Saturday, 16 May 2026

182 करोड़ की 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद, अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़ा एक सीरियाई नागरिक भी गिरफ्तार,हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह

 227 किलो जिहादी ड्रग कैप्टागॉन जब्त
 सीरियाई नागरिक गिरफ्तार

हर ग्राम ड्रग पर सख्ती से कार्रवाई करेंगे: अमित शाह 


खूंखार बनाने वाली जिहादी ड्रग कैप्टागॉन 



इंद्र वशिष्ठ, 
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन रेजपिल के तहत कैप्टागॉन की तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट/पाउडर जब्त किया गया। एजेंसियों ने पहली बार जिहादी ड्रग कैप्टागॉन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 182 करोड़ रुपये है। सिंडिकेट से जुड़े अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागॉन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।
चपाती मशीन में ड्रग्स-
एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त सूचना के आधार पर एनसीबी ने नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की पहचान की। 11 मई 2026 को मकान की तलाशी के दौरान एक चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी गई लगभग 31.5 किलोग्राम
कैप्टागॉन टैबलेट बरामद की गई, जिसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सीरियाई नागरिक 15.11.2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12.01.2025 को समाप्त हो गया और वह अवैध रूप से यहाँ रह रहा था। उसने नेब सराय में मकान किराये पर लिया था।
ऊन की आड़ में ड्रग्स-
आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोकैप्टागकैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। इस कंटेनर को भेड़ की ऊन से भरा हुआ बताकर सीरिया से आयात किया गया था। कंटेनर की गहन तलाशी के दौरान तीन बैगों में छिपाकर रखे गया 196.2 किलोग्राम कैप्टागॉन पाउडर बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था, जहां कैप्टागॉन का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। 
कोकीन-
हाल ही में मुंबई में एनसीबी द्वारा की गई एक अन्य बड़ी कार्रवाई  में इक्वाडोर से आए कंटेनर में छिपाकर रखी गई 349 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन बरामद की गई थी। यह इस बात को उजागर करता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के लिए व्यावसायिक कार्गो और कंटेनर आधारित व्यापार मार्गों का दुरुपयोग बढ़ रहा है।
ड्रग के ख़िलाफ़ सख्ती-
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मध्य-पूर्व जा रहे ड्रग की इस खेप को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के उदाहरण हैं। भारत में आने वाली या हमारे देश को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करके बाहर जाने वाली हर ग्राम ड्रग पर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे।  
जिहादी ड्रग-  
मध्य-पूर्व देशों के युद्धग्रस्त इलाकों और आतंकी संगठनों के लड़ाकों के बीच इसके इस्तेमाल की वजह से इसे जिहादी ड्रग कहा जाता है। इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान को दर्द, डर या थकान का एहसास कम हो जाता है. यही वजह है कि इसे लड़ाई और हिंसक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता रहा है। कैप्टागॉन एक ऐसा नशा है जो शरीर में जबरदस्त ऊर्जा भर देता है।इसे लेने के बाद इंसान लंबे समय तक जाग सकता है, थकान महसूस नहीं होती, फोकस बढ़ जाता है और दिमाग में एक अलग तरह का जोश और खुशी महसूस होती है। 
मौत का डर खत्म -
सीरिया के एक पूर्व विद्रोही लड़ाके ने बताया था कि युद्ध के दौरान कैप्टागॉन क्यों इतना खतरनाक साबित हुआ। सीरियाई लड़ाके के मुताबिक, ब्रिगेड कमांडर ने हमें यह गोली दी और कहा कि इससे ताकत मिलती है। पहली बार लेने पर लगा कि शरीर में जबरदस्त एनर्जी आ गई है। सामने 10 लोग भी हों तो उन्हें पकड़कर मार सकते हो। नींद नहीं आती, डर खत्म हो जाता है, थकान महसूस नहीं होती। अगर कमांडर कहे कि सैन्य बैरक में घुस जाओ, तो बिना डर के अंदर चले जाओगे। 
इसी वजह से कैप्टागॉन को जिहादी ड्रग भी कहा जाता है। हालांकि यह सिर्फ आईएसआईएस या बंदूक उठा चुके लड़ाकों तक सीमित नहीं है। पूरे मध्य-पूर्व में यह ड्रग काफी लोकप्रिय है, खासकर उन देशों में जहां शरीयत कानून के कारण शराब पर पाबंदी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टागॉन 1980 के दशक से ही अमीर और युवा वर्ग के बीच काफी पसंद किया जाता रहा है। इसे लोग पार्टी ड्रग और सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवा के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर साल जितनी एम्फेटामाइन ड्रग्स पकड़ी जाती हैं, उनमें से एक-तिहाई सिर्फ सऊदी अरब में बरामद होती है। रिपोर्ट में बताया गया कि सऊदी अरब में नशे की लत का इलाज करा रहे करीब 75 प्रतिशत लोग कैप्टागॉन के आदी हैं।

(इंद्र वशिष्ठ दिल्ली में 1989 से पत्रकारिता कर रहे हैं। दैनिक भास्कर में विशेष संवाददाता और सांध्य टाइम्स (टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप) में वरिष्ठ संवाददाता रहे हैं।)














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