Friday, 19 September 2025

महरौली थाने का एएसआई गिरफ्तार, कमिश्नर सतीश गोलछा का बड़बोलापन, कथनी और करनी में अंतर , दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर, कमिश्नर ठेंगे पे

  कमिश्नर सतीश गोलछा का बड़बोलापन, 
    कथनी और करनी में अंतर


महरौली थाने का एएसआई गिरफ्तार, 





इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के लगातार पकड़े जाने के बावजूद निरंकुश बेखौफ पुलिसकर्मियों द्वारा वसूली जारी है। 
सतीश गोलछा को कमिश्नर का पद संभाले हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है रिश्वतखोरी के मामले लगातार सामने आ रहें हैं।  पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। इससे वरिष्ठ पुलिस अफसरों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लग जाता है। 

डीसीपी, एसएचओ जिम्मेदार-
पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने पद संभालने के बाद 23 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अफसरों से कहा था कि अब अगर कोई भी पुलिसकर्मी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, तो उसके लिए जिला डीसीपी और एसएचओ भी जिम्मेदार होंगे। लेकिन कमिश्नर की इस बात का भी निरंकुश, बेखौफ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर कोई असर नहीं हो रहा।
बड़बोले कमिश्नर-
कमिश्नर सतीश गोलछा की कथनी और करनी में अंतर साफ़ नज़र आ रहा है। डीसीपी के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई करने की बात करना कमिश्नर का बड़बोलापन दिखलाता है। 
डीसीपी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की तो खैर उनमें हिम्मत नहीं होगी। 
रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के हरेक मामले में कम से कम हरेक एसएचओ को ही हटा कर अपनी बात की कुछ तो लाज रख लें। कमिश्नर द्वारा डीसीपी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बात कहना हास्यास्पद है। 
आईपीएस जिम्मेदार-
वैसे आज के इन हालात के लिए वे आईपीएस अफसर जिम्मेदार है जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ/ फायदों/सेवा के लिए बरसों से भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को पाला पोसा या फलने फूलने का मौका दिया। ऐसे आईपीएस अफसरों ने अगर ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन किया होता, तो भ्रष्टाचार आज नासूर नहीं बन पाता। 

महरौली थाने का एएसआई गिरफ्तार-

दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 18 सितंबर को महरौली थाने में तैनात एएसआई पप्पू राम मीणा और उसके दलाल/बिचौलिए को 5 हजार रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 
घर से मोटर साइकिल उठा ले गया-
शिकायतकर्ता हितेश निवासी नेब सराय का आरोप है कि 10 सितंबर को एक प्रापर्टी डीलर से उसका मामूली विवाद हो गया था। 
झगड़े की पीसीआर कॉल पर एएसआई पप्पू राम मीणा मौके पर गया और उसने जांच बंद/ कॉल फाइल कर दी। 
लेकिन इसके बाद एएसआई पप्पू राम मीणा हितेश के घर गया और ताला तोड़ कर मोटर साइकिल थाने ले गया। 
बाइक छोड़ने के लिए एएसआई पप्पू राम मीणा ने दस हज़ार रुपये रिश्वत मांगी। 
वीरवार शाम को थाने में शिकायतकर्ता से रिश्वत लेते ही के बिचौलिए मोहम्मद शाकिर और एएसआई पप्पू राम मीणा को विजिलेंस यूनिट ने गिरफ्तार कर लिया। बिचौलिया सैलून में काम करता है। 

हौज़ काजी  थाने के एएसआई ने रिश्वत के नोट हवा में उछाल दिए
दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 9 सितंबर को थाना हौज काजी में तैनात एएसआई राकेश कुमार को शिकायतकर्ता से 15,000 रुपये  रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एएसआई राकेश कुमार ने बचने के लिए रिश्वत की रकम हवा में उछाल दी थी। 
डिवीजन अफसर एएसआई राकेश ने बाजार सीता राम, हौज काजी निवासी शिकायतकर्ता को झूठे मामले में न फंसाने के लिए रिश्वत मांगी। रिश्वत लेने के बाद एएसआई राकेश कुमार शिकायतकर्ता के साथ थाने से बाहर आ गया। शिकायतकर्ता का इशारा मिलने पर विजिलेंस टीम एएसआई राकेश को गिरफ्तार करने के लिए लिए आगे बढ़ी, एएसआई राकेश ने भनक लगते ही रिश्वत की रकम लोगों के बीच में हवा में उछाल दी। भीड़ भाड़ में वहां से गुजरने वाले कुछ लोग 5 हजार रुपये उठा कर ले गए। विजिलेंस की टीम सिर्फ 10 हजार रुपये ही मौके से बरामद कर पाई। 

दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर, 

डीसीपी की नाक के नीचे रिश्वतखोरी-
उत्तर पश्चिम जिले के डीसीपी भीष्म सिंह की नाक के नीचे ही 25 अगस्त को वसूली करके बेखौफ पुलिसकर्मियों ने साबित कर दिया कि कमिश्नर और डीसीपी उनके ठेंगे पर हैं। 
कमिश्नर सतीश गोलछा ने अशोक विहार थाने के एसएचओ कुलदीप शेखावत को लाइन हाज़िर कर दिया। 
इस मामले में सस्पेंड किया गया सब-इंस्पेक्टर विशाल मीणा अब तक फरार है। सीबीआई को उसकी तलाश है। 
चिट्ठा मुंशी गिरफ्तार-
सीबीआई ने 25 अगस्त को उत्तर पश्चिम जिले के अशोक विहार थाने में तैनात चिट्ठा मुंशी हवलदार राजकुमार मीणा को एक लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। एसएचओ अपने खास पुलिसकर्मी को ही चिट्ठा मुंशी लगाते हैं। हवलदार राजकुमार मीणा ने सब- इंस्पेक्टर विशाल मीणा की ओर से रिश्वत ली थी। उत्तर पश्चिम जिले के डीसीपी का दफ़्तर और अशोक विहार थाना एक ही इमारत में है।

