Friday, 10 September 2021

कमिश्नर आते-जाते रहते हैं, SHO जमे हुए हैं। ईमानदार,काबिल IPS ही SHO पर लगाम लगा सकते हैं।

             कमिश्नर राकेश अस्थाना 

पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने 14 SHO को थानों से हटा दिया। 
23 इंस्पेक्टरों को SHO के पद पर तैनात किया गया है। एक एसएचओ का थाना बदला गया है।
राजौरी गार्डन SHO अनिल शर्मा और कीर्ति नगर SHO देवेंद्र यादव को भी हटा दिया।
दो महीने के भीतर 9 एसएचओ को निलंबित/लाइन हाजिर भी हाजिर किया जा चुका है।
(अपडेट-20-9-2021)


कमिश्नर आते-जाते रहते हैं, एसएचओ जमे हुए हैं।
पश्चिम दिल्ली में अवैध शराब और जुए के अड्डे।  कमिश्नर ने SHO क्यों नहीं हटाए?
कमिश्नर की भूमिका पर सवालिया निशान।


इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना द्वारा कई एसएचओ को निलंबित या लाइन हाजिर किया गया है। यह मामले पुलिस का असली चेहरा पेश करने के लिए पर्याप्त है। इससे एक बार फिर यह साबित हो गया कि पुलिस संगीन अपराध की भी एफआईआर आसानी से दर्ज नहीं करती और पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत भी होती है।
कमिश्नर की प्राथमिकता।-
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की नीयत और प्राथमिकता अगर वाकई बेसिक पुलिससिंग हैं तो उन्हें एसएचओ नियुक्त करने की प्रक्रिया में भी सुधार करना चाहिए। 
दिल्ली के थानों में ऐसे एसएचओ भी हैं जो कई सालों से एसएचओ के पद पर ही जमे हुए हैं। कमिश्नर आते जाते रहते हैं लेकिन यह एसएचओ जमे रहते हैं। इनके सिर्फ़ थाने बदलते हैं।
भ्रष्टाचार का बोलबाला-
अपराध को दर्ज न करना,अपराधियों को संरक्षण देना सबसे बड़ी समस्या है। अवैध शराब का धंधा, सट्टेबाजी, अवैध पार्किंग, अवैध निर्माण, विवादित संपत्ति ,पैसे के लेन देन के विवाद के मामले आदि भी पुलिस की कमाई का सबसे बड़ा जरिया माने जाते हैं। इसी वजह से पुलिस में भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
जिन कारणों से पुलिस कमिश्नर ने एसएचओ को निलंबित या लाइन हाजिर किया है वह ही असली समस्या और भ्रष्टाचार की जड़ भी है। कमिश्नर अगर वाकई पुलिस में कोई सुधार करना चाहते हैं तो उन्हें इस जड़ पर ही वार करना चाहिए। 
आंकड़ों की बाजीगरी बंद हो-
अपराध को कम दिखाने के लिए  मामलों को दर्ज न करना या हल्की धारा में दर्ज करने की परंपरा को बंद करना चाहिए। 
अपराध के सभी मामलों को सही तरह दर्ज किए जाने से ही अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। 
लेकिन अपराध को दर्ज न करना एसएचओ से लेकर  कमिश्नर/आईपीएस अफसर तक सभी के अनुकूल है।
आंकड़ों की बाजीगरी से अपराध कम होने का दावा कर वह खुद को सफल अफसर दिखाते हैं। जबकि अपराध को दर्ज न करके पुलिस एक तरह से अपराधी की मदद करने का गुनाह ही करती है।
अपराध सही दर्ज होने पर ही अपराध और अपराधियों की सही तस्वीर सामने आएगी। तभी अपराध और अपराधियों से निपटने की  कोई भी योजना सफल हो सकती है। अभी तो आलम यह है कि मान लो कोई लुटेरा पकड़े जाने पर सौ वारदात करना कबूल कर लेता है लेकिन उसमें से दर्ज तो दस ही पाई जाएगी । अगर सभी सौ वारदात दर्ज की जाती तो लुटेरे को उन सभी मामलों में जमानत कराने में ही बहुत समय और पैसा लगाना पड़ता। लुटेरा ज्यादा समय तक जेल में रहता। 
इस तरह अपराध और अपराधी पर काबू किया जा सकता है।
अफसरों पर दबाव जरूरी-
अपराध के सभी मामले दर्ज होंगे तो तभी एसएचओ,एसीपी और डीसीपी पर अपराधियों को पकड़ने का दबाव बनेगा। 
एसएचओ पर जब मामले दर्ज करने और अपराधियों को पकड़ने का पुलिस का मूल काम करने का दबाव होगा, तो ऐसे में वह ही एसएचओ लगेगा जो वाकई मूल पुलिसिंग के काबिल होगा।
मूल काम ही नहीं करती पुलिस-
अभी तो आलम यह है कि लूट,स्नैचिंग, मोबाइल /पर्स चोरी आदि के ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं किए जाते। पुलिस चोरी गए वाहन को तलाश करने की कोई कोशिश नहीं करती। आलम तो यह है कि वाहन चोरी की सूचना पर पुलिस मौके पर भी नहीं जाती।
आईपीएस  भी यह कह कर पल्ला झाड़ लेते है कि  वाहन मालिक को बीमा की रकम तो मिल ही जाती है।
आईपीएस अफसरों के ऐसे कुतर्क से उनकी काबिलियत पर सवालिया निशान लग जाता। पुलिस का काम अपराधियों को पकड़ना होता है।  लेकिन पुलिस अपना मूल काम ही नहीं करती। इसीलिए लुटेरे और वाहन चोर बेखौफ हो कर अपराध कर रहे है।
पुलिस सिर्फ वसूली के लिए है?-
पुलिस अगर अपराध ही सही दर्ज न करे या अपराधियों को पकड़ने की कोशिश ही न करें तो क्या पुलिस सिर्फ़ अवैध वसूली,भ्रष्टाचार और लोगों से बदसलूकी करने के लिए ही है।
ऐसे में तो अब एसएचओ की नौकरी आराम से वसूली करने और अपने आकाओं की फटीक करने की ही रह गई लगती है। 
राकेश अस्थाना के पास मौका है-
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने कहा कि बेसिक पुलिसिंग उनकी प्राथमिकता है। राकेश अस्थाना की विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण एक अलग छवि बनी हुई है। लेकिन अब राकेश अस्थाना के पास अपनी पेशेवर काबिलियत की छाप छोड़ने का मौका है।
एसएचओ के कारण आत्महत्या की-
पांडव नगर थाने के एसएचओ विद्या धर को लाइन हाजिर किया गया।
