कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को उम्रकैद
इंद्र वशिष्ठ
एनआईए की विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (डीईएम) की संस्थापक और अध्यक्ष, अलगाववादी आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और 8 लाख रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई है। आसिया अंद्राबी की सहयोगियों सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की कैद और 7-7 लाख रुपये जुर्माने की सज़ा दी गई है।
इनको 2018 के कश्मीर अलगाववादी साज़िश मामले में सज़ा सुनाई गई है।
डीईएम एक पूरी तरह से महिलाओं का संगठन है, जिसका घोषित उद्देश्य कश्मीर को भारत से अलग करना है।
कश्मीर निवासी इन तीनों महिलाओं को जुलाई 2018 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था। इससे पहले, जनवरी 2026 में, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इन्हें गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। कोर्ट ने इन तीनों आरोपियों को जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के उद्देश्य से डीईएम को सक्रिय रूप से चलाने का दोषी पाया था।
मंगलवार को सुनाए गए फैसले के अनुसार, आसिया को आईपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास और कुल 8 लाख रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई गई है। आसिया की शादी प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी आशिक हुसैन फकतू से हुई थी। फकतू इस समय जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता एच.एन. वांचू की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग थानों में दर्ज 32 अन्य एफआईआर में भी आसिया अंद्राबी का नाम शामिल है।
डीईएम की जनरल सेक्रेटरी नाहिदा नसरीन और इस संगठन की प्रेस सेक्रेटरी सोफी फहमीदा, दोनों को आईपीसी और यूएपीए के अलग-अलग प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया है और एक साथ सज़ा सुनाई गई है। इसमें ज़्यादा से ज़्यादा 30 साल की साधारण कैद और हर एक पर कुल 7 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। सोफी फहमीदा के खिलाफ आठ अन्य मामले दर्ज हैं, जबकि नाहिदा नसरीन के खिलाफ चार मामले दर्ज हैं।
एनआईए की जांच में यह साफ तौर पर साबित हो गया था कि डीईएम की आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को समर्थन देने और उन्हें आगे बढ़ाने में आरोपियों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।
एनआईए की जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने नफरत फैलाने, हिंसा और जिहाद भड़काने के लिए अलग-अलग सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों का इस्तेमाल किया था। उनका मकसद जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना था, जिससे देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा पैदा हो गया था।
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