एएसआई और सिपाही गिरफ्तार-
दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 17 अगस्त, रविवार को वजीरपुर फायर स्टेशन के पास टायर पंचर की दुकान चलाने वाले व्यक्ति दो हजार की रिश्वत लेते हुए पीसीआर वैन में तैनात इंचार्ज एएसआई वी ठाकुर और सिपाही राकेश को गिरफ्तार किया।
पुलिसकर्मी शिकायतकर्ता से एक हजार रुपये मंथली मांग कर रहे थे। शिकायतकर्ता ने रुपये देने की बजाए विजिलें में शिकायत कर दी। 
केस दर्ज करने की धमकी-
विजिलेंस यूनिट ने 8 अगस्त को द्वारका जिले के बिंदापुर थाने में तैनात हवलदार विजय सिंह को 15 हज़ार रिश्वत लेते हुए पकड़ा। 
शिकायतकर्ता से उसके कर्मचारी की वैरीफिकेशन न कराने पर केस दर्ज करने की धमकी दे कर रिश्वत मांगी। 
हवलदार विजय ने शिकायतकर्ता के ऑफिस में काम करने वाले स्टाफ की वेरीफिकेशन के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग की। बाद में वह 15 हजार रुपये लेने पर तैयार हो गया।  
आरोपी ने 15 हजार ले भी लिए। इसके बाद 15 हजार रुपये मंथली की मांग कर दी। 
हवलदार अब दो महीनों के 30 हजार रुपये और मांगने लगा। परेशान होकर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस यूनिट शिकायत कर दी। 
 
सुभाष प्लेस थाने का एसएचओ महेश कसाना लाइन हाज़िर,
शकूर पुर में खुलेआम शराब और सट्टा
पुलिस की मिलीभगत/सांठगांठ के बिना शराब/ड्रग्स/सट्टे का धंधा हो ही नहीं सकता। इस बात की पुष्टि इस मामले से भी होती है। 
उत्तर पश्चिम जिले के सुभाष प्लेस थाने के एसएचओ महेश कसाना को लाइन हाज़िर किया गया है। शकूर पुर इलाके में खुलेआम अवैध शराब बिकने और सट्टा चलने के कारण एसएचओ महेश कसाना को थाने से हटा कर जिला पुलिस लाइन में भेज दिया गया।
एसएचओ महेश कसाना को इसके पहले अप्रैल में सिर्फ फटकार लगा कर बख्श दिया गया था। जिला पुलिस के वरिष्ठ अफसर के अनुसार इस साल अप्रैल में दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने शकूर पुर इलाके में खुलेआम शराब बिकने और सट्टा चलते हुए पाया था। 
उत्तर पश्चिम जिले के डीसीपी भीष्म सिंह ने विजिलेंस की रिपोर्ट मिलने के बाद शकूर पुर इलाके में अवैध शराब बेचने और सट्टा चलाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी। 
फटकार लगा कर बख्श दिया-
एसएचओ महेश कसाना को तब सैंश्योर दिया गया था। सैंश्योर का मतलब आधिकारिक तौर पर किसी को गलत कार्य करने पर डांटना/फटकारना या निंदा/ आलोचना करना भी कहा जाता है। तत्कालीन एसीपी शैलेंद्र चौहान से भी स्पष्टीकरण/ जवाब तलब (एक्सप्लेनेशन) किया गया था। बीट में तैनात तीन पुलिसकर्मियों को बीट से हटा दिया गया था। 
धंधा चालू है- लेकिन कुछ दिन ही बाद शकूर पुर इलाके में दोबारा से शराब बिकने लगी और सट्टा भी शुरू हो गया। विजिलेंस यूनिट ने अब पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी। जिसके आधार पर वीरवार को एसएचओ महेश कसाना को लाइन हाज़िर कर दिया गया।
पहले भी बख्शा गया- सीबीआई ने 2 जनवरी 2025 को उत्तर पश्चिम जिले के सुभाष प्लेस थाने में तैनात हवलदार शिव हरि को खाने की रेहड़ी लगाने वाले सतीश यादव से दस हज़ार रुपए लेते हुए गिरफ्तार किया। उस समय भी एसएचओ महेश कसाना के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