इस थाने में तैनात होम गार्ड बृज लाल का शव  पंखे से लटकता पाया गया था। बृज लाल के परिवार ने एसएचओ विद्याधर सिंह पर बृजलाल को प्रताडित करने के आरोप लगाए हैं।
4 जून 2021 को पांडव नगर थाने की छत पर एसआई राहुल ने सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। राहुल के परिजनों ने भी एसएचओ पर प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था। परिजनों ने एसएचओ पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
यौन उत्पीड़न के आरोपी को एसएचओ क्यों लगाया?-
23 मार्च 2018 को जेएनयू छात्रों के प्रदर्शन  के दौरान अंग्रेजी अखबार की पत्रकार ने आरोप लगाया कि दिल्ली कैंट थाने के एसएचओ विद्या धर ने सरेआम उसका यौन उत्पीडन/ इज्जत पर हमला किया।  26 मार्च को एसएचओ विद्या धर के खिलाफ यौन उत्पीडन का मामला आईपीसी की धारा 354 ए के तहत दर्ज किया। इसके बावजूद एसएचओ को गिरफ्तार नहीं किया गया। उसे सिर्फ लाइन हाजिर किया गया।
छेडख़ानी का आरोप पहले भी लगा-
वर्ष 2008 में  विद्याधर सिंह द्वारका सेक्टर-23 थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।
उस दौरान एसआई विद्या धर पर एक युवती ने छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था।
आईपीएस की भूमिका पर सवाल-
ऐसे गंभीर आरोप लगने के बावजूद इंस्पेक्टर विद्याधर को एसएचओ जैसे पद पर तैनात कर देने के लिए तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सच्चिदानंद श्रीवास्तव, अमूल्य पटनायक और वह आईपीएस अफसर जिम्मेदार हैं जिन्होंने उसे एसएचओ लगाने के लिए सिफारिश की थी।
छह बार एसएचओ -
वसंत विहार एसएचओ सुनील मित्तल को हाल ही में लाइन हाजिर किया गया है। साल 2018 में माया पुरी थाने के तत्कालीन एसएचओ सुनील को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने के लिए सीबीआई ने ऐसी घोर लापरवाही बरती थी कि एसएचओ तो पकड़ा नहीं गया उल्टा हाथ आया एएसआई भी सीबीआई की हिरासत से भाग गया था। 
उस समय कमिश्नर ने सुनील के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उसे मायापुरी से नजफगढ़ और फिर वसंत विहार का एसएचओ बना दिया गया। सीबीआई ने अब पुलिस कमिश्नर से सुनील मित्तल और एएसआई के खिलाफ विभागीय जांच करने के लिए कहा तब जाकर उसे लाइन हाजिर किया गया है। सुनील छह बार एसएचओ रहा है। 
एसएचओ निलंबित क्यों नहीं किया?-
पहाड़ गंज के एसएचओ विशुद्धानन्द झा को लाइन हाजिर किया गया और सिपाही अमित कुमार को नौकरी से बर्खास्त किया गया है। इलाके में संगठित अपराध करने वालों को शह देने / मिलीभगत के आरोप में यह कार्रवाई की गई है। पुलिस की मिलीभगत से संगठित अपराध हो रहा था तो एसएचओ को भी निलंबित क्यों नहीं किया गया।
डीसीपी ने बुलाया एसएचओ नहीं आया-
रोहिणी जिले में विजय विहार थाने के  एसएचओ सुधीर कुमार को शराब के नशे में 
सब-इंस्पेक्टर उमेश को गालियां देने के कारण 
निलंबित किया गया। एसएचओ की अलमारी में शराब की 10 बोतलें मिली।
शराब पीकर अपने मातहत पुलिसकर्मियों को गालियां देने वाला जो एसएचओ अपने डीसीपी के बुलाने पर भी हाजिर नहीं होता ,वह भला आम लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता।
इसका मूल कारण यह है कि पैसे या सिफारिश के दम पर जब तक एसएचओ लगाए जाएंगे तो ऐसा ही होगा। 
ऐसे एसएचओ कानून, पुलिस और जनता के प्रति वफादार नहीं होते। इनकी निष्ठा सिर्फ उस आईपीएस या नेता के प्रति होती हैं जो इन्हें एसएचओ लगवाते हैं।
एसएचओ ने एफआईआर दर्ज नहीं की-
एसएचओ कितने निरंकुश हो गए हैं इसका ताजा उदाहरण पूर्वी जिले का सनसनीखेज मामला भी है। अजीत 4 जून को लापता हो गया उसके परिजन न्यू अशोक नगर थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराने गए लेकिन उनकी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें पता चला कि पांडव नगर थाने के सिपाही मोनू सिरोही ने अजीत को पीटा और अपहरण कर लिया।
यह खुलासा होने पर 27 जुलाई को पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज की। सिपाही मोनू और उसके 3 साथियों को अजीत की हत्या के आरोप मे किया गया। एसएचओ प्रमोद कुमार को निलंबित किया गया।  
कमिश्नर और आईपीएस अफसर दावा करते हैं कि एफआईआर आसानी से दर्ज की जाती है लेकिन इस मामले ने उनके दावे की धज्जियां उड़ा दी।
जुगाडू एसएचओ जमे हैं,
पश्चिम जिला पुलिस के सतर्कता विभाग के एसीपी ने जांच में पाया कि राजौरी गार्डन थाने के एसएचओ अनिल कुमार शर्मा और ख्याला थाने के एसएचओ गुरसेवक सिंह इलाके में अवैध शराब की बिक्री और जुए जैसे अपराध को रोकने में पूरी तरह विफल है। यह सब गैरकानूनी गतिविधियां पुलिसकर्मियों की जानकारी में है और पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पश्चिम जिला डीसीपी उर्विजा गोयल ने इसे घोर लापरवाही माना। लेकिन इसके बावजूद एसएचओ जमे हुए हैं। अनिल शर्मा कई वर्षों से एसएचओ के पद पर ही है। 
सूत्रों के अनुसार कीर्ति नगर एसएचओ देवेंद्र यादव के खिलाफ वरिष्ठ अफसरों को शिकायतें मिली हैं।
 डीसीपी उर्विजा गोयल भी उसे हटवाना चाहती है लेकिन जुगाडू देवेंद्र यादव जमा हुआ है। 
देवेंद्र यादव भी लगातार कई वर्षों से एसएचओ के पद पर ही है


