। हमला करने वाला पुलवामा निवासी फिदायीन डॉ. उमर उन नबी फरीदाबाद (हरियाणा) के अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन में पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर था, के खिलाफ आरोपों को समाप्त करने का प्रस्ताव है।
डॉ. नबी के अलावा, आरोपपत्र में जिन अन्य लोगों के नाम हैं, वे हैं: आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुज़मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार। आरोपपत्र में 588 गवाहों के बयान , 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से अधिक जब्त की गई सामग्रियों के रूप में विस्तृत साक्ष्य शामिल हैं।
जिहादी साजिश-
एनआईए का दावा है कि विस्तृत वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के माध्यम से एक बड़ी जिहादी साजिश का पर्दाफाश किया गया है आरोपी, जिनमें से कुछ कट्टरपंथी डाक्टर थे, ने इस घातक हमले को अंजाम देने के लिए एक्यूआईएस/एजीयूएच की विचारधारा से प्रेरणा ली थी।
ऑपरेशन हेवनली हिंद-
2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक में, आरोपियों ने तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान हिजरत करने के असफल प्रयास के बाद, एजीयूएच आतंकी संगठन को "एजीयूएच अंतरिम" के रूप में पुनर्गठित किया था। नवगठित संगठन के तत्वावधान में, उन्होंने भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून लागू करने के उद्देश्य से "ऑपरेशन हेवनली हिंद" शुरू किया था।
एनआईए की जांच में पता चला कि ऑपरेशन हेवनली हिंद के तहत, आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, सक्रिय रूप से एजीयूएच की हिंसक जिहादी विचारधारा का प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद का जखीरा जमा किया और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रसायनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर विस्फोटक बनाए। आरोपियों ने विभिन्न प्रकार के बम (आईईडी) भी बनाए और उनका परीक्षण किया था। विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (टीएटीपी) था, जिसे आरोपियों ने गुप्त रूप से घटक सामग्री प्राप्त करके और विस्फोटक मिश्रण को परिपूर्ण बनाने के लिए प्रयोग करके तैयार किया था।
डीएनए से पहचान-
एनआईए ने डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के माध्यम से मृतक आरोपी की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में की। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद में भी शामिल थे, जिनमें एके-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौलें शामिल थीं।
ड्रोन से हमला-
आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से रॉकेट और ड्रोन से लैस आईईडी का परीक्षण किया था।
आरोपियों की देश के अन्य हिस्सों में भी अपने अभियान का विस्तार करने की योजना थी, जिसे आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ ने नाकाम कर दिया।
इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और एनआईए उन फरार आरोपियों की तलाश जारी रखे हुए है जिनकी भूमिका जांच के दौरान सामने आई थी।
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