एक करोड़ मांगने वाला इंस्पेक्टर सुनील जैन गिरफ्तार-
इसके पहले पुलिस कमिश्नर पद का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही होमगार्ड के तत्कालीन डीजी शशि भूषण कुमार सिंह के सामने भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है। जिससे पता चलता है कि पुलिस में भ्रष्टाचार कितने चरम पर है। 
उत्तर पश्चिम जिले के डीआईयू में तैनात इंस्पेक्टर सुनील जैन को तीस लाख रुपए लेने के मामले में रोहतक, हरियाणा की एंटी करप्शन ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। 
इंस्पेक्टर सुनील जैन ने अलीपुर थाने में दर्ज दो मामलों को हल्का करने / आरोपी का नाम निकाल देने के लिए एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगी थी। 
तीस लाख लेते गिरफ्तार-
इंस्पेक्टर सुनील जैन की ओर से रिश्वत के तीस लाख रुपए लेते हुए सोनीपत में संदीप को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एंटी करप्शन की टीम इंस्पेक्टर सुनील जैन को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली आई। 
उत्तर पश्चिम जिले के मौर्या एंक्लेव थाना भवन में स्थित डीआईयू के दफ़्तर में जिले के आला अफसरों की मौजूदगी में हरियाणा की एंटी करप्शन ब्रांच के डीएसपी के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सुनील जैन से पूछताछ की गई। इसके बाद शुक्रवार रात को इंस्पेक्टर सुनील जैन को गिरफ्तार करके ले गई। संदीप इंस्पेक्टर सुनील जैन के भाई के सोनीपत जिले में स्थित 3 जी स्कूल में क्लर्क है। 
इंस्पेक्टर सस्पेंड-
उत्तर पश्चिम जिले के डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर सुनील जैन को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके ख़िलाफ़ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। 
वकील ने पकड़वाया-
इस मामले में शिकायतकर्ता वकील विपिन ( गांव बडवासनी, सोनीपत) ने रोहतक, एंटी करप्शन ब्रांच में एक अगस्त को इंस्पेक्टर सुनील जैन के ख़िलाफ़ एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगने का मामला दर्ज कराया। इंस्पेक्टर सुनील जैन और विपिन की बातचीत की रिकॉर्डिंग भी एंटी करप्शन ब्रांच को दिए जाने का शिकायत में दावा किया गया है। 
विपिन के नरेला निवासी रिश्तेदार प्रवीण लाकड़ा के खिलाफ प्रवीण गुप्ता ने अलीपुर थाने में दो मामले दर्ज कराए है। इंस्पेक्टर सुनील जैन उन मामलों का जांच अफसर है। आरोप है कि प्रवीण लाकड़ा के मामलों को हल्का करने और नाम निकालने के लिए इंस्पेक्टर सुनील जैन ने एक करोड़ रुपए रिश्वत मांगी। सौदेबाजी के बाद में वह सत्तर लाख लेने पर राजी हो गया। 
कहानी के अंदर कहानी-
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रवीण लाकड़ा और प्रवीण गुप्ता का गोदाम बनाने का धंधा है। प्रवीण गुप्ता ने प्रवीण लाकड़ा के ख़िलाफ़ दो मामले अलीपुर थाने में दर्ज कराएं। प्रवीण गुप्ता को इस साल दो गाडियों में आए बदमाशों ने इतना पीटा कि वह अभी तक ठीक नहीं हुआ है।
प्रवीण गुप्ता की शिकायत पर बाहरी उत्तरी जिले के अलीपुर थाने में मारपीट, हत्या की कोशिश, लूट आदि धाराओं में प्रवीण लाकड़ा आदि के ख़िलाफ़ दो मामले दर्ज हैं। प्रवीण लाकड़ा ने भी प्रवीण गुप्ता के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज कराया है। 
प्रवीण लाकड़ा की तलाश-
पुलिस मुख्यालय ने इन मामलों की जांच के लिए उत्तर पश्चिम जिले के एडिशनल डीसीपी सिकंदर के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की थी। इंस्पेक्टर सुनील जैन हत्या के प्रयास, लूट आदि धाराओं के तहत दर्ज मामले में जांच अधिकारी है।
जिले के आला अफसर ने बताया पुलिस की जांच में आया कि प्रवीण लाकड़ा ने साज़िश रच कर प्रवीण गुप्ता पर हमला कराया। इन मामलों में प्रवीण लाकड़ा की तलाश है। पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी कराया है ताकि प्रवीण लाकड़ा विदेश न जा सके। प्रवीण लाकड़ा की जमानत की अर्जी हाईकोर्ट तक से खारिज हो चुकी है। 
चार्जशीट दाखिल-
जिला पुलिस के आला अफसर ने बताया कि जिस मामले में धारा हटाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। उसमें तो पुलिस इंस्पेक्टर सुनील जैन की गिरफ्तारी से पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। इस मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एक आरोपी विदेश भाग गया। प्रवीण लाकड़ा समेत दो आरोपियों की तलाश की जा रही है। 
थानेदारनी ने 50 लाख मांगे-
पश्चिम विहार ईस्ट थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर नीतू बिष्ट द्वारा 50 लाख रुपए रिश्वत मांगने का मामला 27 जुलाई को सामने आया। बीस लाख से ज्यादा सब- इंस्पेक्टर नीतू बिष्ट ले चुकी है। 
विजिलेंस यूनिट मामले की जांच कर रही है। पता चला है कि पश्चिम विहार में रहने वाले शिकायतकर्ता डॉक्टर नीरज कुमार और उसके स्टाफ की पिटाई पीरागढ़ी के एक पुलिस बूथ में ले जाकर की गई। उनसे 50 लाख रुपए की मांग की गई थी, पीड़ित ने 20.50 लाख रुपए का इंतजाम बेंगलुरु के एक रिश्तेदार से करवाया। बाकी के 19.50 लाख बाद में देने की हामी पीड़ित से भरवाई गई।
सूत्रों के अनुसार गृह मंत्रालय में पीड़ित के एक दूर के रिश्तेदार के हस्तक्षेप के बाद पश्चिम जिले के आला अधिकारी को मामले की जानकारी दी गई। यह भी पता चला कि जब पीड़ित जिले के एक अधिकारी के पास था, तब भी पीड़ित को फोन पर धमकाया गया। इस मामले में कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के भी शामिल होने का पता चला है।
थानेदार ने 7 लाख मांगे-
साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के कापसहेड़ा थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर सुरेश द्वारा चोरी के मामले में गिरफ्तार न करने की एवज में सात लाख रुपए मांगने का मामला सामने आया है। 24 जुलाई को विजिलेंस की टीम ने 50 हजार रुपए लेते हुए सब इंस्पेक्टर सुरेश को पकड़ लिया। सब- इंस्पेक्टर ने बचने के लिए कहानी बना दी कि ये रकम तो केस प्रॉपर्टी के रूप में उसने जब्त की है। विजिलेंस ने जांच की तो पता चला कि थाने में इस बारे में सब- इंस्पेक्टर सुरेश ने रिकॉर्ड में कुछ भी दर्ज (डीडी एंट्री) नहीं किया था। जिसके बाद विजिलेंस यूनिट ने सब- इंस्पेक्टर के खिलाफ के खिलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया।
विजिलेंस के अनुसार शिकायतकर्ता किसान और टैक्सी ऑपरेटर विक्रम ने बताया था कि उसके भाई ने दो महीने पहले 30 लाख रुपये की चोरी की थी। इस अपराध के लिए उसके खिलाफ कापसहेड़ा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। विक्रम ने चोरी की रकम बरामद करने में पुलिस की मदद करने का दावा किया था। इस सिलसिले में कापसहेड़ा थाने का सब- इंस्पेक्टर सुरेश हरियाणा गया और शिकायतकर्ता विक्रम को कथित तौर पर हिरासत में ले लिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दबाव में आकर उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए 7 लाख का इंतजाम किया और सब- इंस्पेक्टर सुरेश को 50 हजार रुपए बतौर एडवांस देना तय हुआ। विक्रम ने विजिलेंस में शिकायत कर दी। 24 जुलाई को विजिलेंस टीम ने ट्रैप लगाया। 50 हजार की रकम के साथ लिया पकड़ लिया।

Thursday, 18 September 2025

अनिल अंबानी और राणा कपूर के ख़िलाफ़ चार्जशीट, यस बैंक के हजारों करोड़ रुपये हड़पने का मामला