अपडेट-20-9-2021
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने 14 SHO को थानों से हटा दिया। 
23 इंस्पेक्टरों को SHO के पद पर तैनात किया गया है। एक एसएचओ का थाना बदला गया है।
राजौरी गार्डन SHO अनिल शर्मा और कीर्ति नगर SHO देवेंद्र यादव को भी हटा दिया।
दो महीने के भीतर 9 एसएचओ को निलंबित/लाइन हाजिर भी हाजिर किया जा चुका है।


Thursday, 9 September 2021

CBI ने कस्टम की रिश्वतखोर एडिशनल कमिश्नर पारुल गर्ग,सुपरिटेंडेंट धर्मवीर को गिरफ्तार किया।62 लाख रुपए बरामद।



CBI ने कस्टम  के रिश्वतखोर एडिशनल कमिश्नर और सुपरिटेंडेंट को गिरफ्तार किया।
62 लाख रुपए बरामद।


इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने घूसखोरी के मामलें मेंं कस्टम  विभाग के एडिशनल कमिश्नर और सुपरिटेंडेंट को गिरफ्तार  किया है।
सीबीआई के प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया  ने 1.30 लाख रुपए की घूसखोरी के मामलें में सीमा शुल्क विभाग की अपर आयुक्त पारुल गर्ग और अधीक्षक धर्मवीर को गिरफ्तार किया गया है।

सीबीआई ने एक शिकायत के आधार पर सीमा शुल्क, अमृतसर (पंजाब) के अधीक्षक धर्मवीर सिंह के  विरुद्ध मामला दर्ज किया। 
आरोप है कि शिकायतकर्ता (जो कि मण्डी, गोबिन्दगढ़ में साझा फर्म चलाता है एवं कबाड़  के आयात के व्यापार में है) कबाड़ से भरे अपने दो कन्टेनरों को छुड़ाने हेतु अधीक्षक धर्मवीर के पास गया।
अधीक्षक ने 1.50 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की और शिकायतकर्ता को बताया कि उक्त रिश्वत राशि अपर आयुक्त, सीमा शुल्क, सानेहवाल के साथ भी साझा की जाएगी। बाद में, रिश्वत राशि घटाकर 1.30 लाख रुपए की गई।
सीबीआई ने जाल बिछाया और अधीक्षक धर्मवीर को 1.30 लाख रुपए की रिश्वत की मांग करने व स्वीकार करने के दौरान रंगे हाथ पकड़ लिया। इस मामले में अपर आयुक्त पारुल गर्ग सीमा शुल्क, लुधियाना की रिश्वत मामलें में कथित रुप से भूमिका सामने आई और उन्हे भी गिरफ्तार किया गया। पारुल गर्ग भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 2008 बैच की हैं।
62 लाख रुपए बरामद-
सीबीआई ने लुधियाना, होशियारपुर, चण्डीगढ़ में दोनो आरोपियों के परिसरों में तलाशी ली। तलाशी के दौरान, अपर आयुक्त पारुल गर्ग के परिसर से 59.40 लाख रुपए नकद और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए। अधीक्षक धर्मवीर के परिसर से 2.60 लाख रुपए नकद एवं कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए।

दोनों गिरफ्तार आरोपियों को सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, मोहाली (पंजाब) की अदालत में पेश किया गया।

Tuesday, 7 September 2021

पांडव नगर थाने का SHO विद्या धर लाइन हाजिर। कमिश्नर और IPS अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान? यौन उत्पीड़न के आरोपी को SHO क्यों लगाया ?



पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना 
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होमगार्ड को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले एसएचओ को गिरफ्तार क्यों नहीं किया? 
कमिश्नर और IPS अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान? 
यौन उत्पीड़न के आरोपी को SHO क्यों लगाया ?



इंद्र वशिष्ठ
पांडव नगर थाने के एसएचओ विद्या धर को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
पांडव नगर थाने में तैनात होम गार्ड बृज लाल का शव कल पंखे से लटकता पाया गया था। सोमवार सुबह बृज लाल ड्यूटी पर थाने आया था। इसके कुछ ही देर बाद उसने फांसी लगा ली। बृज लाल के परिवार ने एसएचओ विद्या धर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
एसएचओ विद्या धर को बृजलाल को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अफसरों के अनुसार एसएचओ के खिलाफ कुछ शिकायत आई है, जिसके बाद लाइन हाजिर करके मामले की जांच के आदेश दे दिए गए है।
थाने के पुलिस कर्मियों से पूछताछ करने के अलावा सीसीटीवी फुटेज से भी मामले की जांच की जा रही है। वहीं सूत्रों का कहना है कि बृजलाल के पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उसने एसएचओ पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
 एसएचओ के कारण आत्महत्या की-
बृजलाल करीब पांच साल से पांडव नगर थाने में तैनात था। बृजलाल के परिजनों ने मीडिया में बताया कि पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन पिछले छह-सात माह से बृजलाल बेहद परेशान थे। वह हमेशा आरोप लगाते थे कि उनका नया एसएचओ उनके साथ गाली-गलौज करने के अलावा हमेशा डांटता रहता है।
सोमवार सुबह बृजलाल ड्यूटी के लिए थाने पहुंच गए। सीसीटीवी में वह 8.05 बजे थाने में प्रवेश करते हुए दिख रहे हैं। इसके बाद करीब 10.17 बजे थाने के एक जवान ने दूसरी मंजिल स्थित कमरे में बृजलाल को पंखे से लटके हुए देखा। मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
इसके बाद बृजलाल के परिवार को  सूचना  दी गई।
सूत्रों के अनुसार एसएचओ बृजलाल को बुरी तरह डांटते रहते थे। इस बात से वह परेशान था, सोमवार को ड्यूटी पर आने के बाद भी उसे डांटा गया था।
मूलरूप से गांव नेगपुर, खुर्जा, बुलंदशहर का रहने वाला बृजलाल पिछले करीब 15-16 साल से किराए के मकान में मयूर विहार की राजबीर कालोनी, ए-ब्लॉक, गली नंबर-4 में रहता था। इसके परिवार में पत्नी किरण के अलावा तीन बेटी नेहा, निशा, नीतू और एक 10 साल का बेटा चाहत है। 

