सीआरपीएफ के डीआईजी और 2 कर्मियों को 3 साल की सज़ा
इंद्र वशिष्ठ,
सीबीआई कोर्ट (पश्चिम) लखनऊ ने 28 मार्च, 2026 को सीआरपीएफ में सिपाहियों की भर्ती से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में, सीआरपीएफ के तत्कालीन डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) विनोद कुमार शर्मा, सीआरपीएफ कर्मियों सत्यवीर सिंह और तीरथ पाल चतुर्वेदी को दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास और कुल 1.2 लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई।
सीबीआई ने 23 फरवरी, 2009 को, गुप्त सूचना के आधार पर डीआईजी विनोद कुमार शर्मा और अन्य लोगों के ख़िलाफ़ यह मामला दर्ज किया था। जांच में पता चला कि उन्होंने सीआरपीएफ में सिपाही (जनरल ड्यूटी) के पद पर भर्ती चाहने वाले उम्मीदवारों से अवैध रिश्वत लेने के लिए कुछ निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साज़िश रची थी। डीआईजी विनोद कुमार शर्मा ने भर्ती कार्यक्रम और उपलब्ध रिक्तियों के बारे में बिचौलियों को पहले से जानकारी दे दी थी, ये बिचौलिए संभावित उम्मीदवारों को, उनके चयन की गारंटी के बदले, बड़ी रक़म की रिश्वत देने के लिए प्रेरित कर रहे थे। जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 23 नवंबर, 2010 और 16 जुलाई, 2012 को आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दायर किए। पूरी सुनवाई के बाद, माननीय न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें तदनुसार सज़ा सुनाई।
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