अनिल अंबानी, राणा कपूर के ख़िलाफ़  हजारों करोड़ हड़पने के मामले में चार्जशीट




इंद्र वशिष्ठ, 
सीबीआई ने वीरवार को अनिल अंबानी की  कंपनियों, आरसीएफएल,आरएचएफएल  और यस बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं सीईओ राणा कपूर की पत्नी बिंदु कपूर, बेटियों राधा कपूर और रोशनी कपूर के स्वामित्व वाली कंपनियों और यस बैंक के बीच धोखाधड़ी वाले लेन-देन से जुड़े दो मामलों में आरोप पत्र दायर किया।
अनिल अंबानी एडीए समूह का अध्यक्ष और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड का निदेशक भी था, जो आरसीएफएल और आरएचएफएल की होल्डिंग कंपनी है।
साज़िश-
सीबीआई को जांच से पता चला कि राणा कपूर और अनिल अंबानी ने मिलकर साजिश की थी, जिसमें राणा कपूर ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करके यस बैंक लिमिटेड के सार्वजनिक धन (5010 करोड़ रुपये)को वित्तीय रूप से संकटग्रस्त एडीए ग्रुप कंपनियों में निवेश किया,
जिसके बदले में एडीए समूह के तत्कालीन अध्यक्ष अनिल अंबानी ने राणा कपूर की घाटे में चल रही पारिवारिक कंपनियों यानी बिंदु कपूर (पत्नी), राधा कपूर और रोशनी कपूर (बेटियों) के स्वामित्व वाली संस्थाओं/कंपनियों में निवेश किया और रियायती ऋण की सुविधा प्रदान की। 
यस बैंक को चूना लगाया-
इस धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप यस बैंक को भारी नुकसान हुआ (लगभग 2796.77 करोड़ रुपये) और मेसर्स आरसीएफएल, मेसर्स आरएचएफएल, एडीए समूह की अन्य कंपनियों के साथ-साथ राणा कपूर के पारिवारिक सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को भी अवैध लाभ हुआ।
जांच से पता चला है कि यस बैंक ने वर्ष 2017 में  राणा कपूर की स्वीकृति पर मेसर्स आरसीएफएल के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर और वाणिज्यिक ऋणों में लगभग 2045 करोड़ रुपये और आरएचएफएल के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर और वाणिज्यिक पत्रों में 2965 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि केयर रेटिंग्स ने एडीए समूह की वित्तीय कंपनियों को बिगड़ती वित्तीय स्थिति और प्रतिकूल बाजार मूल्यांकन के मद्देनजर "निगरानी में" रखा था। यस बैंक द्वारा मेसर्स आरसीएफएल और मेसर्स आरएचएफएल में निवेश किए गए धन का बाद में कई तरीकों  से गबन कर लिया गया।
गबन में शामिल कंपनियां-
सीबीआई को तफ्तीश से  पता चला कि अनिल अंबानी, राणा कपूर, बिंदु कपूर,  राधा कपूर, रोशनी कपूर, मेसर्स आरसीएफएल, मेसर्स आरएचएफएल (अब मेसर्स ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड), मेसर्स आरएबी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स इमेजिन एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स ब्लिस हाउस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स इमेजिन हैबिटेट प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स इमेजिन रेजिडेंस प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच पीसी एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत एक साजिश रची गई थी।
जांच में पता चला कि रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स  ने अनिल अंबानी के निर्देश पर, राणा कपूर के परिवार के स्वामित्व वाली एक अन्य संस्था, मेसर्स मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट लिमिटेड के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में 2017-18 के दौरान 1160 करोड़ रुपये का निवेश किया।
रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स ने यस बैंक से 249.80 करोड़ रुपये मूल्य के एडीए ग्रुप डिबेंचर भी खरीदे।
इसके अलावा, रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड्स ने यस बैंक के असुरक्षित ऋण उपकरणों (एटी1 बॉन्ड्स) में भी 1750 करोड़ रुपये का निवेश किया। इन उच्च जोखिम/उच्च प्रतिफल वाले बॉन्ड्स की कोई निश्चित परिपक्वता तिथि नहीं थी और संकट की स्थिति में इन्हें या तो इक्विटी में परिवर्तित किया जा सकता था या पूरी तरह से बट्टे खाते में डाला जा सकता था। गौरतलब है कि परिसमापन की स्थिति में एटी1 बॉन्ड्स अन्य ऋणों से सबसे नीचे आते हैं।
वर्ष 2022 में यस बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत पर यस बैंक के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और सीईओ  राणा कपूर और मेसर्स रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल), मेसर्स रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) व अन्य के खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।



Tuesday, 16 September 2025

सिंथेटिक ड्रग्स का चलन बढ़ेगा, पुलिस के कब्ज़े में पड़ी ड्रग्स भी हमारे लिए खतरनाक है - गृहमंत्री अमित शाह