एसआई ने की गोली मार कर खुदकुशी-
4 जून 2021 को पांडव नगर थाने की छत पर एसआई राहुल ने सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। राहुल के परिजनों ने भी एसएचओ पर प्रताडि़त करने का आरोप लगाया था। परिजनों ने एसएचओ पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। 

विद्या धर पर महिला पत्रकार के यौन उत्पीड़न की एफआईआर- 
23 मार्च 2018 को जेएनयू छात्रों के एक प्रदर्शन की कवरेज करने गई अंग्रेजी अखबार  की पत्रकार ने आरोप लगाया कि दिल्ली कैंट थाने के एसएचओ विद्या धर ने सरेआम उसका यौन उत्पीडन/ इज्जत पर हमला किया। लेकिन शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नही की।
वारदात के चौथे दिन 26 मार्च को पुलिस ने महिला पत्रकार की शिकायत पर दिल्ली कैंट थाने के एसएचओ विद्या धर के खिलाफ यौन उत्पीडन का मामला आईपीसी की धारा 354 ए के तहत दर्ज किया। 
एडिशनल डीसीपी की भूमिका-
इस मामले में एक वीडियो में यह खुलासा भी हुआ कि तत्कालीन एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश ने एसएचओ की  हिमायत में महिला पत्रकार को ''समझाने ' की 'जी तोड 'कोशिश की, ताकि वह शिकायत ही दर्ज न कराए। लेकिन महिला अपनी बात पर अडिग रही ।
अफसरों की भूमिका पर सवाल-
 पुलिस ने महिला की शिकायत पर विजिलेंस विभाग द्वारा जांच कराई और उसके आधार पर ही केस दर्ज किया गया है। इसके बावजूद एसएचओ को गिरफ्तार नहीं किया गया। उसे सिर्फ लाइन हाजिर किया गया।
छेडख़ानी का आरोप भी लगा- 
वर्ष 2008 में  विद्याधर सिंह द्वारका सेक्टर-23 थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था। वहां एसएचओ तिलकराज मोंगिया (अब सेवानिवृत्त) थे।
उस दौरान एसआई विद्याधर ने कार में बैठे एक प्रेमी जोड़े को पकड़ लिया था। विद्या धर पर युवती ने छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत तत्कालीन दिल्ली पुलिस आयुक्त से की थी।
इसके बाद एसआई विद्याधर का पहले द्वारका सेक्टर-23 थाने से ट्रांसफर किया गया और उसके बाद विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे। विद्याधर के खिलाफ विभागीय जांच कई वर्ष चली थी। हालांकि उस समय इंस्पेक्टर विद्याधर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
कमिश्नर,आईपीएस की भूमिका पर सवाल- 
ऐसे गंभीर आरोप लगने के बावजूद इंस्पेक्टर विद्याधर को एसएचओ जैसे पद पर तैनात कर देने के लिए तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सच्चिदानंद श्रीवास्तव, अमूल्य पटनायक और वह आईपीएस अफसर जिम्मेदार हैं जिन्होंने उसे एसएचओ लगाने के लिए सिफारिश की थी।
निरंकुश बदतमीज  एसएचओ-
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने हाल ही में विजय विहार थाने के एसएचओ सुधीर कुमार को लाइन हाजिर किया। सब-इंस्पेक्टर उमेश ने आरोप लगाया कि एसएचओ शराब पीकर गालियां दे रहा है। एसएचओ की अलमारी से शराब की दस बोतलें भी मिली।
इन मामलों से पता चलता है कि जो एसएचओ अपने मातहतों से भी बदतमीजी और गाली गलौज करते हैंं वह आम जनता को तो कुछ भी नहीं समझते हैं।

Monday, 6 September 2021

CBI ने ठेकेदारों से रिश्वत लेते हुए तीन इंजीनियरों को गिरफ्तार किया। डाक विभाग और सीपीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की बिलों के भुगतान के बदले रिश्वतखोरी।

सीबीआई ने ठेकेदारों से रिश्वत लेते हुए तीन इंजीनियरों को गिरफ्तार किया।
डाक विभाग और सीपीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने बिलों के भुगतान के बदले रिश्वतखोरी।


इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने घूसख़ोरी के दो अलग-अलग मामलों में डाक विभाग एवं सीपीडब्ल्यूडी के तीन इंजीनियरों को गिरफ़्तार किया है। 
सीबीआई प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया कि पहला मामला, सहायक अभियन्ता (सिविल) कुल भूषण के खिलाफ ठेकेदार की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया।
शिकायतकर्ता (ठेकेदार ) ने डाक घर, एमडीजी भवन, कैथल (हरियाणा ) एवं डाक घर भवन, गुलहा, कैथल का कार्य किया था।
ठेकेदार सहायक अभियन्ता (सिविल ) पोस्टल सब डिविजन, अंबाला में उनके कार्यालय में मिला और लगभग 94,000 रुपए के अपने बिलों के बकाया के भुगतान करने के लिए उनसे निवेदन किया।
आरोपी सहायक अभियंता कुल भूषण ने कथित रूप से बकाया भुगतान करने के बदले में शिकायतकर्ता से दस हजार रुपए की रिश्वत की माँग की।
दस हजार रुपए के चक्कर मे दो इंजीनियर पकड़े गए-
सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी इंजीनियर कुल भूषण को दस हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
 इंजीनियर कुलभूषण से पूछताछ और आगे की जाँच पड़ताल के दौरान, यह भी पता चला कि उक्त रिश्वत की रकम कार्यकारी अभियन्ता ( वर्तमान प्रभारी ) आलोक सक्सेना के साथ साझा की जानी थी। इस पर कार्यकारी अभियंता आलोक सक्सेना को भी गिरफ्तार किया गया।
अंबाला एवं दिल्ली स्थित आरोपियों  के परिसरों की तलाशी ली  गई, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद हुए l 
गिरफ़्तार दोनों इंजीनियरों को पंचकूला (हरियाणा)  की सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 
पचपन हजार लेते पकड़ा-
एक अन्य मामलें में सीबीआई ने कनिष्ठ अभियन्ता, सीपीडब्ल्यूडी, चंडीगढ़ को शिकायतकर्ता से पचपन हजार रुपए की रिश्वत  की माँग करने व स्वीकार करने पर गिरफ़्तार किया गया।
एक ठेकेदार की शिकायत के आधार पर कनिष्ठ अभियन्ता अक्षय कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। 
 शिकायतकर्ता ठेकेदार ने सैक्टर 17, चंडीगढ़ में स्थित एजी ऑफिस, पंजाब भवन में जिम और शिशुगृह के पुनरुद्धार का कार्य किया था।
ठेकेदार कनिष्ठ अभियन्ता अक्षय कुमार से उसके कार्यालय में मिला एवं 14 लाख रुपए के अपने बिलों के भुगतान करने का उनसे निवेदन किया। आरोपी ने कथित रूप से बकाया भुगतान करने के बदले में शिकायतकर्ता से पचपन हजार रुपए की रिश्वत की माँग की।
सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी जूनियर इंजीनियर अक्षय कुमार को शिकायतकर्ता से पचपन हजार रुपए की रिश्वत की माँग करने व स्वीकार करने के दौरान रंगे हाथ पकड़ लिया। चंडीगढ़ एवं दिल्ली स्थित आरोपी के परिसरों में तलाशी ली गईl
गिरफ़्तार आरोपी को चंडीगढ़ के सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।अदालत ने उसे 14  दिन की न्यायिक हिरासत मे भेजा गया।
दोनों मामलों में जाँच जारी है l






Saturday, 4 September 2021

CBI ने रेल कोच फैक्ट्री के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर को एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।


सीबीआई ने रेल कोच फैक्ट्री के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर को रिश्वत लेते हुए पकड़ा।

इंद्र वशिष्ठ
सीबीआई ने एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रेल कोच फैक्ट्री के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर को गिरफ़्तार किया है।
सीबीआई के प्रवक्ता आर सी जोशी ने बताया कि  शिकायतकर्ता से एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग करने एवं स्वीकार करने पर कपूरथला  रेल कोच फैक्ट्री के प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर सुरेश चंद्र मीणा को गिरफ़्तार किया गया।
शिकायतकर्ता ठेकेदार कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में सिविल एवं बागवानी के कार्य करता है। 
एक फीसदी की दर से रिश्वत-
 ठेकेदार प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर से निविदा/भुगतान के संदर्भ में उनके कार्यालय में मिला। उक्त मुलाकात के दौरान, प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर सुरेश चंद्र मीण ने पूर्ण हुए निविदा कार्य और ठेका कार्य को आगे भी जारी करने के बदले में शिकायतकर्ता की फर्म को प्राप्त कुल भुगतान के एक फीसदी की दर से रिश्वत की माँग की। 
ठेकेदार से रिश्वत लेते पकड़ा-
ठेकेदार की शिकायत पर सीबीआई  ने प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर के विरुद्ध मामला दर्ज किया। 
सीबीआई ने कपूरथला में जाल बिछाया और प्रिंसिपल चीफ इंजीनियरआरोपी को एक लाख लेते हुए  रंगे हाथ पकड़ लिया। 
सीबीआई ने कपूरथला और जयपुर स्थित आरोपी के कार्यालयी एवं आवासीय परिसरों में तलाशी ली गई जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए।
जेल -
गिरफ़्तार आरोपी को सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश की अदालत मोहाली(पंजाब) में आज पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।



                

मुकेश अंबानी को डरा कर पैसा वसूलना चाहते थे मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, NIA ने वर्दी वाले गुंडों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

                  सचिन वाजे
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा (अब शिवसेना नेता)
 
मुकेश अंबानी को डरा कर पैसा वसूलना चाहते थे मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट।
NIA ने वर्दी वाले गुंडों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।


इंद्र वशिष्ठ
राष्ट्रीय जांच एजेंसी( एनआईए ) ने मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी स्कार्पियो गाडी खड़ी करने और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले मे अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। 
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट समेत पांच पुलिसकर्मी -
इस मामले में एनआईए ने मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन हिंदू राव वाजे, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा, पुलिसकर्मी सुनील धर्मा माने, रियाजुद्दीन हिशामुद्दीन काजी, पूर्व सिपाही विनायक बालासाहेब शिंदे समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।

साजिश में शामिल-
चार्जशीट मेंं संतोष आत्माराम शेलार, नरेश रमणीक लाल गोर, आनंद पांडुरंग जाधव, मनीष वसंतभाई सोनी और सतीश तिरुपति मोथकुरी उर्फ तानी का भी नाम कथित साजिश रचने वालों में शामिल किया गया है।