सिंथेटिक ड्रग्स का चलन बढ़ेगा : गृहमंत्री अमित शाह



इंद्र वशिष्ठ, 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सिंथेटिक ड्रग्स और लैब्स का चलन आने वाले दिनों में बढ़ेगा। हर राज्य के एएनटीएफ प्रमुख को अपने यहां पैनी नज़र रखते हुए इस प्रकार की लैब्स या सिंथेटिक ड्रग्स को पहचान कर नष्ट करने की कार्रवाई करनी चाहिए। लैब्स या सिंथेटिक ड्रग्स बने ही नहीं, हमें इस दिशा में काम करना होगा। जब ड्रग्स की उपलब्धता समाप्त हो जाएगी तभी नशा करने वाला व्यक्ति मेडिकल सहायता के लिए आगे आएगा। 
त्रिकोणीय रणनीति-
अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) प्रमुखों के राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए रूथलेस अप्रोच, डिमांड रिडक्शन में स्ट्रैटेजिक अप्रोच और हार्म रिडक्शन में ह्यूमन अप्रोच की एक त्रिकोणीय रणनीति के तहत कदम उठाने होंगे।
पुलिस के कब्ज़े में पड़ी ड्रग्स भी खतरनाक-
गृह मंत्री ने कहा कि आज देशभर में 11 जगहों पर करीब 4800 करोड़ रुपये मूल्य के लगभग एक लाख 37 हज़ार 917 किलोग्राम ड्रग्स को नष्ट किया गया है। हमें साइंटिफिक तरीके से हर तीन माह में हर राज्य में ज़ब्त की गई ड्रग्स को नष्ट करने की परंपरा बनानी चाहिए। पुलिस के कब्ज़े में पड़ी ड्रग्स भी हमारे लिए खतरनाक है। 
पैमाना बदलने का वक्त-
नशे की समस्या के निवारण के लिए टॉप टू बॉटम और बॉटम टू टॉप अप्रोच अपनाना बेहद ज़रूरी है।
ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में अब एक्शन और एक्ज़ीक्यूशन में स्केल को बदलने का समय आ गया है। देश में ड्रग की एंट्री, डिस्ट्रीब्यूशन और लोकल सेल से लेकर इनके सरगनाओं तक कठोर आघात किया जा रहा है। अब हमारी लड़ाई ड्रग्स का खुदरा व्यापार करने वालों को पकड़ कर इसका व्यापार कम करने की जगह तीन प्रकार के कार्टेल के खिलाफ है। 
देश के सभी एंट्री पॉइंट्स पर ऑपरेट करने वाले कार्टेल, एंट्री पॉइंट से राज्य तक वितरण करने वाले कार्टेल और राज्यों मे छोटे स्थानों तक मादक पदार्थ बेचने वालों तक कार्टेल पर कठोर आघात करने का अब समय आ गया है। कार्टेल पर लगाम लगाने के लिए डार्कनेट, क्रिप्टो करेंसी, कम्युनिकेशन पैटर्न, लॉजिस्टिक्स, फायनेंशियल फ्लो का एनालिसिस, मेटा डाटा एनालिसिस और मशीन लर्निंग मॉडल जैसी तकनीकों को अपनाना होगा। 
भगोड़ों का निर्वासन और प्रत्यर्पण -
गृह मंत्री ने कहा कि भगोड़ों का निर्वासन और प्रत्यर्पण बहुत ज़रूरी है। अब विदेश में बैठकर यहां ड्रग्स का व्यापार करने वाले लोगों को भारतीय कानून की पकड़ में लाने का समय आ गया है। एएनटीएफ प्रमुख  सीबीआई निदेशक से संपर्क कर प्रत्यर्पण के लिए अपने यहां एक सुनिश्चित व्यवस्था खड़ी करें जो न सिर्फ ड्रग्स, बल्कि आतंकवाद और गैंग तक सभी के लिए कारगर सिद्ध हो।
गृह मंत्री ने कहा कि जिस तरह प्रत्यर्पण ज़रूरी है उसी प्रकार से प्रैक्टिकल अप्रोच से निर्वासन भी ज़रूरी है। निर्वासन की प्रक्रिया के प्रति एक लिबरल अप्रोच अपनाकर अपराधियों को डिपोर्ट करने की व्यवस्था के लिए रास्ता सुनिश्चित करना चाहिए। मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त विदेशी अपराधियों और भगोड़ों को वापिस लाने के लिए एनसीबी, सीबीआई और राज्य पुलिस का एक संयुक्त तंत्र बनाना बेहद ज़रूरी है।
राज्य के अनुकूल एसओपी-
अमित शाह ने कहा कि कॉमन स्ट्रक्चर और ऑपरेशनल यूनिफॉर्मिटी बहुत ज़रूरी है। बेस्ट प्रैक्टिसिस के एक्सचेंज और इसे खुले मन से स्वीकार करने के आधार पर ही राज्य की स्थिति के अनुकूल एसओपी बने और राष्ट्रीय एसओपी इस एसओपी का हिस्सा हो। इस प्रकार का तंत्र तैयार किए बिना हम इस लड़ाई में बहुत पीछे रह जाएंगे। नारकोटिक्स के हर बड़े केस में नेटग्रिड का उपयोग कर पूरा नेटवर्क ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे न सिर्फ केस मज़बूत बनेगा बल्कि हम पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में भी सफल होंगे।तफ्तीश की निगरानी-
गृह मंत्री ने सभी एनटीएफ प्रमुखों से आग्रह किया कि वे एक एंटी नारकोटिक्स एक्शन चेकलिस्ट बनाएं, जिसमें केस की जांच किस प्रकार से की गई और केस पहचान कर जिला पुलिस ने कितने प्रयत्न किए, की जानकारी शामिल हो। इसका हर तीन महीने में रिव्यू करने से यह लड़ाई अपने आप नीचे तक पहुंच जाएगी।
विशेष दस्ता-
हर राज्य को फाइनेंशियल ट्रेल, हवाला लिंक्स, क्रिप्टो लेनदेन और साइबर चेक्स के लिए अपने यहां एक विशेष दस्ता बनाना चाहिए तभी हम इस लड़ाई को पुख्ता तरीके से लड़ सकेंगे। नारकोटिक्स-फोकस्ड फॉरेंसिक लैब की एक यूनिट भी हर राज्य में होनी चाहिए, जिससे गुनहगार को आसानी से ज़मानत न मिल सके।  
सभी पात्र मामलों में  पीटीएनडीपीएस लगाने में कोई झिझक नहीं करनी चाहिए और हर राज्य में प्रॉसीक्यूशन की व्यवस्था को एनसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर दिए गए केसों की स्टडी कर दुरुस्त करना होगा।

ड्रग्स जब्त-
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वर्ष 2004 से 2013 तक ज़ब्त ड्रग्स की मात्रा 26 लाख किलोग्राम थी, जिसका मूल्य 40 हज़ार करोड़ रूपए था जो 2014 से 2025 तक बढ़ कर 1 करोड़ किलोग्राम हो गई, जिसका मूल्य 1 लाख 65 हज़ार करोड़ रूपए है। जब समन्वित प्रयास होते हैं तो सफलता भी मिलती है। हमें अपने प्रयासों को स्ट्रैटेजिक अप्रोच के साथ तेज़ करना होगा, तभी हम नशामुक्त भारत की कल्पना के बहुत करीब पहुंच सकेंगे।
ड्रग्स नष्ट-
अमित शाह ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच 3 लाख 63 हज़ार करोड़ रूपए का ड्रग्स डिस्पोज़ल हुआ था, जबकि 2014 से 2025 के दौरान 35 लाख 21 हज़ार करोड़ रूपए का ड्रग्स डिस्पोज़ल हुआ है। 2004 से 2014 के बीच डिस्पोज़्ड हुई ड्रग्स का मूल्य 8 हज़ार 150 करोड़ रूपए था जबकि 2014 से 2025 के दौरान डिस्पोज़्ड ड्रग्स का मूल्य 71 हज़ार 600 करोड़ रूपए है।
ड्रग्स के खेत-
उन्होंने कहा कि 2020 में ड्रग्स पैदा करने वाली 10,700 एकड़ भूमि को नष्ट किया गया, 2021 में 11 हज़ार एकड़, 2022 में 13 हज़ार एकड़ और 2023 में 31 हज़ार 761 एकड़ भूमि को नष्ट किया गया। इसी प्रकार गांजा/चरस (कैनाबिस) पैदा करने वाली भूमि का विनष्टीकरण 21 हज़ार एकड़ से बढ़कर 34 हज़ार एकड़ तक पहुंच गया है। 
गिरफ्तार-
2004 से 2014 के दौरान 1 लाख 73 हज़ार लोग गिरफ्तार किए गए जबकि 2014 से 2025 के दौरान 7 लाख 61 हज़ार लोग गिरफ्तार किए गए हैं। 
गृह मंत्री ने कहा कि हमारी समस्या के सामने यह उपलब्धि बहुत छोटी है और इसे हमें कई गुना बढ़ाना होगा, तभी हम सफल होंगे।


Monday, 15 September 2025

दिल्ली पुलिस का बदमाशों की रीढ़ पर प्रहार, दिल्ली और हरियाणा में 25 ठिकानों पर छापे,‌ 6 बदमाश गिरफ्तार, 8 पिस्तौल, बुलेट प्रूफ कार, 34.75 लाख रुपये, 50 लाख रुपये के सोने के जेवर बरामद

                 DCP अंकित सिंह


        8 पिस्तौल, बुलेट प्रूफ कार, 
34.75 लाख रुपये, 50 लाख रुपये के सोने के जेवर बरामद 




इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस के द्वारका जिले की पुलिस ने गोलीबारी और जबरन वसूली करने वाले कुख्यात बदमाशों के गिरोहों की रीढ़ पर प्रहार करने के लिए जबरदस्त अभियान चलाया है। 
25 ठिकानों पर छापे -
द्वारका जिले के डीसीपी अंकित सिंह की देखरेख में सोमवार तड़के पुलिस की 25 टीमों ने बदमाशों और उनके सहयोगियों के 25  ठिकानों पर छापे मारे। 380 पुलिसकर्मियों ने दिल्ली में 19 और हरियाणा में 6 स्थानों पर छापे मारे।
बरामदगी-
8 पिस्तौल, 29 कारतूस, तीन मैगज़ीन, एक बुलेट प्रूफ फॉर्च्यूनर,14 महंगी घड़ियाँ, लैपटॉप, आईपैड, नकदी गिनने की मशीन, 
वॉकी-टॉकी सेट और एक ऑडी कार के अलावा विदेश में मौजूद गिरोह सरगना कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू के फाइनेंसर मोनू ढींगरा के घर से 34.75 लाख रुपये की नकदी और लगभग 50 लाख रुपये के सोने के आभूषण बरामद किए गए।
6 गिरफ्तार, 26 हिरासत में-
इस दौरान 26 लोगों को हिरासत में लिया गया। 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हिरासत में लिए गए और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति/आरोपी कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू गैंग और विक्की टक्कर गिरोह से संबंधित हैं।

पुलिस ने पवन उर्फ प्रिंस निवासी बहादुर गढ़, प्रशांत पुत्र निवासी नजफगढ़, अंकित ढींगरा उर्फ ​​नोनी निवासी सुल्तानपुरी (तीनों कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू गिरोह के ), हिमांशु उर्फ ​​मच्छी निवासी डाबड़ी, राहुल दिवाकर उर्फ ​​मनप्रीत निवासी डाबड़ी (दोनों टक्कर गिरोह) और नजफगढ़ थाने के बीसी परवीन उर्फ ​​डॉक्टर को गिरफ्तार किया है।

ये बदमाश, गोलीबारी, जबरन वसूली, हत्या की कोशिश, लूट/ डकैती और कार चोरी जैसे अपराधों में शामिल हैं। 

विदेशों से गिरोह चलाने वाले बदमाशों से संबंध का पता लगाने के लिए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी कब्जे में लिए गए हैं।
 
बदमाशों का काला चिट्ठा-

1.आरोपी पवन उर्फ ​​प्रिंस पुत्र पदम निवासी गली नंबर 13, सैनिक नगर, बहादुरगढ़, हरियाणा, उम्र 18 वर्ष, को एक अत्याधुनिक पिस्तौल और दो कारतूस बरामद होने पर गिरफ्तार किया गया। वह कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू का शूटर है और राज मंदिर स्टोर, पश्चिम विहार और छावला स्थित एक वर्कशॉप में हुई गोलीबारी और जबरन वसूली के मामले में पहले भी शामिल रहा है।

2. आरोपी हिमांशु उर्फ ​​मच्छी पुत्र कुलदीप सिंह निवासी आरजेडए-92, गली नंबर 2, सीतापुरी पार्ट 2, डाबड़ी, दिल्ली, उम्र 24 वर्ष, को एक देसी पिस्तौल और कारतूस बरामद होने पर गिरफ्तार किया गया है। वह विक्की टक्कर गिरोह का सहयोगी है और हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के 7 मामलों में पूर्व में संलिप्त।

3. आरोपी प्रशांत पुत्र जय भगवान निवासी मकान संख्या RZ-149, गली संख्या 4, पूर्वी कृष्णा विहार, नजफगढ़, दिल्ली, उम्र-32 वर्ष, को अत्याधुनिक पिस्तौल और दो ज़िंदा कारतूस बरामद होने पर गिरफ्तार किया गया है। वह कपिल सांगवान उर्फ ​​नंदू का  शूटर है और गोलीबारी, जबरन वसूली और शस्त्र अधिनियम के 11 मामलों में पूर्व में संलिप्त रहा है।

4. आरोपी राहुल दिवाकर उर्फ ​​मनप्रीत पुत्र रमेश निवासी RZ-123 विश्वास पार्क उत्तम नगर, सूर्या मॉडल स्कूल के पास, डाबड़ी, दिल्ली, उम्र-25 वर्ष। वह विक्की टक्कर गिरोह का सहयोगी है और हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम और कार चोरी के 20 मामलों में पूर्व में संलिप्त रहा है।

5. आरोपी अंकित ढींगरा उर्फ ​​नोनी पुत्र अशोक ढींगरा निवासी एफ ब्लॉक सुल्तानपुरी, दिल्ली, उम्र-34 वर्ष, वह शस्त्र और डकैती के 10 मामलों में पूर्व में गिरफ्तार हो चुका है। हाल ही में कपिल सांगवान @ नंदू के फाइनेंसर मोनू ढींगरा के संपर्क में आया।

6. आरोपी परवीन उर्फ ​​डॉक्टर पुत्र धर्मबीर निवासी मकान संख्या 113, श्री चंद पार्क, धरमपुरा, नजफगढ़, दिल्ली, उम्र 35 वर्ष। वह पहले 25 से ज़्यादा आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और नजफगढ़ पुलिस थाने का बीसी भी है।



Saturday, 13 September 2025

फुलवारी शरीफ मामले में पीएफआई का बिहार प्रदेश अध्यक्ष गिरफ्तार : NIA

फुलवारी शरीफ मामले में पीएफआई का बिहार प्रदेश अध्यक्ष गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 

एनआईए ने साल 2022 में फुलवारी शरीफ आपराधिक साजिश मामले में प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया।

एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि‌ बिहार के जिला कटिहार के हसनगंज क्षेत्र के निवासी महबूब आलम उर्फ ​​महबूब आलम नदवी को शनिवार को किशनगंज से पकड़ा गया। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला 19 वां आरोपी है। शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

गैरकानूनी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल पीएफआई का उद्देश्य विभिन्न धर्मों और समूहों के सदस्यों के बीच धार्मिक दुश्मनी फैलाकर आतंक का माहौल बनाना था।
यह मामला शांति और सद्भाव के लिए हानिकारक गतिविधियों से संबंधित है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक शांति भंग करना और भारत के विरुद्ध असंतोष पैदा करना था, और आपराधिक बल प्रयोग को उचित ठहराया गया था। 
पीएफआई के सदस्य भारत में इस्लाम का शासन स्थापित करने के लिए पीएफआई की विचारधारा को बढ़ावा देकर आम जनता में भय फैलाने में लिप्त थे, जैसा कि संगठन के जब्त किए गए विज़न दस्तावेज़ "भारत 2047 भारत में इस्लाम के शासन की ओर, आंतरिक दस्तावेज़: प्रसार के लिए नहीं" में परिकल्पित है।