डरा कर अंबानी से पैसे वसूलने का इरादा-
एंटीलिया और मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में दायर दस हजार पन्नों के आरोप पत्र ( चार्जशीट ) में एनआईए ने कहा है कि बर्खास्त पुलिसकर्मी सचिन वाजे मशहूर उद्योगपति को डराकर जबरन वसूली करना चाहता था। इसी साल फरवरी में मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया  पास एक स्कॉर्पियो कार से विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे।
वाजे और उसके गिरोह ने मनसुख हिरेन को मौत के घाट उतारा-
सचिन वाजे का मुख्य मकसद आतंक पैदा कर उद्योगपति से पैसे वसूल करना था। बाद में वाजे और उसके साथियों ने मनसुख हिरेन को मौत के घाट उतार दिया, क्योंकि उन्हें संदेह था कि मामला एनआईए के पास जाएगा और मनसुख हिरेन एजेंसी को पूछताछ के दौरान सब कुछ बता सकता है। 
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट बनने की चाह-
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि वाजे जबरन वसूली के माध्यम से अपनी और दूसरों की जेब भरने के अलावा एक बेहतरीन डिटेक्टर और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में अपना दबदबा फिर से हासिल करना चाहता था। इसी वजह से उसने जिलेटिन की छड़ों से लदी स्कॉर्पियो को रखने की साजिश रची और एक बड़े व्यापारिक समूह के अध्यक्ष (अंबानी) को संबोधित करते हुए एक धमकी भरा पत्र भी लिखा।
बर्खास्त-
मुंबई के पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले ने मई में मामले में कथित भूमिका के लिए सचिन वाजे, सुनील माने और रियाजद्दीन काजी को बर्खास्त करते हुए कहा था कि वाजे ने एक प्रसिद्ध उद्योगपति को अपने और दूसरों के लिए पैसों की वसूली करने की कोशिश की, जिसके लिए धमकी भरा पत्र भी लिखा गया था। 
सुपर कॉप-
शुरू में एनआईए ने कहा था कि सचिन वाजे विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो को रखकर और फिर उस मामले को सुलझा कर  सुपरकॉप बनना चाहता था।
गवाहों को सुरक्षा-
तीन सितंबर को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश प्रशांत सित्रे के सामने चार्जशीट पेश की गई है। स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने 20 प्रमुख गवाहों के लिए सुरक्षा की मांग की और अदालत ने इसे मंजूर कर लिया है। पिछले महीने एनआईए ने कोर्ट को बताया था कि इस मामले के गवाहों को धमकी दी गई है। जिसकी वजह से कई गवाह डर गए हैं।
10 आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत-
एनआईए ने कहा कि उसके पास सचिन वाजे, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा, बर्खास्त पीआई सुनील माने, एपीआई रियाजुद्दीन काजी सहित सभी 10 आरोपियों के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य है।
300 से ज्यादा गवाह-
आरोप पत्र  में 300 से ज्यादा गवाहों की गवाही के अलावा डिजिटल और दस्तावेजी सबूत हैं। आरोपियों के खिलाफ विस्फोटक लदी गाडी  रखने की साजिश, उसकी चोरी और मनसुख हिरेन की हत्या के विभिन्न चरणों में शामिल आरोपियों के खिलाफ आपत्तिजनक सबूत सामने आए। मामले में आगे की जांच जारी है।
आईपीसी की धाराएं-
एनआईए ने चार्जशीट आईपीसी की धारा 120बी, 201, 286, 302, 364, 384, 386, 403, 419, 465, 471, 473 और 506, आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25, विस्फोटक पदार्थ कानून की धारा 4 और यूएपीए की धारा 16, 18 और 20 के तहत दायर की है।
 यूएपीए की धारा 20 का मतलब एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना होता है। 
जैश-उल-हिंद -
 चार्जशीट में कथित आतंकी संगठन जैश-उल-हिंद से जुड़े प्रमुख संदिग्ध के बारे में भी उल्लेख किया है। इसी संगठन का नाम सामने आया था, जिसने पहले स्कॉर्पियो रखने का दावा किया था, लेकिन बाद में पीछे हट गया।
 जैश-उल-हिंद का नाम इस्तेमाल करने के पीछे कौन कौन है, इसका पता लगाने के लिए एनआईए की जांच जारी है।
 3 मामलों में दाखिल किए गए आरोप पत्र-
 तीन मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं। पहली एफआईआर स्कॉर्पियो में जिलेटिन छड़ें रखने से संबंधित है। वहीं दूसरी एफआईआर स्कॉर्पियो की चोरी से संबंधित है, जो मनसुख हिरन के नाम पर थी। तीसरी एफआईआर मनसुख हिरन की मौत से जुड़ी है।
अंबानी को धमकी भरा पत्र-
मुकेश अंबानी के घर के पास कार्मिकल रोड पर खड़ी मिली महिंद्रा स्कॉर्पियो एसयूवी में जिलेटिन की 20 छड़ें मिली थी।
साथ ही धमकी भरा एक पत्र। इसमें लिखा था, 'नीता भाभी और मुकेश भैया और फैमिली। एक झलक है यह। अगली बार यह सामान पूरा कनेक्ट होकर आएगा। ओरिजनल गाड़ी में आएगा। तुम्हारी पूरी फैमिली को उड़ाने के लिए इंतजाम हो गया है। संभल जाना। गुड नाइट।'
शुरू में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मामले में जांच शुरू की थी। मनसुख हिरेन की संदिग्ध हालात में मौत के बाद मामले को महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) को स्थानांतरित किया गया। इसके बाद एनआईए को मामले की जांच सौंप दी गई। 
आतंक की गुत्थी अनसुलझी-
इस पूरे मामले में अभी भी एक गुत्थी अनसुलझी है। 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के घर के बाहर स्कॉर्पियो में जिलेटिन मिलने के दो दिन बाद एक मैसेज जैश उल हिंद के नाम से आया, जिसमें उस स्कॉर्पियो में इस आतंकवादी संगठन ने जिलेटिन रखने का दावा किया था। हालांकि कुछ घंटे बाद जैश उल हिंद के नाम से एक और मैसेज आया और खुद को असल जैश उल हिंद बताने वाले ने दावा किया कि उनके संगठन के नाम से भेजा गया मैसेज फर्जी है। साथ ही कहा कि मुकेश अंबानी के घर के बाहर उसके आतंकवादी संगठन ने कोई स्कॉर्पियो नहीं खड़ी की, कोई जिलेटिन नहीं रखा।
तिहाड़ जेल कनेक्शन-
लेकिन 11 मार्च को मुंबई पुलिस की सूचना पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने तिहाड़ जेल में छापा मारा  और वहां से इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े तहसीन अख्तर के पास से कुछ मोबाइल जब्त किए। आरोप लगा कि इन्हीं मोबाइल में से किसी एक से जैश उल हिंद वाला मैसेज किया गया था। सवाल यह है कि जब सचिन वझे को स्कॉर्पियो में जिलेटिन प्लांट करने के मामले में अरेस्ट किया गया है, तो उसी केस में जैश उल हिंद वाली गुत्थी अभी तक क्यों नहीं सुलझी है। शायद आने वाले दिनों में इस रहस्य से भी पर्दा उठेगा।
इस साल 24/ 25 फरवरी की रात 20 जिलेटिन छड़ों से भरी स्कॉर्पियो और एक धमकी भरा पत्र मुकेश अंबानी के घर के पास मिला था। इसके बाद 5 मार्च 2021 को स्कॉर्पियो के मालिक मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा से बरामद किया गया। 
सचिन वाजे पहले भी गिरफ्तार -
सचिन वाजे जब अंधेरी सीआईयू में थे, तब उन पर बम ब्लास्ट आरोपी ख्वाजा युनूस की पुलिस कस्टडी में मौत से जुड़ी साजिश रचने का आरोप लगा था। उस केस में वह 3 मार्च 2004 को गिरफ्तार भी हुए थे। वझे ने बाद  नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। सालों तक पुलिस फोर्स से बाहर रहे वाजे की पिछले साल ही पुलिस फोर्स में वापसी हुई और उन्हें फिर से क्राइम इंटलिजेंस यूनिट यानी सीआईयू में तैनाती दे दी गई।
साल 2003 में बम ब्लास्ट केस में ख्वाजा यूनुस को हिरासत में लिया गया था और उसकी मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि जांच के लिए औरंगाबाद ले जाते वक्त ख्वाजा पुलिस जीप से कूद गया और उसकी मौत हो गई। हालांकि, ख्वाजा की मां आसिया बेगम का कहना है कि उनके बेटे को हिरासत में टॉर्चर किया गया था जिससे उसकी मौत हो गई।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा-
कभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को मुंबई में अपराधियों के लिए मौत का दूसरा नाम माना जाता था। प्रदीप शर्मा के कथित  एनकाउंटर 150 के आसपास बताए जाते है। इंसपेक्टर प्रदीप शर्मा ने जुलाई 2019 में पुलिस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह शिव सेना में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए।
सिपाही - 
मुंबई पुलिस में सिपाही रहा विनायक शिंदे पहले से ही एक फर्जी एनकाउंटर मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उन दिनों वह पैरोल पर बाहर था। चूंकि वह एक समय सचिन वाजे के साथ काम कर चुका था, इसलिए वाजे ने मनसुख मामले में उसे भी अपना साथी बना लिया।