11 जुलाई 2022 को अहमद पैलेस, फुलवारी शरीफ, पटना से जब्त किए गए उक्त दस्तावेज़ में कहा गया है कि आरोपी महबूब आलम पीएफआई की साजिश का हिस्सा था। एनआईए की जांच के अनुसार, वह सह-आरोपियों के साथ मिलकर पीएफआई की भर्ती, प्रशिक्षण, बैठकों और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल था। उसने धन भी जुटाया था और सह-आरोपियों और पीएफआई कार्यकर्ताओं को प्रदान किया था।




Friday, 12 September 2025

मिलिट्री के 3 इंजीनियर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार : CBI

मिलिट्री के 3 इंजीनियर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार 



इंद्र वशिष्ठ, 

सीबीआई ने मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के तीन इंजीनियरों और एक बिचौलिए को शिकायतकर्ता से 80 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
सीबीआई ने एमईएस, सागर (मध्य प्रदेश) के गैरिसन इंजीनियर (जीई) नितेश कुमार सिंह , सहायक गैरिसन इंजीनियर (एजीई) राकेश साहू, जूनियर इंजीनियर दीपक और  बिचौलिए राजेश मिश्रा  को गिरफ्तार किया है।
आरोपी इंजीनियरों ने ठेकेदार को दिए गए ठेके के तहत मरम्मत और रखरखाव कार्य करने के लिए ठेका स्थल उपलब्ध कराने के लिए बिचौलिए के माध्यम से ठेका मूल्य का 2 फीसदी (अर्थात एक लाख रुपये) की रिश्वत मांगी थी।
बातचीत के बाद, वह शिकायतकर्ता से ठेका मूल्य के 1.5 फीसदी की दर से 80 हज़ार रुपये की रिश्वत लेने को तैयार हो गए। 
सीबीआई ने जाल बिछाया और चारों आरोपियों को शिकायतकर्ता से 80 हज़ार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। 
उन्हें सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, जबलपुर की अदालत में पेश किया गया।
आरोपियों के कार्यालय और आवासीय परिसरों की तलाशी ली गई, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज़/सामग्री बरामद हुई।



Thursday, 11 September 2025

आतंकियों का लश्कर बनने से पहले ही नेस्तनाबूद , 5 गिरफ्तार, बंदूक/ पिस्तौल और बम बनाने का सामान बरामद