Wednesday, 1 September 2021

मोदी,शाह की नाक के नीचे IPS लुटा रहे सरकारी खजाना, पुलिस कमिश्नर को खुश करने के लिए IPS ने लुटाए 30 लाख रुपएशाही दावत, फूलों की सजावट,वातानुकूलित टैंट।

कमिश्नर को खुश करने के लिए आईपीएस ने तीन दिन मे लुटाए तीस लाख रुपए ?
बिछाया लाल कालीन, सजाए फूल, शाही दावत।
प्रधानमंत्री, गृहमंत्री की नाक के नीचे 
आईपीएस लुटा रहे सरकारी खजाना।


इंद्र वशिष्ठ
कोरोना महामारी के दौर में भी दिल्ली पुलिस के आईपीएस सरकारी खजाने यानी लोगों के टैक्स के पैसों को बेदर्दी से लुटा रहे हैंं।
दिल्ली शहर के नए कोतवाल यानी पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना की शान में लाखों रुपए लुटा दिए गए। 
कमिश्नर के तीन कार्यक्रमों में ही सरकारी खजाने से लगभग तीस लाख रुपए खर्च कर दिए जाने का अनुमान है। 
कमिश्नर का दौरा-
पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने पुलिस अफसरों से मिलने के लिए दक्षिण, मध्य और पश्चिम क्षेत्र का दौरा किया था। अगस्त में क्रमशः दक्षिण, मध्य और पश्चिम जोन में इस सिलसिले में तीन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 
इन कार्यक्रम में जिलों के डीसीपी ने अपने-अपने क्षेत्र की अपराध और कानून एवं व्यवस्था की स्थिति और समस्या आदि से कमिश्नर को अवगत कराया। इन कार्यक्रमों में पुलिस के विशेष आयुक्त,संयुक्त पुलिस आयुक्त,15 जिलों के उपायुक्त, एसीपी, एसएचओ और इंस्पेक्टर स्तर तक के अफसर ही शामिल हुए थे। 
हरेक कार्यक्रम में 150-200 पुलिस अफसरों ने शिरकत की। इस तरह तीनों कार्यक्रमों में 600-700 पुलिस अफसर शामिल हुए।
कमिश्नर का कदम खजाने पर भारी-
कमिश्नर राकेश अस्थाना का इस तरह से एसएचओ स्तर तक के अफसरों से मिलना, सीधे संवाद करना और उनका उत्साह बढ़ाना अच्छा कदम हैं। 
लेकिन इन कार्यक्रमों के आयोजन पर सरकारी खजाने से लाखों रुपए लुटा देने से आईपीएस अफसरों की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया है। 
तीस लाख रुपए ?
एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने बताया कि इन तीनों कार्यक्रमों में भोजन, फूलों/साज सज्जा और टैंट आदि पर लगभग तीस लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। वैसे यह रकम ज्यादा भी हो सकती हैं।
इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता हैं कि एक कार्यक्रम में ही भोजन, साजसज्जा, टैंट आदि पर करीब 10-15 लाख रुपए तक खर्च होने का अनुमान है। जिसमें भोजन पर ही करीब 6 लाख रुपए, लगभग ढाई लाख रुपए टैंट पर, एक लाख रुपए फूलों /साज सज्जा पर , हजारों रुपए का पानी, 30-35 हजार रुपए एअरकंडीशनर पर और हजारों रुपए जनरेटर आदि पर खर्च किया गया है।
एक अफसर से मुलाकात पर पांच हजार रुपए खर्च -
इस हिसाब से ही तीनों कार्यक्रमों पर तीस लाख रुपए खर्च करने का अनुमान है। यानी एक कार्यक्रम पर औसतन दस लाख रुपए खर्च कर दिए गए। मान लें कि हरेक कार्यक्रम में दो सौ अफसरों ने शिरकत की, तो एक अफसर पर औसतन पांच हजार रुपए खर्च किया गया। जिसमें एक अफसर के खाने की प्लेट ढ़ाई हजार की हुई। 
पुलिस कमिश्नर की अफसरों से यह मुलाकात तो सरकारी खजाने पर बहुत ही महंगी साबित हुई है। 
कमिश्नर को खुश करने का चक्कर-
हालांकि एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने बताया कि दक्षिण जिले में आयोजित पहले ही कार्यक्रम की चकाचौंध देख कर ही कमिश्नर राकेश अस्थाना ने साफ कहा था कि इतना सब तामझाम करने की कोई जरूरत नहीं है कार्यक्रम सादगी भरा रखो। मैं साधारण कुर्सी पर भी बैठ सकता हूं। कोई अनावश्यक खर्च करने की जरुरत नहीं है। 
लेकिन इसके बावजूद आईपीएस अफसरों ने कमिश्नर को खुश करने/ चापलूसी के चक्कर में सरकारी खजाने को लुटा दिया।
कमिश्नर जांच कराएं तो पोल खुलेगी-
कमिश्नर राकेश अस्थाना को इस मामले की पूरी जांच करानी चाहिए। बिलोंं का भुगतान पूरी छानबीन करने के बाद ही किया जाना चाहिए।
यह भी मालूम करना चाहिए कि एक ही टैंट वाले/कैटरर से सारे कार्यक्रम कराने के पीछे किन-किन आईपीएस अफसरों का हाथ है। 
सिर्फ़ 600-700 व्यक्तियों के भोजन और टैंट आदि पर ही तीस लाख रुपए लुटा देने की जांच ईमानदारी से की जाए तो असलियत सामने आ जाएगी। 
कमिश्नर को यह भी खुलासा करना चाहिए कि कुल कितनी रकम इन कार्यक्रमों पर खर्च की गई।
किस नियम- प्रक्रिया के तहत लाखों रुपए खर्च किए गए। किस मद या खाते से ऐसे मामलों में रकम का भुगतान किया जाता है।
कमिश्नर यह भी जांच कराएं कि पुलिस के ज्यादातर कार्यक्रम एक ही टैंट वाले/ कैटरर से क्यों कराएं जाते हैं?
इन तीनों कार्यक्रमों के लिए भोजन और टैंट आदि का इंंतजाम टैंटवाले राहुल मेंहदीरत्ता से कराया गया।
सभागार का उपयोग-
नए बने पुलिस मुख्यालय में सभागार भी बनाया गया है जिसमें तीन-चार सौ व्यक्तियों के बैठने की व्यवस्था हैं।
इस सभागार का सदुपयोग करने की बजाए लाखों रुपए लुटा देने से आईपीएस अफसरों की काबिलियत पर भी सवालिया निशान लग जाता है। कमिश्नर के दौरे पर लाखों रुपए लुटाने से तो अच्छा यह होता कि वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से ही पुलिस अफसरों से संवाद/संपर्क कर लिया जाता।
शर्मनाक-
 एक अफसर का कहना है कि कोरोना के दौर में जब लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। ऐसे मे आईपीएस अफसरों का इस तरह सरकारी खजाने को लुटाना शर्मनाक है।
सिर्फ़ चाय,समोसा और बिस्कुट से भी काम चल सकता था।
अफसर की थाली और सिपाही की थाली?
एक वरिष्ठ अफसर कहना है कि आईपीएस अफसरों की यह कैसी मानसिकता हैं कि  अफसरों के खाना पर तो दो- ढ़ाई हजार रुपए प्रति प्लेट तक खर्च किया जाता है।
दूसरी ओर किसी भी सुरक्षा इंतज़ाम में तैनात सिपाहियों के लिए जो खाना दिया जाता है। वह सरकार द्वारा निर्धारित 75 रुपए मूल्य का ही होता है। इतना बड़ा अंतर अमानवीय और भेदभावपूर्ण  हैं।

एसएचओ से फटीक कराना बंद हो-
सरकारी खजाने को लुटाने से रोकने के साथ ही
कमिश्नर अगर वाकई पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले यह कदम उठाना चाहिए कि किसी भी कार्यक्रम के लिए एसएचओ से पैसा खर्च नहीं कराना चाहिए। एसएचओ जाहिर सी बात हैं अपनी जेब से तो पैसे खर्च करेगा नहीं , वह किसी से फटीक कराएगा या पैसा वसूली करेगा। .
क्रिकेट मैचों पर लाखों लुटा रहे आईपीएस -
उदाहरण के लिए कई आईपीएस/ जिले के डीसीपी मीडिया में अपनी छवि बनाने के लिए के लिए पत्रकारों के लिए क्रिकेट मैच के आयोजन करते हैं। जिसमें खिलाड़ियों की किट और भोजन आदि पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसके लिए एसएचओ से भी फटीक कराई जाती है। जाहिर सी बात है कि अगर एसएचओ, आईपीएस के ऊपर एक रुपया भी खर्च करेगा तो अपने लिए तो उसे सौ रुपए वसूलने की छूट मिल जाती हैं। इसी वजह से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। 
भ्रष्टाचार के लिए आईपीएस जिम्मेदार-
सच्चाई यह है कि एसएचओ से अपने निजी कार्यक्रम पर पैसा खर्च करवाने वाला आईपीएस ईमानदार हो ही नहीं सकता। जो पेशेवर रुप से काबिल नहीं होता, वह ही मीडिया में अपनी छवि बनाने के लिए यह सब काम करता है। काबिल आईपीएस सिर्फ़ अपने काम से काम रखता है। उसका तो काम ही बोलता है।
मैचों पर सरकारी खजाने से भी पैसा खर्च किया जाता है तो वह सरकारी खजाने का दुरूपयोग ही है सरकारी खजाने को लुटाना बंद होना चाहिए.
शान दिखाने  वाले आईपीएस-
कुछ आईपीएस अफसर तो अपनी शान शौकत और रुतबा दिखाने के लिए दफ्तर की साज सज्जा पर सरकारी खजाने को लुटाते है। 
करीब दो साल पहले ही बने नए पुलिस मुख्यालय में भी कई वरिष्ठ आईपीएस ने अपने दफ्तरों को बड़ा बनवाने और साज सज्जा के लिए सरकारी खजाने को लुटाया है। अफसर ऐसी हरकत करते हैं जैसे कि पूरी जिंदगी इसी दफ्तर में गुजारेंगे।