आतंकियों का लश्कर बनने से पहले ही नेस्तनाबूद, 5 गिरफ्तार


इंद्र वशिष्ठ, 
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने झारखंड, तेलंगाना, बेंगलुरु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की पुलिस/एटीएस के साथ एक संयुक्त अभियान में पाकिस्तानी आका/हैंडलर समर्थित एक आतंकी गिरोह/मॉड्यूल को सिर उठाने से पहले ही कुचल दिया। संदिग्ध आतंकियों को लश्कर बनाने और कोई  आतंकी हमला करने से पहले ही पुलिस ने  नेस्तनाबूद कर दिया। 
पुलिस ने पिस्तौल/बंदूक, कारतूस, बम/आईईडी और हथियार बनाने का सामान बरामद किया है। 
5- गिरफ्तार
इस मामले में अशर दानिश (23), निवासी बोकारो, झारखंड, आफ़ताब कुरैशी (25), निवासी कल्याण, मुंबई, सूफ़ियान अबुबकर खान (20)निवासी मुंब्रा, महाराष्ट्र, मोहम्मद हुज़ैफ़ यमन (20), निवासी नरसापुर, तेलंगाना और कामरान कुरैशी उर्फ ​​समर खान (26), निवासी राजगढ़, मध्य प्रदेश को गिरफ्तार किया गया।
गज़वा-ए-हिंद-
स्पेशल सेल के एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि इनका इरादा सबसे पहले गज़वा-ए-हिंद के  लिए किसी जमीन पर कब्जा करके उसे खिलाफत/स्वतंत्र घोषित करना। इसके बाद आतंकी जेहाद के लिए लश्कर बनाने का था। इस गिरोह का सरगना अशर दानिश उर्फ सीईओ है। उसने अपनी आईडी गजवा लीडर के नाम से बनाई हुई है। सीईओ के नाम से वह इस तरीके से काम कर रहा था जैसे कि पेशेवर कंपनी या एनजीओ चला रहा हो। 
5 राज्यों में छापे-
स्पेशल सेल के एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि डीसीपी अमित कौशिक, एसीपी हृदय भूषण, एसीपी राहुल विक्रम की देखरेख में इंस्पेक्टर विनय पाल, इंस्पेक्टर मनोज कुमार के नेतृत्व में सहयोगी एजेंसियों के समन्वय से, दिल्ली, रांची, ठाणे (महाराष्ट्र), बेंगलुरु, निज़ामाबाद (तेलंगाना) और राजगढ़ (मध्य प्रदेश) में कई स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए।
 इन छापों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान के आका द्वारा संचालित किए जा रहे अखिल भारतीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ।
दिल्ली से गिरफ्तार-
एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि 09/09/2025 को दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन से सटे थीम पार्क के पास से आफ़ताब नासिर कुरैशी और सूफ़ियान अबुबकर खान को दो पिस्तौल और 15 कारतूस के साथ पकड़ा गया। 
इसके बाद दस सितंबर को रांची, ठाणे, बेंगलुरु, निज़ामाबाद और राजगढ़ में संयुक्त छापे मारे गए। 
पाकिस्तानी कनेक्शन-
अशर दानिश को रांची से गिरफ्तार किया गया। उसके किराए के कमरे से आईईडी/बम बनाने के उपकरण और केमिकल बरामद किए गए। उसने स्वीकार किया कि उसने आतंकी तरीकों से खिलाफत स्थापित करने की आपराधिक साजिश के तहत हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक खरीदे थे। उसने खुलासा किया कि उसे पाकिस्तान स्थित एक आका से निर्देश मिल रहे थे। 
हथियार, बम का सामान बरामद-
एक देसी तमंचा, दो अर्ध-स्वचालित पिस्तौल और 16 कारतूस, एक एयर गन (.22 बोर), तांबे की चादरें और स्टील के खोखले पाइप, सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, सोडियम बाइकार्बोनेट, सल्फर पाउडर,पीएच मान जांचने वाला उपकरण, बॉल बेयरिंग, चार चाकू,10,500 नकद, वजन तौलने की मशीन,बीकर सेट, सुरक्षा दस्ताने, मास्क, प्लास्टिक का डिब्बा जिसमें स्ट्रिप वायर, सर्किट बोर्ड, डायोड, मदरबोर्ड, दो लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन बरामद हुआ है। 
आतंकियों पर निरंतर निगरानी-
एडिशनल पुलिस कमिश्नर प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि स्पेशल सेल सोशल मीडिया पर सक्रिय कट्टरपंथी युवाओं सहित संभावित आतंकवादी गुर्गों की पहचान के लिए निरंतर निगरानी कर रहा है। 
विश्वसनीय स्रोतों से सुराग प्राप्त करते हुए, दिल्ली, रांची, ठाणे, निज़ामाबाद और राजगढ़ में सक्रिय एक आतंकवादी मॉड्यूल की पहचान की गई। इसके सदस्यों को बारूद तैयार करने और आईईडी/बम बनाने की महत्वपूर्ण जानकारी थी।
जान कुर्बान करने को तैयार-
 उनमें से कुछ ने गज़वा-ए-हिंद की अवधारणा के तहत भारत में खिलाफत स्थापित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने की इच्छा व्यक्त की।
यह भी पता चला कि रांची निवासी अशहर दानिश, दिल्ली/एनसीआर से हथियार और कृषि-रसायन की दुकानों व ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से रासायनिक पदार्थ ख़रीदने की कोशिश कर रहा था। 
सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर संदिग्धों की निगरानी की गई। इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों पर नज़र रखने के लिए रांची, ठाणे, बेंगलुरु, निज़ामाबाद और राजगढ़ में अग्रिम टीमें तैनात की गईं।
आतंकी आका-
पुलिस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी आका किसी आतंकी तंजीम का हो सकता है। 
जो अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा है। 
आरोपियों का परिचय और प्रारंभिक पूछताछ
1.अशहर दानिश, बोकारो, झारखंड में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे, उनके पिता वकील और माँ एक गृहिणी हैं। उसने रांची के सिल्ली कॉलेज से अंग्रेजी (ऑनर्स) में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। जनवरी 2024 में, वह रांची के न्यू तबारक लॉज में रहने चले गया, जहां उसने डॉ. इसरार अहमद के व्याख्यान/लेक्चर सुनने शुरू किए और धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारों को अपना लिया। इंस्टाग्राम पर उसकी मुलाकात आफ़ताब कुरैशी और इज़हार-उल-हक जैसे लोगों से हुई, जिनकी विचारधाराएं उससे मिलती-जुलती थी। उसने इंस्टाग्राम पर एक ग्रुप बनाया और लगभग 40 लोगों को जोड़ा, जहाँ खिलाफत की स्थापना पर चर्चा होती थी। उसने खुद को कंपनी का सीईओ, प्रोफेसर या एनजीओ संचालक बताते हुए कई सोशल मीडिया आईडी वाले कई ग्रुप भी बनाए ताकि उन पर और उनकी गतिविधियों पर किसी भी तरह की निगरानी को छुपाया जा सके। केमिकल की खरीद के लिए धन इकट्ठा किया और बारूद बनाने के लिए सल्फर खरीदा। अगस्त 2025 में, उसने कारतूस बनाने के लिए ताम्रपत्र खरीदे। उसने हथियार बनाने के प्रोटोटाइप के रूप में अध्ययन करने के लिए बोकारो से एक गोली और एक देसी पिस्तौल भी ली।
2. आफ़ताब नासिर कुरैशी-कल्याण, मुंबई निवासी, वह अपने माता-पिता और दो भाई-बहनों के साथ रहता हैं। उसने दसवीं तक पढ़ाई की है और अपने पिता की मीट की दुकान में मदद करता हैं। इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय, उसने 2020 के आसपास कट्टरपंथी  तारिक मसूद, ज़ाकिर नाइक, इसरार अहमद और तारिक जमील के भाषण सुनना शुरू किया था। वह जिहादी विचारधाराओं पर चर्चा करने वाले कट्टरपंथी समूहों का सदस्य बन गया। वह विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अशहर दानिश से जुड़ा।
3. मोहम्मद हुज़ैफ़ यमन- बी. फ़ार्मेसी के तृतीय वर्ष के छात्र 20 वर्षीय यमन का संपर्क 3-4 साल पहले ओमेगल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए अशहर दानिश से हुआ। बाद में वे व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के ज़रिए जुड़े। दानिश ने भारत में मुसलमानों पर हो रहे कथित अत्याचारों पर चर्चा की और सशस्त्र जिहाद के ज़रिए जवाबी कार्रवाई के लिए "लश्कर" बनाने का प्रस्ताव रखा। दानिश ने उसे जिहादी उद्देश्यों के लिए हथियार निर्माण सीखने की ज़िम्मेदारी सौंपी।
4. सूफ़ियान अबु बकर ख़ान महाराष्ट्र के कल्याण में जन्म, उसने पाँचवीं कक्षा तक पढ़ाई की और वेल्डर का काम करते हैं। वह सह-आरोपी आफ़ताब कुरैशी को पिछले पाँच सालों से जानता हैं। आफ़ताब नियमित रूप से उनके साथ कट्टरपंथी वीडियो शेयर करता था और उन्हें कट्टरपंथी सोशल मीडिया ग्रुप्स में जोड़ता था। 08/09/2025 को, आफ़ताब ने उसे मेवात के एक सप्लायर जमील से हथियार लेने के लिए दिल्ली चलने को कहा।

5. कामरान कुरैशी उर्फ ​​समर खान
मध्य प्रदेश के राजगढ़ निवासी 26 वर्षीय कामरान कुरैशी ने 12वीं तक पढ़ाई की है। उसके पिता वेल्डर हैं। वह लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है और वकीलों के लिए टाइपिस्ट/ड्राफ्टर का भी काम करता है। उसने स्वीकार किया कि वह अशहर दानिश के संपर्क में एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आया था, जो गज़वा-ए-हिंद के लिए कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देता था। उसने दानिश को धन मुहैया कराया और उसे और सदस्य बनाने का निर्देश दिया गया। 
वह और दानिश खिलाफत से संबंधित प्रशिक्षण गतिविधियों को शुरू करने के लिए ज़मीन खरीदने की भी योजना बना रहे थे।

मोहम्मद हुज़ैफ़ यमन को तेलंगाना के निज़ामाबाद से गिरफ़्तार किया गया। उसने अशहर दानिश के मार्गदर्शन में हथियार और गोला-बारूद बनाने के प्रयोगों में अपनी संलिप्तता का खुलासा किया।

कामरान कुरैशी उर्फ़ समर खान को मध्य प्रदेश के राजगढ़ से गिरफ़्तार किया गया। उसने स्वीकार किया कि वह अशहर दानिश के संपर्क में एक व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए आया था, जहाँ तारिक मसूद, तारिक जमील और ज़ाकिर नाइक जैसे कट्टरपंथी मौलवियों के वीडियो चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए प्रसारित किए जाते थे।